NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन:  महाराष्ट्र के किसान शाहजहांपुर बॉर्डर पर डटे, दिल्ली-जयपुर नेशनल हाइवे बंद
महाराष्ट्र के किसानों ने साफ किया कि वो इतना लंबा रास्ता तय कर दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार को बताने आए हैं कि यह सिर्फ पंजाब और हरियाणा के किसानों का आंदोलन नहीं है बल्कि यह पूरे देश के किसान इन तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ हैं।
मुकुंद झा, रौनक छाबड़ा
26 Dec 2020
किसान आंदोलन

शाहजहांपुर: 21 दिसंबर को महाराष्ट्र के नासिक से दिल्ली कूच के लिए निकला किसानों का व्हीकल (गाड़ियों) जत्था राजस्थान-हरियाणा के बॉर्डर पर 25 दिसंबर को पहुँच गया। यह जत्था कई सौ किलोमीटर की यात्रा और तीन राज्यों महाराष्ट्र,मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पार कर यहाँ पहुंचा। महाराष्ट्र के किसान पिछले 13 दिनों से राजस्थान-हरियणा बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों के आंदोलन में शामिल हुए। जब महाराष्ट्र के किसान धरना स्थल से कुछ दूर ही शाहजहांपुर टोल प्लाज पहुंचे तो उनका स्वागत करने के लिए पहले से ही राजस्थान के बड़े किसान नेता और पूर्व माकपा विधायक अमराराम अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे।

इन किसानों ने साफ किया कि वो इतना लंबा रास्ता तय कर दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार को बताने आए हैं कि यह सिर्फ पंजाब और हरियाणा के किसानों का आंदोलन नहीं है बल्कि यह तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पूरे देश के किसानों का आंदोलन है।

विरोध स्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए, अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के अध्यक्ष अशोक धवले ने कहा: “केंद्र एक बात को दोहरा रही है कि कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध केवल कुछ राज्यों तक ही सीमित है। उन्हें यहां आना होगा और देखना होगा ... देश के कोने-कोने से आए किसान इस ऐतिहासिक आंदोलन का हिस्सा बन गए हैं। अब यह अंदोलन केवल किसानों का नहीं बल्कि देश का आंदोलन बन गया है।''

उन्होंने सरकार से कहा कि देश भर के किसानों की बड़ी भागीदारी को दिखाने के लिए पांच सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। जो एक महीना से चल रहा है, उसमें हजारों किसान दिल्ली - सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और चिल्ला के प्रवेश-निकास बिंदुओं पर घेरा डेरा डाले हुए हैं।

नासिक से आए सैकड़ों किसानों ने जैसे बॉर्डर से आगे चलने के लिए कुछ दूर आगे बढे उन्हें हरियाणा पुलिस द्वारा रोका गया। वो वहीं रुक गए लेकिन किसानों की बढ़ती संख्या ने दिल्ली को जयपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 8 को पूर्ण रूप से बंद कर दिया। महाराष्ट्र से आए कुछ किसानों ने कहा कि किसान लॉन्ग मार्च 2018 की याद आ गई,जिसमें लगभग 50 हज़ार किसानों ने नासिक से मुंबई के लिए ऐतिहासिक पैदल मार्च किया था। नासिक के 55 वर्षीय भिकाजी ने कहा, '' हम तब भी दृढ़ थे, हम अब भी पीछे नहीं हटेंगे।”

नांदेड़ के 41 वर्षीय जनार्दन काले ने कहा, "हमारी यात्रा के दौरान, हमें कई स्थानों, पर लोगों ने रजाईयों और यहां तक कि हमारे वाहनों के लिए मुफ्त डीजल के साथ भोजन भी दिया है।"

image

उन्होंने कहा “पिछले कुछ दिनों में रास्ते में कई सार्वजनिक बैठकें हुईं। मैं विभिन्न राज्यों के लोगों से मिला। मैं एक बात कह सकता हूं कि सरकार के खिलाफ क्रोध हर जगह गूंज रहा है ... लेकिन मीडिया यह नहीं बताएगा।"

एआईकेएस-महाराष्ट्र के राज्य सचिव डॉ. अजीत नवले अपने साथ बड़ी संख्या में किसानों के लिए दवाई का स्टॉक लेकर आए हैं। उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि हमने एआईकेएस के नेतृत्व में महाराष्ट्र में फसल के लगत के डेढ़ गुना दाम की मांग को लेकर 2018  में बड़ा आंदोलन किया। उसके बाद हमने ऐतिहसिक लॉन्ग मार्च किया था। उसमें भी हमें ऐसे ही भारी जनसमर्थन मिला था और इस आंदोलन में भी भारी जनसमर्थन मिल रहा है। ये आंदोलन उस आंदोलन से भी काफी विराट है। जैसे उस समय हमने सरकार को झुकाया था इस बार भी हम अपनी मांग मनवा कर ही जाएंगे।

हालांकि, नासिक जिले की 55 वर्षीय मीरा बाई पवार जो एक महिला किसान है उन्होंने कहा कि 2018 में दिए गए आश्वासनों के बावजूद, उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। मीरा एक आदिवासी किसान हैं, वे जंगल की ज़मीन पर खेती करती हैं। उस समय की सरकार ने कहा था कि वो इन किसानों को पांच एकड़ के ज़मीन का मालिकाना हक़ देगी लेकिन इस दौरान सरकार भी बदल गई लेकिन उन्हें ज़मीन का हक नहीं मिला। अभी वो प्याज, बाजरा और गेहूं उगाती है परन्तु उनका भी उचित दाम नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, उनके 20 वर्षीय बेटे को जिंदगी चलने के लिए दैनिक मजदूरी का काम करने के लिए मजबूर है।

मीरा बाई अपनी माँगों को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थीं और वे बेहद जागरूक थी। उन्होंने कहा सरकार हमें हमारी जोत नहीं दे रही है, हमें बता रही है ये वन अधिनियम के खिलाफ है परन्तु वो वही ज़मीन पूंजीपतियों को दे रही है। उनके साथ ही कई अन्य महिलाए भी इस आंदोलन में कई सौ किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंची हैं। लगभग सभी इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं। सभी ने एक साथ कहा कि अभी जब मंडी भी है फिर भी हमें फसल का दाम नहीं मिल रहा है तो जब यह ख़त्म हो जाएगा तब क्या होगा? सभी महिला बार बार यह कह रही थी यह सरकार बड़े लोगो की है।

मीरा ने कहा "अब जब हम यहां आए हैं, तो हम तब तक वापस नहीं जाएंगे जब तक कि हमारे मुद्दों का हल नहीं हो जाता है।"

महाराष्ट्र के सांगली जिले से आए नौजवान किसान दिगंबर कामले ने कहा कि महाराष्ट्र में किसानों की हालत पहले से ही ख़राब है, क्योंकि हमे भाव (उचित दाम) नहीं मिलता है। मंडी में भी कई दिक्कतें हैं, उसे ठीक करने की जरूरत थी परन्तु सरकार मंडी ही खत्म कर रही है। उससे वहां किसानों की आत्महत्या की संख्या बढ़ेगी क्योंकि जैसे की मैंने मक्का उगाया उसकी लागत भी हमें बाजार में नहीं मिलेगी, ऐसे में किसानों पर कर्ज और बढ़ेगा, इससे परेशान किसान आत्महत्या कर लेगा।

इस बीच, हरियाणा पुलिस द्वारा सुरक्षा बढ़ा दी गई, पुलिस अनुमान लगा रही थी कि किसान राष्ट्रीय राजधानी की तरफ कूच कर सकते थे। इसलिए पुलिस ने एहतियातन ही कई जगहों पर बैरिकेडिंग की हुई थी। जिसके कारण राजमार्ग पर दिन भर गाड़ियों की रफ़्तार थमी रही। शाम तक, ट्रैफिक जाम से बचने के लिए हरियाणा के नजदीकी बावल शहर से पुलिस ने एक डाइवर्जन बनाया लेकिन वो भी नाकाफी लग रहा था।

किसानों को रोकने के लिए शिपिंग कंटेनरों, बड़े-बड़े पत्थरों की बैरिकेडिंग, दंगा नियंत्रण वाहन और वाटर कैनन के साथ आरएएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ की कई कंपनियों को विरोध स्थल पर तैनात किया गया था।

कुछ युवाओं ने शुक्रवार दोपहर में बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद किसान नेताओं ने उन्हें शांत किया, जिन्होंने उन्हें अंतिम निर्णय के लिए इंतजार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा आगे जाने या यहाँ रहने के लिए निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा लिया जाएगा, जो इस आंदोलन की अगुआई कर रहा है।

राजस्थान के नौजवान किसान राजेंद्र जाखड़ जो जयपुर से इस आंदोलन में शमिल हुए हैं, उन्होंने ख़ुशी जताई की जिस तरह से महाराष्ट्र के किसान यहाँ पहुंचे वो बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार को भी चेतवानी दी कि इसबार मोदी का पाला किसानों से पड़ा है अब यहां से किसान वापस नहीं जाएगा बल्कि तीनों कृषि क़ानून ही वापस होंगे।

image

महाराष्ट्र के बड़े किसान नेता और पूर्व सीपीएम विधायक जे पी गावित ने न्यूज़क्लिक को बताया कि यह आंदोलन अभी और बढ़ेगा क्योंकि अभी तो महाराष्ट्र से किसानों का एक जत्था आया है, अभी लाखों किसान दिल्ली आने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो वापस महाराष्ट्र जल्द जाएंगे और बाकी किसानों को इकठा कर दिल्ली के बड़ा मार्च करेंगे।  

farmers protest update
farmers
farmers protest
Nashik
Gujarat
Rajasthan
Haryana
delhi-jaipur highway
MSP
BJP
Narendra modi
Modi government

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License