NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी, कांग्रेस भी हमलावर
शुक्रवार को पंजाब में किसानों द्वारा रेल रोको अभियान शुरू किया गया। इसके अलावा हरियाणा, दिल्ली और यूपी के आस पास के इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन किए जाने की ख़बर है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Oct 2020
 किसानों का प्रदर्शन
फोटो साभार : ट्विटर

नये कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। पंजाब की किसान यूनियनों ने राज्य के विभिन्न रेलवे स्टेशनों अमृतसर, फरीदकोट, फिरोजपुर, पटियाला सहित कई रेलवे ट्रैक पर टैंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को भी जारी रखा है।

किसानों के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने 3 अक्टूबर को कुछ ट्रेन और मालगाड़ी के रूट में बदलाव किया है। इसके अलावा कुछ ट्रेनें कैंसल भी की गई हैं और कुछ ट्रेनों की खुलने की समय में भी बदलाव हुआ है।

गौरतलब है कि इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन तेज करने के लिए 31 किसान संघ एकजुट हुए हैं और उन्होंने एक अक्टूबर से अनिश्चितकाल के लिए रेल रोको आंदोलन चलाने की घोषणा की है।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने कहा कि नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लक्ष्य से 31 किसान संघों के किसानों ने राज्य में कई जगहों पर ट्रेन की पटरियों को अनिश्चितकाल के लिए अवरूद्ध कर दिया है।

इससे पहले शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर कृषि कानून के विरोध में कई जिलों में किसानों के प्रदर्शन जारी रहे। शुक्रवार को मोगा, पटियाला, संगरूर, बरनाला, फिरोजपुर, अमृतसर, रोपड़ और मुक्तसर आिद जिलों में किसानों ने रेलवे ट्रैक और टोल प्लाजा पर धरना देकर विरोध जताया। वहीं, रिलायंस के पेट्रोल पंप, और मॉल्स और अडानी के गोदामों का घेराव किया। किसानों ने कहा है कि 6 अक्तूबर से टोल प्लाजा, मॉल्स, रिलायंस के पेट्रोल पंपों और भाजपा के नेताओं के घरों का घेराव किया जाएगा।

दूसरी ओर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अगर किसानों की आवाज नहीं सुनी और कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया तो वह संघर्ष दिल्ली व देश के अन्य भागों में ले जाने में संकोच नहीं करेंगे।

वहीं, कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कृषि कानूनों एवं श्रम सुधार संबंधी संहिताओं के विरोध में शुक्रवार को देश भर में ‘किसान मजदूर बचाओ दिवस’ मनाया और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों ने ‘किसान विरोधी कृषि कानूनों’ और ‘मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं’ के विरोध में धरना दिया।

कांग्रेस ने तैयार किया आदर्श कानून का मसौदा

कांग्रेस ने कृषि संबंधी कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए एक आदर्श कानून का मसौदा तैयार किया है जिन्हें पार्टी शासित राज्यों की विधानसभाओं में पारित कराया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि आदर्श कानून का मसौदा तैयार किया गया है और इसे कांग्रेस शासित राज्यों को भेजा जाएगा ताकि वहां की विधानसभाओं में इसे मंजूरी दी जा सके।

इस कदम से कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से पार्टी शासित राज्यों से केंद्रीय कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने वाले कानून बनाने के बारे में विचार करने को कहा गया था। पार्टी ने इस कानून का मसौदा उस वक्त तैयार किया है जब चार अक्टूबर से कांग्रेस पंजाब और हरियाणा में ट्रैक्टर रैली निकालने जा रही है। इसमें पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल होंगे।

कांग्रेस कृषि संबंधी केंद्रीय कानूनों का पुरजोर विरोध कर रही है। उसने शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की शुरुआत की। कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी शासित राज्यों से कहा है कि वे संविधान के अनुच्छेद 254 (ए) के तहत कानून पारित करने के संदर्भ में गौर करें। पार्टी का दावा है कि यह अनुच्छेद इन ‘कृषि विरोधी एवं राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने वाले' केंद्रीय कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य विधानसभाओं को कानून पारित करने का हक देता है।

गौरतलब है कि वर्तमान में पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकारें हैं। जबकि महाराष्ट्र और झारखंड में वह गठबंधन सरकार का हिस्सा है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कुछ भाजपा विरोधी दलों के शासन वाले राज्यों में भी केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ कानून पारित किया जा सकता है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कृषि संबंधी कानूनों को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया और कहा कि इन ‘काले कानूनों’ के खिलाफ उनकी पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि इन कानूनों के खिलाफ चल रहा आंदोलन सफल होगा और किसानों की जीत होगी।

उल्लेखनीय है कि सरकार का दावा है कि नए कानूनों के जरिये कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी मंडियों) के बाहर भी कृषि उत्पाद बेचने और खरीदने की व्यवस्था तैयार की जाएगी।

हाल ही में संपन्न मानसून सत्र में संसद ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को इन विधेयकों को स्वीकृति प्रदान कर दी, जिसके बाद ये कानून बन गए।

हालांकि किसानों एवं विशेषज्ञों को इस बात को लेकर चिंता है कि यदि ये कानून लागू किया जाता है तो एपीएमसी (कृषि उपज विपणन समितियों) और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Farm bills 2020
New Agricultural bills
Farmer protest
Nationwide Protest
BJP
Congress
Indian Farmer's Union
MSP
MSP for farmers

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • otting massacre
    अजय सिंह
    2021: हिंसक घटनाओं को राजसत्ता का समर्थन
    31 Dec 2021
    दिखायी दे रहा है कि लिंचिंग और जेनोसाइड को सामाजिक-राजनीतिक वैधता दिलाने की कोशिश की जा रही है। इसमें भाजपा और कांग्रेस की मिलीभगत लग रही है। वर्ष 2021 को इसलिए भी याद किया जायेगा।
  • dharm sansad
    स्मृति कोप्पिकर
    तबाही का साल 2021: भारत के हिस्से में निराशा, मगर लड़ाई तब भी जारी रहनी चाहिए
    31 Dec 2021
    साम्प्रदायिक विद्वेष और दलित विरोधी हिंसा के चलते हमारी स्थिति पहले भी बहुत ख़राब थी, लेकिन मौजूदा स्थिति कहीं ज़्यादा ख़राब है। नफ़रत 2021 की हमारी नयी पहचान बन गयी और भारत सरकते हुए बहुत नीचे चला…
  • BAJRANG DAL
    रवि शंकर दुबे
    बजरंग दल को नए साल के जश्न से भी परेशानी, काशी की गलियों में नोटिस लगाकर दी धमकी
    31 Dec 2021
    विश्व हिंदू परिषद हर दिन नई धमकियाँ दे रहा है। इस बार विहिप ने धमकी दी है कि अगर नए साल का जश्न मनाया गया तो ठीक नहीं होगा, साथ ही इस दल ने पब और होटल पर संगीन आरोप मढ़ दिए हैं।
  • dharm sansad
    सत्यम श्रीवास्तव
    असल सवाल इन धर्म संसदों के औचित्य का है
    31 Dec 2021
    सवाल हरिद्वार या रायपुर में एक या अनेक लेकिन एक जैसे कथित संतों द्वारा बदतमीज़ी और उकसाने वाले बयानों का नहीं है बल्कि असल सवाल इन कथित धर्म सांसदों के आयोजनों के औचित्य का है।
  • protest
    रौनक छाबड़ा
    हरियाणा: यूनियन का कहना है- नाकाफी है खट्टर की ‘सौगात’, जारी रहेगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल
    31 Dec 2021
    8 दिसंबर से जारी हड़ताल की कार्रवाई के चलते राज्य भर के सभी 22 जिलों में लगभग 26,000 आंगनबाड़ी केंद्रों में कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License