NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
नहीं बनी बात: सरकार के पास किसानों को देने के लिए कोई ठोस आश्वासन नहीं, अब 9 को फिर बातचीत
किसानों और सरकार के बीच पांचवे दौर की बातचीत एक बार फिर किसी नतीजे के बिना ख़त्म हो गई। अब 9 दिसंबर को फिर बातचीत होगी। इस बीच किसान 8 दिसंबर के अपने भारत बंद पर क़ायम हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Dec 2020
Farmers protest
दिल्ली के विज्ञान भवन में शनिवार को पांचवे दौर की बातचीत के दौरान सरकार से तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए हां या ना में जवाब मांगते किसान नेता। फोटो साभार ट्विटर

जैसी कि संभावना थी कि आज की बैठक में भी कोई समाधान नहीं निकल सकेगा, वही हुआ। सरकार के मंत्रियों के पास किसानों को देने के लिए कोई ठोस आश्वासन नहीं था, बस कुछ मामूली संशोधनों का प्रस्ताव था, उधर किसान भी दृढ़ हैं कि इन तीनों कानूनों को वापस लो तभी बात बनेगी। अब सरकार की ओर से अगली बातचीत के लिए 9 दिसंबर की तारीख़ का प्रस्ताव है।

तीन दिसंबर की सात घंटे से ज़्यादा की मैराथन बैठक के बाद आज एक बार फिर दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्र सरकार के मंत्रियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच पांचवें दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। सरकार अब तक बार-बार यही बताने की कोशिश करती रही कि ये कानून किसानों के फ़ायदे के हैं, और किसान उन्हें बार-बार यही समझाने की कोशिश करते रहे हैं कि उन्हें ऐसा फ़ायदा नहीं चाहिए। चौथे दौर की बात की बात आज पांचवें दौर में सरकार कानून में कुछ संशोधनों के लिए राज़ी दिखी, लेकिन किसान नेताओं ने साफ़ कर दिया कि कुछ संशोधनों से बात नहीं बनेगी। दरअसल किसानों को इन कानूनों में 37-38 आपत्तियां हैं, जबकि सरकार चार-पांच संशोधनों पर राज़ी है। इसलिए किसानों का साफ कहना है कि तीनों काले कानून वापस लेकर नए कानूनों पर बात हो।

इसे लेकर तो आज बैठक में कई बार वॉकआउट तक की नौबत आ गई। किसान नेताओं ने कहा कि जब सरकार को उनकी बात ही नहीं सुननी तो फिर बातचीत का क्या फायदा। एक समय ऐसा आया जब किसान नेताओं ने मौन व्रत रख लिया और तख़्ती पर yes or no यानी हां या ना लिखकर कानूनों के वापस लेने के बारे में सरकार की राय जाननी चाही।

अंत में कृषि मंत्री ने कानूनों को वापस लेने, एमएसपी पर कानून बनाने इत्यादि पर कोई फ़ैसला लेने के लिए अन्य मंत्रालय और मंत्रियों से बात करने का समय मांगा। इसके बाद 9 दिसंबर को छठे दौर की बातचीत पर सहमति बनी। लेकिन इसी के साथ किसानों ने साफ कर दिया कि उनका 8 दिसंबर का भारत बंद होगा और साथ ही अब अगली बातचीत किसी ठोस प्रस्ताव के बाद ही होगी। यानी अब सरकार क्या करने जा रही है इसे लेकर वह पहले किसानों को प्रस्ताव दे तब बातचीत का अगल चरण होगा।    

कुल मिलाकर सरकार समय को लंबा खींचती दिख रही है, क्योंकि वह कानूनों को वापस लेना तो दूर वास्तविक संशोधन भी करना नहीं चाहती और बातचीत भी करती दिखना चाहती है। इसलिए किसानों को उसकी मंशा पर शक हो रहा है, क्योंकि वरना क्या वजह है कि एक तरफ तीसरे दौर की बातचीत से पहले प्रधानमंत्री इन कानूनों की तारीफ के पुल बांधते हुए किसानों को भ्रम में बता देते हैं और अब पांचवें दौर की बातचीत से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार को कह देती हैं कि नए कृषि कानूनों को हड़बड़ी में नहीं लाया गया, इन्हें हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा और काफी विचार विमर्श के बाद लाया गया तथा इनसे किसानों को फायदा होगा।

प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से लेकर कृषि मंत्री तक के बयानों तक से साफ है कि सरकार अभी तक यही समझ और समझा रही है कि ये कानून किसान हित में हैं और किसान इसे लेकर किसी भ्रम की स्थिति में हैं। यानी जब सरकार अब तक अपने कानूनों में विसंगतियां समझ ही नहीं रही है, उसे इनमें कुछ ग़लत लगता ही नहीं तो बिल्कुल साफ है कि वो इनमें संशोधन को लेकर बहुत तैयार नहीं है और कानूनों की वापसी की बात तो सोचना भी असल में भ्रम पालना है।

हालांकि चौथे दौर की बातचीत के दौरान बृहस्पतिवार को कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने विभिन्न किसान संगठनों के 40 किसान नेताओं के समूह को आश्वासन दिया था कि सरकार किसान संगठनों की चिंताओं को दूर करने के प्रयास के तहत मंडियों को मजबूत बनाने, प्रस्तावित निजी बाजारों के साथ समान परिवेश सृजित करने और विवाद समाधान के लिये किसानों को ऊंची अदालतों में जाने की आजादी दिये जाने जैसे मुद्दों पर विचार करने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद व्यवस्था जारी रहेगी।

लेकिन किसानों की आपत्तियां ज़्यादा हैं और सरकार की मंशा किसी तरह किंतु-परुंतु करके इन कानूनों को बनाए रखने की है।

आज पांचवें दौर वार्ता में भी सरकारी पक्ष का नेतृत्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किया और उनके साथ खाद्य मंत्री पीयूष गोयल एवं वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोमप्रकाश भी रहे।

MSP
farmers protest
AIKSCC
AIKS
Bharat Bandh

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का दिखा दम !

क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License