NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहली किसान महापंचायत को मिला भारी जन-समर्थन 
किसान आंदोलन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ पूर्वांचल में पैठ जमा ली है।
अब्दुल अलीम जाफ़री
27 Feb 2021
Translated by महेश कुमार
पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहली किसान महापंचायत को मिला भारी जन-समर्थन 

बाराबंकी: पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ रोड के पास हरख चौराहा है, जहां  किसान आंदोलन के समर्थन में बुधवार तड़के सुबह से ही ट्रैक्टर, कार और बाइक, पर सवार सैकड़ों समर्थकों की भीड़ इकट्ठा होते देखी जा सकती थी। इनमें ज्यादातर महिलाएँ थी जो तीन कृषि-क़ानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आई थीं। 

सैकड़ों लोगों को विरोध स्थल तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। वे मार्च करते वक़्त अवधी लोक गीत गा रहे थे, तिरंगा लहरा रहे थे और आंदोलन को प्रोत्साहित करने वाले नारे लगा रहे थे। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा भारतीय किसान यूनियन (BKU) के बैनर तले पूर्वी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में अपनी पहली 'महापंचायत' करने के फैसले से आम जनता और किसानों में काफी उत्साह देखने को मिला जिसे बुधवार को आयोजित किया गया था।

29 जनवरी को मुजफ्फरनगर की बड़ी सभा के बाद इस क्षेत्र के किसानों की यह पहली 'महापंचायत' थी। फिर अन्य महापंचायतें बागपत, बिजनौर और मथुरा में हुई जो तीन नए कृषि-कानूनों के खिलाफ गाजीपुर बार्डर पर बीकेयू के नेतृत्व में चल रहे माहासंग्राम को समर्थन देने के लिए आयोजित की गई थी। 

बाराबंकी जिले के जियोली गाँव के एक किसान चंद्रभान ने न्यूज़क्लिक को बताया, “महापंचायत का आयोजन पूर्वी उत्तर प्रदेश में केवल सार्वजनिक जागरूकता पैदा करने और किसानों को तीन कृषि-क़ानूनों के बारे में जागरूक करने के लिए किया जा रहा है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अभी भी इन कानूनों के असल मकसद को नहीं जानते हैं। इस संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए काफी समय है। आम आदमी का कहना है कि सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। हम कृषि-कानूनों की खामियों को समझाते हुए काफी आसान भाषा में सीमांत किसानों और छोटे किसानों को एक पैम्फलेट बांट रहे हैं। इसलिए, किसान, विशेष रूप से भूमिहीन किसान, जो गांवों में फसल की कटाई के सीजन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, उनमें काफी गुस्सा है।”

महापंचायत में बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या, फैजाबाद, अमेठी, बहराइच रायबरेली और फतेहपुर जिलों के लगभग 10,000 लोगों ने भागीदारी की। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के अध्यक्ष नरेश टिकैत, दिगंबर सिंह, भारतीय किसान यूनियन (युवा) के अध्यक्ष, हरिनाम सिंह वर्मा और बीकेयू के बलराम सिंह लम्बरदार ने सभाओं को संबोधित किया।

बाराबंकी क्षेत्र के बीकेयू के उपाध्यक्ष वर्मा ने न्यूज़क्लिक को उक्त तैयारी के बारे में बताते हुए कहा, “एक ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान बार्डर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को वहां पहुंचने में कठिनाई हो रही है क्योंकि वहाँ से कोई ट्रेन नहीं है। इसलिए, हमने गोरखपुर और वाराणसी सहित हर क्षेत्र में महापंचायत बुलाने का फैसला किया है। बाराबंकी को पूर्वांचल के एक प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है और जब हम यहां सफलतापूर्वक किसानों को जुटा लेंगे तो यहां भी आंदोलन की ज्योति प्रज्वलित हो जाएगी जो  काले कानूनों के खारिज होने तक जारी रहेगी।”

सीमांत किसान से संपर्क स्थापित करने की कोशिश 

गाजीपुर बार्डर पर नए कृषि-कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान-आंदोलन की लहरें पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ पूर्वांचल में फैल गई हैं। बीकेयू 'महापंचायतों' के माध्यम से पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक कृषि-कानूनों के खिलाफ आंदोलन तेज़ कर रहा है, ताकि छोटे किसान जो दिल्ली की सीमा तक नहीं पहुंच सकते हैं, उन्हें आंदोलन से जोड़ा जा सके।

बीकेयू से जुड़ी महिला किसान उषा देवी अपने 50 सहयोगियों के साथ महापंचायत में भाग लेने के लिए फैजाबाद से बाराबंकी तक आईं और लगभग 100 किलोमीटर पैदल चलीं। आलू उत्पादक महिला किसान उषा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मोदी सरकार के रुख पर गहरी नाराज़गी जताई। दुखी उषा बड़े दर्द के साथ अपनी व्यथा बताती हैं, “हम आलू को डंप करने पर मजबूर हो जाते हैं क्योंकि हमारी फसलों के लिए जरूरी एमएसपी नहीं मिल रही है। हमारे आलू 100 रुपये प्रति टन बेचे जाते हैं और हमें कोल्ड स्टोरेज को 250 रुपये प्रति टन का भुगतान करना पड़ता है। किसानों को आलू को बचाने के लिए जेब से पैसा भरने पर मजबूर किया जाता है।" 

उषा कहती हैं कि प्रति किलोग्राम आलू उगाने की लागत 10-12 रुपये होती है, किसान उन्हें केवल 3-4 रुपये प्रति किलो बेचते हैं। यहां तक कि सबसे अच्छी क्वालिटी के 50 किलो आलू की बोरी 170 रुपये में बिकती है। “अब एमएसपी कहां गायब है? मैं जरूरतमंद लोगों को मुफ्त में अपना आलू देना चाहूंगी, लेकिन लागत से नीचे नहीं बेचूंगी।

सीतापुर का एक युवा किसान सुरिंदर सिंह उत्साहित तो था, लेकिन साथ ही घबराया भी हुआ था। उत्साहित इसलिए, क्योंकि किसानों की महापंचायत पूर्वी यूपी में लगभग तीन महीने बाद आयोजित की जा रही थी। लेकिन घबराहट इस बात से है कि पुलिस किसानों को घर पर ही नज़रबंद कर रही है, लोगों को अवैध रूप से हिरासत में ले रही है, गिरफ्तार कर रही है और उन्हें राज्य की सीमाओं पर विरोध में शामिल होने से रोकने के लिए कानूनी धमकियां दे रही हैं।

पंजाब में विरोध शुरू होने के बाद से ही हम सब भी कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन योगी सरकार ने हमें नजरबंद कर दिया था और धमकी दी थी कि यदि सीतापुर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया तो परिणाम अच्छा नहीं होगा। यही कारण है कि किसान सीमाओं पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन जब से बाराबंकी ने महापंचायत कर बड़ा संकेत दिया है तो लगता है अब विरोध पूर्वांचल के हर नुक्कड़ और घर में पहुंच जाएगा।”

बीकेयू के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार "गलत धारणा" पाले बैठी है कि "लड़ाई" यानि आंदोलन केवल पंजाब और हरियाणा के किसान लड़ रहे हैं और उन्होने इस बात पर जोर दिया कि देश भर के किसान "दमनकारी" कृषि-क़ानूनों को खारिज करवाना चाहते हैं।

टिकैत ने न्यूजक्लिक को बताया "सरकार ने पहले दावा किया कि केवल पंजाब और हरियाणा के किसान ही विरोध कर रहे थे,  बाद में पश्चिमी उत्तर प्रदेश भी इसमें शामिल हो गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में केवल जाट हैं। पूर्वांचल की बड़े पैमाने की सभाओं को देखने के बाद अब सरकार क्या कहेगी?" सरकार गलत धारणा में है कि आंदोलन में केवल पंजाब और हरियाणा के किसान हैं और केवल जाट हैं। देश भर के किसान चाहे फिर वे  आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश या फिर पूर्वोत्तर के राज्य या और कोई अन्य राज्य हो सबकी भावना एक ही है।"

फसल पर एमएसपी की गारंटी 

बीकेयू उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष लम्बरदार ने कहा कि एमएसपी आधारित खरीद न होने के कारण उत्तर प्रदेश में किसान अपनी उपज को बहुत कम कीमतों पर बेचने पर मजबूर हैं। उन्होंने कहा, "मक्का की एमएसपी 1,800 रुपये प्रति क्विंटल थी और धान की एमएसपी लगभग 1,868 रुपये थी, लेकिन निजी व्यापारी यूपी में इन फसलों को 800-900 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रहे हैं।"

मोदी सरकार पर अडानी और अंबानी जैसे कॉरपोरेट दिग्गजों की खिदमत में काम करने का आरोप लगाते हुए टिकैत ने कहा, “हम अपने बच्चों को इन कॉरपोरेट परिवारों का गुलाम नहीं बनने देंगे। हम अपने जीवन का बलिदान कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं होने देंगे। यह सारी महापंचायतें बड़े कॉर्पोरेट घरानों के खिलाफ थीं।”

इसी तरह की महापंचायत गुरुवार को बस्ती जिले के मुंडेरवा में भी आयोजित की गई थी। बीकेयू ने अपने बयान में कहा कि किसानों का समर्थन हासिल करने के लिए अगले महीने गोरखपुर और वाराणसी में भी ऐसी सभाओं का आयोजन किया जाएगा। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

First Farmers’ Mahapanchayat in Eastern UP Sees Huge Response

Barabanki Mahapanchayat
Naresh Tikait
Harakh
Barabanki
BKU
Eastern Uttar Pradesh
Famers Protest

Related Stories

उप्र चुनाव: बेदखली नोटिस, उत्पीड़न और धमकी—चित्रकूट आदिवासियों की पीड़ा

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

मुंबई महापंचायत: किसानों का लड़ाई जारी रखने का संकल्प  

यूपी: बुंदेलखंड में ‘उर्वरक संकट’ ने एक सप्ताह में ली 5 किसानों की जान

बाहरी साज़िशों और अंदरूनी चुनौतियों से जूझता किसान आंदोलन अपनी शोकांतिका (obituary) लिखने वालों को फिर निराश करेगा

यूपी: केंद्र ने चुनाव से पहले गन्ने की एफआरपी बढ़ाई; किसान बोले विफलताओं को छुपाने का ढकोसला

मुज़फ़्फ़रनगर में 'ऐतिहासिक' महापंचायत के लिए प्रचार, 2 लाख से अधिक किसान लेंगे भाग

बसों में जानवरों की तरह ठुस कर जोखिम भरा लंबा सफ़र करने को मजबूर बिहार के मज़दूर?

किसान ट्रैक्टर मार्च : बिजनौर से 200 ट्रैक्टर ग़ाज़ीपुर बॉर्डर जाने को तैयार

आसमान छू रहीं ईंधन क़ीमतों के ख़िलाफ़ हुए अखिल भारतीय प्रदर्शन में शामिल हुए किसान संगठन


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं
    23 Oct 2021
    उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 में प्राथमिक शिक्षक के 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, इसमें राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया गया…
  • Supreme Court
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा- प्रोविजनल एलॉटमेंट के समय कोई पैसा नहीं लिया जाएगा, फ़ाइनल एलॉटमेंट पर तय होगी किस्त 
    23 Oct 2021
    मजदूर आवास संघर्ष समिति ने कहा कि अस्वीकृत आवेदन की प्रकिया में अपारदर्शिता है एवं प्रार्थी को अपील का मौका न देना सरासर अत्याचार एवं धोखा है।
  • inflation
    अजय कुमार
    सरकारी आंकड़ों में महंगाई हो गई कम, ग़रीब जनता को एहसास भी नहीं हुआ! 
    23 Oct 2021
    आख़िर क्या वजह है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों में कमी आने के बाद भी आम आदमी इस पर भरोसा नहीं कर पाता।
  • 100 crore vaccines
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक: क्या भारत सचमुच 100 करोड़ टीके लगाने वाला दुनिया का पहला देश है?
    23 Oct 2021
    भारत न तो पहला देश है जिसने 100 करोड़ डोज़ लगाई है और न ही भारत का टीकाकरण विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है।
  • shareel
    द लीफलेट
    सीएए विरोधी भाषण: भीड़ उकसाने के ख़िलाफ़ ‘अपर्याप्त और आधे-अधूरे सुबूत’, फिर भी शरजील इमाम को ज़मानत से इनकार
    23 Oct 2021
    दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA)-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर अपने कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License