NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
लॉकडाउन के बीच चली पहली विशेष ट्रेन, अन्य राज्यों को भी मदद की उम्मीद
एक ट्रेन तो ज़रूर चली लेकिन अभी भी केंद्र सरकार आदेश को लेकर बहुत असमंजस है। गाइडलाइन्स के मुताबिक सभी फंसे लोगों को सिर्फ़ बसों के जरिए सड़क मार्ग से लाने की बात की गई है।
सोनिया यादव
01 May 2020
विशेष ट्रेन

देश में लॉकडाउन के दौरान पिछले महीने भर से रेल और विमान सेवा पूरी तरह ठप है। लेकिन आज शुक्रवार, 1 मई को भारतीय रेल अपनी पहली विशेष ट्रेन के साथ एक बार फिर पटरी पर उतरी है। लॉकडाउन के बीच फंसे करीब 1200 लोगों को लेकर ये ट्रेन तेलंगाना से झारखंड के हटिया तक जाएगी। सामान्य स्थिति में जहां ट्रेन की एक कोच में 72 यात्री सफर करते हैं वहीं इस ट्रेंन में मात्र 54 यात्री ही सफर कर रहे हैं।

बता दें कि तेलंगाना के पशुपालन मंत्री टी श्रीनिवास ने इस संबंध में गुरुवार, 30 अप्रैल को केंद्र सरकार से मांग की थी कि प्रवासी श्रमिकों को उनके मूल राज्यों तक जाने के लिए स्पेशल ट्रेने चलवाई जाएं। जिसके बाद लॉकडाउन के बीच ये पहली स्पेशल ट्रेन चली है।

झारखंड सरकार के मुताबिक उनके राज्य के तकरीबन 5 लाख मज़दूर, छात्र और तीर्थ यात्री दूसरे राज्यों में फँसे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र के आदेश मिलने के तुरंत बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि “हर राज्य में फँसे मज़दूरों, छात्रों, टूरिस्ट और तीर्थ यात्रियों को अकेले लाने में राज्य सरकार सक्षम नहीं है। हमारे पास सीमित संसाधन है। हमारे पास ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन भी नहीं है। अगर हम कहीं से व्यवस्था भी करते हैं तो हमें तो अपने मज़दूरों को लाने में ही 6 महीने का वक़्त लग जाएगा।"

झारखंड की तरह ही बिहार, पंजाब और केरल की राज्य सरकारों ने भी केंद्र सरकार से लोगों को लाने के लिए विशेष ट्रेन चलाने की मांग की है। राज्यों का कहना है कि एक बस में केवल 20-30 लोगों को ही लाया जा सकता है लेकिन ऐसे फंसे लोगों की संख्या को लाखों में है और फिर राज्य सरकारें इतनी बसों का इंतजाम कैसे करें? वहीं दूर-दराज़ इलाकों से बसों में इन लोगों को अपने घरों तक पहुंचाने में काफी समय भी लग जाएगा। कई राज्यों से होकर आना के कारण संक्रमण का खतरा और ज्यादा हो सकता है।

बिहार की समस्या

एक आंकलन के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के प्रवासी लोगों की संख्या लगभग 25 लाख से ऊपर है। दरअसल नीतीश सरकार की ओर से सभी प्रवासी मज़दूरों के खाते में एक-एक हजार रुपए भेजे जाने की योजना बनाई गई है और अब तक कुल 28 लाख लोगों ने इसके लिए आवेदन भी कर दिया है। यह संख्या अभी और बढ़ सकती है। इसके अलावा विद्यार्थी व अन्य लोग भी हैं। ऐसे में प्रवासी अगर बस से आए तो यह सिलसिला महीनों चल सकता है।

बिहार सरकार ने केंद्र के सड़क मार्ग से लाने के आदेश में बदलाव की मांग करते हुए रेल परिवाहन के इस्तेमाल की बात कही है। बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा है कि बिहार के लाखों लोगों को बसों से लाना व्यवाहरिक नहीं होगा। इसलिए सरकार स्पेशल ट्रेन चलाए।

राजस्थान सरकार की मांग

राजस्थान सरकार ने भी अख़बार में विज्ञापन के ज़रिए केंद्र सरकार से बस के साथ ट्रेन चलाने की मांग की है। सरकारी विज्ञापन में लिखा है, "इतनी ज़्यादा संख्या में रजिस्टर्ड लोगों का दूरस्थ राज्यों से बिना स्पेशल ट्रेन चलाए राजस्थान आना बहुत कठिन है। अत: हमने 29 अप्रैल 2020 को ही भारत सरकार से स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था के लिए विशेष अनुरोध किया है।"

राजस्थान के परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया, “राजस्थान में अन्य राज्यों जैसे बिहार, मध्प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल के लाखों लोग फंसे हैं। इनमें से कुछ कामगार हैं तो वहीं छात्रों की भी एक बड़ी आबादी है। अभी तक हमारे पास करीब 4 लाख लोगों ने वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है वहीं राजस्थान के अपने 6 लाख लोग दूसरे राज्यों में अटके हैं, ये संख्या आगे और भी बढ़ सकती है, ऐसे में इन श्रमिकों का अपने मूल राज्य की इतनी लंबी दूरी बसों से तय करना बहुत मुश्किल है, इसलिए हम पास के राज्यों के लिए बस से काम चला सकते हैं, लेकिन लंबी दूरी ट्रेंन के माध्यम से ही सही और सुरक्षित होगी।”

पंजाब और महाराष्ट्र की चिट्ठी

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि पंजाब में दूसरे राज्यों के फंसे लोगों को वापस ले जाने के लिए ट्रेन चलाई जाए। अकेले लुधियाना में सात लाख से अधिक प्रवासी मजदूर हैं, जबकि पूरे पंजाब में दस लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक फंसे हुए हैं। राज्य सरकार के मुताबिक पंजाब में लगभग 70 प्रतिशत मजदूर बिहार से हैं और इसीलिए ट्रेन की मांग की जा रही है।

इससे पहले महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने भी इससे पहले केंद्र को चिट्ठी लिख कर विशेष ट्रेन चलने की मांग की थी।

मालूम हो कि केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद अब राज्य सरकारों की ओर से देश के अलग-अलग इलाकों में फंसे लोगों को अपने घर लाने की कवायद तेज़ हो गई है। हालांकि गृह मंत्रालय की ओर से साफ कहा गया है कि फंसे लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए बसों का ही इस्तेमाल होगा लेकिन इसे लेकर केंद्र ओर राज्य सरकारों के बीच सियासत अभी भी जारी है।

केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम में बदलाव करते हुए, राज्यों में फंसे मज़दूरों, छात्रों, टूरिस्ट और तीर्थ यात्रियों को बसों के ज़रिए सड़क मार्ग से घर वापसी की अनुमति दी है लेकिन यहां ‘फंसे’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इसके मुताबिक वो लोग जो किसी कारण दूसरे राज्यों में फंस गए हैं, उनके पास रहने और खाने का कोई ठोस जरिया नहीं है केवल वही लोग घर वापसी के पात्र होंगे। यानी अगर आप लॉकडाउन में किसी दूसरे राज्य में नौकरी या काम के सिलसिले में रह रहे हैं और आपके पास घर और बाकी सुविधाएं हैं तो आप सरकार के इस वापसी अभियान का हिस्सा नहीं हो सकते।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक़ -

• इस प्रक्रिया के लिए राज्यों को नोडल अधिकारियों को नियुक्त करना होगा और एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल तैयार करना होगा।

• जिन राज्यों से सरकारें अपने फँसे लोगों को रोड मार्ग से निकालेंगी, उन्हें दूसरे राज्यों से इसके लिए मंज़ूरी लेनी होगी।

• वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के पहले सभी लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी और जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं होंगे, सिर्फ़ उन्हें ही इजाज़त मिलेगी।

• इस प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाने वाले बसों को पूरी तरह सैनिटाइज़ करना होगा, सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना होगा।

• वापसी के दौरान बीच में आने वाले राज्यों को इन बसों को निकलने की सुविधा देने को भी कहा गया है।

• इसके साथ राज्यों में वापसी पर लोगों की दोबारा जाँच की जाएगी। ज़रूरत के हिसाब से घर पर या अस्पताल में क्वारंटीन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. समय-समय पर लोगों का हेल्थ चेक भी किया जाए। इसके लिए आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल करने को भी कहा गया है।

बता दें कि केंद्र सरकार के इस आदेश के पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन-1 के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से यूपी बसों के जरिए लिफ्ट करवाया था। इसके बाद कोटा से छात्रों को भी इसी प्रकिया से लाया गया था। पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों केंद्र के आदेश के बाद अपने छात्रों को घर बुलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कई राज्यों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि गाइडलाइन्स के मुताबिक सभी फंसे लोगों को सिर्फ़ बसों के जरिए सड़क मार्ग से लाने की बात की गई है। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का ख़याल रखने की हिदायत भी दी गई है। ऐसे में एक बस में केवल 20-30 लोगों को ही लाया जा सकता है जबकि फंसे लोगों की संख्या तो लाखों में है।

ट्रेन चलाने में क्या दिक्कत है?

रेल मंत्रालय के ट्रेन न चलाने को लेकर स्टेशन पर अधिक कर्मचारियों की ज़रूरत, ट्रेन ड्राइवर, गार्ड, आरपीएफ, सिग्नलिंग स्टाफ, साफ़ सफ़ाई आदि को लेकर अपने तर्क हैं। लेकिन ऐसी विषम परिस्थितियों में रेलवे सबसे कारगर माध्यम है इससे भी मंत्रालय का इंकार नहीं है।

रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘मौजूदा समय में सभी के समक्ष अलग-अलग समस्याएं हैं लेकिन हम सभी की जो पहली प्राथमिकता है वो इस वायरस को फैलने से रोकने की है। इसलिए जो रेल कभी नहीं बंद हुई, उसे इस मुश्किल वक्त में बंद करना पड़ा। अगर सरकार से आदेश मिलते हैं, तो ये दोबारा शुरू हो जाएगी लेकिन ऐसे में रेलवे के सामने भी स्टाफ, हाउसकीपिंग, मैनेजमेंट समेत तमाम चुनौतियां होगीं।”

गौरतलब है कि 14 मार्च की शाम महाराष्ट्र के बांद्रा रेलवे स्टेशन की तस्वीरें शायद ही किसी के जेहन से धूमिल हुई हों। हजारों की संख्या में जमा हुए सभी लोगों को अपने घर जाने की आस थी लेकिन ट्रेंन चलने की बात महज़ एक अफवाह साबित हुई। हालांकि अब रेल मंत्रालय की विशेष ट्रेन सेवा के जरिए फंसे हे प्रवासी लोगों को घर जल्दी पहुंचने की एक नई उम्मीद दिखाई दी है।

Coronavirus
Lockdown
migrants
IRCTC
indian railways
Central Government
State Government
Telangana
Jharkhand

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • fact check
    किंजल
    UP का वीडियो दिल्ली के सरकारी स्कूल में मदरसा चलाने के दावे के साथ वायरल
    30 Nov 2021
    वीडियो को गौर से देखने पर ऑल्ट न्यूज़ ने स्कूल के बोर्ड पर ‘प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर’ लिखा हुआ पाया. प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर, गाज़ियाबाद के विजयनगर इलाके में है. यानी, ये घटना उत्तर प्रदेश की है…
  • tripura
    संदीप चक्रवर्ती, शांतनु सरकार
    त्रिपुरा नगर निकाय चुनावों में ‘धांधली’ के चलते विपक्ष का निराशाजनक प्रदर्शन 
    30 Nov 2021
    यह पहली बार नहीं है जब राज्य को चुनाव पूर्व हिंसा और चुनाव के दिन ‘धांधली’ देखने को मिल रही है, ऐसा ही कुछ दो साल पहले पंचायत चुनावों के दौरान भी देखने में आया था।
  •  Pentagon
    सोनाली कोल्हटकर
    पेंटागन का भारी-भरकम बजट मीडिया की सुर्खियां क्यों नहीं बनता?
    30 Nov 2021
    पेंटागन का भारी-भरकम बजट आम अमेरिकियों के कल्याण के लिए मिलने वाले सरकारी लाभों से चुराया जा रहा है। लेकिन कॉरपोरेट मीडिया या नीति-निर्माता इसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं, इस मुद्दे पर उनसे बहस की…
  • Rajya Sabha
    भाषा
    राज्यसभा की ऐतिहासिक सबसे बड़ी कार्रवाई में 12 सांसद निलंबित
    30 Nov 2021
    राज्यसभा के 12 सांसदों को वर्तमान शीत सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह उच्च सदन के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 2020 में आठ सांसदों को निलंबित किया गया था,…
  • media
    अभिषेक पाठक
    कृषि कानून वापसी पर संसद की मुहर, लेकिन गोदी मीडिया का अनाप-शनाप प्रलाप जारी!
    30 Nov 2021
    आज के दौर में मोदी सरकार शोले फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के उस सिक्के जैसी हो गई है जिसके दोनों ओर 'मास्टरस्ट्रोक' लिखा है। गोदी मीडिया के उन एंकरों पर तरस भी आता है जिन्होंने सालभर इस कानून और सरकार का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License