NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
स्वास्थ्य
लोगों को समय से पहले बूढ़ा बना रहा है फ्लोराइड युक्त पानी
इसके चलते गांव के लोगों को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश लोगों में हड्डियों और जोड़ों की परेशानी के साथ-साथ दांतों की बीमारी आम बात है।
एम.ओबैद
20 Apr 2022
लोगों को समय से पहले बूढ़ा बना रहा है फ्लोराइड युक्त पानी

बिहार के बांका जिले के फुल्लीडुमर ब्लॉक का निरपाडीह गांव फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या को लेकर सुर्खियों में है। वैसे तो बिहार के कई जिलों में पानी में फ्लोराइड और आर्सेनिक पाया गया है, लेकिन निरपाडीह गांव के पानी की हुई जांच में फ्लोराइड की मात्रा तीन गुना अधिक पाया गया है। इसके चलते गांव के लोगों को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। गांव के अधिकांश लोगों में हड्डियों और जोड़ों की परेशानी के साथ-साथ दांतों की बीमारी आम बात है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक आदिवासी बहुल निरपाडीह गांव में करीब 150 लोग रहते हैं। पेयजल के लिए लोग एक ही कुएं पर निर्भर हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के कारण लोग दिव्यांगता का शिकार हो रहे हैं। बच्चों और महिलाओं में भी इसका काफी ज्यादा असर देखा गया है।

आदिवासी बहुल गांव निरपाडीह की निवासी तुर्की मुर्मू न्यूज18 से बात करते हुए कहती है, 'कंधे से लेकर शरीर के नीचले हिस्से तक दर्द रहता है। कमर दर्द रहता है, जहां बैठ गए वहां से उठ नहीं पाते हैं।' इसी गांव के निवासी जीवन सोरेन बातचीत में कहते है, 'बहुत लोग यहां पर और जांच करके गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुआ है। यहां पर लोग पच्चीस से तीस साल होते विकलांग हो जाते हैं और सारी उम्र इसी तरह गुजर जाती है। इस बीमारी से हाथ में दर्द लहर के साथ होता है। पानी की वजह से सबका दांत भी खराब है।' गांव के अन्य निवासी बबलू सोरेन कहते है, 'घुटना काफी ज्यादा दर्द करता है। कमर से लेकर पैर तक टेढ़ा हो गया है।'

न्यूजक्लिक से बातचीत में सीपीआइएम के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अरूण कुमार ने इन समस्याों पर कहा कि "बिहार में पीने का पानी में फ्लोराइड और आर्सेनिक से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं। लोगों में हड्डियों की बीमारियां और उनके पैरों में सूजन हो जाता है। हाल में एक गांव की रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि गांव का सभी व्यक्ति इससे बीमार है। इस पर सरकार को जो ध्यान होना चाहिए वह नहीं है। सरकार एक तरफ कह रही है कि नल जल योजना के तहत हर घर में शुद्ध पानी की व्यवस्था कराई गई है लेकिन इस योजना में कई तरह के घोटाले सामने आए हैं। कहीं नल है तो उसमें पानी नहीं आ रहा है और कहीं कहीं तो नल ही गायब है। जगह जगह पाइप फूटे हुए हैं। ऐसे में लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की बात बेकार है।"

उन्होंने आगे कहा कि, "सरकार सही तरीके से काम नहीं कर रही है। सरकार के दावे और वास्तविक रुप से कार्यों को लागू करने के मामले में काफी अंतर दिखाई देता है। पूरा प्रोपगैंडा लोगों को ध्यान बंटाने का है। ग्राउंड रिपोर्ट में बिल्कुल दूसरी बात सामने आती है। चाहे शौचालय का सवाल हो या पानी का सवाल हो। इन सब चीजों के लिए ग्राउंड लेवल पर लड़ाई की आवश्यकता है।"

सीपीआइएमएल नेता रणविजय कुमार ने न्यूजक्लिक से बातचीत में कहा कि "सरकार का जनता पर कोई ध्यान नहीं है। सरकार का सिर्फ इस पर ध्यान है कि किस क्षेत्र से खनिज निकल रहा है और वहां से लोगों को कैसे मार कर भगा दिया जाए। उनको उनके जमीन पर बसने नहीं दिया जाए, उनकी संपत्ति लूट ली जाए, ये सब सरकार का एजेंडा है। लेकिन दूषित जल व अन्य परेशानियों के चलते कहां पर लोग मर रहे हैं उसके इस पर कोई ध्यान नहीं है। लोगों की जिंदगियां बर्बाद हो जा रही है। लोगों का शरीर विकलांग हो जा रहा है, वे कुबरे हो जा रहे हैं, इन सब पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पूरी तरह समाप्त हो गई है। सरकार केवल राष्ट्रीय संपदा की लूट में व्यस्त है। मानवीय पहलू पर सरकार पूरी तरह विफल है। लोगों को उनके ही हवाले छोड़ दिया गया है। लोग मरे या जीएं उनका अपना मामला है।"

ज्ञात हो कि इसी साल मार्च महीने में आए राज्य आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में यह खुलासा हुआ था कि ग्रामीण बिहार के बड़े हिस्से में भूजल में व्यापक पैमाने पर रासायनिक संदूषण है। यहां पीने के पानी के स्रोत इस्तेमाल के लिए असुरक्षित हैं तथा लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं।

उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद द्वारा विधानसभा में पेश 16वीं बिहार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021-22 में कहा गया था कि राज्य के 38 में से 31 जिलों के ग्रामीण इलाकों में भूजल आर्सेनिक, फ्लोराइड और लौह संदूषण से प्रभावित हैं।

मीडिया से बात करते हुए निरपाडीह के लोगों ने कहा कि इस गांव के लोग 30 वर्ष पार करते-करते ही कई बीमारियों के शिकार होने लगते हैं। पैर व घुटने में दर्द शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे पैर में टेढ़ापन आ जाता है। ग्रामीणों के दांत भी पीले होकर गलने लगते हैं। जवानी में ही लोग बूढ़े दिखने लगते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोराइड युक्त पानी के कारण इस तरह की बीमारी हो रही है लेकिन आज तक इसका कोई ठोस उपाय नहीं किया गया। कुछ लोगों ने अपने घरों में ट्यूब वेल भी लगाया है लेकिन उसका भी पानी ऐसा ही है। दो साल पहले गांव में नल-जल योजना से पाइप बिछाई गई लेकिन आज तक एक भी बूंद पानी नहीं मिला।

फुल्लीडुमर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. संजीव सिंह एबीपी से बात करते हुए कहते हैं पिछले वर्ष दिव्यांग शिविर के क्रम में निरपाडीह गांव के कुछ लोग दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आए हुए थे। इसी दौरान ग्रामीणों से पता चला था कि गांव के शत-प्रतिशत लोग इसी तरह से हैं। पीएचसी प्रभारी ने कहा कि आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़ा यह गांव जंगल और पहाड़ के बीच है। कई वर्षों से लगातार फ्लोराइड युक्त दूषित पानी पीते रहने की वजह से गांव के लोग दिव्यांग होने के साथ-साथ कम उम्र में ही कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।

बता दें कि बिहार में भूजल में आर्सेनिक होने का खुलासा काफी पहले हो चुका था लेकिन बीते साल एक अध्ययन में बिहार में भूजल में यूरेनियम के पाए जाने की बात सामने आई थी। न्यूजक्लिक के वरिष्ठ पत्रकार मो.इमरान ने अपनी रिपोर्ट में इस अध्ययन के हवाले से लिखा था कि पूरे बिहार में आर्सेनिक और यूरेनियम की सांद्रता अत्यधिक विषम है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के (प्रोविजनल) दिशा-निर्देशों क्रमशः 16% तथा 7% के सेंपल से कहीं अधिक है। आर्सेनिक और यूरेनियम के बीच यह जबर्दस्त प्रतिलोमी सह-संबंध आर्सेनिक और यूरेनियम गतिशीलता के विरोधाभासी रेडॉक्स नियंत्रणों के अनुरूप ही है। इस अध्ययन के अनुसार, जिन जिलों में यूरेनियम कम से कम एक नमूने में डब्ल्यूएचओ के अनंतिम दिशानिर्देशों से अधिक पाया गया है, उनमें भागलपुर, गोपालगंज, कटिहार, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पटना, सारण, सीवान, सुपौल और वैशाली जिले शामिल हैं। अध्ययन में कहा गया था कि गंगा नदी के दक्षिणी एवं उत्तरी जिले में गहरी विषमताएं हैं। इसके दक्षिणी जिले में आमतौर पर यूरेनियम उच्च मात्रा में और आर्सेनिक कम मात्रा में मिलती है, बनिस्बत गंगा के उत्तर के जिलों के।

ये भी पढ़ेंः https://hindi.newsclick.in/Bihar-After-Arsenic-Health-Concerns-Uranium-Contaminated-Groundwater

 

Bihar
banka
Nirpadis
Fluoride
water
Bihar government
Ground water
Arsenic

Related Stories

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

बिहार की राजधानी पटना देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

बिहारः गर्मी बढ़ने के साथ गहराने लगा जल संकट, ग्राउंड वाटर लेवल में तेज़ी से गिरावट

ग्राउंड रिपोर्ट: राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित बिहार की धनौती नदी के अस्तित्व पर संकट !

विश्व जल दिवस : ग्राउंड वाटर की अनदेखी करती दुनिया और भारत

बिहार में ज़हरीली हवा से बढ़ी चिंता, पटना का AQI 366 पहुंचा

बिहारः सेहत के लिए ख़तरनाक 'यूरेनियम' ग्राउंडवाटर में मिला, लोगों की चिंताएं बढ़ी


बाकी खबरें

  • सबरंग इंडिया
    करौली हिंसा को रोकने में विफल रहे अधिकारियों को निलंबित करें: PUCL
    12 Apr 2022
    हिंदुत्ववादी समूह द्वारा आयोजित रैली को मुस्लिम पड़ोस से गुजरने की अनुमति किसने दी और हिंसा होने पर अधिकारियों ने केवल दर्शकों की तरह काम क्यों किया?
  • अभिवाद
    सीपीआईएम पार्टी कांग्रेस में स्टालिन ने कहा, 'एंटी फ़ेडरल दृष्टिकोण का विरोध करने के लिए दक्षिणी राज्यों का साथ आना ज़रूरी'
    12 Apr 2022
    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के 'ग़ैर लोकतांत्रिक रवैये' की आलोचना की और कहा कि 'केंद्र राज्यों को अपनी कठपुतली बनाना चाहता है'।
  • भाषा
    झारखंड रोपवे दुर्घटना: वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने 10 और लोगों को सुरक्षित निकाला
    12 Apr 2022
    वायु सेना, सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा बचाव अभियान जारी है।
  • काशिफ काकवी
    मध्यप्रदेश: रामनवमी के दौरान सांप्रदायिक हिंसा, खरगोन में कर्फ़्यू, बड़वानी में तनाव
    12 Apr 2022
    सांप्रदायिक घटनाओं के गवाह रहे आदिवासी बहुल ज़िले खरगोन और बड़वानी में कांग्रेस का दबदबा है। अगले साल यहां विधानसभा चुनाव होने हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    रोहतक : मारुति सुज़ुकी के केंद्र में लगी आग, दो कर्मियों की मौत
    12 Apr 2022
    मज़दूर संगठन ने दोषियों पर कार्रवाई और मृतकों के लिए 50 लाख मुआवज़े की रखी मांग
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License