NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पश्चिम एशिया
भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी
आईपीसी की पड़ताल में कहा गया है, "लक्ष्य है कि मानवीय खाद्य सहायता 38% आबादी तक पहुंचाई जाये, लेकिन अब भी तक़रीबन दो करोड़ लोग उच्च स्तर की ज़बरदस्त खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। यह संख्या देश की कुल आबादी की आधी है।"

पीपल्स डिस्पैच
14 May 2022
afghanistan
(फ़ोटो: एंडी वर्माट / ट्विटर)

इंटिग्रेटेड फ़ूड सेक्योरिटी फ़ेज़ क्लासिफ़िकेशन (IPC) की 18 पृष्ठ की इस रिपोर्ट के मुताबिक़, इस समय तक़रीबन दो करोड़ अफ़ग़ानी भूख और खाद्य संकट से गुज़र रहे हैं। बुनियादी खाद्य पदार्थों की क़ीमतें आसमान छू रही हैं और इसके साथ ही तीव्र खाद्य असुरक्षा है और इन दोनों ने अफ़ग़ान लोगों की हताशा के स्तर को बढ़ा दिया है। पिछले साल सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिका की ओर से लगाये गये प्रतिबंधों के आर्थिक नतीजों के साथ-साथ देश में सूखे की स्थिति से अकाल की संभावना बहुत बढ़ गयी है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अकाल चेतावनी प्रणाली-आईपीसी के अनुसार इस साल मार्च और मई के बीच क़रीब 1 करोड़ 30 लाख अफ़ग़ानी बेहद संकट में थे। लगभग 60 लाख 60 हज़ार लोग कथित तौर पर आईपीसी के चौथे चरण स्तर की उस आपात स्थिति का सामना कर रहे हैं, जिसमें भोजन के बीच बड़े अंतराल और भोजन तक पहुंच की कमी है। 

आईपीसी की पड़ताल में कहा गया है, "लक्ष्य है कि मानवीय खाद्य सहायता 38% आबादी तक पहुंचाया जाये,लेकिन अब भी तक़रीबन दो करोड़ लोग उच्च और महत्वपूर्ण स्तर के ज़बरदस्त खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।यह संख्या देश की कुल आबादी की आधी है।"

सेव द चिल्ड्रन ने 9 मई को अपनी रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में "90  लाख 60 हज़ार बच्चे हर दिन भूखे रह रहे हैं।" इनमें से एक बड़ा प्रतिशत महज़ चाय और सूखी रोटी पर ही अपना गुज़ारा करता है। कुछ लोग हताशापूर्ण क़दम उठा रहे हैं और यहां तक कि पैसों के बदले अपनी किडनी तक अस्पतालों को बेच रहे हैं।

आईपीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम दो करोड़ लोगों,ख़ासकर उस ग़ोर के सुदूर सूबे में सहायता की ज़रूरत है, जहां "तक़रीबन 20,000 लोग कथित तौर पर ऐसे पाये गये हैं, जो ज़बरदस्त संकट या तबाही (चरण 5) का सामना कर रहे हैं और उन्हें तुरंत सहायता की दरकार है।अगर ऐसा नहीं होता है,तो इस सूबे की स्थिति और ख़राब हो जायेगी।”

चारसदा और पासबंद के दो ज़िले ऐसे हैं,जो अपनी भौगोलिक स्थितियों और उन तक पहुंचने में पेश आने वाली चुनौतियों के चलते सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। मार्च के आख़िर तक मौजूदा अवधि के दौरान इन इलाक़ों में किसी तरह की कोई मदद नहीं पहुंच पायी थी।

अफ़ग़ानिस्तान की इस मौजूदा दुर्दशा के लिए ज़िम्मेदार कुछ प्रमुख कारक हैं- अंतर्राष्ट्रीय अनुदान सहायता में तेज़ी से गिरावट और अमेरिका की ओर से लगाये गये प्रतिबंधों के अलावा अफ़ग़ान केंद्रीय बैंक से जुड़े 9.5 बिलियन अमरीकी डालर की संपत्ति का फ़्रीज किया जाना।

इस नाकाम अर्थव्यवस्था ने भूख और ज़बरदस्त ग़रीबी को जन्म दिया है। यह देश सूखे, बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी और आसमान छूती खाद्य क़ीमतों का सामना कर रहा है। यूक्रेन में चल रहे संघर्ष से अनाज का आयात भी प्रभावित हुआ है।

इस आईपीसी की रिपोर्ट में कहा गया है, "जून से नवंबर 2022 तक, तीव्र खाद्य असुरक्षा के उच्च स्तर का सामना करने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 40 लाख 90 हज़ार लोगों तक पहुंच जाने की आशंका है।"

चीन जैसे कई पड़ोसी देशों ने भोजन की इस क़िल्लत को दूर करने में मदद करने की पेशकश की है। चीन ने हाल ही में पांच खेप खाद्य आपूर्ति की है, इस मानवीय संकट के बीच अफ़ग़ानिस्तान को 6,000 टन से ज़्यादा खाद्य सहायता दी है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस खाद्य संकट से बचने के लिए देश को कम से कम 4.4 बिलियन अमरीकी डॉलर की ज़रूरत है।

साभार: पीपल्स डिस्पैच

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://peoplesdispatch.org/2022/05/13/20-million-afghans-experiencing-acute-food-shortage-ipc/

TALIBAN
Afghanistan
Hunger Crisis
Famine
Food Shortage
poverty

Related Stories

तालिबान: महिला खिलाड़ियों के लिए जेल जैसे हालात, एथलीटों को मिल रहीं धमकियाँ

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

अफ़ग़ानिस्तान में सिविल सोसाइटी और अधिकार समूहों ने प्रोफ़ेसर फ़ैज़ुल्ला जलाल की रिहाई की मांग की

इतवार की कविता : "फिर से क़ातिल ने मेरे घर का पता ढूंढ लिया..."

अफ़ग़ानिस्तान: गढ़े गये फ़सानों के पीछे की हक़ीक़त

गोल्ड लोन की ज़्यादा मांग कम आय वाले परिवारों की आर्थिक बदहाली का संकेत


बाकी खबरें

  • Lakhimpur massacre
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: लखीमपुर के शहीद किसानों का मर्सिया
    10 Oct 2021
    अदनान कफ़ील दरवेश हमारे समय के महत्वपूर्ण युवा कवि हैं। लखीमपुर खीरी के किसान हत्याकांड से विचलित होकर उन्होंने यह कविता लिखी है। कविता व्यंग्यात्मक शैली में कही गई है। वाकई, शायद जब कोई घटना भीतर तक…
  • patient
    शंभूनाथ शुक्ल
    मरीज़ को क्लाइंट समझने की सोच से उबरा जाए!
    10 Oct 2021
    वैद्य अथवा डॉक्टर के लिए दोस्ती का कोई मतलब नहीं उन्हें हर बीमार अपना क्लाइंट नज़र आता है जिससे वे दवा के बदले पैसा उगाह सकते हैं। इसीलिए लोग कहते हैं कि जिस मौसम में बीमारियाँ बढ़ती हैं वही मौसम…
  • World Hunger
    सतीश भारतीय
    कोरोना संकट के बीच भूख से दम तोड़ते लोग
    10 Oct 2021
    ऑक्सफैम द्वारा जारी नई रिपोर्ट द हंगर वायरस मल्टीप्लाई के अनुमान से ज्ञात होता है कि इस वक्त दुनिया भर में करीब 15.5 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 2…
  • US National Security
    एम. के. भद्रकुमार
    बाइडेन-शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन संभावित 
    10 Oct 2021
    इस संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन और चीन के पोलित ब्यूरो सदस्य यांग यिएची के बीच स्विटजरलैंड के ज्यूरिख में हुई बैठक महत्त्वपूर्ण है। 
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    लखीमपुर के हत्यारे, कश्मीर की हिंसा और टाटा को एयर इंडिया
    09 Oct 2021
    लखीमपुर हत्याकांड के 6 दिन बाद किसानों की हत्या के प्रमुख आरोपी और केंद्रीय गृहराज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्र ने शनिवार को पुलिस को पूछताछ का मौका दिया. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद छह दिनों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License