NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
देवस्थानम एक्ट के विरोध में उबल रहे हैं चारों धाम, पूर्व सीएम को बिना दर्शन लौटाया, पीएम मोदी के विरोध की तैयारी
केदारनाथ दर्शन के लिए पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को तीर्थ-पुरोहितों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें दर्शन न करने देने के लिए पुरोहित मंदिर के प्रांगण में लेट गए। काले झंडों के साथ त्रिवेंद्र रावत गो बैक जैसे नारे लगे।
वर्षा सिंह
02 Nov 2021
protest in Kedarnath
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के केदारनाथ पहुंचने पर तीर्थ-पुरोहितों ने दिखाए काले झंडे

देवस्थानम एक्ट के विरोध में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बाज़ार सोमवार, एक नवंबर को बंद रहे। यहां दर्शन के लिए आए यात्रियों को पूजा सामाग्री तो क्या पीने का पानी तक नहीं मिला। जबकि केदारनाथ में काले झंडे लहराए गए। 5 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा प्रस्तावित है। तीर्थ-पुरोहितों ने प्रधानमंत्री की यात्रा के भी विरोध का फ़ैसला लिया है। 3 नवंबर को चारों धाम के तीर्थ-पुरोहितों ने केदारनाथ कूच करने का एलान किया है।

केदारनाथ की बर्फ़ीली ठिठुरन में तीर्थ-पुरोहितों का गुस्सा उबल रहा था। केदारनाथ दर्शन के लिए पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सोमवार को तीर्थ-पुरोहितों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें दर्शन न करने देने के लिए पुरोहित मंदिर के प्रांगण में लेट गए। काले झंडों के साथ त्रिवेंद्र रावत गो बैक जैसे नारे लगे। उनके साथ देहरादून के मेयर सुनियाल उनियाल गामा भी थे। तीर्थ पुरोहितों ने दोनों भाजपा नेताओं को दर्शन नहीं करने दिया। भारी विरोध को देखते हुए उन्हें केदारपुरी से वापस लौटना पड़ा।

सोमवार को ही भाजपा प्रवक्ता मदन कौशिक और मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी केदारनाथ दर्शन के लिए पहुंचे। तीर्थ-पुरोहितों ने दोनों नेताओं का घेराव किया। हालांकि वे केदारनाथ मंदिर में दर्शन कर सके।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए जम्मू-कश्मीर के श्राइन बोर्ड की तर्ज़ पर देवस्थानम बोर्ड बनाने का फ़ैसला किया था। विधानसभा से देवस्थानम एक्ट भी पास किया गया। इसलिए पुरोहितों में उन पर गुस्सा ज्यादा है।

देवस्थानम बोर्ड का मक़सद यात्रा को व्यवस्थित करना है। लेकिन तीर्थ-पुरोहितों को डर है कि इसका असर उनकी आजीविका पर पड़ेगा। बोर्ड के फैसले के साथ ही तीर्थ पुरोहित लगातार विरोध कर रहे हैं।

देवस्थानम बोर्ड के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं चारों धाम के तीर्थ पुरोहित

तीर्थ-पुरोहितों की नहीं सुनी बात

केदारनाथ में चारधाम तीर्थ-पुरोहित हक-हकूक धारी महापंचायत के प्रवक्ता ब्रजेश सती का कहना है कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर 11 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आश्वासन मिलने के बाद हमने 22 महीने से चल रहा अपना आंदोलन स्थगित किया था। देवस्थानम बोर्ड पर सरकार ने 31 अक्टूबर तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके लिए एक हाईपावर कमेटी बनाई गई।

ब्रजेश बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि इस एक्ट पर पुनर्विचार के लिए हाई पावर कमेटी में चारों धामों के आठ तीर्थ पुरोहितों को भी शामिल किया जाएगा। लेकिन हाई पावर कमेटी ने बिना तीर्थ पुरोहितों और मंदिर समितियों से विचार विमर्श किए ही अपनी अंतरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेज दी। यही नहीं, हमने जो 8 नाम कमेटी के लिए भेजे थे, उनमें से 3 लोगों के नाम हटा दिए गए और दो ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो न तो तीर्थ-पुरोहित हैं, न ही हक हकूकधारी।

गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में बंद रहे व्यापारिक प्रतिष्ठान

तीर्थ पुरोहितों ने 1 नवंबर से चारों धामों में एक बार फिर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ब्रजेश सती कहते हैं “ये आंदोलन अब जारी रहेगा। 2 नवंबर को बदरीनाथ में भी विरोध प्रदर्शन होगा। अब यहां आने वाले किसी भी भाजपा नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री का विरोध किया जाएगा। हम प्रधानमंत्री मोदी के केदारनाथ आगमन का भी विरोध करेंगे। प्रशासन क्या करता है ये हमें नहीं पता। 3 नवंबर को ही चारों धाम के तीर्थ-पुरोहित केदारनाथ जुटेंगे”।

वहीं गंगोत्री धाम के पुरोहित राजेश सेमवाल बताते हैं कि गंगोत्री-यमुनोत्री दोनों ही धाम के सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान पहली नवंबर को बंद रहे। हमने मंदिरों में पूजा-पाठ नहीं किया। ढोल-नगाड़ों के साथ बाज़ारों में जुलूस निकाला गया।

ऐसे में दूसरे राज्यों से दर्शन के लिए आए यात्रियों को असुविधा हुई होगी? इस पर वह बताते हैं कि यात्री मंदिर दर्शन तो कर सके। लेकिन उन्हें प्रसाद तक नहीं मिला।

धर्म और राजनीति

केदारनाथ से विधायक मनोज रावत कहते हैं “देवस्थानम बोर्ड और एक्ट जनता को विश्वास में लिए बिना धोखे से लाया गया है। जिस दिन एक्ट लाया गया पूरे राज्य में इसका विरोध हुआ था। सरकार ने सोचा कि गढ़वाल के मंदिर उनकी कमाई का अड्डा बनेंगे। मैंने विधानसभा में इस पर कहा था कि इस एक्ट को आप प्रवर समिति में भेजते। जहां से जनता की राय ली जाती। सरकार जनता को विश्वास में क्यों नहीं लेती”।

मनोज कहते हैं “चारों धाम से यहां के आसपास बसे गांवों की आस्था जुड़ी हुई है। यहां के तीर्थ-पुरोहित, हक-हकूक धारी बर्फ में डोली लेकर भगवान को भेजने और छोड़ी जाते हैं। इसके दस्तूर में इन्हें एक किलो चावल और दस रुपये मिलते हैं। इसके लिए तो ये बर्फ में नंगे पांव नहीं चलते। ये इनकी भावना है। यहां के लोग बिना केदार के नहीं रह सकते”।

“पुनर्निर्माण के नाम पर केदारनाथ मंदिर का वास्तु बदल दिया गया है। शंकराचार्य की मूर्ति 30 फीट गहरे गढ्ढे में पश्चिम की ओर मुख करके बनाई गई है। ऐसा नादानी में नहीं किया गया। केदारनाथ में शंकराचार्य की मूर्ति की जरूरत नहीं है। यहां स्वयंभू ज्योतिर्लिंग की पूजा होती है”।

वह आगे कहते हैं “प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में केदारनाथ मंदिर से 5 किलोमीटर तक जो लंबी लाइन लगती हैं वहां एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। लोग शौचालय के लिए कहां जाएंगे। गरीबों के ठहरने के लिए जो पारंपरिक चट्टियां होती थीं, पुनर्निर्माण में वे भी हटा दी गईं। क्या केदारनाथ सिर्फ अमीर लोगों के दर्शन के लिए है। गरीब लोगों के लिए कौन सी जगह बनाई गई है”।

तीर्थ-पुरोहितों की नाराजगी और चुनाव की टाइमिंग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीर्थ-पुरोहितों को आश्वस्त किया था कि वे 31 अक्टूबर तक देवस्थानम बोर्ड पर फैसला लेंगे। 25 अक्टूबर को दी गई हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि समिति ने सरकार को अपनी पहली रिपोर्ट दी है। ये अंतिम रिपोर्ट नहीं है। देवस्थानम बोर्ड पर सबकी राय से फ़ैसला लिया जाएगा।

ब्रजेश सती कहते हैं कि राज्य सरकार ने वादा-खिलाफी की है। नाराज तीर्थ-पुरोहित अब पूरे राज्य में उग्र आंदोलन करेंगे।

तीर्थ-पुरोहितों की नाराजगी चुनावी मुद्दा भी बन गई है। आम आदमी पार्टी के नेता रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल ने मीडिया को कहा था कि अगर देवस्थानम बोर्ड भंग नहीं किया जाता तो उनकी पार्टी भी तीर्थ पुरोहितों के आंदोलन का समर्थन करेगी। उधर, भाजपा की भी पूरी कोशिश होगी कि चुनाव से पहले चारों धाम के तीर्थ-पुरोहितों का गुस्सा न मोल लें।

(वर्षा सिंह, देहरादून स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

KEDARNATH
Protest in Kedarnath
Trivendra Singh Rawat
Protest against Devasthanam board
Protest in Gangotri
Narendra modi
BJP
Char Dham Devasthanam Act
badrinath
Gangotri
Yamunotri

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Victims of Tripura
    मसीहुज़्ज़मा अंसारी
    त्रिपुरा हिंसा के पीड़ितों ने आगज़नी में हुए नुकसान के लिए मिले मुआवज़े को बताया अपर्याप्त
    25 Jan 2022
    प्रशासन ने पहले तो किसी भी हिंसा से इंकार कर दिया था, लेकिन ग्राउंड से ख़बरें आने के बाद त्रिपुरा सरकार ने पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। हालांकि, घटना के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के…
  • genocide
    अजय सिंह
    मुसलमानों के जनसंहार का ख़तरा और भारत गणराज्य
    25 Jan 2022
    देश में मुसलमानों के जनसंहार या क़त्ल-ए-आम का ख़तरा वाक़ई गंभीर है, और इसे लेकर देश-विदेश में चेतावनियां दी जाने लगी हैं। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
  • Custodial Deaths
    सत्यम् तिवारी
    यूपी: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक आदिवासी की मौत, सरकारी अपराध पर लगाम कब?
    25 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार दावा करती है कि उसने गुंडाराज ख़त्म कर दिया है, मगर पुलिसिया दमन को देख कर लगता है कि अब गुंडाराज 'सरकारी' हो गया है।
  • nurse
    भाषा
    दिल्ली में अनुग्रह राशि नहीं मिलने पर सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने विरोध जताया
    25 Jan 2022
    दिल्ली नर्स संघ के महासचिव लालाधर रामचंदानी ने कहा, ‘‘लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल, जीटीबी हस्पताल और डीडीयू समेत दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग…
  • student
    भाषा
    विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट
    25 Jan 2022
    रिपोर्ट के अनुसार महामारी के कारण उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विश्वविद्यालयों के सामने अनेक विषय आ रहे हैं और ऐसे में विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License