NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
चरमराई अर्थव्यवस्था और बेरोज़गारी को लेकर ओमान में जारी विरोध प्रदर्शन का चौथा दिन
राष्ट्रीय बजट को संतुलित करने और घाटे को कम करने के लिए सुल्तान द्वारा शुरू की गई बिजली और पानी से सब्सिडी को हटाने जैसे कठोर नियमों से ओमानी नागरिक जूझ रहे हैं।
पीपल्स डिस्पैच
27 May 2021
चरमराई अर्थव्यवस्था और बेरोज़गारी को लेकर ओमान में जारी विरोध प्रदर्शन का चौथा दिन

बुधवार 26 मई को हजारों युवा ओमानी नागरिकों ने गिरती आर्थिक स्थिति, बड़े पैमाने पर छंटनी और तेजी से बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ कई शहरों और कस्बों में लगातार चौथे दिन विरोध प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के अनुसार ये विरोध प्रदर्शन सोहर और अन्य प्रमुख शहरों में हुए।

ये विरोध प्रदर्शन जो काफी हद तक शांतिपूर्ण थे और सोहर शहर में तैनात मिलिट्री राइट पुलिस और बख्तरबंद वाहनों की उपस्थिति में आयोजित किए गए लेकिन पुलिस ने शहर के मुख्य पुल के नीचे धरना देने वाले प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे। विरोध के पहले 3 दिनों में सोहर और सलालाह में कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया।

रविवार को शुरू हुए इस विरोध के चलते ओमान के शासक सुल्तान हैथम ने सरकार को लगभग 32,000 पूर्णकालिक और अंशकालिक नौकरियों के साथ-साथ हजारों सरकारी नौकरियों के सृजन की प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ साथ नए कर्मचारियों के लिए सरकारी सब्सिडी का निर्देश देकर कुछ नुकसान की भरपाई की।

छोटा खाड़ी राष्ट्र ओमान अनगिनत आर्थिक समस्याओं से उबरने की कोशिश कर रहा है जो धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में गिरावट, कोरोनावायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव और बढ़ते राष्ट्रीय ऋण जो देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2020 में लगभग 127% होने का अनुमान लगाया गया वह और बदतर हो गया। ओमानी नागरिक भी राष्ट्रीय बजट को संतुलित करने और घाटे को कम करने के लिए सुल्तान द्वारा शुरू की गई बिजली और पानी से सब्सिडी को हटाने जैसे कठोर उपायों से जूझ रहे हैं।

द गल्फ सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स और ओमानी एसोसिएशन फॉर ह्यूमन राइट्स जैसे मानवाधिकार समूहों ने एक बयान जारी कर सरकार से देश में मानव और नागरिक अधिकारों का सम्मान करने और "लोगों की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कराने और उन्हें चुप करने की नीति" को तत्काल समाप्त करने के लिए कहा। इनमें शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल हैं।"

Oman
woman protest
economic crises
Economic Recession

Related Stories

एक ‘अंतर्राष्ट्रीय’ मध्यवर्ग के उदय की प्रवृत्ति

किधर जाएगा भारत— फ़ासीवाद या लोकतंत्र : रोज़गार-संकट से जूझते युवाओं की भूमिका अहम

श्रीलंका का संकट सभी दक्षिण एशियाई देशों के लिए चेतावनी

श्रीलंका संकट: दर्द भी क़र्ज़ और दवा भी क़र्ज़

श्रीलंका की तबाही इतनी भयंकर कि परीक्षा के लिए कागज़ का इंतज़ाम भी नहीं हो पा रहा

रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध का भारत के आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

केंद्रीय बजट में दलित-आदिवासी के लिए प्रत्यक्ष लाभ कम, दिखावा अधिक

रोजगार, स्वास्थ्य, जीवन स्तर, राष्ट्रीय आय और आर्थिक विकास का सह-संबंध

डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट उन्हें भी मारती है जिन्होंने पूरी जिंदगी डॉलर नहीं देखा है!

भारत की महामारी के बाद की आर्थिक रिकवरी अस्थिर है


बाकी खबरें

  • Hemant Soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड-बिहार: स्थानीय भाषा को लेकर विवाद कहीं महज़ कुर्सी की राजनीति तो नहीं?
    22 Sep 2021
    “किसी भी प्रदेश में वहां की स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलना संविधान सम्मत है। लेकिन अब इस पर भी राजनीति होना संदेह पैदा करता है कि कहीं ये विवाद भी कोई सांप्रदायिक ध्रुविकरण करा कर बुनियादी सवालों…
  • Varanasi
    विजय विनीत
    बदहाली: रेशमी साड़ियां बुनने वाले हाथ कर रहे हैं ईंट-पत्थरों की ढुलाई, तल रहे हैं पकौड़े, बेच रहे हैं सब्ज़ी
    22 Sep 2021
    बनारस से ग्राउंड रिपोर्ट: विश्वविख्यात बनारस की रेशमी साड़ियों का ताना-बाना बिखर रहा है। इसी ताने-बाने में सिसक रही है बुनकरों की जिंदगी। जानने के लिए आपको लिए चलते हैं बनारस की संकरी गलियों में..
  • school
    सौम्या गुप्ता, सी. सरतचंद
    स्कूलों को वक़्त से पहले खोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए
    22 Sep 2021
    केवल स्कूलों को फिर से खोलने से असमान शिक्षा प्रणाली अधिक समान नहीं हो जाएगी जब तक कि सरकारें शिक्षा पर अपने ख़र्च को नहीं बढ़ाती हैं स्थिति में बदलाव लाना असंभव है। स्कूल खोलने से कोविड म्यूटेशन का…
  • SCO
    एम. के. भद्रकुमार
    ईरान की एससीओ सदस्यता एक बेहद बड़ी बात है
    22 Sep 2021
    तेहरान का एससीओ में ज़ोरदार स्वागत के साथ शामिल किया जाना और इस संगठन का जल्दबाज़ी के साथ विस्तार किया जाना दिखाता है कि बीजिंग और मॉस्को के बीच ज़बरदस्त तालमेल है।
  • यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    22 Sep 2021
    योगी जी का विकास का सारा जश्न दरअसल अर्थव्यवस्था के ध्वंस और कोविड से हलकान, हैरान-परेशान जनता को मुंह चिढ़ाने और उसके जले पर नमक छिड़कने जैसा है। कुछ विश्लेषकों ने ठीक नोट किया है कि "यूपी विकासोत्सव…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License