NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
सफ़ूरा ज़रग़र की अजन्मी बिटिया की ओर से... तुम कब जनमोगी अम्मा...मैं कब आज़ाद होउंगी!
‘सब याद रखा जाएगा’ : कवि और समाजसेवी अंशु मालवीय ने 2002 के गुजरात दंगों का शिकार हुईं कौसर बानो की अजन्मी बिटिया की ओर से एक बेहद मार्मिक कविता लिखी थी, जो अपने आप में प्रतिरोध का सच्चा बयान और पोस्टर बन गई थी। उसी तर्ज़ पर उन्होंने एक बार फिर क़लम उठाकर सफ़ूरा ज़रग़र की अजन्मी बिटिया की ओर से मां के नाम एक ख़त लिखा है। सफ़ूरा ज़रग़र जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एम.फिल की विद्यार्थी हैं। CAA और NRC के विरोध में हुए आंदोलन में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। अपनी इसी भूमिका की वजह से वह सत्ता की आंखों का कांटा बन गई हैं और आज जेल में हैं। सफ़ूरा इस समय गर्भवती हैं, वह मां बनने वाली हैं, लेकिन जैसे ही यह बात सामने आई दंगाई नेताओं ने उनका चरित्र हनन करने की भरपूर कोशिश की। यह कविता इसी का प्रतिरोध करती है और कहे-अनकहे ढंग से हमारे लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े करती है जिनका जवाब ढूंढना बेहद ज़रूरी है।
न्यूज़क्लिक डेस्क
03 Jun 2020
सफ़ूरा ज़रग़र की अजन्मी बिटिया की ओर से... तुम कब जनमोगी अम्मा...मैं कब आज़ाद होउंगी!
प्रतीकात्मक तस्वीर (पेंटिंग) साभार: फेसबुक/Safoora Zargar Fans

सब कुछ ठीक है अम्मा!

 

सलाखों की छाया तुम्हारे पेट पर देखी है मैंने

और सुनी है तुम्हारे दिल की थरथराहट

कोख के पानी में

 

सब कुछ ठीक है अम्मा !

 

तुम जेल की कोठरी में हो

और मैं तुम्हारी कोख में

तुम अपने वतन में हो

मैं अपने वतन में

सलाखों से रिसती धूप

रौशनदान से झांकती चांदनी

तुम्हारी धड़कन में सीझकर पहुंचते हैं मेरे पास।

 

सब कुछ ठीक है अम्मा !

 

वे जब तुम्हें कैद कर लाए ना अम्मा

उन्हें पता नहीं था

वे एक को नहीं दो को कैद कर लाए हैं

जब तुम्हें खाना दिया

तो पता नहीं था उन्हें

तुम्हें एक की नहीं दो की भूख है

जब सोईं ना तुम

तो पता ही न चला उन्हें

कि ये एक की नहीं दो की नींद है

और कहां पता चलना था उन्हें

कि तुम्हारी आंखों में

एक के नहीं दो के ख़्वाब हैं

कैसा चकमा दिया उन्हें अम्मा

तुम्हारे भीतर छुपकर आ गई मैं

 

मैं बहुत खुश हूं अम्मा !

 

अपनी उन आंखों से जो अभी नहीं खुलीं

मैंने एक दुनिया देखी

अपने उन कानों से जो कुछ नहीं सुनते

मैंने कुछ गीत सुने

अपनी उस ज़बान में जो अभी नहीं चली

मेरे पास कुछ जवाब हैं

अजन्मे जवाब अम्मा!

मेरे बाप का नाम पूछें तो कहना वतन

मेरा वतन पूछें तो मुट्ठी भर जेल की माटी देना

मेरा धरम पूछें

तो कहना वहीं जो मादरे हिंद का है

और जो पूछें अम्मा तुमसे

कौन है तुम्हारे पेट में

तो कहना आज़ादी का इक नन्हा नग़्मा पलता है!

 

बंदिनी मांएं आज़ाद नहीं होतीं

                             जनमती है

बंदिनी बेटियां जनमती नहीं

                                आज़ाद होती हैं

तुम कब जनमोगी अम्मा

मैं कब आज़ाद होउंगी !

अंशु मालवीय
(27/5/20)

 

इन्हें भी पढ़ें : काश! ये आँखें धंस जातीं हमारे हुक्मरानों की आँखों में, उनके ज़ेहन में

: हम बच तो जाएंगे, लेकिन कितना बच पाएंगे ?

: ...जैसे आए थे वैसे ही जा रहे हम

: …तब भूख एक उलझन थी, अब एक बीमारी घोषित हो चुकी है

: अब आप यहाँ से जा सकते हैं, यह मत पूछिए कि कहाँ जाएँ...

: हम भी हिंदुस्तान हैं

Safura Zargar
CAA
NRC
Protest against CAA
modi sarkar
‘सब याद रखा जाएगा’

Related Stories

वैश्विक भुखमरी इंडेक्स में भारत की ‘तरक़्क़ी’: थैंक्यू मोदी जी!

हे राम से श्री राम और हाय राम तक

'टू मच डेमोक्रेसी', सच्ची में!

तिरछी नज़र: समझदार सरकार और नासमझ जनता!

तिरछी नज़र: मोदी जी इतिहास लिख रहे हैं

बिहार चुनाव और कोरोना वैक्सीन : घर में नहीं दाने, साहेब चले भुनाने

इरफ़ानः हम आगे बढ़ते हुए, पीछे के क़दमों के निशान मिटाते जा रहे हैं

तिरछी नज़र: कोरोनुआ भयो पचास लखपतिया

तिरछी नज़र : रफ़ाल आला रे आला, इतिहास लिखा डाला रे डाला

कम टेस्ट से कोरोना की रोकथाम का नायाब तरीक़ा


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: कुछ भी मत छापो, श..श..श… देश में सब गोपनीय है
    10 Apr 2022
    एक कानून है, गोपनीयता का कानून। पहले से ही है। सरकारी गोपनीयता का कानून। बलिया में वह भंग कर दिया गया। तीन पत्रकारों ने उसे भंग किया।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    जय श्री राम बनाम जय सिया राम
    10 Apr 2022
    आज रामनवमी है, और इतवार भी। इसलिए ‘इतवार की कविता’ में आज पढ़ते हैं जय श्री राम और जय सिया राम का फ़र्क़ और मर्म बताती मुकुल सरल की यह छोटी सी कविता।
  • worker
    पुलकित कुमार शर्मा
    पिछले तीन सालों में दिहाड़ी 50 रुपये नहीं बढ़ी, जबकि महंगाई आसमान छू गयी    
    10 Apr 2022
    देश में 30 करोड़ से भी ज्यादा ग्रामीण कामगार कृषि और गैर कृषि पेशों से जुड़े हुए हैं। जिनकी दिहाड़ी में पिछले तीन सालों में मामूली सी बढ़ोतरी हुई है, जबकि महंगाई आसमान छू रही है।  
  • नाइश हसन
    उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां
    10 Apr 2022
    उर्दू अपना पहले जैसा मक़ाम हासिल कर सकती है बशर्ते हुकूमत एक खुली ज़ेहनियत से ज़बान को आगे बढ़ाने में साथ दे, लेकिन देखा तो यह जा रहा है कि जिस पैकेट पर उर्दू में कुछ छपा नज़र आ जा रहा है उस प्रोडक्ट से…
  • शारिब अहमद खान
    नेट परीक्षा: सरकार ने दिसंबर-20 और जून-21 चक्र की परीक्षा कराई एक साथ, फ़ेलोशिप दीं सिर्फ़ एक के बराबर 
    10 Apr 2022
    केंद्र सरकार द्वारा दोनों चक्रों के विलय के फैसले से उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले हज़ारों छात्रों को धक्का लगा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License