NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
कानून
भारत
राजनीति
10 और एनजीओ की फंडिंग को रोका गया
आरबीआई का आंतरिक नोट बताता है कि अमेरिकी, ऑस्ट्रेलियाई और यूरोपीय संस्थाओं को ‘पूर्व सन्दर्भ श्रेणी’ वाली सूची में रखा गया है।
सुमेधा पाल
15 Sep 2021
NGO funding
प्रतीकात्मक फ़ोटो

गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की ओर से दिए जाने वाले विशाल योगदान और उनके द्वारा देश भर में शुरू किये गए राहत कार्यों के बावजूद इस प्रकार की कई और संस्थाएं अब गृह मंत्रालय (एमएचए) की जांच के दायरे में आ गई हैं। इसके साथ ही केंद्र ने 10 अमेरिकी, ऑस्ट्रेलियाई और यूरोपीय समूहों के वित्तपोषण को प्रतिबंधित कर दिया है।

1 जुलाई को सभी बैंकों को भेजे गए अपने आंतरिक नोट में भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि सरकार ने विदेशी योगदान (नियमन) संशोधन अधिनियम, 2020 के तहत कुछ विदेशी संस्थाओं को ‘पूर्व संदर्भ श्रेणी’ (पीआरसी) सूची में रखने के लिए निर्दिष्ट किया है। नोट के मुताबिक, यदि कोई भी अनधिकृत फण्ड यदि आता है तो बैंक और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स दोनों ही उसके लिए जवाबदेह होंगे। 

द हिन्दू अखबार के हाथ लगी नोटिस की एक कॉपी में कहा गया है कि “आरबीआई ने निर्देशित किया है कि भारत में किसी भी एनजीओ/स्वयंसेवी संगठन/व्यक्तियों के लिए (निर्दिष्ट) दानदाता संस्थाओं से किसी भी प्रकार के फण्ड के प्रवाह को गृह मंत्रालय के संज्ञान में लाना होगा, ताकि फण्ड को गृह मंत्रालय की एफसीआरए शाखा के विदेश विभाग से इसकी मंजूरी/पूर्व अनुमति मिल जाने के बाद ही प्राप्तकर्ताओं के खाते में इसे जमा किया जा सके।”

इन 10 संस्थाओं के जुड़ जाने से पीआरसी सूची में कुल एनजीओ की संख्या बढ़कर 90 से अधिक हो चुकी है। इन 10 एनजीओ में यूरोपियन क्लाइमेट फाउंडेशन, तीन अमेरिका स्थित एनजीओ, दो ऑस्ट्रेलिया-आधारित एनजीओ और ब्रिटेन-आधारित चिल्ड्रेन इन्वेस्टमेंट फण्ड फाउंडेशन, फ्रीडम फण्ड और लौडेस फाउंडेशन के साथ-साथ ब्रिटेन/यूएई-आधारित लेगाटम फण्ड शामिल हैं।

फण्ड के अभाव में हाथ-पाँव मारते और कड़े प्रावधानों का सामना करते हुए कई गैर सरकारी संगठनों को अपना कामकाज बंद करना पड़ा है, जिसके चलते देश भर में कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए हैं।

दिल्ली स्थित नेशनल कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन के वकील अंसार इंदौरी ने न्यूज़क्लिक को बताया, “नरेंद्र मोदी सरकार के तहत गैर सरकारी संगठनों को विदेशों से की जा रही फंडिंग में तकरीबन 40% की कमी आई है। एक विदेशी सलाहकार कंपनी बैन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से गृह मंत्रालय द्वारा अभी तक लगभग 13,000 के करीब एनजीओ के लाइसेंस रद्द किये जा चुके हैं।

इंदौरी के अनुसार “2017 में लगभग 4,800 एनजीओ के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। सरकार ने एफसीआरए अधिनियम का हवाला देते हुए संवैधानिक एवं मानवाधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले कई गैर सरकारी संगठनों के खिलाफ जांच बिठाई है। इन संगठनों ने जाँच का विरोध किया था और इन्हें सत्ता का दुरुपयोग बताया था।” 

द हिन्दू अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक संसद में गृह मंत्रालय के जवाब के अनुसार, सरकार ने 6,600 से अधिक की संख्या में गैर सरकारी संगठनों के एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और 2016 से 2020 के बीच में लगभग 264 को निलंबित कर दिया था। 

विदेशी अंशदान (नियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधनों ने फण्ड के उप-अनुदान को प्रतिबंधित कर दिया था, वैश्विक नागरिकों से मिलने वाली सहायता को रोक दिया और देशहित के नाम पर सभी विदेशी दान को खत्म करने का आह्वान किया था। अब तमाम संगठनों को अपने प्रशासनिक खर्चों को 20 प्रतिशत विदेशी योगदान से पूरा करना पड़ता है, और छोटे संगठनों को बीजारोपण वित्तीय मदद तक से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

चैरिटीज एड फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी (सीईओ) मीनाक्षी बत्रा ने इस बारे में दिसंबर 2020 में बताया था कि संशोधित अधिनियम “भारत में चल रहे उन विकास कार्यों को बाधित करने जा रहा है जिन्हें इन कंपनियों द्वारा समर्थन दिया जा रहा है।” 

बत्रा ने लिखा था “मौजूदा एफसीआरए अंधड़ से पहले, अंतर्राष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्थाएं अपने भारतीय कार्यालयों को पैसा भेजा करती थीं, जो काफी हद तक स्वतंत्र रूप से अपना कामकाज करती थीं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए और स्थानीय जरूरतों और मुद्दों की उनकी अपनी समझ के आधार पर अन्य गैर-लाभकारी संस्थाओं को फण्ड उप-अनुदान दिया था। अब जबकि उप-अनुदान को प्रतिबंधित कर दिया गया है, अंतर्राष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्थाओं को सीधे तौर पर कार्यान्वयन करने वाले संगठन को प्रत्यक्ष तौर पर फण्ड भेजना पड़ेगा (न कि उनके अपने भारतीय कार्यालय को) – जो कि और भी ज्यादा जटिल प्रक्रिया है, जिसने उन्हें जमीनी हालात से एक कदम और पीछे हटा दिया है।”

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पिछले साल एमनेस्टी इंटरनेशनल के खातों को सील करने के बाद से उसे अपने भारतीय कार्यालयों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इसी प्रकार ब्रिटेन स्थित कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) अपने विदेशी योगदान के 25 प्रतिशत फण्ड के उपयोग की अनुमति और विदेशों से दान प्राप्त करने की अनुमति दिए जाने के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहा है। 

वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की सदस्या, लारा जेसानी ने न्यूज़क्लिक को बताया: “मनमाने तरीके से लाइसेंस रद्द किये जा रहे हैं। हालाँकि कई गैर सरकारी संगठनों ने अदालत में लाइसेंस रद्द किये जाने को चुनौती दे रखी है, लेकिन फैसला आने में कई साल लग जाते हैं।”

जेसानी के मुताबिक सरकार की मंशा है कि ये एनजीओ अधिकारों के लिए लड़ना बंद कर दें। “उदाहरण के लिए, सीएचआरआई मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ काम करती है। सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और पुलिस एवं पर्यावरण सुधारों के लिए काम करने वाले संगठनों के खिलाफ एफसीआरए का इस्तेमाल बदले की भावना के तहत किया जा रहा है। इन संगठनों को विशेषतौर उनके वित्तपोषण और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन में कटौती करके और उन्हें बदनाम और अपमानित करके लक्षित किया जा रहा है।” 

ताजा शिकंजा कसे जाने की घटना को सरकार पर सवाल उठाने वाले संगठनों के अधिकारों और स्वतंत्रता में और अधिक कटौती किये जाने के तौर पर देखा जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता और अनहद की संस्थापक सदस्य शबनम हाशमी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि मोदी सरकार ने “20,000 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों के एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।”

हाशमी का कहना था कि “सरकार से हमें इस बारे में एक वाक्य का उत्तर मिला था। जब गृह मंत्रालय ने हमारा एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया था तो उसका जवाब था ‘आपका काम जन-हित में नहीं है।” हाशमी ने कहा, इसका नतीजा यह हुआ कि ग्रामीण बिहार, मेवात और कश्मीर का हमारा सारा कामकाज पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। हम वहां पर महिला सशक्तिकरण केंद्र चला रहे थे, महिलाओं को शिक्षित कर रहे थे, उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण दे रहे थे और उन्हें लैंगिक अधिकारों के बारे में प्रशिक्षित कर रहे थे।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/Funding-10-More-NGO-Slashed

Foreign Funding Case
FCRA
RBI
NGO

Related Stories

बच्चों की गुमशुदगी के मामले बढ़े, गैर-सरकारी संगठनों ने सतर्कता बढ़ाने की मांग की


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: किस चीज़ से डरते हैं वे?
    09 Jan 2022
    गोरख पाण्डेय ने 43 साल पहले देश के हाकिमों से पूछा था कि “किस चीज़ से डरते हैं वे/तमाम धन-दौलत/ गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद?”, आज भी ये सवाल मौज़ू है और साथ ही उसका जवाब भी।
  • UP
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव हलचल: गठबंधन के सहारे नैया पार लगाने की कोशिश करतीं सपा-भाजपा
    09 Jan 2022
    यूपी में चुनावों का ऐलान हो चुका है, सबकी नज़र सपा और भाजपा पर है, बसपा, रालोद और कांग्रेस भी चुनावी गणित में अपना अपना हिस्सा लेने की आस लगाए बैठी हैं। आइए गठबंधनों के लिए अंदर ही अंदर चल रही हलचल…
  • omicron
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...
    09 Jan 2022
    हम तो हर मेहमान का स्वागत करते हैं। आखिर 'अतिथि देवो भव', यही हमारी सभ्यता है। और अगर मेहमान विदेशी हो तो कहना ही क्या! विदेशी अतिथि तो हमें बहुत ही पसंद हैं। क्या पता, निवेश करने ही आया हो।
  • पीएम सुरक्षा चूक पर धुंध, चन्नी की चमक और सूबाई चुनाव
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    पीएम सुरक्षा चूक पर धुंध, चन्नी की चमक और सूबाई चुनाव
    08 Jan 2022
    पंजाब और पंजाबियत के बचाव में पुरजोर ढंग से बोलकर क्या मुख्यमंत्री चन्नी ने अपने सूबे में अपनी हैसियत मजबूत कर ली है? #HafteKiBaat के नये एपिसोड में इन सवालों के अलावा पांच राज्यों में चुनाव की…
  • संभावित लॉकडाउन के ख़तरे के बीच बिहार-यूपी लौटने लगे प्रवासी श्रमिक !
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संभावित लॉकडाउन के ख़तरे के बीच बिहार-यूपी लौटने लगे प्रवासी श्रमिक !
    08 Jan 2022
    घर लौटने को लेकर मुंबई में अफरातफरी का माहौल सामने आया है। मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर इन श्रमिकों की भीड़ देखी गई। घर पहुंचने के लिए बिहार-उत्तरप्रदेश के इन श्रमिकों को ट्रेन में जगह नहीं मिल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License