NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना काल में GBU ने 156 सफ़ाईकर्मियों को निकाला, 40 दिन से प्रदर्शन जारी
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) प्रशासन ने ठेके पर काम कर रहे 156 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया है, जिसमें 34 महिलाएं शामिल हैं। 14 जून को कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त हो गया, जिसका विस्तार नहीं किया जा रहा है। 15 जून से ही सभी कर्मचारी गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के गेट नंबर 2 के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।
सत्येन्द्र सार्थक
24 Jul 2020
GBU

40 वर्षीय सुनीता सफ़ाई कर्मचारी हैं और पिछले 10 वर्षों से गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में काम कर रही थीं। 15 जून को बिना किसी पूर्व सूचना के विश्वविद्यालय प्रशासन ने 156 सफ़ाई कर्मचारियों सहित सुनीता को भी बाहर निकाल दिया है। तब से ही सुबह घर का काम करने के बाद सुनीता दर्जनों महिलाओं के साथ विश्वविद्यालय गेट पर प्रदर्शन करने के लिए आ जाती हैं। तीन बच्चों की मां सुनीता विधवा हैं और परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य। प्रधानमंत्री द्वारा सफ़ाईकर्मियों को कोरोना योद्धा घोषित किए जाने के बाद सुनीता को अंदाजा भी नहीं था कि उन्हें इतनी जल्दी और इस कदर बेरोजगार होना पड़ेगा। फिलहाल वह एक महीने से अधिक समय से सहकर्मियों के साथ फिर से नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

सुनीता दनकौर गांव की रहने वाली हैं, जो विश्वविद्यालय से 10-12 किलोमीटर की दूरी पर है। लॉकडाउन के दौरान  सवारी गाड़ियों का मिलना निश्चित नहीं, लिफ्ट नहीं मिलने पर सुनीता को यह दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है। पूरी तरह से लॉकडाउन के 3 महीनों के दौरान उन्होंने ड्यूटी के लिए दोनों तरफ की दूरी पैदल ही तय की थी। सुनीता की दो बेटियां और एक बेटा है, जिसमें बड़ी बेटी की उम्र 18 वर्ष हो चुकी है। लॉकडाउन के दौरान कहीं और नौकरी भी नहीं मिल रही। वह बताती हैं कि “हम सुबह 7 बजे से शाम तक विश्वविद्यालय के गेट के बाहर बैठे रहते हैं। तेज धूप के कारण हमारे एक दर्जन साथी बीमार हो चुके हैं। फिर भी हमें परिसर के अंदर से पीने का पानी तक नहीं लेने दिया जाता है, हमें घर से लाकर या खरीदकर पानी पीना पड़ता है।”

sunita.jpg

19 मार्च को जनता कर्फ्यू का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में अगली कतार में खड़े डॉक्टर्स, पुलिसकर्मी, सफ़ाईकर्मी और सरकारी कर्मचारियों के सम्मान में 22 मार्च को लोगों से घर या घर की बॉलकनी में खड़े होकर ताली, थाली और घंटी बजाकर अभिवादन करने को कहा था। स्थानीय प्रशासन से भी शाम को 5 बजे सायरन बजाकर लोगों को याद दिलाने की बात कही। 14 अप्रैल को फिर प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों से कोरोना योद्धाओं का सम्मान करने की बात कही। साथ ही सभी नियोक्ताओं से किसी को भी नौकरी से नहीं निकालने की अपील की। पूरे देश में प्रधानमंत्री की इन अपीलों का कैसा असर रहा यह एक अलग सवाल है। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं दिख रही।

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय प्रशासन ने ठेके पर काम कर रहे 156 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया है, जिसमें 34 महिलाएं शामिल हैं। 14 जून को कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त हो गया, जिसका विस्तार नहीं किया जा रहा है। 15 जून से ही सभी कर्मचारी गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के गेट नंबर 2 के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय या स्थानीय प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों से बात करने की जहमत नहीं उठाई है। सफ़ाईकर्मियों का आरोप है कि जब उन्होंने रजिस्ट्रार से बात करने की कोशिश की तो अपशब्दों का प्रयोग कर उन्हें कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया।

प्रदर्शन कर रहे इन सभी कर्मचारियों के पास विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोविड-19 के दौरान आवश्यक सेवाओं के संचालन के लिए जारी पास मौजूद है। सफ़ाईकर्मियों ने लॉकडाउन के समय में भी लगातार काम किया है। कोविड-19 के गंभीर खतरे के दौरान काम करने के बावजूद सफ़ाई कर्मचारियों को केवल एक मास्क दिया गया था। ज्यादातर सफ़ाईकर्मी आसपास के गांवों के ही हैं। पूरी तरह से लॉकडाउन के दौरान विश्वविद्यालय में ड्यूटी के लिए सफ़ाईकर्मियों ( विशेषकर महिलाओं ) ने 10 से 15 किमी की दूरी पैदल तय की थी।

IMG20200717121036.jpg

गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा सफ़ाई कामगार यूनियन के अध्यक्ष संजय ने बताया “दस वर्षों से काम करने के बाद भी हमें ऐसे समय निकाला जा रहा है जब हमें काम की सबसे अधिक जरूरत है। वर्तमान समय में जिस कंपनी को ठेके देने की बात चल रही है उसने पहले भी कर्मचारियों को ईएसआई व ईपीएफ का भुगतान नहीं किया है। हमारा प्रदर्शन तब तक चलता रहेगा जब तक कि हमें नौकरी पर फिर से रख नहीं लिया जाता है।”

वेतन के तौर पर सफ़ाईकर्मियों को प्रति महीने केवल 8,300 रुपयों का ही भुगतान किया जाता था। जबकि उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी अकुशल मजदूरों की 8,625 रुपये, अर्धकुशल की 9,488 और कुशल मजदूरों की 10,628 रुपये है। महीने की 20 तारीख को वेतन का भुगतान किया जाता है। सफ़ाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने के बाद एक महीने से अधिक चले प्रदर्शन के बाद 21 व 22 जुलाई को उन्हें भुगतान किया गया।

गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा सफ़ाई कामगार यूनियन ने 15 जून को ही पत्र लिखकर जिलाधिकारी को घटना से अवगत कराते हुए कार्रवाई की मांग की थी। 22 जून को फिर जिलाधिकारी को पत्र लिखा, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। 21 जुलाई को सफ़ाई कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा जिले अग्रिम कार्रवाई के लिए अग्रसारित कर देने का जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया। कुलसचिव से वार्ता के लिए गए 4 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने भी उनपर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा सफ़ाई कामगार यूनियन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय कुलसचिव एसएन तिवारी ने जाति सूचक शब्दों के उपयोग और अभद्रता करने के आरोपों को खारिज करते हुए बताया “सफ़ाई कर्मचारी काम नहीं करते हैं, जिससे नाराज होकर कंपनी ने बीच में ही अनुबंध तोड़ दिया है। नये टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी सफाइकर्मियों को वापस ले लिया जाएगा। बकाया वेतन मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया भी 21 जुलाई से शुरू कर दी गई है।”

21 व 22 जुलाई को सफ़ाई कर्मचारियों को बकाया वेतन का भुगतान तो किया गया लेकिन ओवर टाइम का भुगतान नहीं किया गया, इस दौरान कर्मचारी नेताओं को गेट पर ही रोक दिया गया। भुगतान से पहले कर्मियों से एक फार्म भरवाया गया। कर्मचारी नेता कपिल ने बताया “जितने लोगों को पैसे दिए गए हैं सभी से एक फार्म भरवाया जा रहा है, जिसमें लिखा है कि मानदेय व ईपीएफ की भुगतान को लेकर कर्मचारियों को कोई शिकायत नहीं है। वह अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ रहे हैं। कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं इसलिए जो पैसे मिल रहे हैं वह लेने को मजबूर हैं। जबकि अभी बड़े पैमाने पर सफ़ाईकर्मी ईपीएफ में ठेका कंपनी के अंशदान को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।”

कोविड-19 के दौर में जब सरकार खुद ही लोगों से घरों में रहने की अपील और आपस में दूरी बनाए रखने की बात कह रही है। दिल्ली से सटे नोएडा में सफ़ाईकर्मियों को नौकरी के दौरान बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करते हुए कोरोना संक्रमण का खतरा उठाना पड़ा था। अब उसी नौकरी को पाने के दिनभर विश्वविद्यालय के सामने बैठ कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

(सत्येन्द्र सार्थक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Coronavirus
COVID-19
Gautam Buddha University
GBU
Sweepers
Corona Crisis
unemployment
Narendra modi
modi sarkar
Fight Against CoronaVirus
CITU
workers protest

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?


बाकी खबरें

  • Cuba
    ऋचा चिंतन
    वैश्विक एकजुटता के ज़रिये क्यूबा दिखा रहा है बिग फ़ार्मा आधिपत्य का विकल्प
    11 Jan 2022
    दुनिया को बिग फ़ार्मा के एकाधिकारवादी चलन का एक विकल्प सुझाते हुए क्यूबा मुनाफ़े से कहीं ज़्यादा अहमियत लोगों को देता है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, राज्य से वित्त पोषित अनुसंधान को बढ़ावा देता…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,68,063 नए मामले, 277 मरीज़ों की मौत 
    11 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 2.29 फ़ीसदी यानी 8 लाख 21 हज़ार 446 हो गयी है।
  • kashi
    विजय विनीत
    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: कैसे आस्था के मंदिर को बना दिया ‘पर्यटन केंद्र’
    11 Jan 2022
    काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप सड़क के किनारे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का न्यास सुविधा केंद्र है। यहां एक हेल्प डेस्क है, जिसके बाहर कांच के गेट पर 300 रुपये में सुगम दर्शन का पोस्टर चस्पा किया गया है।…
  • security lapse
    शिव इंदर सिंह
    “मोदी की सुरक्षा में चूक या राजनीतिक ड्रामा?” क्या सोच रहे हैं पंजाब के लोग! 
    11 Jan 2022
    जिला लुधियाना के नौजवान किसान जगजीत सिंह का कहना है, “पहली बात तो किसान मोदी के काफिले से करीब एक किलोमीटर दूरी पर थे। दूसरी बात उनके पास कोई हथियार नहीं थे। वह कम से कम मोदी को काले झंडे दिखा सकते…
  • Rahul and Modi
    ओंकार पूजारी
    2022 तय कर सकता है कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का भविष्य
    11 Jan 2022
    कमज़ोर कांग्रेस इतनी कमज़ोर नहीं है कि औपचारिक मोर्चे या भाजपा विरोधी ताक़तों की अनौपचारिक समझ के मामले में किसी भी अखिल भारतीय भाजपा विरोधी परियोजना से बाहर हो जाए।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License