NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गढ़चिरौलीः यह लहू किसका है
सरकार और बड़े पूंजीपति घरानों के दमन चक्र और लूट चक्र से अपने जीवन, सम्मान, जल, जंगल व ज़मीन को बचाने की लड़ाई आदिवासी लंबे समय से लड़ते आ रहे हैं। देश के अन्य हिस्सों की तरह गढ़चिरौली में भी ऐसी ही लड़ाई चल रही है, और उसे भीषण सरकारी दमन का सामना करना पड़ रहा है।
अजय सिंह
27 Nov 2021
gadchiroli
फोटो साभार: पीटीआई

ऐसा क्यों होता है कि जिसे ‘भीषण मुठभेड़’ बताया जाता है, उसमें 26 आदिवासी तो मार डाले जाते हैं, लेकिन एक भी पुलिसवाला नहीं मारा जाता? मारे गये आदिवासियों के पास से कई ‘खतरनाक हथियारों’ की बरामदगी दिखायी जाती है, लेकिन वे हथियार पुलिस के सामने ख़ामोश पड़े रहते हैं! क्या इसे वाक़ई  मुठभेड़ कहा जायेगा—तथाकथित भीषण मुठभेड़, या इसे सोचे-समझे दिमाग़ से, पूरी तैयारी के साथ, की गयी सामूहिक हत्या कहा जायेगा? क्या इसे धार्मिक/नस्ली/जातीय सफ़ाया नहीं कहा जाना चाहिए?

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली ज़िले के घने जंगलों में 12 नवंबर 2021 को ऐसी ही एक घटना घटी। उस दिन, भाजपा-विरोधी पार्टियों के गठबंधन वाली, महाराष्ट्र सरकार की पुलिस ने एक मुठभेड़ दिखा कर—जिसे पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में ‘भीषण मुठभेड़’ कहा गया—26 आदिवासियों को मार डाला।

इस तथाकथित मुठभेड़ में, जो सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक चली और जिसे ‘बहुत लंबी मुठभेड़’ बताया गया, एक भी पुलिसवाला नहीं मारा गया। मारे गये आदिवासियों को पुलिस ने ‘माओवादी’ बताया और उसने इस घटना को ‘माओवाद के ख़िलाफ़ बड़ी क़ामयाबी’ के तौर पर चिह्नित किया। मारे गये आदिवासियों में पांच महिलाएं हैं। आदिवासियों को ‘माओवादी’ बताकर उनका सफ़ाया अभियान चलाने के लिए पुलिस को ख़ुली छूट मिल जाती है।

अब उन हथियारों पर निगाह डालते हैं, जिन्हें पुलिस ने मारे गये आदिवासियों के पास से बरामद दिखाया है। पुलिस ने कुल 29 हथियारों की बरामदगी का दावा किया है। ये उन्नत, आधुनिक क़िस्म के हथियार हैं: पांच एके-47, यूबीजीएल के साथ एक एके, नौ सेल्फ़ लोडिंग राइफ़लें, एक इंसास (राइफ़ल), तीन थ्री नॉट थ्री राइफ़लें, नौ बारह बोर की बंदूकें और एक पिस्तौल। उन्नत किस्म के ये सभी हथियार पुलिस के सामने नतमस्तक रहे!

पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि इन हथियारों से कितनी गोलियां चलीं/चलायी गयीं और वे गोलियां कहां हैं। पुलिस ने बताया कि इस घटना में चार पुलिसवाले घायल हुए हैं, जिन्हें नागपुर के एक अस्पताल में भरती कराया गया है। लेकिन यह नहीं बताया गया कि इन पुलिसवालों को गोलियां कहां लगी हैं और वे किन बंदूकों की गोलियां हैं। अभी तक यह भी नहीं बताया गया है कि मारे गये आदिवासियों को गोलियां कहां-कहां लगी हैं और गोली से बने घाव का स्वरूप क्या है। (यानी, गोली नज़दीक से मारी गयी या दूर से।)

सरकार और बड़े पूंजीपति घरानों के दमन चक्र और लूट चक्र से अपने जीवन, सम्मान, जल, जंगल व ज़मीन को बचाने की लड़ाई आदिवासी लंबे समय से लड़ते आ रहे हैं। देश के अन्य हिस्सों की तरह गढ़चिरौली में भी ऐसी ही लड़ाई चल रही है, और उसे भीषण सरकारी दमन का सामना करना पड़ रहा है।

पूंजीवाद की हिंसक लिप्सा आदिवासियों की ज़मीन, जंगल, पानी को हड़प लेना और वहां से उन्हें (आदिवासियों को) बेदख़ल कर देना चाहती है। इस काम में अगर आदिवासियों का सफ़ाया करना पड़े, तो बर्बर पूंजीवादी मशीनरी को कोई गुरेज नहीं। गढ़चिरौली में जो 26 भारतीय नागरिक मारे गये, उसे इसी संदर्भ में दखा जाना चाहिए। यह नहीं भूलना चाहिए कि मारे गये आदिवासी (अन्यत्र मारे गये मुसलमानों व दलितों की तरह) भारत के नागरिक—‘हम भारत के लोग’—थे।

संदर्भ के लिए बता दिया जाये कि कुछ साल पहले 23 अप्रैल 2018 को भी गढ़चिरौली में एक और जनसंहार हुआ था। उस दिन महाराष्ट्र सरकार की पुलिस ने दो अलग-अलग मुठभेड़ दिखाकर 40 आदिवासियों को, जिन्हें ‘माओवादी’ बताया गया था, मार डाला था। गढ़चिरौली की उस तथाकथित मुठभेड़ में भी न तो एक भी पुलिसवाला मारा गया था, न एक भी पुलिसवाला घायल हुआ था। इतनी बड़ी तादाद में, सुरक्षा बलों के हाथों, भारतीय नागरिकों की हत्या पर देश की संसद मौन रहती है।

(लेखक वरिष्ठ कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Maharastra
Gadchiroli
maharastra government
maharastra politics
maharastra Police

Related Stories

कभी सिख गुरुओं के लिए औज़ार बनाने वाला सिकलीगर समाज आज अपराधियों का जीवन जीने को मजबूर है

महाराष्ट्र: फडणवीस के खिलाफ याचिकाएं दाखिल करने वाले वकील के आवास पर ईडी का छापा

ख़बरों के आगे पीछे: यूक्रेन में फँसे छात्रों से लेकर, तमिलनाडु में हुए विपक्ष के जमावड़े तक..

एमएसआरटीसी हड़ताल 27वें दिन भी जारी, कर्मचारियों की मांग निगम का राज्य सरकार में हो विलय!

महाराष्ट्र: 6 महीने में 400 लोगों ने किया नाबालिग का कथित दुष्कर्म, प्रशासन पर उठे सवाल!

महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों की हड़ताल जारी, मंत्री ने यूनियन से बात की

एमएसआरटीसी हड़ताल: अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को समिति गठित करने का निर्देश दिया

महाराष्ट्र: रेज़िडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल और सरकार की अनदेखी के बीच जूझते आम लोग

महाराष्ट्र: महिला सुरक्षा को लेकर कितनी चिंतित है सरकार?

उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने वाली टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री नारायण राणे गिरफ्तार


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 7,992 नए मामले, 393 मरीज़ों की मौत
    11 Dec 2021
    इसके अलावा देश में अब तक ओमिक्रोन के 32 मामले सामने आ चुके है | जिनमे से 17 मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं|
  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    सिर्फ भारत में ही नहीं, अमेरिका में भी फेल हुए ' आर्थिक सुधार'
    10 Dec 2021
    देश में 3 दशक पहले शुरू हुए आर्थिक सुधारों के चलते अमीर और गरीब के बीच की खाई और गहरी हो गयी है. देश ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य बड़े देशों में भी यही हाल हुआ है। कैसे आर्थिक सुधारों से बढ़ रही है…
  • Bundelkhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    कृषि संकट और नौकरी की कमी से बुंदेलखंड के लोग कर रहे हैं पलायन
    10 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस ग्राउंड रिपोर्ट में हमने बुंदेलखंड के प्रवासी मजदूरों से बात की और जानना चाहा कि मजदूरों को आखिर क्यों पलायन करना पड़ रहा है|
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्टः मोदी को झुकाया, जीत की ख़ुशी पर भारी मन से छोड़ रहे बॉर्डर
    10 Dec 2021
    ग्राउंड रिपोर्ट में भाषा सिंह ने टिकरी बॉर्डर के गुलाब बीबी नगर में मनाए गये मानवाधिकार दिवस पर, किसानी के सवाल को बड़े राजनीतिक सवालों से जोड़ने की तैयारी को रेखांकित किया। यहां मानवाधिकार दिवस पर…
  • nagaland
    अजय कुमार
    क्या नागालैंड से AFSPA हटा देना चाहिए?
    10 Dec 2021
    पिछले साठ सालों से अधिक समय से नागालैंड में अफस्पा लगा है, लेकिन अब तक नागालैंड की अशांति खत्म नहीं हुई है। इसका क्या मतलब है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License