NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गोवा चुनावः  34 साल में 22 मुख्यमंत्री
दल बदल के मामले में गोवा बाकी राज्यों को पीछे छोड़ता नज़र आ रहा है। चुनाव से पहले गोवा के आधे से ज्यादा विधायक पार्टी बदल चुके हैं। आलम ये है कि कहना मुश्किल है कि जो विधायक आज इस पार्टी में है कल पता नहीं किस पार्टी में चला जाए।
राज कुमार
04 Jan 2022
Goa Chief Ministers

गोवा में अगले महीने फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। फिलहाल दल बदल के मामले में गोवा बाकी राज्यों को पीछे छोड़ता नज़र आ रहा है। गोवा के आधे से ज्यादा विधायक पार्टी बदल चुके हैं। आलम ये है कि कहना मुश्किल है कि जो विधायक आज इस पार्टी में है कल पता नहीं किस पार्टी में चला जाए। तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। लेकिन ये अस्थिरता और अफरा-तफरी गोवा के लिए कोई नई बात नहीं है।

गोवा 19 दिसंबर 1961 को आज़ाद हुआ। उस समय दमन और दीव भी गोवा का ही हिस्सा था। ये एक ही संयुक्त केंद्र शासित प्रदेश था। गोवा को राज्य का दर्जा 30 मई 1987 को मिला। मतलब राज्य के तौर पर गोवा की उम्र 34 साल है। लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी की गोवा में इन 34 सालों में 22 मुख्यमंत्री रहे हैं और तीन बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है। ये सब दिखाता है कि गोवा में राजनैतिक अस्थिरता कोई नई बात नहीं है। गोवा के 34 साल और 22 मुख्यमंत्रियों की कहानी काफी पेचीदा और लंबी है। लेकिन फिलहाल के चुनावी माहौल, गठबंधन और दल बदल को समझने के लिये इसे जानना ज़रूरी है।

तो आइये, इसे थोड़ा आसान बनाकर, सिलसिलेवार ढंग से, मोटे तौर पर समझने की कोशिश करते हैं। अगर हम गोवा के अब तक के मुख्यमंत्रियों की बात करें तो हमें इसे दो भागों में बांटना होगा। पहला, जब गोवा, दमन और दीव संयुक्त केंद्र शासित प्रदेश थे। दूसरा, गोवा को राज्य का दर्जा मिलने के बाद। तो आइये पहले चर्चा करते हैं केंद्र शासित प्रदेश और इसके मुख्यमंत्रियों की।

गोवा, दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री

इस संयुक्त क्षेत्र को पहला मुख्यमंत्री 20 दिसंबर 1963 को मिला। दयानंद बांदोदकर पहले मुख्यमंत्री थे। दयानंद बांदोदकर का संबंध महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी से था। उसके बाद 1966 में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। मुद्दा था कि क्या गोवा को महाराष्ट्र में मिला दिया जाए। इस मुद्दे पर गोवा में जनमत संग्रह किया गया और गोवा के लोगों ने महाराष्ट्र में विलय को नकार दिया और एक स्वतंत्र केंद्र शासित प्रदेश को ही वोट किया।

इसके बाद 5 अप्रैल 1967 को फिर से दयनांद बांदोदकर ने मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला। 1972 में भी वही मुख्यमंत्री रहे। उसके बाद शशिकला काकोदकर 1973 से 1979 तक दो बार मुख्यमंत्री रहीं। शशिकला काकोदकर भी महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी से ही जुड़ी हुईं थीं। 1979 में महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी में विघटन हुआ और बहुमत खो दिया। गोवा में फिर से राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। उसके बाद गोवा की कमान कांग्रेस पार्टी के हाथ में आई। 1980 से 1987 तक दो कार्यकाल में प्रताप सिंह राणे मुख्यमंत्री बनें। 30 मई 1987 को गोवा को एक स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिला।

गोवा राज्य के मुख्यमंत्री

गोवा को राज्य का दर्जा 30 मई 1987 को मिला। गोवा राज्य के पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस के प्रताप सिंह राणे थे। 9 जनवरी 1990 को प्रताप सिंह राणे फिर से गोवा के मुख्यमंत्री बनें। लेकिन इस बार कार्यकाल मात्र ढाई महीने का ही रहा।

1990 का साल गोवा के लिए बहुत अस्थिरता का था। एक साल में तीन मुख्यमंत्री बदले गये। प्रताप सिंह राणे के बाद 27 मार्च 1990 को प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट के चर्चिल अलेमाओ मुख्यमंत्री बनें। चर्चिल मात्र 17 दिन मुख्यमंत्री रहे। 14 अप्रैल 1990 को प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट के लुईस प्रोटो बारबोसा गोवा के मुख्यमंत्री बनें। लुईस आठ महीने तक मुख्यंमंत्री रहे। हाइकोर्ट द्वारा लुईस को अयोग्य घोषित कर दिया और परिणामस्वरूप उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 14 दिसंबर 1990 को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। लुईस प्रोटो बारबोसा बनाम भारत संघ दिलचस्प केस है, इस बारे फिर कभी।

25 जनवरी 1991 को कांग्रेस के रवि एस. नाइक गोवा के मुख्यमंत्री बनें। 1991 से 1998 तक सत्ता कांग्रेस के हाथ में रही। लेकिन इस बार भी 1991 से 1994 तक तीन सालों में पांच बार मुख्यमंत्री बदलने पड़े। रवि नाइक के बाद विलफ्रेड डिसूज़ा, फिर रवि नाइक, फिर विलफ्रेड डिसूज़ा और उसके बाद प्रताप सिंह राणे मुख्यमंत्री बनें, जो 29 जुलाई 1998 तक मुख्यमंत्री रहे। लेकिन अस्थिरता का दौर थमा नहीं।

1998 से वर्ष 2000 तक मात्र दो सालों में ही 6 बार मुख्यमंत्री बदलने पड़े। विलफ्रेड डिसूज़ा फिर दो बार लुइज़िन्हों फलेरिओ, फिर फ्रांसिस्को सरदिन्हा और फिर 24 अक्तूबर 2000 को मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री बनें। इसी दौरान गोवा को 1999 में 120 दिन तक राष्ट्रपति शासन भी देखना पड़ा। वर्ष 2002 में चुनाव हुए और मनोहर पर्रिकर फिर से मुख्यमंत्री बनें। लेकिन ये सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई और 2 फरवरी 2005 को प्रताप सिंह राणे मुख्यमंत्री बनें। लेकिन प्रताप सिंह राणे भी मात्र एक महीना ही मुख्यमंत्री रहे और 4 मार्च 2005 को गोवा में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

2005 से 2007 प्रताप सिंह राणे मुख्यमंत्री रहे। कांग्रेस के दिगंबर कामत गोवा के पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। वे 8 जून 2007 से 9 मार्च 2012 तक गोवा के मुख्यमंत्री रहे। 2012 से लेकर 2021 तक भी नौ साल में चार बार मुख्यमंत्री बदले। मनोहर पर्रिकर, लक्ष्मिकांत पारसेकर, फिर मनोहर पर्रिकर और मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद भाजपा के प्रमोद सावंत 19 मार्च 2019 को गोवा के मुख्यमंत्री बनें।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है। विचार व्यक्तिगत हैं।)

गोवा चुनाव 2022: राजनीतिक हलचल पर एक नज़र

यौन शोषण के आरोप में गोवा के मंत्री मिलिंद नाइक का इस्तीफ़ा

goa
Goa elections 2022
Goa Chief Ministers
Goa Politics
BJP
Congress
pramod sawant

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • OMICRON
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना की तीसरी लहर OMICRON ?
    29 Nov 2021
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं कोरोना के एक नए वैरिएंट 'Omicron' के बारे मेंI इस वैरिएंट ने फिर से कोविड के खतरे को बढ़ा दिया हैI
  • kisan
    प्रभात पटनायक
    साम्राज्यवाद पर किसानों की जीत
    29 Nov 2021
    किसानों की यह जीत, बुनियादी तौर पर साम्राज्यवाद के लिए एक धक्का है। इसलिए, इससे हमें रत्तीभर अचरज नहीं होना चाहिए कि पश्चिमी मीडिया, किसान आंदोलन के सामने झुकने के लिए मोदी सरकार की इतनी आलोचना कर…
  • dalit
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान: घोड़ी पर चढ़ने के कारण दलित दूल्हे पर पुलिस की मौजूदगी में हमला
    29 Nov 2021
    राजस्थान की राजधानी जयपुर में दलित दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ने को लेकर कथित उच्च जाति के लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में हमला कर दिया। पुलिस ने दस लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है। 
  • This Victory Gives Confidence for Future Struggles
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    यह जीत भविष्य के संघर्षों के लिए विश्वास जगाती है
    29 Nov 2021
    "कई संघर्ष अभी बाक़ी हैं, जैसे कि सभी किसानों को उनकी फ़सलों के उत्पादन लागत के डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने के लिए क़ानून बनवाने की लड़ाई अभी बाक़ी है।"
  • PUNJAB
    शिव इंदर सिंह
    कृषि कानूनों की वापसी के बाद क्या सोच रहे हैं पंजाब के लोग?
    29 Nov 2021
    कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद पंजाब में जश्न का माहौल है। पंजाब के लोग इसे किसान आंदोलन की बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं। लेकिन भाजपा के प्रति विरोध और गुस्से का भाव कम होने का नाम नहीं ले रहा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License