NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
भारत
राजनीति
गोवा चुनाव: विधायकों पर दल-बदल न करने का दबाव बना रही जनता, पार्टियां भी दिला रहीं शपथ
पिछले विधानसभा चुनाव में 17 सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई थी। जबकि भाजपा ने 13 सीटें जीतकर भी सरकार बना ली थी। अंत तक आते-आते कांग्रेस के 12 विधायक भाजपा में ही शामिल हो गये। इस बार भी नेताओं का सभी पार्टियों में आवागमन जारी है।
राज कुमार
03 Feb 2022
Goa election

गोवा में दल बदल एक बड़ा मुद्दा है। विधायक रातों-रात एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चले जाते हैं और वोटर ठगे से देखते रह जाते हैं। प्रत्याशियों को इस बात का भी गुमान रहता है कि वोटर पार्टी को नहीं उम्मीदवार को वोट करेंगे। इस दल-बदल और आया राम गया राम के चलते, चुनाव का पूरा जनादेश बदल जाता है। आपको याद होगा कि पिछले विधानसभा चुनाव में 17 सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई थी। जबकि भाजपा 13 सीटें जीतकर भी सरकार बना गई थी। अंत तक आते-आते कांग्रेस के 12 विधायक भाजपा में ही शामिल हो गये। इस बार भी सभी पार्टियों में आवागमन जारी है। इस आवागमन को सिर्फ चुनाव से पहले तक ही सीमित करके ना देखें, बल्कि चुनाव के बाद भी इसकी संपूर्ण संभावनाएं हैं। इस बात को गोवा की जनता अच्छे से जानती है। यही वजह है कि इस बार तमाम पार्टियों और प्रत्याशियों पर ये दबाव बन रहा है कि वो जनता को कैसे यकीन दिलाएं कि वो दल-बदल नहीं करेंगे।

गोवा के मतदाताओं में भाजपा के खिलाफ एक लहर साफ देखी जा सकती है। लेकिन लोगों में एक ये आशंका भी है कि कहीं जिस प्रत्याशी को हम वोट देंगे कहीं वो बाद में भाजपा में तो शामिल नहीं हो जाएगा। क्योंकि पिछले चुनाव में लोग ये अनुभव कर चुके हैं। ऐसे में तमाम विपक्षी दल लोगों को विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि वो चुनाव जीतने के बाद दल-बदल नहीं करेंगे।

आम आदमी पार्टी प्रत्याशियों ने जारी किया शपथ पत्र

कल अरविंद केजरीवाल चुनाव प्रचार के लिए गोवा में थे। इस मौके पर उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेस की। उनकी उपस्थिति में आम आदमी पार्टी के सभी प्रत्याशियों ने एफिडेविट पर हस्ताक्षर किए हैं कि वो दल बदल नहीं करेंगे। उन्होंने शपथ ली कि वो मतदाताओं के प्रति इमानदार रहेंगे और जीतने के बाद आम आदमी पार्टी को छोड़कर किसी अन्य पार्टी में नहीं जाएंगे। आम आदमी पार्टी के सभी प्रत्याशी इन शपथ-पत्रों की प्रतियां अपने डोर टू डोर कंपेन में हर घर में वितरित करेंगे। आम आदमी पार्टी का कहना है कि अगर हमारा प्रत्याशी दल बदल करता है तो मतदाता उनके खिलाफ कोर्ट में केस कर सकते हैं। 

गोवा फ़ॉर्वर्ड पार्टी ने मंदिर में ली शपथ, नहीं करेंगे दल-बदल

31 जनवरी को गोवा फ़ॉर्वर्ड पार्टी के प्रत्याशियों ने मापसा के बोधगेश्वर मंदिर में शपथ ली कि वो चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल नहीं होंगे। गौरतलब है कि गोवा फ़ॉर्वर्ड पार्टी का कांग्रेस का साथ गठबंधन है। गोवा में कांग्रेस 37 और गोवा फ़ॉर्वर्ड पार्टी 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में गोवा फ़ॉर्वर्ड की तीन सीटों आईं थीं और गोवा फ़ॉर्वर्ड पार्टी नें भाजपा को समर्थन कर दिया था।

कांग्रेस दल-बदल पर सख़्त

गोवा कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी भी दल-बदल के खिलाफ शपथ ले चुके हैं कि वो गोवा की जनता और पार्टी के प्रति ईमानदार रहेंगे। कांग्रेस के प्रत्याशियों ने महालक्ष्मी मंदिर, हम्ज़ा शाह दरगाह और बांबोलिम क्रोस चर्च में पार्टी और जनता के प्रति वफादारी की शपथ ली। गौरतलब है कि दल बदल का सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस ही को ही उठाना पड़ा था। इससे कांग्रेस की छवि पर भी बहुत गलत प्रभाव पड़ा था। इस बार कांग्रेस इस पर काफी सख़्त दिखाई पड़ रही है।

साउथ गोवा में एक चुनावी सभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने आत्मालोचना करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वालों को टिकट देना कांग्रेस का एक शर्मनाक चैप्टर था। इसे रिपीट नहीं होने दिया जाएगा।

क्या है इसके मायने?

पार्टियों पर इस तरह का दबाव बनने का मतलब है कि ये पार्टियां जनता को विश्वास दिलाना चाहती हैं कि उनके प्रत्याशी भाजपा में शामिल नहीं होंगे। ये स्पष्ट तौर पर संकेत है कि जनता में भाजपा के खिलाफ लहर है। क्योंकि ऐसा माना जाने लगा है कि चुनाव में जीत चाहे किसी की भी हो सरकार भाजपा की ही बनेगी। पिछली बार गोवा की जनता ये देख चुकी है। भाजपा के खिलाफ स्पष्ट जनादेश के बावजूद भी भाजपा ने विधायकों के साथ डील की और सरकार बना ली। सभी जानते हैं कि विधायकों का ये दल बदल किसी सिद्धांत के लिए नहीं था बल्कि निहित स्वार्थों के आधार पर था। कायदे से भाजपा को बताना चाहिये कि विधायकों के साथ क्या डील थी? पद का प्रलोभन, प्रोपर्टी, पैसा, फाइल खुलना या बंद होना, क्या किया गया था? लेकिन इस चुनाव में सब पार्टियां इस मामले पर सख्त दिखाई दे रही हैं और शपथ-पत्र जारी कर रही हैं। लेकिन क्या भाजपा शपथ-पत्र जारी करेगी कि वो विधायकों की खरीद-फरोख्त नही करेगी।?

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है।)

ये भी पढ़ें: गोवा चुनावः डेढ़ महीने में एक चौथाई विधायकों का इस्तीफ़ा

goa
Goa elections 2022
Congress
BJP
AAP

Related Stories

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा

उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल

गोवा में फिर से भाजपा सरकार

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल


बाकी खबरें

  • Diagnosis and Recovery Long
    दित्सा भट्टाचार्य
    अध्ययन बताता है कि मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस रोगियों की पहचान और इलाज का सफ़र लंबा और महंगा है
    05 Nov 2021
    इस रिपोर्ट में ज़िक़्र किया गया है कि कैसे एमडीआर-टीबी के 128 (49%) रोगियों में से 62 रोगियों के होने वाले ख़र्च के आकलन से पता चला कि औसत ख़र्च 10,000 रुपये था, और 14 (23%) रोगियों ने बताया कि यह…
  • akhilesh
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    उत्तर प्रदेशः छोटी छोटी पार्टियों की बड़ी बेचैनी
    05 Nov 2021
    ध्यान से देखा जाए तो यह होड़ उत्तर प्रदेश की विभिन्न जातियों की सामाजिक-राजनीतिक हलचल है। यह छोटी जातियों का राजनीतिकरण है जो हिंदुत्व और समाजवाद के बड़े बड़े आख्यानों के बीच अपने लिए सम्मान और सत्ता…
  • kisan diwali
    लाल बहादुर सिंह
    उपचुनाव नतीजों के बाद पैनिक मोड में आई मोदी सरकार क्या किसान-आंदोलन पर भी यू-टर्न लेगी? 
    05 Nov 2021
    अगले 1-2 महीने बेहद निर्णायक हैं आंदोलन के भविष्य के लिए। इस दौरान  एक ओर सरकार किसी न किसी तरह आंदोलन खत्म कराने के अधिकतम दबाव में रहेगी, दूसरी ओर आंदोलन के सामने न सिर्फ अपने को मजबूती से टिकाए…
  • diwali crackers
    शंभूनाथ शुक्ल
    दिवाली, पटाख़े और हमारी हवा
    04 Nov 2021
    दशहरा या दिवाली पर पटाख़े फोड़ने का कोई भी धार्मिक विधि-विधान नहीं है लेकिन जिनके पास अतिरिक्त धन है, उनको दिवाली पर पटाख़ों को फोड़ने में आनंद मिलता है। शायद इस तरह वे अपने वैभव का प्रदर्शन करते हों।
  • 12 लाख दीयों की दीवाली और 32 उपचुनावों के नतीजे के संदेश
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    12 लाख दीयों की दीवाली और 32 उपचुनावों के नतीजे के संदेश
    03 Nov 2021
    एक तरह भूख और बेहाली का रिकार्ड और दूसरी तरफ दीवाली के भव्यतम जश्न का रिकार्ड. साथ में 32 उपचुनावों के नतीजे का विश्लेषण कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश अपने खास कार्यक्रम #AajKiBaat में :
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License