NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
'किसान आंदोलन को अस्थिर करने की कोशिश': गाज़ीपुर में बिजली काटी, बागपत में जबरन आंदोलन स्थल कराया खाली
गाजीपुर बॉर्डर पर रात में अचानक पुलिस तैनाती बढ़ा दी गई और धरना-प्रदर्शन वाली जगह की बिजली भी काट दी गई। जबकि 40 दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से बागपत में आंदोलन कर रहे किसानों को बलप्रयोग कर हटा दिया गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
28 Jan 2021
'सरकार की किसान आंदोलन को अस्थिर करने की कोशिश': गाज़ीपुर में बिजली काटी, बागपत में जबरन आंदोलन स्थल कराया खाली
Image courtesy: Daily Post Punjabi

नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार पर आंदोलन को अस्थिर करने और डराने का आरोप लगाया। कल यानि बुधवार देर रात गाजीपुर पर किसानों के धरनास्थल यूपी गेट पर अचानक बिजली काट दी गई। वहां अचनाक पुलिस की संख्या बढ़ा दी गई जिससे लगा जैसे पुलिस कोई कार्रवाई करने वाली है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने रात को इन के कैंप की बिजली काट दी। टिकैत ने कहा सरकार किसानों में डर का माहौल बना रही है। इसलिए लोग सारी रात जागते रहें। आगे उन्होंने कहा कि सरकार किसान आंदोलन को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है।

टिकैत ने साफ़ किया कि लाल किले पर 26 जनवरी को जो हुआ उससे हमारा या आंदोलन का कोई लेना देना नहीं है और जिसने भी यह किया है उसके खिलाफ कार्रवाई तो होनी ही चाहिए।

यही नहीं, उत्तर प्रदेश के बागपत में पिछले 40 दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे है किसानों को भी पुलिस प्रशासन ने बल प्रयोग कर के आंदोलन ख़त्म करा दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किसानों का कहना है कि पुलिस कर्मियों ने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर एक साइड पर बैठे सैकड़ों किसानों को मौके से खदेड़ते हुए टैंट तक उखाड़ फेंक दिए और लाठियां भी भांजी।

धरने में शामिल किसान थांबा चौधरी और ब्रजपाल सिंह ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों को बताया कि कृषि कानूनों के विरोध में बड़ौत थाना क्षेत्र स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पिछली 19 दिसंबर से किसानों का धरना चल रहा था। देर रात बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी धरना स्थल पर बने तंबुओं में घुस गए और वहां सो रहे किसानों पर लाठियां चलाईं और उन्हें खदेड़ दिया।

किसानों ने इसे पुलिस की ज्यादती करार देते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने तंबू भी हटा दिए हैं।

पुलिस क्षेत्राधिकारी आलोक सिंह ने किसानों पर ज्यादती के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसानों से बातचीत के बाद ही धरने को समाप्त कराया गया है और कोई लाठीचार्ज नहीं किया गया ।

वहीं 26 जनवरी की घटना को कारण बता कर दो किसान नेताओं ने अपने धरने को वापस लेने का फैसला किया है। हालांकि इन दोनों नेताओं को संयुक्त मोर्चा से पहले ही अलग कर दिया गया था। पहले किसान नेता वीएम सिंह की बात करे तो उन्हें किसानों ने 27 नवंबर को ही सिंघु बॉर्डर से भगा दिया था। वो इस आंदोलन के नेतृत्वकारी संगठन संयुक्त किसान मोर्चे का हिस्सा शुरू से ही नहीं थे। सिंघु से हटाए जाने के बाद वो अपने कुछ समर्थकों के साथ सरकार के कहे अनुसार बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड में बैठ गए थे। हालांकि कुछ दिनों पहले वो वहां से निकलकर गाज़ीपुर के धरनास्थल पर शामिल हुए थे।

बुधवार शाम को उन्होंने प्रेस वार्ता कर खुद को इस आंदोलन से औपचरिक रूप से अलग कर दिया।

वहीं नए कृषि कानूनों को लेकर करीब दो माह से चिल्ला बॉर्डर पर धरना दे रहे भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने बुधवार से अपना धरना वापस ले लिया। ये भी संयुक्त मोर्चे से बहार रहकर ही आंदोलन कर रहे थे। इन्होंने बीच में बीजेपी नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी।

दिल्ली में मंगलवार को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसक घटना से आहत होकर भानु गुट ने धरना वापस लिया है।   भानु प्रताप सिंह ने कहा कि भारत का झंडा तिरंगा है तथा वह तिरंगे का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि कल के घटनाक्रम से वह काफी आहत हैं। उन्होंने कहा कि 58 दिनों से जारी चिल्ला बॉर्डर का धरना वह खत्म कर रहे हैं।

 कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब किसान आंदोलन कमजोर पड़ रहा है? इस पर बात करते हुए आंदोलनकारी किसान और नेता एक साथ कहते हैं जो आंदोलन छोड़कर गए वो तो इस आंदोलन का हिस्सा थे ही नहीं, वो खुद को किसान नेता की छवि बनाए रखने के लिए इस आंदोलन में मज़बूरी में शामिल हुए थे। जैसे ही उन्हें मौका मिला वो आंदोलन को बदनाम कर के चले गए। इससे हमारे आंदोलन को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहेगा।

हरियाणा के तीन जिलों में बृहस्पतिवार तक इंटरनेट सेवा निलंबित

हरियाणा सरकार ने बुधवार को प्रदेश के तीन जिलों-सोनीपत, झज्जर एवं पलवल में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 28 जनवरी को शाम पांच बजे तक निलंबित कर दी हैं। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि लोक व्यवस्था एवं शांति बनाये रखने के लिये यह निर्णय लिया गया है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा के आलोक में प्रदेश के इन जिलों में इंटरनेट सेवाएं मंगलवार को बंद कर दी गयी थीं ।

किसान संयुक्त मोर्चा ने हिंसा की घटना और पुलसिया दमन की निंदा की

संयुक्त मोर्चा ने बयान जारी कर कहा कि पिछले 7 महीनों से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की साजिश अब जनता के सामने उजागर हो चुकी है। कुछ व्यक्तियों और संगठनों (मुख्य तौर पर दीप सिधु और सतनाम सिंह पन्नू की अगुवाई में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी) के सहारे, सरकार ने इस आंदोलन को हिंसक बनाया। हम फिर से स्पष्ट करते हैं कि हम लाल किले और दिल्ली के अन्य हिस्सों में हुई हिंसक कार्रवाइयों से हमारा कोई संबंध नहीं है। हम उन गतिविधियों की कड़ी निंदा करते हैं।

आगे उन्होंने कहा कि जो कुछ जनता द्वारा देखा गया, वह पूरी तरह से सुनियोजित था। किसानों की परेड मुख्य रूप से शांतिपूर्ण और मार्ग पर सहमत होने पर हुई थी। हम राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान की कड़ी निंदा करते हैं, लेकिन किसानों के आंदोलन को 'हिंसक' के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता क्योंकि हिंसा कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा की गई थी, जो हमारे साथ जुड़े नहीं हैं। सभी सीमाओं पर किसान कल तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी-अपनी परेड पूरी कर के अपने मूल स्थान पर पहुंच गए थे।

किसान नेताओं ने पुलिस के रैवये को लेकर भी नाराज़गी जाहिर की और कहा हम प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा करते हैं। पुलिस और अन्य एजेंसियों का उपयोग करके इस आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयास अब उजागर हो गए हैं। हम कल गिरफ्तार किए गए सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग करते हैं। हम पुलिस की परेड में ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों की भी निंदा करते हैं।

संयुक्त मोर्चा ने उन लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं जिन्होंने राष्ट्रीय प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया है। किसान सबसे बड़े राष्ट्रवादी हैं और वे राष्ट्र की अच्छी छवि के रक्षक हैं।

मंगलवार कुछ अफसोसजनक घटनाओं के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए, SKM ने एक फरवरी के लिए निर्धारित संसद मार्च को स्थगित करने का फैसला लिया है। इसके अलावा, 30 जनवरी को गांधीजी के शहादत दिवस पर, शांति और अहिंसा पर जोर देने के लिए, पूरे देश में एक दिन का उपवास रखने का भी एलान किया है।

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन में अब तक सौ से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि दो महीने से चल रहा यह आंदोलन 26 जनवरी की छुटपुट हिंसा को छोड़ कर अभी तक शांतिपूर्ण रहा है।

farmers protest
kisan andolan
farmers protest update
Ghazipur Border
delhi police
BJP
Modi government
Power Cut Ghazipur Border

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Russia Draws Red Lines for US
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस ने अमेरिका के सामने खींची लाल लकीर 
    18 Oct 2021
    मान्यता देने से पहले हम कुछ क्षेत्रीय पहल की उम्मीद कर सकते हैं। मान्यता के लिए मानदंड आमतौर पर पूरे देश पर सरकार का प्रभावी नियंत्रण होना ज़रूरी होता है।
  • ald
    सरोजिनी बिष्ट
    आख़िर जनांदोलनों से इतना डर क्यों...
    17 Oct 2021
    लखीमपुर खीरी हत्याकांड के विरोध में, उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार से सवाल करने का दम रखने वाली संघर्षशील ताकतें लगातार सड़कों पर उतर रही हैं तो उनके ख़िलाफ़ संविधान के विरुद्ध जाकर बेहद दमनात्मक…
  • press freedom
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़ाद पत्रकारिता से सत्ता को हमेशा दिक्कत रही
    17 Oct 2021
    हाल के सालों में भारत में प्रेस की आज़ादी कमज़ोर होती गई हैI इतिहास के पन्ने के इस अंक में लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय ने पत्रकार मासूम मुरादाबादी और जयशंकर गुप्ता से खास चर्चा की जिसमें प्रेस की आज़ादी…
  • संदीपन तालुकदार
    चीन द्वारा चाँद से धरती पर लाए पत्थरों से सामने आया सौर मंडल का नया इतिहास
    17 Oct 2021
    वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह से एकत्र किए गए पत्थरों के नमूनों के निष्कर्षों को साझा किया है, जिससे इसके कुछ आवश्यक पहलुओं के बारे में नई चीज़ें पता चली हैं।
  • अज़हर मोईदीन
    केरल बीजेपी में बदलाव से भी नहीं कम हुए बढ़ते फ़ासले
    17 Oct 2021
    हाल ही में संगठनात्मक नेतृत्व में फेरबदल और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रत्याशियों की घोषणा ने भाजपा की केरल इकाई के भीतर दरार को और बढ़ा दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License