NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
आफ़त पर आफ़त: कोरोना के क़हर के बीच खेतों पर टिड्डी दलों का हमला
कोरोना महामारी से पूरा देश परेशान है। चक्रवाती तूफ़ान ने भी कई हिस्सों में तबाही मचाई है। इस बीच मध्य प्रदेश, उत्तरी गुजरात और राजस्थान के कुछ इलाकों में टिड्डियों के आतंक से किसान बेहाल हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 May 2020
 टिड्डी दलों का हमला
Image courtesy: The Hindu

दिल्ली: अभी जब देश अपनी पूरी ताकत झोंक कर कोरोना वायरस से उपजी महामारी का मुकाबला करने में लगा है, तब टिड्डी दलों के हमलों ने कुछ इलाकों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। पाकिस्तान से चला टिड्डी दल भारत के मध्य प्रदेश, उत्तरी गुजरात और राजस्थान के कुछ इलाकों में कोहराम मचा रहा है। टिड्डियों के आतंक से किसान परेशान हैं।

इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा सब्जियों, कपास और अन्य फसलों को टिड्डियों के खतरें का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के 16 और मध्य प्रदेश के 15 जिले अभी टिड्डियों के हमले की चपेट में हैं।

फिलहाल अभी इसका सबसे ज्यादा प्रकोप मध्य प्रदेश के उज्जैन, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा और आसपास के अन्य जिलों में है। दैनिक भास्कर के मुताबिक, गुरुवार को राजस्थान की सीमा से लगे मंदसौर, नीमच और उज्जैन जिले के कुछ क्षेत्रों में टिड्डी दल के आने की प्रशासनिक जानकारी के आधार पर बचाव और सतर्कता के लिए निर्देश कृषि विभाग की ओर से दिए गए हैं।

कृषि विभाग के निर्देश में किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने स्तर पर समूह बनाकर खेतों में रात के समय निगरानी करें। शाम 7 से 9 बजे के बीच टिड्डी दल रात्रि विश्राम के लिए कहीं भी बैठ सकता है, जिसकी पहचान एवं जानकारी के लिए स्थानीय स्तर पर दल का गठन कर सतत निगरानी की जाए।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि टिड्डी दल का प्रकोप होने पर तत्काल स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग से संपर्क कर जानकारी दी जाए। किसान टोली बनाकर विभिन्न तरह के पारंपरिक उपाय जैसे शोर मचाकर, अधिक ध्वनि वाले यंत्रों को बजाकर या पौधों की डालों से अपने खेत से टिड्डी दलों को भगा सकते हैं।

वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि टिड्डी दल के मामले में स्थिति पर हमारी नज़र है। उन्होंने ट्वीट किया, 'प्रदेश में टिड्डियों से प्रभावित जिलों में जिला प्रशासन की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ लगी हुई है। किसानों के साथ मिलकर इनसे बचाव की रणनीति पर टीम काम कर रही है। स्थिति पर लगातार हमारी नजर है। किसान भाइयों, आप चिंता न करें; हम व आप मिलकर इसका मुकाबला करेंगे और जीतेंगे।'

दूसरी ओर भारत ने क्षेत्र में तेजी से बढ़ते रेगिस्तानी टिड्डियों के खतरे से निपटने के लिये पाकिस्तान और ईरान को एक समन्वित रुख की पेशकश की है। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

रेगिस्तानी टिड्डियों को सबसे विनाशकारी प्रवासी कीट माना जाता है, जो अफ्रीका सहित विश्व के कई हिस्सों में खाद्य सुरक्षा के लिये एक गंभीर खतरा पेश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, हालांकि, भारत के प्रस्ताव पर पाकिस्तान का जवाब आना बाकी है, वहीं ईरान ने रेगिस्तानी टिड्डियों को रोकने के लिये एक संयुक्त रूख के बारे में अपनी तैयारी से अवगत करा दिया है। भारत ने पाक को सुझाव दिया है कि दोनों देश सीमा पर टिड्डियों के नियंत्रण के अभियान में समन्वय कर सकते हैं। भारत ने पड़ोसी देश को कीटनाशकों की आपूर्ति की पेशकश तक की।

सूत्रों ने बताया कि रेगिस्तानी टिड्डियों का वयस्क दल बलूचिस्तान के अपने प्रजनन क्षेत्रों से भारत में और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आ रहा है। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान से हाल के हफ्तों में टिड्डियों का दल आया था और यह राजस्थान में पूर्व की ओर बढ़ गया।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक राजस्थान से मंदसौर होते हुए टिड्डियों का दल मंगलवार शाम उज्जैन जिले में आ पहुंचा। रात में टिड्डी दल ने पानबिहार के रनाहेड़ा गांव में डेरा जमा लिया। टिड्डियों की संख्या इतनी अधिक थी कि करीब 20 वर्ग किमी क्षेत्र ढंक गया। इनसे फसलों को बचाने के लिए किसानों ने तेज आवाजें निकालीं। मशाल जलाकर झुंड के पीछे भी दौड़े। बुधवार सुबह 4 बजे कीटनाशक स्प्रे कर टिड्डी दल को मारने की रूपरेखा बनाई गई। केंद्रीय टिड्डी नियंत्रण दल ने 9 स्प्रे गाड़ियां, फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियां, 11 ट्रैक्टर स्प्रे पंप से चारों ओर स्प्रे करवाया। हालांकि ये उपाय ज्यादा असरदार नहीं साबित हो रहे।

जानकारों का कहना है कि एक बार इन टिड्डी दलों को अपनी अगली पीढ़ी तैयार करने का मौका मिल गया तो इन्हें आसपास के राज्यों में फैलने से रोकना लगभग असंभव हो जाएगा और अगले दो-तीन साल तक ये भारतीय खेती का सिरदर्द बनी रहेंगी।

आपको बता दें कि राजस्थान में टिड्डियों के हमले की खबरें पिछले साल से ही चर्चा में हैं। इस साल जनवरी में बीकानेर के भारतीय जनता पार्टी के विधायक बिहारी लाल राजस्थान विधानसभा में टिड्डियों से भरी टोकरी के साथ सदन का ध्यान दिलाने पहुंचे तो यह समस्या मीडिया की सुर्खियां बनी। वहीं संसद में भी इस मसले पर सवाल-जवाब का दौर जुलाई 2019 से ही आरंभ हो गया था।

राज्यसभा में 26 जुलाई 2019 को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक सवाल के जवाब में माना था कि जैसलमेर इलाके में 21 मई 2019 से रेगिस्तानी टिड्डी दलों का आक्रमण हुआ और बाद में इसका कई जिलों में विस्तार हुआ। तबसे उनकी मौजूदगी लगातार बनी रही और गुजरात के बाद वे पंजाब और हरियाणा की सीमा तक आ पहुंचीं।

गौरतलब है कि इसके पहले सबसे खतरनाक हमला सितंबर-अक्टूबर 1993 में हुआ था। इस बार का हमला उससे भी भयावह है। हालांकि वर्ष 1993 में अक्टूबर में उनका प्रकोप समाप्त हो गया था, जबकि इस बार वे एक साल से ज्यादा तक आतंक फैलाती रहीं। वैसे वर्ष 1993 में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब ही नहीं, उत्तर प्रदेश के भी कुछ हिस्सों में इन टिड्डी दलों ने नुकसान पहुंचाया था। इस बार भी इसका दायरा बढ़ रहा है।

टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) द्वारा टिड्डी नियंत्रण एवं शोध विषय पर जारी एक डॉक्यूमेंट बताता है कि दुनिया में टिड्डियों की 10 प्रजातियां सक्रिय हैं, इनमें से चार प्रजातियां भारत में समय-समय पर देखी गई हैं। इनमें से सबसे खतरनाक रेगिस्तानी टिड्डी होती है। इस बार जो प्रजाति सक्रिय है, वह रेगिस्तानी टिड्डियां हैं। एक व्यस्क टिड्डी की रफ्तार 12 से 16 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। ये टिड्डियां किस कदर नुकसानदायक हो सकती हैं, इसका अनुमान ऐसा लगाया जा सकता है कि इन टिड्डियों का एक छोटा दल एक दिन में 10 हाथी और 25 ऊंट या 2500 आदमियों के बराबर खाना खा सकता है।

निसंदेह किसानों के लिए यह बहुत कठिन समय है। कोरोना वायरस के चलते लागू किए गए लॉकडाउन से बर्बाद हो चुके किसानों के लिए टिड्डियों का हमला आफ़त बनकर आया है। ऐसे में केंद्र, राज्य और पड़ोसी देशों की सरकारों को अब तक के सभी आग्रहों-पूर्वाग्रहों को एक तरफ रखकर पूरे तालमेल के साथ इस तबाही के दौर से बाहर निकलना होगा।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Corona Crisis
farmer crises
Grasshopper attack on Crops
Crops ruined
Agriculture Crises

Related Stories

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार

कोरोना लॉकडाउन: लगातार दूसरे साल भी महामारी की मार झेल रहे किसान!

पड़ताल: एमएसपी पर सरकार बनाम किसान, कौन किस सीमा तक सही?

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग यानी कृषि क्षेत्र से किसानों को बाहर धकेलने का रास्ता!

राज्य की हिंसा पर हमने आंखें क्यों बंद कर ली हैं?

यह पूरी तरह से कमज़ोर तर्क है कि MSP की लीगल गारंटी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार गड़बड़ा जाएगा!

“नए कृषि क़ानून सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि राष्ट्रविरोधी हैं”

विवादित कृषि क़ानून वापस नहीं लिए गए तो छोटे किसान खत्म हो जाएंगे!

'किसान और किसानी को बर्बाद करने के लिए लाए गए हैं कृषि विधेयक'

उत्तराखंड: नए कृषि कानूनों से किसानों को कितनी मिली आज़ादी


बाकी खबरें

  • भाषा
    'आप’ से राज्यसभा सीट के लिए नामांकित राघव चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा से दिया इस्तीफा
    24 Mar 2022
    चड्ढा ‘आप’ द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकित पांच प्रत्याशियों में से एक हैं । राज्यसभा चुनाव के लिए 31 मार्च को मतदान होगा। अगर चड्ढा निर्वाचित हो जाते हैं तो 33 साल की उम्र में वह संसद के उच्च सदन…
  • सोनिया यादव
    पत्नी नहीं है पति के अधीन, मैरिटल रेप समानता के अधिकार के ख़िलाफ़
    24 Mar 2022
    कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 375 के तहत बलात्कार की सज़ा में पतियों को छूट समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के मुताबिक शादी क्रूरता का लाइसेंस नहीं है।
  • एजाज़ अशरफ़
    2024 में बढ़त हासिल करने के लिए अखिलेश यादव को खड़ा करना होगा ओबीसी आंदोलन
    24 Mar 2022
    बीजेपी की जीत प्रभावित करने वाली है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सामाजिक धुरी बदल रही है, जिससे चुनावी लाभ पहुंचाने में सक्षम राजनीतिक ऊर्जा का निर्माण हो रहा है।
  • forest
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद
    24 Mar 2022
    शोधकर्ताओं का तर्क है कि वनीकरण परियोजनाओं को शुरू करते समय नीति निर्माताओं को लकड़ी के उत्पादन और पर्यावरणीय लाभों के चुनाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • रवि कौशल
    नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 
    24 Mar 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने कहा कि गरीब छात्र कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट पास करने के लिए कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाएंगे। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License