NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संगीत
अंतरराष्ट्रीय
ग्रीसः संगीतकार और वामपंथी एक्टिविस्ट मिकिस थियोडोराकिस का 96 वर्ष की आयु में निधन
मिकिस थियोडोराकिस जीवन भर साम्राज्यवादी आक्रमकता के कट्टर विरोधी बने रहे।
पीपल्स डिस्पैच
03 Sep 2021
Mikis Theodorakis

गुरुवार 2 सितंबर को ग्रीस के प्रसिद्ध संगीतकार और राजनीतिक कार्यकर्ता मिकेल "मिकिस" थियोडोराकिस का 96 वर्ष की आयु में एथेंस में हृदय आघात से निधन हो गया। मिकिस महान संगीतकार थे और उनके कृति ओपेरा से लेकर कोरल संगीत और लोकप्रिय गीतों तक था।

चियोस में पैदा हुए मिकिस ने सत्रह साल की उम्र में अपना पहला संगीत कार्यक्रम आयोजित किया था। जब वे क्रेटे में थे तो उन्होंने अपना पहला ऑर्केस्ट्रा गठित किया और चानिया म्यूजिक स्कूल के प्रमुख बने। 1960 के दशक के दौरान पेरिस से ग्रीस लौटने के बाद उनकी रचनाओं ने देश में एक सांस्कृतिक क्रांति ला दी। उन दिनों उन्होंने लिटिल ऑर्केस्ट्रा ऑफ एथेंस और म्यूजिकल सोसाइटी ऑफ पीरियस की स्थापना की। मिकिस ने ग्रीक कवि इआकोवोस कंबानेलिस द्वारा लिखित हॉलोकॉस्ट पर आधारित कविताओं पर प्रसिद्ध "मौथौसेन ट्रिलॉगी" (द बैलाड ऑफ मौथौसेन) की रचना की। इसे आलोचकों द्वारा थियोडोराकिस की अब तक की सर्वश्रेष्ठ कृति के रूप में बताया गया है।

मिकिस द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ग्रीक प्रतिरोध (1941-1944) और ग्रीक मिलिट्री जुंटा (1967-74) के प्रतिरोध में सक्रिय थे। उनके राजनीतिक विचारों और गतिविधियों के लिए, उनके कृतियों को सेंसर किया गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया, प्रताड़ित किया गया और निर्वासन के लिए मजबूर किया गया। वह अपने जीवन के अधिकांश समय में ग्रीक लेफ्ट के साथ जुड़े रहे और कई बार ग्रीस की संसद के लिए चुने गए और दो बार वामपंथी/कम्युनिस्ट प्लेटफार्मों से चुने गए। अपने पूरे जीवन में उन्होंने साम्राज्यवाद का विरोध किया, शांति के लिए प्रयास किया और मजदूर वर्ग के मामलों को उठाया। उन्हें लेनिन शांति पुरस्कार सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिल चुके हैं।

ग्रीस में मिकिस थियोडोराकिस के जीवन के सम्मान में तीन दिन का शोक मनाया जाएगा। ग्रीस में प्रोग्रेसिव सेक्शन और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ ग्रीस (केकेई), प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ वर्किंग पीपल (एकेईएल) सहित विदेशों में प्रगतिशील वर्गों ने मिकिस थियोडोराकिस के निधन पर दुख व्यक्त किया।

2 सितंबर को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ ग्रीस (केकेई) की केंद्रीय समिति ने अपने शोक संदेश में कहा कि "लोगों को सुझाव देने के जुनून से प्रेरित, प्रवर्तक और जोशीले थियोडोरकिस अपने देश में बीसवीं सदी के लोकप्रिय संघर्ष के संपूर्ण महाकाव्य को अपने महान कृतियों में डालने कामयाब रहे। आखिरकार, वह इस महाकाव्य का हिस्सा थे।"

Mikis Theodorakis
Mikis Theodorakis passed away
Greece

Related Stories


बाकी खबरें

  • भाषा
    दिल्ली विधानसभा : भाजपा के दो विधायकों को मार्शल ने सदन से बाहर निकाला
    29 Mar 2022
    दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों द्वारा कानून-व्यवस्था सहित अन्य मुद्दे उठाए जाने के दौरान कथित रूप से व्यवधान डालने पर विधानसभा अध्यक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक…
  • नाइश हसन
    सियासत: दानिश अंसारी के बहाने...
    29 Mar 2022
    बीजेपी ने कभी मुस्लिम जनसंख्या के हिसाब से उसे नुमाइंदगी देने या उनके संपूर्ण विकास के लिए काम नहीं किया। बस पिक एण्ड चूज के आधार पर कुछ मुसलमान जो मुसलमानों के ही ख़िलाफ़ खुल कर खड़े हो सकें बस उनको…
  • अखिलेन्द्र प्रताप सिंह
    एक देश एक चुनाव बनाम लोकतांत्रिक सरोकार
    29 Mar 2022
    लगातार होने वाले चुनावों ने क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को फलने-फूलने का मौका प्रदान किया है और उनकी क्षेत्रीय आकांक्षाओं को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पटल पर एक महत्व दिया है, और इस प्रकार से भारत में…
  • उपेंद्र स्वामी
    श्रीलंका संकट: दर्द भी क़र्ज़ और दवा भी क़र्ज़
    29 Mar 2022
    दुनिया भर की: यह कोई आकस्मिक घटनाक्रम नहीं है। कोविड के दौर ने इसकी रफ़्तार और मार को भले ही थोड़ा तेज़ बेशक कर दिया हो लेकिन यह लंबे समय से चली आ रही नीतियों का नतीजा है। यह संकट उन तमाम…
  • प्रेम कुमार
    विश्लेषण: दिल्ली को सिंगापुर बनाने के सपने में आंकड़ों का फरेब
    29 Mar 2022
    अगर 5 साल बाद दिल्ली में रोजगार का स्तर 45 फीसदी के स्तर तक ले जाना है तो इसके लिए कम से कम 1.63 करोड़ लोगों के पास रोजगार रहना चाहिए। ऐसा तभी संभव है जब इन पांच सालों में 63 लाख अतिरिक्त लोगों को…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License