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2022-23 में वृद्धि दर 8-8.5 प्रतिशत रहेगी : आर्थिक समीक्षा
समीक्षा के मुताबिक, 2022-23 का वृद्धि अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि आगे कोई महामारी संबंधी आर्थिक व्यवधान नहीं आएगा, मानसून सामान्य रहेगा, कच्चे तेल की कीमतें 70-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहेंगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधान इस दौरान लगातार कम होंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
31 Jan 2022
nirmala sitharaman

नयी दिल्ली: ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ की तर्ज पर एक बार फिर आगे सबकुछ अच्छा ही अच्छा होगा की आशा या कहें कि ख़ुशफ़हमी रखते हुए दावा किया जा रहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले वित्त वर्ष (2022-23) में 8-8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सोमवार को संसद में पेश 2021-22 की आर्थिक समीक्षा में यह अनुमान लगाया गया है।

समीक्षा के मुताबिक, 2022-23 का वृद्धि अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि आगे कोई महामारी संबंधी आर्थिक व्यवधान नहीं आएगा, मानसून सामान्य रहेगा, कच्चे तेल की कीमतें 70-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहेंगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधान इस दौरान लगातार कम होंगे।

समीक्षा में कहा गया कि तेजी से हुए टीकाकरण, आपूर्ति-पक्ष के सुधारों तथा नियमनों को आसान बनाने के साथ ही अर्थव्यवस्था भविष्य की चुनौतियों से निपटने को अच्छी तरह तैयार है।

आर्थिक समीक्षा में उम्मीद जाहिर की गई है कि अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष के दौरान 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो महामारी से पहले के स्तर के मुकाबले सुधार का संकेत है।

इसका मतलब है कि वास्तविक आर्थिक उत्पादन का स्तर 2019-20 के कोविड-पूर्व स्तर को पार कर जाएगा।

वित्त वर्ष 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल के नेतृत्व वाले एक दल द्वारा तैयार इस दस्तावेज में आगे कहा गया कि 2020-21 में अर्थव्यवस्था को दिए गए वित्तीय समर्थन के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के कारण राजकोषीय घाटा और सरकारी ऋण बढ़ गया। हालांकि, 2021-22 में अब तक सरकारी राजस्व में जोरदार उछाल देखने को मिला है।

समीक्षा के अनुसार, सरकार के पास समर्थन बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर पूंजीगत व्यय बढ़ाने की वित्तीय क्षमता है।

आर्थिक समीक्षा भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए आपूर्ति-पक्ष के मुद्दों पर केंद्रित है।

समीक्षा में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है और यह 2022-23 की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है।

समीक्षा कहती है, ‘‘कुल मिलाकर वृहद-आर्थिक स्थिरता संकेतक बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2022-23 की चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैयार है। भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छी स्थिति में होने की एक वजह इसकी अनोखी प्रतिक्रिया रणनीति है।’’

समीक्षा कहती है कि अगले वित्त वर्ष में वृद्धि को व्यापक टीकाकरण, आपूर्ति-पक्ष में किए गए सुधारों से हासिल लाभ एवं नियमनों में दी गई ढील से समर्थन मिलेगा।

समीक्षा में कहा गया है कि निर्यात में मजबूत वृद्धि और राजकोषीय गुंजाइश होने से पूंजीगत व्यय में तेजी आएगी जिससे अगले वित्त वर्ष में वृद्धि को समर्थन मिलेगा।

इसमें कहा गया है, ‘‘देश की वित्तीय प्रणाली अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार को समर्थन देने के लिए बेहतर स्थिति में है। वित्तीय प्रणाली की मजबूती से निजी निवेश में तेजी आने की संभावना है।’’

समीक्षा कहती कि निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के लिए वित्तीय प्रणाली अच्छी तरह तैयार है।

इसमें आगे कहा गया कि बैंकिंग प्रणाली अच्छी तरह से पूंजीकृत है और गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में संरचनात्मक रूप से गिरावट आई है।

समीक्षा के मुताबिक, थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति की ऊंची दर कुछ हद तक आधार प्रभाव के कारण है, लेकिन साथ ही इसमें कहा गया है कि भारत को आयातित मुद्रास्फीति से सावधान रहने की जरूरत है। ऊंची ऊर्जा कीमतों के संबंध में खासतौर से यह बात कही गई है।

वर्ष 2021-22 में सामाजिक क्षेत्र पर व्यय 71.61 लाख करोड़ रुपये रहा

केंद्र एवं राज्य सरकारों का सामाजिक सेवा क्षेत्र पर सम्मिलित व्यय वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 71.61 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह वर्ष 2020-21 में 65.24 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 9.8 प्रतिशत अधिक है।

सोमवार को संसद में पेश वर्ष 2021-22 की आर्थिक समीक्षा के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में सामाजिक सेवाओं पर सरकारों का व्यय बढ़ा है। सामाजिक सेवाओं के तहत शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, परिवार कल्याण, जलापूर्ति एवं स्वच्छता, आवास, शहरी विकास, श्रम एवं श्रमिक कल्याण, सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण, पोषण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों का कल्याण और प्राकृतिक आपदाओं में दी जाने वाली राहत आती है।

आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में केंद्र एवं राज्य सरकारों का सामाजिक सेवाओं पर व्यय 71.61 लाख करोड़ रुपये रहने का बजट अनुमान है। इसमें शिक्षा क्षेत्र पर सर्वाधिक 6.97 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि स्वास्थ्य पर 4.72 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए।

वहीं वित्त वर्ष 2020-21 में सामाजिक सेवा क्षेत्र पर सरकारी व्यय 65.24 लाख करोड़ रुपये रहा था। इसमें शिक्षा क्षेत्र पर 6.21 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र पर 3.50 लाख करोड़ रुपये व्यय किए गए थे।

आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, ‘‘महामारी ने कमोबेश सभी सामाजिक सेवाओं को प्रभावित किया है, फिर भी स्वास्थ्य क्षेत्र पर इसकी सर्वाधिक मार पड़ी। स्वास्थ्य क्षेत्र पर व्यय महामारी से पहले के वर्ष 2019-20 में 2.73 लाख करोड़ रुपये रहा था, लेकिन वर्ष 2021-22 में इसके 4.72 लाख करोड़ रुपये रहने का बजट अनुमान है। इस तरह इस मद में खर्च करीब 73 फीसदी तक बढ़ गया है। वहीं शिक्षा क्षेत्र पर व्यय इसी अवधि में करीब 20 प्रतिशत बढ़ा है।’’

समीक्षा के मुताबिक, महामारी के दौरान बार-बार लगाए गए लॉकडाउन एवं बंदिशों का शिक्षा क्षेत्र पर पड़े वास्तविक प्रभाव का आकलन कर पाना मुश्किल है क्योंकि इस बारे में समग्र आधिकारिक आंकड़े 2019-20 के ही उपलब्ध हैं। इससे यह नहीं पता चल पाता है कि कोविड-19 की पाबंदियों ने शिक्षा से जुड़े रुझानों पर किस तरह असर डाला है।

महामारी की पहली लहर में बच्चों एवं युवाओं को संक्रमण से बचाने के लिए सभी स्कूलों एवं कॉलेज को बंद कर दिया गया था। बाद में बंदिशें थोड़ी कम हो गईं लेकिन अब भी शिक्षा की निरंतरता एक चुनौती बनी हुई है।

2020-21 में एथनॉल आपूर्ति 302 करोड़ लीटर से अधिक रहने का अनुमान

नवंबर, 2021 में समाप्त 2020-21 के आपूर्ति वर्ष में एथनॉल की आपूर्ति 302 करोड़ लीटर से अधिक रहने का अनुमान है। सोमवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि यह आपूर्ति वर्ष 2013-14 में केवल 38 करोड़ लीटर थी।

वर्ष 2020-21 एथनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) के दौरान पेट्रोल के साथ एथनॉल के मिश्रण का स्तर 8.1 प्रतिशत होने का अनुमान है।

पेट्रोल के साथ एथनॉल मिलाने (ईबीपी) के कार्यक्रम के बारे में बताते हुए, समीक्षा में कहा गया है कि सरकार ने अब वर्ष 2025 तक पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य 20 प्रतिशत तय किया है।

इसमें कहा गया है, ‘‘अनुमान है कि वर्ष 2022 के दौरान 10 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल हो जाएगा।’’ इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, सरकार ने चीनी मिलों से जुड़े या अपने आप में अलग से काम कर रही डिस्टिलरीज को विभिन्न फीड स्टॉक जैसे बी-हाई और सी-हाई शीरा, गन्ना रस, चीनी सिरप, चीनी और एफसीआई के अधिशेष चावल, मक्के आदि सहित क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से एथनॉल के उत्पादन की अनुमति दी है।

देश में एथनॉल उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए पात्र डिस्टिलरी को ब्याज सहायता के रूप में वित्तीय मदद भी प्रदान की जाती है।

दस्तावेज में कहा गया है, ‘‘ईबीपी कार्यक्रम के तहत एथनॉल आपूर्ति, जो एथनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2013-14 में केवल 38 करोड़ लीटर थी, 2019-20 के दौरान बढ़कर 173.3 करोड़ लीटर हो गई है। पेट्रोल में एथनॉल का मिश्रण 8.1 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

ईएसवाई 2021-22 के लिए एथनॉल सम्मिश्रण लक्ष्य 10 प्रतिशत है जिसे वर्ष 2025 तक बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाना है।

दूरसंचार सुधारों से नकदी प्रवाह बढ़ेगा, 5जी में निवेश को अनुकूल माहौल बनेगा: समीक्षा

दूरसंचार क्षेत्र में सुधारों से 4जी प्रसार को बढ़ावा मिलेगा, तरलता या नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और 5जी नेटवर्क में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनेगा। आर्थिक समीक्षा 2021-22 में यह कहा गया है।

सोमवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि कोविड संबंधी चुनौतियों का सामना करने में दूरसंचार क्षेत्र के ‘‘उत्कृष्ट प्रदर्शन’’ और ऑनलाइन शिक्षा एवं घर से काम (डब्ल्यूएफएच) के चलन से डेटा की खपत में भारी वृद्धि के साथ, सुधार उपायों से ब्रॉडबैंड और दूरसंचार कनेक्टिविटी के प्रसार और पैठ को बढ़ावा मिलेगा।

समीक्षा में भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में ढांचागत और प्रक्रियागत सुधारों की रूपरेखा बताते हुए कहा गया है कि दूरसंचार अवसंरचना के विस्तार के अलावा सुधार लाने के लिए और भी कई कदम उठाए गए हैं। इसमें कहा गया, ‘‘सुधारों से 4जी प्रसार को बढ़ावा मिलेगा, नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और 5जी नेटवर्क में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनेगा।’’

मजबूत और जिम्मेदार नियामकीय ढांचे ने उचित कीमतों पर सेवा की पहुंच को बनाए रखा है, सरकार ने उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से सेवाप्रदाताओं के बीच उचित प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए और उपाय भी किए हैं।

समीक्षा में कहा गया कि दूरसंचार देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले सबसे शक्तिशाली क्षेत्रों में से एक है और इस क्षेत्र की का महत्व बहुत बढ़ गया है। यह कुल दूरसंचार उपभोक्ता आधार में वृद्धि, इंटरनेट उपभोक्ताओं और ब्रॉडबैंक कनेक्शनों की लगातार बढ़ती संख्या में नजर आता है।

बीते कुछ वर्षों में भारत के दूरसंचार क्षेत्र में डेटा की भूमिका बहुत बढ़ गई है क्योंकि कड़ी प्रतिस्पर्धा से लागत कम हुई है और इससे डेटा इस्तेमाल और बढ़ गया है।

प्रत्येक डेटा उपभोक्ता का प्रतिमाह औसत वायरलेस डेटा उपयोग वित्त वर्ष 2017-18 में 1.24 गीगाबाइट प्रतिमाह से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 14.1 गीगाबाइट मासिक हो गया है। मोबाइल टावरों की संख्या दिसंबर, 2021 में बढ़कर 6.93 लाख हो गई है।

राज्यसभा की बैठक आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने के बाद दिन भर के लिए स्थगित

संसद के बजट सत्र के पहले दिन राज्यसभा की बैठक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण (2021-22), सदन के पटल पर रखे जाने के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी।

इससे पहले उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर महासचिव पी सी मोदी ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिए गए अभिभाषण की प्रति पटल पर रखी।

राष्ट्रपति ने संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया था।

सभापति एम वेंकैया नायडू ने मशहूर कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज के अलावा सदन के मौजूदा सदस्य महेंद्र प्रसाद व पूर्व सदस्यों जयंत राय, देवेंद्र नाथ बर्मन, एम. मूसा व गणेश्वर कुसुम के हाल ही में निधन होने का जिक्र किया।

सदस्यों ने अपने स्थान पर खड़े होकर दिवंगत लोगों के सम्मान में कुछ क्षणों का मौन रखा।

इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन के पटल पर वित्त वर्ष 2021-22 की आर्थिक समीक्षा की प्रति रखी।

बाद में नायडू ने बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन की अगली बैठक मंगलवार को लोकसभा में आम बजट पेश किए जाने के एक घंटे बाद शुरू होगी।

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री मंगलवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2022-23 का आम बजट पेश करेंगी।

Nirmala Sitharaman
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