NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सफ़ूरा मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, जानें अब तक क्या-क्या हुआ!
न्यायमूर्ति राजीव शकधर की पीठ ने पुलिस को नोटिस जारी कर ज़मानत याचिका पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जून यानी सोमवार को होगी।
सोनिया यादव
19 Jun 2020
Image Courtesy:  The Week

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा सफ़ूरा ज़रगर का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इसकी वजह दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पुलिस से मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट है। गुरुवार, 18 जून को इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजीव शकधर की पीठ ने पुलिस को नोटिस जारी कर ज़मानत याचिका पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जून यानी सोमवार को होगी।

बता दें कि 10 अप्रैल को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सफ़ूरा ज़रगर को उनके घर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद 4 जून को ट्रायल कोर्ट ने सफ़ूरा को ज़मानत देने से इंकार कर दिया था। निचली अदालत ने तब अपने आदेश में कहा था, ‘‘जब आप अंगारे के साथ खेलते हैं, तो चिंगारी से आग भड़कने के लिए हवा को दोष नहीं दे सकते।’’ इसी आदेश को सफ़ूरा ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

क्या है सफ़ूरा ज़रगर का पूरा मामला?

27 वर्षिय सफ़ूरा ज़रगर दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया की एमफिल छात्रा हैं। वो जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी (JCC) की मेंबर हैं, मीडिया कोऑर्डिनेटर का भी काम करती थीं। लॉकडाउन के बीच 10 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने फरवरी में जाफ़राबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ हुए प्रदर्शन को लीड करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया था।

सफ़ूरा के वकील ने अगले ही दिन अधिकारियों को उनकी प्रेगनेंसी की जानकारी देते हुए बेल की अपील की थी। सफ़ूरा 13 अप्रैल को ज़मानत पर बाहर आ पातीं, इससे पहले ही दिल्ली पुलिस ने 6 मार्च को हुई एक FIR के तहत उन्हें दिल्ली दंगे भड़काने की साजिश करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सफ़ूरा पर एंटी टेरर एक्ट यानी अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया है। अभी भी सफ़ूरा के ज़मानत की कोशिशें जारी हैं।

क्या UAPA मामलों में ज़मानत नहीं मिल सकती?

सफ़ूरा ज़रगर केस के संबंध में वकील आर्षी जैन कहती हैं कि अमूमन UAPA के तहत दर्ज मामलों में ज़मानत नहीं मिलती है, UAPA का सेक्शन 43 D(5) ज़मानत मिलने में एक वैधानिक रुकावट की तरह है लेकिन सफ़ूरा के केस को एक अलग नज़रिए से देखा जाना चाहिए।

आर्षि कहती हैं, “सेक्शन 43 D (5) तभी लागू होता है जब किसी व्यक्ति पर आतंकवाद का आरोप लगता है और पुलिस कोर्ट में साबित करती है कि प्राइमा फेसी केस बन रहा है यानी व्यक्ति ने आतंकवादी गतिविधि में हिस्सा लिया था। लेकिन सफ़ूरा के मामले में मुझे लगता है कि पटियाला हाउस कोर्ट में एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने सुनवाई करते हुए पूरे समय गैरकानूनी गतिविधि का जिक्र किया। जज ने सुनवाई के दौरान कभी भी आतंकवादी गतिविधि का जिक्र नहीं किया। जस्टिस राणा ने ऐसा भी कुछ नहीं कहा कि प्रॉसिक्यूशन प्राइमा फेसी आतंकवाद का केस साबित कर रहा है। इसलिए सफ़ूरा को ज़मानत मिल सकती है।”

सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स, अमेरिकन बार एसोसिएशन ने भी सफ़ूरा की ज़मानत याचिका खारिज़ होने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अनुचित बताया था। सेंटर के मुताबिक सफ़ूरा जरगर का प्री-ट्रायल डिटेंशन अंतरराष्ट्रीय कानून, जिनमें वो संधियां भी शामिल है, भारत जिनमें स्टेट-पार्टी है, के मानकों के अनुरूप प्रतीत नहीं होता है। इंटरनेशनल कोवनंट ऑफ सिविल एंड पॉलिटिकल राइट (ICCPR) कहता है कि "यह सामान्य नियम नहीं होना चाहिए कि ट्रायल का इंतजार कर रहे व्यक्तियों को हिरासत में रखा जाएगा।"

अभी तक सफ़ूरा के साथ क्या-क्या गलत हुआ?     

सफ़ूरा की गिरफ्तारी के बाद उनकी प्रेग्नेंसी को लेकर सोशल मीडिया पर अनर्गल बातें हुईं। कई बार ट्विटर पर इसे लेकर अलग-अलग हैशटैग भी ट्रेंड हुए। महिलाविरोधी, अपमानजनक, किसी महिला को ठेस पहुंचाने वाली तमाम अनाप-शनाब बातें कहीं गई।

पहली बार जब सफ़ूरा को बेल नहीं मिली तो कांग्रेस के एक नेता सलमान निज़ामी ने इस पर विरोध जताया। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘एक्टिविस्ट सफ़ूरा ज़रगर (प्रेगनेंट) रमज़ान के वक्त भी जेल में हैं, नफ़रत फैलाने वाले कपिल मिश्रा, जिन्होंने हिंसा भड़काई, वो आज़ाद हैं। मोदी के भारत में मुस्लिम होना अपराध है। कुछ तो शर्म करो। सफ़ूरा को रिलीज़ करो।’

इस पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने जवाब देते हुए लिखा, “‘प्लीज़ उनकी प्रेग्नेंसी को मेरी स्पीच से कनेक्ट मत करिए। ऐसे काम नहीं चलेगा।”

बता दें कि दिल्ली हिंसा में कपिल मिश्रा के ऊपर कथित भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था। जिसे जोड़ते हुए सलमान निज़ामी ने उन्हें लेकर ट्वीट किया था।

कपिल मिश्रा के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर सफ़ूरा के चरित्रहनन की बाढ़ आ गई। लोग उनके होने वाले बच्चे पर सवाल करने लगे।

बहरहाल सफ़ूरा के पक्ष में भी कई लोग आए, उन्होंने बताया कि सफ़ूरा की शीदी 2018 में शादी हुई थी, वो शादीशुदा हैं। कई लोगों ने कहा कि अगर सफ़ूरा अविवाहिता भी हैं और प्रेगनेंट हैं तो क्या हो गया। कई लोगों ने महिलाओं की आजादी की बातें तक कह डाली, ऑल्ट न्यूज़ ने पूरी खबर की पड़ताल कर दी।

क्या कहना है महिला अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों का

इस पूरे मामले पर समाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि आखिर लोग सफ़ूरा के पक्ष-विपक्ष में गंदगी मचा क्यों रहे हैं। क्यों उनके खिलाफ में लिखने वाले लोग उनके चरित्र पर उंगली उठा रहे हैं, किसने दिया है उनको ये अधिकार तो वहीं मुझे ये भी नहीं समझ आ रहा कि आखिर उनका साथ देने वाले भी उन्हें शादीशुदा, विवाहिता दिखाने में क्यों लगे हैं। क्या एक महिला बिना शादी के बंधन में बंधे बच्चे को जन्म नहीं दे सकती? क्यों किसी औरत को शादी का सर्टिफिकेट चाहिए। जब कोर्ट तक ने इनकी मंजूरी दे दी है तो अब लोग कौन होते हैं उंगली उठाने वाले। ये पितृसत्तात्मक समाज की संकुचित मानसिकता का नमूना है।”

ऐपवा की सचिव कविता कृष्णन बताती हैं, “ये समाज में जो भी कुछ औरतों के साथ हो रहा है इसे राजनीति से दरकिनार करके नहीं देखा जा सकता। सफ़ूरा को एक मुस्लिम औरत होने के नाते, सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। जब लॉकडाउन में ग्रीन और ऑरेंज जोन में भी महिलाओं को घर में रहने को बोला जो रहा है तो ऐसे समय में सफ़ूरा के साथ इस तरह का बर्ताव कितना जायज़ है? प्रधानमंत्री की पार्टी के नेता, यहां तक कि जिन लोगों को पीएम फॉलो करते हैं, वही लोग ऐसी टिप्पणियां करते हैं और फिर भी प्रधानमंत्री मौन साधे रहते हैं, इसका क्या मतलब है?

गौरतलब है कि मामले के तूल पकड़ने के बाद दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल को नोटिस भेज कर सफ़ूरा के खिलाफ घटिया अभियान चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने साइबर अपराध सेल में भी इसकी शिकायत की थी। हालांकि अभी तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं है।

Safoora Zargar
JCC
BJPTweeter
fake news
NRC-CAA Protest
Shaheen Bagh
Jamia Arrests
delhi police
Delhi High court

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’


बाकी खबरें

  • bharat_ek_mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: एंटीनैशनल गिरोह में शामिल हुआ इंफ़ोसिस; गोदी मीडिया के सर चढ़ा  तालिबान का भूत
    12 Sep 2021
    भारत एक मौज के इस एपिसोड में संजय राजौरा पांचजन्य द्वारा इंफ़ोसिस पर लगाए गए आरोप और गोदी मीडिया की तालिबान पर जुनूनी कवरेज पर चुटकी ले रहे हैं।
  • सड़क में गड्ढे...: एक स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    सड़क में गड्ढे...: एक स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम
    12 Sep 2021
    तिरछी नज़र: गड्ढे सड़क बनवाने में बरती गई ईमानदारी का परिचायक हैं। सड़क बनाने में जितनी अधिक ईमानदारी बरती गई होती है गड्ढे उतनी ही जल्दी और उतने ही ज़्यादा बनते हैं।
  • ‘प्रेस की आज़ादी पर हमला': एडिटर्स गिल्ड, डीयूजे ने मीडिया घरानों पर आयकर विभाग द्वारा “सर्वे” की निंदा की
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ‘प्रेस की आज़ादी पर हमला': एडिटर्स गिल्ड, डीयूजे ने मीडिया समूहों पर आयकर विभाग के “सर्वे” की निंदा की
    12 Sep 2021
    गिल्ड ने न्यूज़क्लिक और न्यूज़लॉन्ड्री के दफ़्तरों में आईटी द्वारा ‘सर्वे’ की आलोचना करते हुए कहा कि आज़ाद मीडिया को परेशान करने और डराने-धमकाने की इस ख़तरनाक रवैये को रोका जाना चाहिए।
  • महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे (दाएं) और नारायण दत्तात्रय आप्टे (बाएं)।
    अनिल जैन
    विडंबना: अब गोडसे ही नहीं आप्टे को भी ‘पूजने’ की तैयारी, मेरठ में लगेगी मूर्ति?
    12 Sep 2021
    महात्मा गांधी के हत्यारों में से एक नारायण आप्टे की मूर्ति लगाने की कोशिशों के पीछे कौन-सी ताकतें हैं, उनका क्या राजनीतिक मकसद है और मूर्ति लगाने के लिए मेरठ शहर का ही चयन क्यों किया गया है, इन सारे…
  • karnala
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    करनाल में किसानों की बड़ी जीत; एसडीएम सिन्हा के ख़िलाफ़ बैठी जांच, मृत किसान के परिवार को मिली दो नौकरियां
    11 Sep 2021
    'समझौते के मुताबिक, सरकार पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा बस्तारा टोल प्लाजा पर लाठीचार्ज प्रकरण की जांच करेगी। जांच पूरी होने तक आयुष सिन्हा जबरन छुट्टी पर रहेंगे। इसी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License