NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
क्या कोरोना का वायरस तीसरे स्टेज में पहुंच चुका है?
भारत सरकार अभी तक यह मानती है कि देश में फिलहाल कोरोना वायरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं हुआ है। लेकिन ICMR की SARI  रिपोर्ट कुछ आशंकाएं जताती है। हालांकि इस रिपोर्ट की भी दो व्याख्याएं की जा रही हैं।
अजय कुमार
11 Apr 2020
कोरोना वायरस
Image courtesy: The Indian Express

इंडियन जर्नल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) नामक पत्रिका में इंडियन मेडिकल कॉउंसिल ऑफ़ रिसर्च की तरफ से एक रिपोर्ट जारी की गयी है। रिपोर्ट का नाम 'Severe acute respiratory illness surveillance for coronavirus disease (SARI)' है।  सीवियर एक्यूट रेस्पेरेटरी डिजीज यानी वैसे मरीज़ जो बुरी तरह से सांस की बीमारी से परेशान हैं। आईसीयू यानी इंटेंस केयर यूनिट के देखभाल में रह रहे हैं। 15 फरवरी से लेकर 2 अप्रैल तक देश भर के 20 राज्यों के 52 जिलों में  रैंडम तरीके से 5911 सांस के मरीजों का अध्ययन किया गया। इससे यह निष्कर्ष निकला है कि 104 मरीज कोरोना वायरस से पीड़ित हैं। प्रतिशत हिस्सेदारी देखें तो यह करीब 1.08 फीसदी होता है।  

इस रिपोर्ट को बनाने में शामिल वैज्ञानिक तरुण भटनागर का मीडिया में बयान छपा है। तरुण कहते हैं कि ''चूँकि देश भर में रैंडम तरीके से केवल उन्हीं की जांच की गयी है, जिनमें कोरोना वायरस होने की सबसे अधिक संभावना थी, जिसका निष्कर्ष यह निकला कि उसमें से तकरीबन 1.08 फीसदी लोगों में संक्रमण हो चुका है तो इसका मतलब है कि कोरोना वायरस बहुत बड़े इलाके में फ़ैल चुका है।''

इसमें सबसे अधिक चौंकाने वाली बात है कि इन 104 मरीजों में से 40 मरीज ऐसे हैं, जिनका सम्बन्ध किसी भी तरह के विदेश यात्रा से नहीं पाया गया।

अब पूरी बात को साफ-साफ ऐसे समझिये कि देश भर में कोरोना की स्थिति जानने के लिए रैंडम तरीके से तकरीबन 6 हजार लोगों की जाँच की गयी जिनमें कोरोना वायरस होने की संभावना सबसे अधिक थी। जाँच से यह निष्कर्ष निकला कि 104 कोरोना पॉजिटिव लोगों में करीब 40 लोग ऐसे हैं, जिनका इतिहास किसी भी तरह के विदेश यात्रा का नही है और जिन्होंने न ही किसी ऐसे व्यक्ति से मुलाक़ात की है जो विदेश से लौटा हो।  

इस रिपोर्ट का सारी व्याख्या इसी बिंदू से की जा रही है। बहुत सारे जानकार यह कह रहे हैं कि 104 लोगों में से 40 लोग यानी 38 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनकी कांटेक्ट ट्रेसिंग में विदेश यात्रा का कोई जिक्र नहीं आ रहा है, न ही कोई ऐसा जिक्र आ रहा है कि इन्होंने कभी किसी विदेशी व्यक्ति से मुलाकात की है तो इसका मतलब है कि कोरोना वायरस का कम्युनिटी लेवल पर ट्रांसमिशन हो रहा है।  

इस बात को समझने में आपको मुश्किल आयी होगी कि आख़िरकार यह कम्युनिटी लेवल ट्रांसफर क्या है?

कोरोना वायरस के फैलने के तीन स्टेज हैं-

पहला है इम्पोर्ट स्टेज यानी किसी ऐसे व्यक्ति से कोरोना फैल रहा है, जो दूसरे देश की यात्रा करके आया है।

दूसरा लोकल स्टेज यानी किसी भी तरह से ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आ जाना जिसे संक्रमण है।

और तीसरा, कम्युनिटी स्टेज यानी कोरोना वायरस हर जगह है। पूरे समुदाय में फ़ैल गया है। आप सब्जी खरीदने गए और घर आये तो आपको पता चला कि कोरोना वायरस से आप पीड़ित हो चुके हैं। इस हालत से इस समय स्पेन और इटली गुजर रहे हैं। 40 लोगों की कोई ट्रैवल हिस्ट्री विदेश की नहीं है और न किसी ने ऐसे व्यक्ति से मुलाकात की है जो विदेश से आया हो तो जानकारों का एक धड़ा यह अंदेशा जता रहा है कि कोरोना वायरस बहुत बड़े इलाके में फ़ैल चुका है। इसका कम्युनिटी ट्रांसमिशन हो रहा है।

दूसरा नज़रिया जो उम्मीद बंधाता है

लेकिन जानकारों का दूसरा धड़ा भी है। वह इस रिपोर्ट की थोड़ी आशावादी व्याख्या कर रहा है। इस धड़े का कहना है कि देश भर में से साँस के मरीज़ों का अध्ययन किया गया, जिनमें कोरोना वायरस फैलने की संभावना सबसे अधिक थी। तकरीबन 6 हजार में से केवल 104 मरीजों में कोरोना का संक्रमण पाया गया। इनमें से 83 फीसदी मरीज 50 साल के ऊपर के हैं।

इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि जिन्हें कोरोना वायरस से सबसे अधिक खतरा हो सकता था, उनमें से केवल 1.08 फीसदी मरीजों को खतरा हुआ। इसका मतलब है कि भारत की बहुत बड़ी आबादी के लिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है। यही बात उन 40 लोगों के लिए भी कही जा सकती है कि जिनकी ट्रवेल हिस्ट्री विदेश की नहीं है। इनका भी हिस्सा कुल 5911 लोगों में केवल 0.6 फीसदी का ही है। मतलब यह कि बहुत अधिक चिंतित होने की बात नहीं है।  

भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी रिपोर्ट पर पूछे गए सवाल पर कहा कि कुछ मामलों में यह पता नहीं चल पाया है कि संक्रमण का स्रोत क्या है लेकिन आधिकारिक तौर पर भारत सरकार यह मानती है कि देश में फिलहाल कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं हुआ है।

Coronavirus
COVID-19
novel coronavirus
Coronavirus Epidemic
Corona 3rd stage
Health Ministry
Dr. Harshvardhan
health care facilities

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • जितेन्द्र कुमार
    मुद्दा: बिखरती हुई सामाजिक न्याय की राजनीति
    11 Apr 2022
    कई टिप्पणीकारों के अनुसार राजनीति का यह ऐसा दौर है जिसमें राष्ट्रवाद, आर्थिकी और देश-समाज की बदहाली पर राज करेगा। लेकिन विभिन्न तरह की टिप्पणियों के बीच इतना तो तय है कि वर्तमान दौर की राजनीति ने…
  • एम.ओबैद
    नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग
    11 Apr 2022
    बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 ज़िलों के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुज़फ़्फ़रपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट…
  • रवि शंकर दुबे
    दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए
    11 Apr 2022
    रामनवमी और रमज़ान जैसे पर्व को बदनाम करने के लिए अराजक तत्व अपनी पूरी ताक़त झोंक रहे हैं, सियासत के शह में पल रहे कुछ लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को पूरी तरह से ध्वस्त करने में लगे हैं।
  • सुबोध वर्मा
    अमृत काल: बेरोज़गारी और कम भत्ते से परेशान जनता
    11 Apr 2022
    सीएमआईए के मुताबिक़, श्रम भागीदारी में तेज़ गिरावट आई है, बेरोज़गारी दर भी 7 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा ही बनी हुई है। साथ ही 2020-21 में औसत वार्षिक आय भी एक लाख सत्तर हजार रुपये के बेहद निचले स्तर पर…
  • JNU
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !
    11 Apr 2022
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दो साल बाद फिर हिंसा देखने को मिली जब कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संबद्ध छात्रों ने राम नवमी के अवसर कैम्पस में मांसाहार परोसे जाने का विरोध किया. जब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License