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स्वास्थ्य बजट 2021-22 : आवंटन में 'अभूतपूर्व' बढ़ोतरी कहाँ है?
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को दिए आवंटन में कोई अभूतपूर्व वृद्धि नहीं है जबकि  उल्टे पोषण के लिए आवंटन में 27 प्रतिशत की कमी पाई गई है। इसलिए, स्वास्थ्य ख़र्च में 137 प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा थोड़ा भ्रामक है।
दित्सा भट्टाचार्य
02 Feb 2021
Translated by महेश कुमार
स्वास्थ्य बजट 2021-22

आर्थिक सर्वेक्षण-2021 में नागरिकों से वादा किया गया है कि आखिरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर खास ध्यान दिया जाएगा। इसके चलते अगले वित्त वर्ष में स्वास्थ्य पर केंद्र सरकार के खर्च के दोगुना होने की अफवाहें आम थीं। वित्त वर्ष 2021-22 के अपने बजट भाषण के दौरान, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आने वाले वर्ष में स्वास्थ्य और कल्याण पर बजट आवंटन 2,23,846 करोड़ रुपये रहेगा, जो कि 2020-2021 के 94,452 करोड़ रुपये के बजट अनुमान की तुलना में 137 प्रतिशत की वृद्धि है, एक ऐसा कदम जिसका सत्ताधारी दल के नेताओं ने काफी सराहना की और स्वागत किया है।

हालाँकि, यदि कोई इन संख्याओं की जांच करे तो पता चलेगा कि स्वास्थ्य में बजटीय आवंटन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है, यह तब है जब मौजूदा महामारी ने स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियों और कमियों को उजागर करके रख दिया है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) को कुल 73,931.77 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जिसे दो विभागों- यानि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के बीच साझा किया जाएगा। वित्तवर्ष 2020-2021 के बजट अनुमान में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) का आवंटन 67,111.80 करोड़ रुपये था; यानि इसबार के आवंटन में 10.16 राशि की वृद्धि है। आगामी वर्ष के लिए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को 65,011.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जोकि चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान से 9.62 प्रतिशत की वृद्धि है जबकि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग को 2,663 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

क्या 137 प्रतिशत की बढ़ोतरी की कवायद एक चाल है?

वित्त मंत्री की स्वास्थ्य और कल्याण विभाग के लिए आवंटन में अनुमानित 137 की वृद्धि की घोषणा को काफी लोगों द्वारा सराहा जा रहा है। हालांकि, ये बात अलग है कि इसमें आयुष मंत्रालय, पेयजल और स्वच्छता विभाग और कोविड-19 टीकाकरण के लिए 35,000 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

(स्रोत: केंद्रीय बजट 2021-22) 

इस संख्या का विश्लेषण बताता है कि 137 प्रतिशत की बढ़ोतरी टीकाकरण, पेयजल और स्वच्छता विभाग के लिए के लिए आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि तथा जल और स्वच्छता और स्वास्थ्य पर वित्त आयोग के अनुदान की शुरुआत के कारण है। इसलिए आप देखें कि स्वास्थ्य और परिवार और कल्याण विभाग के आवंटन में कोई खास वृद्धि नहीं है और पोषण के लिए आवंटन में 27 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी है। इसलिए, स्वास्थ्य पर खर्च में 137 प्रतिशत  की वृद्धि का दावा थोड़ा भ्रामक है।

क्या वास्तव में स्वास्थ्य पर आवंटन बढ़ा है?

वित्त वर्ष 2020-2021 के बजट अनुमान में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के लिए आवंटन कुल बजट का 2.2 प्रतिशत रहा था। वित्तवर्ष 2021-2022 के बजट अनुमान में, यह अनुपात कुल बजट का 0.1 प्रतिशत अंक से लेकर 2.1 प्रतिशत अंक तक कम हो गया है, जबकि कुल बजट में 14.5 प्रतिशत की वृद्धि है, तो कहना होगा कि स्वास्थ्य देखभाल के आवंटन में उतनी वृद्धि नहीं हुई है जितनी कि होनी चाहिए थी। अगर वित्त वर्ष 2020-2021 के संशोधित अनुमान यानि 78,866 करोड़ रुपये को देखें तो वित्तवर्ष 2021-2022 के लिए आवंटित 71,268.77 करोड़ रुपये के मुक़ाबले आवंटन में 9.3 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है। 

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के तहत अधिकांश बजट मदों में बहुत मामूली सी वृद्धि देखी गई है, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान वर्ष के बजट अनुमान में 9.62 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आवंटन में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि है और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के आवंटन में क्रमशः 11.32 प्रतिशत  और 5.26 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण में पीएम मोदी की प्रमुख योजना एबी-पीएमजेएवाय(AB-PMJAY) की काफी प्रशंसा की गई है, जबकि वित्त वर्ष 2019-2020 में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए 6,400 करोड़ रुपये के आवंटन का 50 प्रतिशत भी खर्च करने में नाकाम रही है। बावजूद इस नाकामी के वित्त वर्ष 2021-2022 के लिए फिर से उपरोक्त राशि आवंटित कर दी गई है। 

केंद्र सरकार की नई प्रायोजित योजना, प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वच्छ भारत योजना का केंद्रीय बजट में कोई उल्लेख नहीं है, जिसकी घोषणा वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण के दौरान की थी। इस योजना को छह वर्षों के लिए 64,180 करोड़ रुपये के आवंटन से शुरू किया जाना था। वित्तमंत्री के अनुसार, यह योजना स्वास्थ्य देखभाल की प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक प्रणालियों की क्षमता को विकसित करेगी, मौजूदा राष्ट्रीय संस्थानों को मजबूत करेगी, और नए और उभरते रोगों का पता लगाने और उन्हे ठीक करने के लिए नए संस्थानों का निर्माण करेगी। मंत्री ने इस नई योजना की जरूरत पर रोशनी नहीं डाली; जबकि इन मुद्दों के लिए योजनाएं पहले से मौजूद हैं और केंद्र सरकार ने इन्हे जरूरी फंड कभी नहीं दिया है। 

हलानीक, आर्थिक सर्वेक्षण 2021 से तो ऐसा लगता है जैसे कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने के महत्व को केंद्र सरकार ने महसूस किया है, जबकि स्वास्थ्य पर बजट कुछ अलग ही कहानी कहता है। इस बजट में सरकार आयुष्मान भारत योजना के बीमा मॉडल का विस्तार करने के मामले में काफी उत्सुक नज़र आती है, जबकि प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवा और अस्पताल के बुनियादी ढांचे को मुश्किल से कोई महत्व दिया गया है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करे

Health Budget 2021-22: Where is the ‘Unprecedented’ Hike in Allocation?

Health Budget
Union Budget 2021
Economic Survey 2021
Nutrition
Health and Wellness
ayushman bharat
Pradhan Mantri Atma Nirbhar Swasth Bharat Yojana

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