NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
"स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से नहीं हैं।"
एम.ओबैद
16 Feb 2022
health Department

उत्तर प्रदेश के 16 जिलों की 59 सीटों पर तीसरे चरण का चुनाव 20 फरवरी को होना है। सभी पार्टियों का प्रचार जोर-शोर से जारी है। दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं ताकि सत्ता मिल सके। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ जहां अपनी सरकार के विकास कार्यों को गिना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों और योगी सरकार की विफलताओं को भी गिना रहे हैं।

कोरोना काल में राज्य की चिकित्सा व्यवस्था की पोल पूरी तरह खुल चुकी है। नदियों में बड़ी संख्या में शवों के बहाए जाने से लेकर नदियों के किनारे शव को दफन करने के मामले बीते साल सुर्खियों में रहे हैं। पिछले साल हाई कोर्ट ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदतर स्थिति को लेकर तल्ख टिप्पणी भी की थी। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए न्यूजक्लिक ने सीटू के राज्य कमेटी के सदस्य प्रताप यादव से बात की। 

राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर प्रताप यादव कहते हैं, "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से नहीं हैं। चार साल पहले यहां के जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. श्रीकांत तिवारी ने वीआरएस ले लिया। दूसरे सर्जन डॉक्टर वसंत लाल जिनका कानपुर ट्रांसफर हो गया। इन दोनों विशेषज्ञों के जाने के बाद से अब चार साल हो गए लेकिन इस जिला अस्पताल में किसी विशेषज्ञ सर्जन की पोस्टिंग नहीं हुई है जिसके पास एमएस की डिग्री हो।

इस ज़िले में मौजूदा समय में किसी भी सरकारी अस्पताल चाहे सीएचसी हो या पीएचसी तथा जिला अस्पतालों में एक भी सर्जन नहीं है। एमडी की बात करें तो चार साल पहले यहां डॉक्टर अरविंद दुबे थे। इनका ट्रांसफर हो गया जिसके बाद से अब तक यहां का ये पोस्ट खाली है। छोटे अस्पतालों से लेकर बड़े अस्पतालों तक में एमडी नहीं है। पूरे प्रदेश की सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है।" 

उन्होंने कहा कि “विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी पूरे प्रदेश में है अगर जालौन जनपद की बात की जाए तो यहां जिला मुख्यालय का अस्पताल केवल रेफरल सेंटर है। यहां ऐसी भी स्थिति नहीं है कि इमर्जेंसी में मरीजों को घंटे-दो घंटे उपचार किया जा सके। वे मरीजों को भर्ती करते हैं और स्लिप बनाकर मेडिकल कॉलेज झांसी और मेडिकल कॉलेज कानपुर रेफर कर देते हैं। गरीब मरीज जो एक हजार रूपये खर्च कर इन्हीं अस्पतालों में ठीक हो सकते हैं उनको बीस-बीस हजार रूपये खर्च करने के लिए झांसी रेफर कर दिया जाता है। चिकित्सा सेवाओं के मामले में उत्तर प्रदेश की व्यवस्था बिल्कुल बेपटरी हो चुकी है।"

यादव ने कहा कि "जालौन मेडिकल कॉलेज में स्टूडेंट को पढ़ाने वाले लेक्चरार, प्रोफेसर वगैरह न के बराबर हैं। उरई में जो चिकित्सक निजी प्रैक्टिस करते हैं उन्हीं चिकित्सकों को संविदा पर बहाल किया हुआ है। ये चिकित्सक हफ्ते में एक दिन एक-एक घंटे के लिए लेक्चर देने के लिए आते हैं। यहां विशेषज्ञ नहीं हैं। किसी भी चिकित्सकों की कमीशन से पोस्टिंग नहीं की गई है। यहां स्थायी तरीके से नियुक्त कोई भी विशेषज्ञ नहीं हैं। सारे के सारे विशेषज्ञ संविदा पर हैं। उन बच्चों को इस तरह से पढ़वाया जा रहा है जो भविष्य के डॉक्टर बनेंगे।"

पीएचसी और सीएचसी में महिला डॉक्टरों की संख्या को लेकर उन्होंने कहा कि, "यहां प्राइमरी हेल्थ सेंटर सारे रेफरल हैं। वे सिर्फ रेफर करते हैं। वहां तो कोई पोस्टिंग ही नहीं है। जिले के कदौरा सीएचसी की बात करें तो यहां केवल एक महिला डॉक्टर बीयूएमएस है जिनकी बहाली संविदा पर हुई है। काल्पी में पिछले चार सालों से एक भी महिला डॉक्टर नहीं थी। अभी तीन महीने पहले जब वहां एक नए अधीक्षक आए तो उनकी पत्नी की पोस्टिंग हुई जो कि संविदा पर है। यहां ज्यादातर सीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं हैं। जिला मुख्यालयों में जो महिला एमबीबीएस डॉक्टर हैं भी तो उनकी संविदा पर ही बहाली है। उनकी स्थायी बहाली नहीं है। ये डॉक्टर नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संविदा पर बहाल हैं।"

आरोग्य केंद्र के बारे में पूछे जाने पर यादव कहते हैं, "पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों में डॉक्टरों समेत अन्य कर्मियों की कमी है ऐसे में आरोग्य केंद्र का संचालन सरकार किस तरह कर पाएगी। इस तरह पीएचसी और सीएचसी के डॉक्टर और स्टाफ ही हफ्ते में कुछ दिन पीएचसी, सीएचसी और कुछ दिन आरोग्य केंद्र में जाकर काम करेंगे। डॉक्टर और स्टाफ बढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही। नई भर्तियां नहीं निकाली जा रही हैं। यह बिल्कुल बंद है।" 

डॉक्टर और स्टाफ की भर्ती को लेकर प्रताप यादव ने कहा, "ईएमएम, जीएमएम, स्टाफ, नर्स, लैब टेक्निशियन सभी की नियुक्ति अस्थायी तौर पर थर्ड पार्टी के जरिए की जा रही है। डायरेक्ट सरकार इनको भर्ती नहीं कर रही है। संविदा पर भी एक कंडिशन लगी हुई है। उदाहरण के तौर पर सरकार एक विशेष एजेंसी से कर्मचारी की भर्ती के बारे में कहती है। इन कर्मियों का भुगतान सरकार उस विशेष एजेंसी को करती है और उक्त एजेंसी के जरिए कर्मचारियों को भुगतान किया जाता है। पिछले महीने मेडिकल कॉलेज में हड़ताल हो गई थी। वहां के सफाई कर्मियों की बहाली थर्ड पार्टी के जरिए हुई थी। इसने सफाई कर्मियों को दो महीने से वेतन नहीं दी जिसके नतीजे में इन लोगों ने हड़ताल कर दिया तो करीब एक हफ्ते के लिए कॉलेज में अफरा तफरी की स्थिति पैदा हो गई थी। चारों तरफ गंदगी का अंबार लग गया था। इन सफाई कर्मियों ने कई बार डीएम को लिख कर दिया कि हमारी भर्ती करने वाली एजेंसी ने दो महीने से वेतन नहीं दे रही है। किसी ने उनकी बात को सुना नहीं तो उन्होंने हड़ताल किया जब जाकर प्रशासन ने हस्तक्षेप किया तब जाकर उनकी समस्या का निपटारा हो सका।"

अस्पतालों से मरीजों को मिलने वाली दवाईयों पर यादव कहते हैं, "सीएमओ तथा सीएमएस इमर्जेंसी में जरुरत पड़ने पर स्थानीय तौर पर दवा खरीद लिया करते थें। इनको पंद्रह हजार रुपये से लेकर पच्चीस हजार तक लोकल पर्चेज का राइट्स होता था। सिर्फ कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार के चक्कर में फ्रीज कर दिया गया है। इन दोनों के अधिकार को सरकार ने सीज कर दिया है। अब सभी तरह की खरीदारी चिकित्सा सचिव या चिकित्सा निदेशक करते हैं। सप्लाई में वो दवाईयां आती हैं जिन दवाओं की एक्सपायरी नजदीक होती है अर्थात जिन दवाईयों की एक्सपायरी को महज चार-पांच महीने बचे होते हैं। इस तरह की दवाईयां बल्क में जबर्दस्ती सीएमओ और सीएमएस को दी जाती हैं। उन पर इन दवाओं को मरीजों को देने का दबाव भी होता है। लखनऊ से जिला अस्पतालों में आते-आते दो-तीन महीने का समय निकल जाता है। इस तरह ये दवाईयां एक्सपायरी के बिल्कुल करीब होकर मरीजों को मिलती हैं। दूसरी तरफ जरूरत की दवाईयां न के बराबर होती हैं। वैसी दवाईयां आती हैं जिनकी मरीजों को कम जरूरत होती हैं। मरीजों को देने के लिए बी-कंप्लेक्स और मल्टीविटामिन की दवाईयां किसी भी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध न के बराबर होती है। इसके नाम पर मरीजों को सिर्फ कैल्सियम की दवा जाती है। सबसे ज्यादा दवाईयां कैल्सियम के नाम पर अस्पतालों में सप्लाई होती हैं। यहां हर मरीज को कैल्सियम दी जाती है। किसी भी मरीज को बी-कम्प्लेक्स और मल्टीविटामिन जैसी दवाईयां नहीं दी जाती हैं। यहां तो सर्दी-जुकाम के लिए अस्पतालों में सिट्रीजीन भी नहीं मिलती हैं। जिन मरीजों को कैल्सियम की दवा की जरुरत नहीं है उन्हें भी ताकत के नाम पर कैल्सियम की दवा दे दी जाती है। सांस के मरीजों को भी कैल्सियम की दवा दी जा रही है जबकि इस दवा की उनको कोई जरुरत नहीं है। दवा सप्लाई की ये हालत है कि महिलाओं को आयरन और कैल्सियम दोनों दवाएं मिलनी चाहिए लेकिन इनको आयरन की दवा न देकर सिर्फ कैल्सियम की ही दवा दी जाती है।" 

ये भी पढ़ें: यूपी चुनाव: योगी राज में पेपर लीक और परीक्षा-संबंधित घोटालों की कोई कमी नहीं

UttarPradesh
health department
Health Department in UP
yogi government
Yogi Adityanath
health care facilities

Related Stories

सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!

यूपी चुनाव नतीजे: कई सीटों पर 500 वोटों से भी कम रहा जीत-हार का अंतर

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

यूपी चुनाव: प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी

यूपी चुनाव: रुझानों में कौन कितना आगे?

यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?

यूपी का रण: आख़िरी चरण में भी नहीं दिखा उत्साह, मोदी का बनारस और अखिलेश का आज़मगढ़ रहे काफ़ी सुस्त

यूपी में न Modi magic न Yogi magic

कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?

यूपी चुनाव : काशी का माँझी समाज योगी-मोदी के खिलाफ


बाकी खबरें

  • yogi
    अजय कुमार
    योगी सरकार का काम सांप्रदायिकता का ज़हर फैलाना है या नौजवानों को बेरोज़गार रखना?
    25 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश का चुनावी माहौल हिंदू-मुस्लिम धार पर बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है। तो आइए इस नफ़रत के माहौल को काटते हुए उत्तर प्रदेश की बेरोज़गारी पर बात करते हैं।
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर : ड्रग्स का कनेक्शन, भाजपा और इलेक्शन
    25 Dec 2021
    मणिपुर में ड्रग कार्टेल और भाजपा नेताओं की उसमे संलिप्तता की कई खबरें आ चुकी हैं। टेररिस्ट संगठन से लिंक के आरोपी, थोनाजाम श्याम कुमार सिंह, 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं। विधायकी की…
  • up
    सत्येन्द्र सार्थक
    यूपी चुनाव 2022: पूर्वांचल में इस बार नहीं हैं 2017 वाले हालात
    25 Dec 2021
    पूर्वांचल ख़ासकर गोरखपुर में सभी प्रमुख पार्टियां अपनी जीत का दावा कर रही हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर ज़िले की 9 सीटों में से 8 पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, लेकिन जानकारों का मानना है कि…
  • bhasha singh
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी : दरअसल, वे गृह युद्ध में झोंकना चाहते हैं देश को
    24 Dec 2021
    हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर 2021 तक चली बैठक को धर्म संसद का नाम देने वाले वे सारे उन्मादी मारने-काटने की बात करने वाले, ख़ुद को स्वामी और साध्वी कहलाने वाले शख़्स दरअसल समाज को उग्र हिंदु राष्ट्र के…
  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में क्यों पनपती है सांप्रदायिक राजनीति
    24 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले वहां सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत फिर से हो गयी है। सवाल यह है कि उप्र में नफ़रत फैलाना इतना आसान क्यों है? इसके पीछे छिपी है देश में पिछले दस सालों से बढ़ती बेरोज़गारी
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License