NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फ्रांस में स्वास्थ्य कर्मी सड़कों पर उतरे, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को बचाने की मांग
फ्रांस की सरकारों ने सुनियोजित तरीक़े से उपेक्षा करके और फंडिंग कम करके सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम को कमज़ोर कर दिया है।
पीपल्स डिस्पैच
18 Jun 2020
फ्रांस
मंगलवार 16 जून को पेरिस में स्वास्थ्य कर्मियों के मार्च में हज़ारों लोग शामिल हुए।

सरकारी अस्पतालों को बचाने की सरकार से मांग करते हुए स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मंगलवार 16 जून को पेरिस सहित फ्रांस के अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। लोगों के इकट्ठा होने का आह्वान इंटर-अर्जेंसेज और कलेक्टिफ़-इंटर-होपिटॉक्स द्वारा किया गया था और इसे जनरल कन्फेडरेशन ऑफ़ लेबर (सीजीटी) और सॉलिडेयर सहित कई यूनियनों द्वारा समर्थन किया गया था।

ख़बरों के मुताबिक फ्रांस के अन्य शहरों जैसे मार्सिले, टूलूज़, लियोन, लिले और नांतेस सहित पेरिस में हज़ारों लोगों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने इमैनुएल मैक्रोन के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की निरंतर और सुनियोजित तरीके से उपेक्षा करने और फंड कम करके कमज़ोर करने को लेकर निंदा की।

कलेक्टिफ़-इंटर-होपिटॉक्स ने कहा, “क़रीब साल भर से अस्पताल के कर्मचारी सार्वजनिक अस्पतालों में साधनों की कमी और देख-रेख के अपने कार्यों को पूरा करने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में चेतावनी देते रहे हैं। साल भर से वे मरीज़ की देखभाल की गुणवत्ता और सुरक्षा की गारंटी के लिए अस्पताल की आपातकालीन योजना के लिए कहते रहे हैं। तब से, COVID-19 संकट (अगर कुछ आश्वस्त नहीं थे) ने सार्वजनिक अस्पताल की आवश्यक जगह और लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर्मचारियों और साधनों की असीमित आवश्यकता की ओर संकेत दिया है।"

फ्रांस के लगभग 250 अस्पतालों के एक्सिडेंट एंड एमर्जेंसी (ए एंड ई) विभागों में कर्मचारियों ने 2019 में आपातकालीन कर्मचारियों के मासिक वेतन में 300 ईयूआर की वृद्धि, साथ ही कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए नई भर्तियां और अस्पताल के बिस्तर और अन्य चिकित्सा सुविधाओं में कटौती को रोकने की मांग करते हुए अपनी हड़ताल शुरू की।

कलेक्टिफ़-इंटर-होपिटॉक्स ने कहा कि अस्पताल के आपातकालीन कर्मचारियों द्वारा साल भर की हड़ताल के बाद राष्ट्रपति ने 20 मार्च को अस्पतालों के लिए एक बड़ी योजना का वादा किया था। इस समूह ने कहा, "लेकिन हम अभी भी सरकार की एन्क्रिप्टेड घोषणा और सार्वजनिक अस्पताल के अस्तित्व के लिए अपनी आवश्यक मांगों के जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

फ्रेंच कम्युनिस्ट पार्टी (पीसीएफ) ने भी स्वास्थ्य कर्मचारियों के आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की। पीसीएफ नेता फैबिन रूसेल और पियरे लॉरेंट मंगलवार को पेरिस में प्रदर्शनों में शामिल हुए। मोवेमेंट ज्यूनेस कम्युनिस्टेस डी फ्रांस (एमजेसीएफ) के कार्यकर्ता भी देश के विभिन्न हिस्सों में इस मार्च में शामिल हुए।

France
Health workers
Health workers Protest
Save government health system
Weak Healthcare system

Related Stories

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च

माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है

मध्यप्रदेश: आशा कार्यकर्ताओं की लड़ाई के पीछे नियमित वेतन और स्थायी कर्मचारी के रूप में मान्यता दिये जाने की मांग

फ़्रांस : पुलिस को अधिक अधिकार देने वाले बिल के ख़िलाफ़ भारी विरोध जारी

हिंदूराव के हड़ताली डॉक्टरों और कर्मचारियों को ट्रेड यूनियन का समर्थन, जगह-जगह प्रदर्शन

बन रहा है सपनों का मंदिर मगर ज़िंदगी का असली संघर्ष जारी

केन्या के मेरु काउंटी में हेल्थकेयर श्रमिक 5 फरवरी के हड़ताल के लिए तैयार


बाकी खबरें

  • शशि शेखर
    एमएलसी चुनाव परिणाम: राजद के मेरे अपने, फिर भी टूट गए सपने, क्यों?
    12 Apr 2022
    बिहार में 23 सीटों पर चुनाव लड़ कर राजद ने जिन छह सीटों पर जीत हासिल की है, उनमें से 3 पर भूमिहार, 1 पर वैश्य और 1 पर राजपूत जाति से आने वाले उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। राजद का एक भी मुस्लिम कैंडिडेट…
  • सबरंग इंडिया
    करौली हिंसा को रोकने में विफल रहे अधिकारियों को निलंबित करें: PUCL
    12 Apr 2022
    हिंदुत्ववादी समूह द्वारा आयोजित रैली को मुस्लिम पड़ोस से गुजरने की अनुमति किसने दी और हिंसा होने पर अधिकारियों ने केवल दर्शकों की तरह काम क्यों किया?
  • अभिवाद
    सीपीआईएम पार्टी कांग्रेस में स्टालिन ने कहा, 'एंटी फ़ेडरल दृष्टिकोण का विरोध करने के लिए दक्षिणी राज्यों का साथ आना ज़रूरी'
    12 Apr 2022
    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के 'ग़ैर लोकतांत्रिक रवैये' की आलोचना की और कहा कि 'केंद्र राज्यों को अपनी कठपुतली बनाना चाहता है'।
  • भाषा
    झारखंड रोपवे दुर्घटना: वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने 10 और लोगों को सुरक्षित निकाला
    12 Apr 2022
    वायु सेना, सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा बचाव अभियान जारी है।
  • काशिफ काकवी
    मध्यप्रदेश: रामनवमी के दौरान सांप्रदायिक हिंसा, खरगोन में कर्फ़्यू, बड़वानी में तनाव
    12 Apr 2022
    सांप्रदायिक घटनाओं के गवाह रहे आदिवासी बहुल ज़िले खरगोन और बड़वानी में कांग्रेस का दबदबा है। अगले साल यहां विधानसभा चुनाव होने हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License