NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी
झारखंड के प्रमुख वामपंथी दल भाकपा माले और सीपीएम ने हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ भाजपा के रवैये पर काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
अनिल अंशुमन
16 May 2022
Hemant soren

अक्सर विवादों में घिरी रहने वाली झारखंड प्रदेश की रसूखदार उच्चाधिकारी रहीं पूजा सिंघल के भ्रष्टाचार और उनके खिलाफ खिलाफ ईडी-कारवाई प्रकरण से जुडी ख़बरें, भले ही हर दिन के अपडेट के साथ मीडिया में जगह बनाए हुए हैं। लेकिन प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल भाजपा व उसके नेता-प्रवक्ता एक स्वर से पूजा सिंघल के कथित भ्रष्टाचार मामले के तार हेमंत सोरेन सरकार से ही जोड़ रहें हैं।

वैसे झारखंड भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व उनके भाई झामुमो विधायक बसंत सोरेन की विधान सभा सदस्यता खारिज करने की मांग के साथ-साथ हेमंत सोरेन सरकार को गिराने के लिए पूरी ताक़त से चौतरफा घेरेबंदी कर रखी है। इससे जुड़ी ख़बरों के साथ साथ कयासों-अफवाहों का बाज़ार भी प्रदेश मीडिया के लिए सबसे पसंदीदा मसाला बना हुआ है।कुछ निजी चैनलों व अखबारों द्वारा तो आईपीएल टूर्नामेंट की तर्ज़ पर हर दिन की जा रही- विवादों में घिरी ‘हेमंत सोरेन सरकार कभी भी जा सकती है’ जैसी भविष्यवाणियों का तोता रटंत नित नए नयी सुर्ख़ियों में लगातार जारी है।

दो दिन पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश एवं विधायक दल नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा अचानक से दिल्ली जाकर प्रधान मंत्री से मिलने की ख़बर को तो कुछ इस अंदाज़ में परोसा गया कि मानो हेमंत सोरेन सरकार कुछ पल की ही मेहमान है। फिलहाल ताज़ा ख़बर यही है कि दोनों उच्च नेता दिल्ली से वापस लौट आये हैं और मीडिया से उन्होंने कह दिया है- नो कॉमेंट !  

सनद रहे कि इन दिनों झारखंड प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल भाजपा और उसके सभी शीर्ष नेतागण हेमंत सोरेन सरकार व उनके भाई विधायक बसंत सोरेन की विधान सभा सदस्यता फौरन रद्द किये जाने की मांग को लेकर सरकार गिराने की मुहीम को अपना मुख्य राजधर्म बनाए हुए हैं। दोनों पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने अपने अपने पद का दुरुपयोग कर ‘अवांछित लाभ कमाने’ का गंभीर भ्रष्टाचार किया है। हेमंत सोरेन पर तो सीधे मुख्यमंत्री पद के दुरुपयोग कर अपने नाम से ‘खननलीज़ पट्टा’ आबंटन कराने, पत्नी के नाम ज़मीन खरीदने तथा चुनाव आयोग से जानकारी छुपाने का सीधा आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल मुख्यमंत्री पद से हटाने की ही मांग उठायी है।

इसी वर्ष फ़रवरी माह में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक प्रेसवार्ता कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जिनके पास राज्य खनन मंत्रालय भी है, पर व उनके भाई व झामुमो विधायक बसंत सोरेन पर अपने पद का दुरुपयोग कर अपने नाम से रांची के पास पत्थर खनन के लिए ‘माइनिंग लीज़’ लेने तथा खनन कंपनी ग्रैंड माइनिंग में पार्टनर होने का संगीन आरोप लगाया। जिसके तत्काल बाद ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक दल नेता बाबूलाल मरांडी इत्यादि ने राजभवन जाकर राज्यपाल से शिकायत की। साथ ही मामले से सम्बंधित कागज़ात देते हुए दोनों की विधान सभा सदस्यता रद्द कर उन्हें पद से हटाने की पुरज़ोर मांग उठायी।

बिना कोई देरी किये माननीय राज्यपाल महोदय भी 27 अप्रैल को दिल्ली जाकर प्रधानमन्त्री और गृह मंत्री से मिलकर राज्य के हालात की जानकारी दी। साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ मिली शिकायतों तथा उनपर उन पर उठाये गए क़दम की भी जानकारी दी।

बाद के घटनाक्रम में प्रदेश भाजपा की ओर से हेमंत सोरेन व बसंत सोरेन पर अपनी सरकार से दोहरा लाभ उठाने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग को लिखित शिकायत पत्र भेजकर दोनों की विधान सभा सदस्यता रद्द करने की मांग उठायी गयी। जिसमें कहा गया कि- यह कार्य गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से मंत्रियों के लिए जारी आचार संहिता का उल्लंघन है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 कीधारा 13 (1) डी के तहत गंभीर आपराधिक कृत्य है।

भाजपा नेता रघुवर दास ने हेमंत सोरेन पर अपनी पत्नी के नाम से ज़मीन खरीदने का भी आरोप लगाया है। राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने भी त्वरित संज्ञान लेते हुए हेमंत सोरन के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए 10 मई तक जवाब देने का निर्देश देते हुए पूछा है कि- क्यों न उनके खिलाफ लोक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी) 1951 की धारा 9A के उल्लंघन के तहत कार्रवाई की जाए। बाद में हेमंत सोरेन ने चुनाव आयोग से जवाब देने के लिए समुचित वक़्त दिए जाने की मांग की तो आयोग ने उसे स्वीकारते हुए 10 दिन का समय बढ़ा दिया है।

इसी मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में हेमंत सोरेन के खिलाफ विशेष जनहित याचिका भी दायर की गयी है। जिस पर झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा. रवि रंजन एवं जस्टिस एस एन प्रधान की अदालत में सुनवाई चल रही है। 17 मई को इस मामले पर हाई कोर्ट की अगली सुनवाई होनी है।  

इस पूरे प्रकरण में भाजपा द्वारा सरकार गिराने की घेरेबंदी का जवाब देते हुए खुद हेमंत सोरेन व झामुमो प्रवक्ता द्वारा भाजपा के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया जा रहा है कि- ‘खनन लीज़ मामला’ उठाया जाना भाजपा की राजनितिक साज़िश है।

सरकार के घटक दल राजद ने भी भाजपा पर एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया है। जबकि हेमंत सोरेन सरकार औरमंत्रिमंडल में कई मंत्री पदों पर अपने विधायकों को काबिज़ करने वाली कांग्रेस पार्टी की ओर बहुत कारगर जवाब नहीं दिये जाने को लेकर भी कई तरह की चर्चाएँ हैं। फ़िलहाल खबर है कि कांग्रेस ने राज्य सभा के लिए झारखंड से चुने जाने वाले दो सांसदों में से एक सीट के लिए अपना दावा किया है।   

झारखंड के प्रमुख वामपंथी दल भाकपा माले और सीपीएम ने हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ भाजपा के रवैये पर काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दोनों दलों के राज्य सचिवों ने अपनी पार्टी कि ओर से बयान जारी कर भाजपा ये चेतावनी दी है कि यदि लोकतान्त्रिक ढंग से चुनी हुई हेमंत सोरेन सरकार को गिराने की साज़िश की जायेगी तो राज्य की जनता इसे नहीं बर्दास्त करेगी।

भाकपा माले ने जारी बयान में भाजपा पर अपने विरोधी दलों की चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए केन्द्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि- गत विधान सभा चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद वह गैर भाजपा दलों के विधायकों की खरीद-बिक्री कर सरकार गिराने के कुचक्र में लगातार लिप्त है। जिसकी शुरुआत धुर विरोधी रहे अपने पूर्व नेता बाबूलाल मरांडी से गैर कानूनी ढंग से दल बदल करवाकर की। पिछले दिनों कतिपय कांग्रेसी विधायकों को खरीदने के हथकंडे का भी पर्दाफाश हो चुका है। पिछले भाजपा शासन के रघुवर दास कार्यकाल में ही भाजपा के तत्कालीन विधायक और उस सरकार के मंत्री सरयू राय ने ‘मोमेंटम झारखण्ड’ के नाम पर हुए घोटालों की जांच की मांग की थी। जिसे केंद्र की सरकार ने सीधे ठुकरा दिया था।

आईएएस पूजा सिंघल के भ्रष्टाचार मामले में भी रघुवर दास की सरकार व भाजपा ने ही क्लीन चीट देकर उन्हें बचाए रखा था। भानु प्रताप शाही जैसे आरोपी घोटालेबाजों की टोली बनाकर भाजपा की भ्रष्टचार विरोधी नौटंकी को भी झारखंड की जनता भली भांति समझ रही है।

फिलहाल प्रदेश के सियासी जगत में सबकी नज़रें 17 मई को हाई कोर्ट में होनेवाली सुनवाई के साथ साथ राष्ट्रीय चुनाव आयोग की भूमिका पर लगी हुई है।

दूसरी ओर, राज्य के लोकतान्त्रिक नागरिक समाज में भाजपा व केंद्र की उनकी सरकार द्वारा राज्यों की गैर भाजपा सरकारों के खिलाफ की जा रही साज़िशों को लेकर काफी चिंता व्यक्त की जा रही है। युवा एक्टिविस्ट नदीम खान का कहना है कि – यह सही है कि केंद्र में काबिज़ सत्ताधारी दल द्वारा राज्यों की विरोधी दलों की सरकार को अस्थिर करना अथवा उसे येन केन प्रकारेंण गिरा देने की कवायद पहले भी होती रही है।

लेकिन 2014 में चरम दक्षिणपंथी विचारधारा वाले राजनीतिक दल के सरकार में होने के बाद से काफी खतरनाक किस्म के बदलाव देखने को मिल रहें हैं। जिसमें सीबीआई व ईडी जैसी केन्द्रीय एजेंसियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर विपक्षी दलों की सरकारों को अस्थिर करने का कुचक्रों का बढ़ना, देश की लोकतांत्रिक शासन प्रणाली और संघीय ढांचे के लिए गंभीर खतरे का ही संकेत है।

ये भी पढ़ें: झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

Hemant Soren
Jharkhand government
Hemant government
Central Government
Modi government
IAS Pooja Singhal
CPIM
CPIML

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान


बाकी खबरें

  • एम.के. भद्रकुमार
    बाइडेन-पुतिन की बैठक के एक हफ़्ते बाद संकट गहरा रहा है
    15 Dec 2021
    रूस अपनी उन 'लाल रेखाओं' को फिर से दोहरा रहा है
  • hindutva
    अजय कुमार
    हिंदुत्व की बहस के बीच बेरोज़गारी और महंगाई की मार झेलती ग़रीब जनता
    15 Dec 2021
    बनारस में प्रधानमंत्री मोदी की मज़दूरों के साथ बैठकर खाना खाने की फोटो बहुत अधिक वायरल हो रही है। लेकिन वहीं एक ख़बर शहरी बेरोज़गारी को लेकर आई है। जिस पर कोई चर्चा नहीं है। जिसकी सबसे अधिक मार उसी…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,984 नए मामले, ओमिक्रॉन से अब तक 57 लोग संक्रमित
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,984 नए मामले, ओमिक्रॉन से अब तक 57 लोग संक्रमित
    15 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.25 फ़ीसदी यानी 87 हज़ार 562 हो गयी है। इस बीच महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के 8 और दिल्ली व राजस्थान में 4-4 नए मामले सामने आए हैं।
  • GDP
    प्रभात पटनायक
    भारत की महामारी के बाद की आर्थिक रिकवरी अस्थिर है
    15 Dec 2021
    2021-22 की दूसरी तिमाही में जीडीपी की 2019-20 की दूसरी तिमाही के स्तर पर बहाली होने के पीछे उपभोग की बहाली नहीं, बल्कि निवेश में बढ़ोतरी कारण है।
  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    MSP की लड़ाई जीतने के लिए UP-बिहार जैसे राज्यों में शक्ति-संतुलन बदलना होगा
    15 Dec 2021
    किसान इस बात को समझ गए हैं कि MSP उनका जायज हक है, यह बात अब पूरे देश के किसानों की अनुभूति का हिस्सा बन गयी है। और जैसा मार्क्स ने कहा, कोई विचार जब जनगण की अनुभूति बन जाता है तो वह एक Material…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License