NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
बढ़ती फीस के साथ दूर खिसकता उच्च शिक्षा का सपना
गरीब और वंचित तबकों के छात्रों की उच्च शिक्षा हासिल करने की कोशिशें, उन्हें बड़े उधार में फंसा रही हैं। इसकी वजह उच्च शिक्षा की फीस में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी है।
रवि कौशल
03 Dec 2019
higher education and fee hike
प्रतीकात्मक तस्वीर

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी समेत कई दूसरी यूनिवर्सिटीज़ में फीस वृद्धि के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के कारण, महंगी होती शिक्षा का मुद्दा विमर्श के केंद्र में आ गया है। अगर हम देश के प्रमुख संस्थानों की फीस का विश्लेषण करें तो लगता है कि यह सिर्फ अमीरों के लिए ही ढ़लते जा रहे हैं। दूसरी तरफ गरीब और वंचित तबकों द्वारा उच्च शिक्षा की कोशिशें उन्हें बड़े शिक्षा ऋण में फंसा रही हैं। न्यूज़क्लिक ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन (IIMC), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के छात्रों से बात कर उनकी मानसिक और भावनात्मक पीड़ा समझने की कोशिश की।

***

भारतीय जनसंचार संस्थान/इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन

भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) की स्थापना 1965 में 'मानव विकास, सशक्तिकरण, सहभागितापूर्ण लोकतंत्र औऱ बहुलतावाद' में योगदान के लिए हुई थी। जेएनयू के साथ साझा कैम्पस में स्थित इस संस्थान में हिंदी, अंग्रेजी और रेडियो-टेलीविजन पत्रकारिता में कोर्स करवाए जाते हैं। इसके अलावा यहां 'एडवर्टाइज़मेंट एंड पब्लिस रिलेशन' में भी डिप्लोमा दिया जाता है।

संस्थान की फीस वृद्धि दिखाती है कि कैसे छात्रों को अपने सपने पूरा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। संस्थान ने हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता कोर्स की फीस हाल में 79 हजार रुपये से बढ़ाकर 95,000 रूपये कर दी। वहीं रेडियो एंड टीवी कोर्स की फीस 1.45 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.68 लाख रुपये पहुंचा दी। एड/पीआर की पहले फीस 1.12 लाख रुपये हुआ करती थी, जो ताजा फेरबदल के बाद 1.31 लाख रुपये हो चुकी है।

हिंदी पत्रकारिता के छात्र देवेश मिश्रा ने न्यूज़क्लिक को बताया कि संस्थान फीस वृद्धि में नियमों का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने बताया, 'नियमों के मुताबिक़ संस्थान सालाना 10 फ़ीसदी तक फीस बढ़ा सकता है। लेकिन इस साल 22 फ़ीसदी फीस बढ़ा दी गई। हमें यह याद रखना होगा कि संस्थान पूरी तरह केंद्र से अनुदान पाता है और यह पत्रकारिता प्रशिक्षण का सबसे बड़ा संस्थान है। मैं वंचित तबकों के ऐसे छात्रों को जानता हूं, जो परीक्षा और इंटरव्यू पास करने के बावजूद ऊंची फीस के चलते दाख़िला नहीं ले पाए।'

संस्थान इस साल पहली बार एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटों को नहीं भर पाया। देवेश ने बताया कि 'हमें समझना चाहिए कि पत्रकारिता में एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व वैसे भी कम है। जब आप फीस बढ़ा रहे होते हैं, तो आप इन समुदायों के लिए रास्ते बंद कर रहे होते हैं। यह खेदजनक है।'

अपनी कहानी सुनाते हुए एक दूसरे छात्र आकाश पांडे ने बताया कि छात्रों के लिए अतिरिक्त खर्चे भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया, 'मैं कई लोगों से उधार लेकर फीस की पहली किश्त जमा कर पाया। मैं एक संयुक्त परिवार से आता हूं, जिसके पास मुश्किल से तीन बीघा ज़मीन है। पहली फसल बर्बाद हो गई, भारी बारिश के चलते दूसरी भी खराब हो गई। फसल में अभी भी पानी भरा हुआ है। हमें नहीं पता उस फसल की कितनी कीमत हमें मिलेगी। मैं नहीं जानता कि मैं कैसे फीस की दूसरी किश्त भरूंगा। मै अपने एक ऐसे दोस्त को जानता हूं, जिसे फीस चुकाने के लिए अपनी ज़मीन बेचनी पड़ी। सरकार को समझना चाहिए कि किफ़ायती शिक्षा का हर छात्र का अधिकार है।'

***

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी

देश में 19 राज्यों में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLU) की स्थापना की गई है। इनका उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण कानूनी ज्ञान का प्रशिक्षण देना है। इन संस्थानों में BA LLB (Hons.) जैसे पांच साल के कोर्स करवाए जाते हैं। औसत तौर पर इन संस्थानों की सालाना फीस 1,30,000 रुपये से लेकर 2,02,000 रुपये तक है। जैसे, महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में 2019-2020 की फीस 2,02,000 रुपये थी। ऊपर से हर छात्र को हॉस्टल और मेस के लिए सालाना 90,000 रुपये का अतिरिक्त चार्ज देना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि अगर दूसरे अतिरिक्त खर्चों को भी जोड़ दें, तो उन्हें सालाना 3,50,000 रुपये जैसी भारी-भरकम रकम चुकानी होती है। मतलब घरवालों को पांच साल के कोर्स के लिए 17,50,000 रुपये जुटाने पड़ते हैं।

न्यूज़क्लिक ने हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों से भी बात की, जिन्होंने पिछले साल विरोध प्रदर्शन किया था।

देवव्रत ने जब पहली बार कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट के लिए फॉर्म भरा था, तो उसने सबसे कम फीस वाले NLU को खोजने की कोशिश की। उन्होंने पाया कि हर कॉलेज में करीब दो लाख रूपये सालाना चुकाने होंगे। लेकिन फीस की व्यवस्था करने में देवव्रत को पसीने आ गया। उन्होंने बताया, 'जब मेरे मां-बाप अलग हुए तो मां ने मेरी परवरिश की। वो वकील हैं, लेकिन उनका काम बहुत ज़्यादा जमा हुआ नहीं है। पिछले तीन सालों में हमें अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसे उधार लेने पड़े। चूंकि यह पांच साल का कोर्स है, इसलिए बहुत सारे लोगों ने पढ़ाई में पैसे लगाने में विश्वास नहीं दिखाया। इसलिए मुझे बैंक जाकर लोन लेना पड़ा। लेकिन हम लोन के लिए योग्य नहीं थे, क्योंकि हमारे घर की कीमत कम थी। पर हमने अपनी कोशिश जारी रखी। आखिर में एक बैंकर ने मेरा इंटरव्यू और अकादमिक रिकॉर्ड देखने के बाद मुझमें विश्वास दिखाया।बैंक ने मुझे 3.75 लाख रुपये का लोन दिया। जब मेरी पढ़ाई खत्म हो जाएगी, तब मैं इसे चुकाऊंगा।'

एक दूसरे छात्र प्रांजल ने न्यूज़क्लिक को बताया कि शिक्षा पर खर्च ने उसके परिवार की कमर तोड़ दी। परिवार की आय का करीब 50 फ़ीसदी हिस्सा फीस चुकाने में जाता है। उन्होंने बताया, 'मेरे पिताजी सरकारी कर्मचारी हैं और करीब 6 लाख रुपये सालाना कमाते हैं। मेरी फीस दो लाख के आसपास है। दूसरे खर्चे में करीब 50,000 रुपये खर्च हो जाते हैं। मेरा भाई सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है, उसे भी सालाना 50,000 रुपयों की जरूरत होती है। इस तरह केवल शिक्षा पर मेरे पिता तीन लाख रुपये खर्च कर रहे हैं। जेएनयू में जो विमर्श जारी है, उस पर मैं सोचता हूं कि NLU जैसे सरकारी संस्थान में हमें इतनी फीस क्यों चुकानी पड़ रही है।'

देवव्रत ने बताया कि यूजीसी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से अनुदान मिलने के बावजूद संस्थान इतनी ज़्यादा फीस लेता है।वरिष्ठ वकील और आरटीई एक्टिविस्ट अशोक अग्रवाल ने न्यूज़क्लिक को बताया, 'जब छात्रों पर लाखों रुपये के लोन का भार होगा, तो उनकी पहली चिंता उसे चुकाने की होगी। इसलिए छात्र प्रैक्टिस करने की जगह, कॉरपोरेट लॉ फर्म में नौकरी करना पसंद करते हैं। दूसरा, ऊंची फीस निश्चित ही बेहतर छात्रों को वकालत के पेशे में आने से रोकती है। क्योंकि इसमें जमने के लिए कम से कम 10 लाख का अनुभव चाहिए होता है। केवल कुछ ही छात्र यह रास्ता चुनते हैं।'

***

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IITs)

आजादी के बाद भारत के विकास में योगदान देने के लिए आईआईटी की स्थापना की गई थी। राष्ट्रहित की योजनाओं में यह संस्थान लगातार योगदान दे रहे हैं। लेकिन इनकी फीस में भी बेतहाशा इज़ाफा हो रहा है। 2016 में IIT काउंसिल (सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था) ने बी टेक प्रोग्राम की फीस 60,000 रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये सालाना कर दी। एक दूसरे विवादास्पद फ़ैसले में काउंसिल ने एम टेक की फीस भी दो लाख रुपये की थी।

नाम न छापने की शर्त पर एक छात्र ने बताया कि जो बच्चे अच्छी आर्थिक स्थिति वाले परिवारों से नहीं आते उन्हें लोन लेना पड़ता है। इसलिए कोर्स खत्म करने के बाद छात्रों की पहली चिंता लोन चुकाने की होती है। पर कई छात्र नौकरी के ऊपर शोध और अकादमिक क्षेत्र भी चुनते हैं। बढ़ी हुई फीस इन छात्रों को प्रभावित करेगी और जनहित के लिए होने वाले शोधों पर भी लंबे वक्त में असर डालेगी।  

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Dream of Higher Education Moves Farther with Fee Hikes

Fee Hike
JNU
JNUSU
IIT
National Law University
IIMC
Marginalised Sections

Related Stories

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे

शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का मसौदा ढांचा अनुसंधान के लिए विनाशकारी साबित होगा

जेएनयू में छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में एक व्यक्ति गिरफ़्तार, GSCASH बहाली की मांग

प्रत्यक्ष कक्षाओं की बहाली को लेकर छात्र संगठनों का रोष प्रदर्शन, जेएनयू, डीयू और जामिया करेंगे  बैठक में जल्द निर्णय

तमिलनाडु : मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन 50 दिन के पार; प्रशासन ने विश्वविद्यालय बंद कर छात्रों का खाना-पानी रोका

दिल्ली : विश्वविद्यालयों को खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने हिरासत में  लिया


बाकी खबरें

  • सुहित के सेन
    हिन्दू दक्षिणपंथ द्वारा नफरत फैलाने से सांप्रदायिक संकेतों वाली राजनीति बढ़ जाती है  
    08 Apr 2022
    पत्रकारों और अल्पसंख्यकों पर हमले और भाजपा सरकारों के बदतर शासन के रिकॉर्ड दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
  • लाल बहादुर सिंह
    MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?
    08 Apr 2022
    एक ओर किसान आंदोलन की नई हलचलों का दौर शुरू हो रहा है, दूसरी ओर उसके ख़िलाफ़ साज़िशों का जाल भी बुना जा रहा है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मिड-डे-मील में लापरवाहीः बिहार के बाद राजस्थान में खाने के बाद 22 बच्चे बीमार
    08 Apr 2022
    मिड-डे-मील योजना में लापरवाही से बच्चों के बीमार पड़ने की ख़बरें अक्सर आती रही हैं। ताज़ा मामला राजस्थान का है जहां इस भोजन के करने के बाद 22 बच्चों के बीमार होने की बात सामने आई है।
  • रवि शंकर दुबे
    यूपी एमएलसी चुनाव: भाजपा-सपा की सीधी टक्कर
    08 Apr 2022
    उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव भी बेहद दिलचस्प होने वाले हैं, क्योंकि ज्यादातर सीटों पर भाजपा-सपा के बीच कांटे की टक्कर देखी जा रही है तो कहीं-कहीं बाहुबलियों के करीबी अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं।
  • मार्को फर्नांडेज़
    चीन और लैटिन अमेरिका के गहरे होते संबंधों पर बनी है अमेरिका की नज़र
    08 Apr 2022
    अमेरिकी में विदेश नीति के विशेषज्ञ लैटिन अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को लेकर सतर्क हो गए हैं, यह भावना आने वाले वक़्त में और भी तेज़ होगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License