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कोविड-19
भारत
राजनीति
हिमाचल : माकपा ने कहा सरकार की टीका नीति पूर्णतः भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक
सरकार की टीकाकरण की नीति पूर्णतः भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक है क्योंकि भारत के संविधान की धारा 21 सभी को जीवन व धारा 14 सभी को बराबरी का अधिकार प्रदान करती है। इसलिए देश मे सभी युवा, वृद्ध, बच्चों, गरीब, अमीर व हर वर्ग के लोगों के जीवन की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक दायित्व बनता है। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Jun 2021
माकपा

देशभर में टीके की कमी की खबरें आ रही हैं। सरकारों के कुप्रबंधन से यह समस्या और जटिल होती जा रही है। देश की राजधानी दिल्ली, महारष्ट्र, उड़ीसा, झारखंड, बिहार, बंगाल,असम सहित दक्षिण के कई राज्यों में टीके की कमी के कारण कई टीका केंद्र बंद किए जा चुके हैं। अब हिमाचल में भी टीके की कमी का मामला सामने आ रहा है। लेकिन इन सभी राज्यों में एक सवाल यह उठ रहा है कि सिर्फ सरकारी सेंटर पर टीके नहीं है लेकिन निजी अस्पतालों में टीके बराबर लग रहे हैं। इसको लेकर देश की न्यायालय सरकारों से गंभीर सवाल पूछ रही हैं, जिसका जवाब कोई भी सरकार पुख़्ता तौर पर नहीं दे पा रही है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) / माकपा की हिमाचल प्रदेश कमेटी ने सरकार द्वारा देश व प्रदेश में लागू की जा रही लचर व भेदभावपूर्ण टीकाकरण नीति की कड़ी भर्त्सना की और सरकार से मांग की है कि इस कोविड-19 महामारी पर समय पर रोकथाम हेतु 18 वर्ष की आयु से ऊपर सभी का समयबद्ध तरीके से नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर मुफ़्त टीकाकरण कर अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करे।

शिमला मेयर और माकपा राज्य सचिव मंडल के सदस्य संजय चौहान ने सरकार द्वारा 18 से 44 वर्ष के लिये टीकाकरण की नीति को पूर्णतः भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक बताया। उन्होंने अपने बयान में कहा, "हाल ही में सरकार द्वारा युवा वर्ग के लिए जो ऑनलाइन बुकिंग के आधार पर थोड़ी बहुत टीकाकरण की जा रही थी वह भी सरकार के अनुसार अब टीका उपलब्ध न होने के कारण बन्द कर दी गई है और अब देश व प्रदेश में महंगी दरों पर निजी अस्पतालों व अन्य संस्थानों को युवा वर्ग का टीकाकरण करने की इजाजत दे दी है। यह बिल्कुल भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक है क्योंकि भारत के संविधान की धारा 21 सभी को जीवन व धारा 14 सभी को बराबरी का अधिकार प्रदान करती है। इसलिए देश मे सभी युवा, वृद्ध, बच्चों, गरीब, अमीर व हर वर्ग के लोगों के जीवन की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक दायित्व बनता है।"

चौहान ने आलोचना करते हुए कहा "सरकार की टीकाकरण को लेकर लागू नीति व कार्यप्रणाली इसलिए भी संदेह के घेरे में आती है क्योंकि प्रदेश सरकार के अनुसार उनको टीका ही नहीं मिल रही है इसलिए 18 से 44 आयु वर्ग की टीकरण नहीं किया जा रहा है तो इन निजी अस्पतालों व संस्थानों के पास टीका कहाँ से आ रहा है। सरकार का यह निर्णय स्पष्ट रूप से इन निजी अस्पतालों व संस्थानों को लाभ पहुंचाने का है। इसके कारण कोविड-19 से पैदा हुए संकट से जूझ रहे सभी लोगों, विशेष रूप में गरीब व दूरदराज के लोग टीके से वंचित रह जाएंगे और इनकी जान का खतरा भी बढ़ जाएगा।"

आगे उन्होंने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला और कहा "अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि एक ओर केन्द्र सरकार कह रही है कि देश में टीके की कमी नहीं होने दी जाएगी। जबकि दूसरी ओर आज अधिकांश राज्य सरकारें टीके की कमी बता रही हैं और कह रही हैं कि वो जितने टीके की मांग कर रही है, उन्हें केन्द्र सरकार उतनी टीका उपलब्ध नहीं करवा रही है। और अपने स्तर पर भी कंपनियां उन्हें टीका उपलब्ध नहीं करवा रही हैं। जिससे सरकार को आज 18 से 44 आयु वर्ग को टीका लगाना संभव नहीं हो रहा है।"

हिमाचल माकपा ने कहा "केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को समय और मांग अनुसार टीका उपलब्ध न करवाना भी हमारे देश के संवैधानिक संघीय ढांचे पर चोट है। इसलिए सरकार की टीकाकरण की नीति मनमानी व तर्कहीन है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान अपने एक आदेश में केन्द्र सरकार को लताड़ लगाई है। इसलिए इस नीति में सरकार तुरंत बदलाव करे और टीकाकरण को मुफ़्त सार्वभौमिक कर सभी को सरकार उपलब्ध करवाए।"

माकपा ने आगे अपने बयान में कहा आज कोविड-19 महामारी से देश व प्रदेश में लाखों लोग प्रभावित है और अनगिनत मौतें हुई हैं। इन मौतों के लिए जिम्मेदार मुख्यतः सरकार की कोविड-19 से निपटने के लिए की गई लचर नीति व आधी अधूरी तैयारी रही है। सरकार द्वारा उचित रूप में टेस्टिंग न करना व देश में ऑक्सीजन व अन्य मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं की कमी तथा देश में समय रहते टीकाकरण आरम्भ न करने के कारण अधिकांश मौतें हुई हैं।"

चौहान ने कहा आज दुनिया में इस कोविड-19 महामारी पर काबू पाने हेतु टीकाकरण ही एकमात्र चारा है। जब तक 70 प्रतिशत आबादी की टीकाकरण नहीं किया जाता है तब तक इससे होने वाली तबाही पर रोक लगाना संभव नहीं है। यदि सरकार समय रहते अपनी लचर टीकाकरण नीति में गुणात्मक बदलाव नहीं करती और इसको सभी को मुफ्त समय रहते उपलब्ध नहीं करवाती तो देश मे कोविड-19 की और कई वेव आने से कोई नहीं रोक सकता और देश के कई लाखों लोगों को अपनी जान से हाथ गवाने होंगे और इसके लिए केवल मात्र सरकार ही दोषी होगी और इसको इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा।

देश में कोविड-19 रोधी टीकों की अब तक 22.75 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं, जिनमें से 33,57,713 खुराक शुक्रवार को दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने बताया कि 18-44 आयु समूह के 16,23,602 लोगों को शुक्रवार को टीके की पहली खुराक दी गई जबकि इसी समूह के 31,217 लोगों को दूसरी खुराक दी गई।

अब तक 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इस समूह के कुल 2,58,45,901 लोगों ने टीके की पहली खुराक ली है, जबकि 1,18,299 लोगों को टीके की दूसरी खुराक मिली है। इस समूह के लिए टीकाकरण अभियान की शुरुआत एक मई से हुई थी।

देश में अब तक 22,75,67,873 टीके की खुराक दी गई है, जिनमें से 99,44,507 स्वास्थ्यकर्मियों को पहली खुराक जबकि 68,40,415 कर्मियों को दूसरी खुराक दी गई है। इसमें अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले 1,60,45,747 लोगों को टीके की पहली खुराक जबकि 86,34,525 कर्मियों को दूसरी खुराक दी गई है। मंत्रालय ने बताया कि टीकाकरण अभियान के 140 वें दिन (चार जून) को 33,57,713 खुराक दी गई थीं।

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Unconstitutional law
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