NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
हिमाचल प्रदेश : सरकार की ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के ख़िलाफ़ छात्रों का प्रदर्शन
प्रदर्शनकरियों ने कहा है कि इन्वेस्टर मीट में निवेशकों को प्रदेश के संसाधनों पर डाका डालने के लिए खुला अवसर प्रदान किया जा रहा है।
मुकुंद झा
07 Nov 2019
student protest

हिमाचल प्रदेश सरकार 7 और 8 नवंबर को ग्लोबल इन्वेस्टर मीट, यानी विश्व स्तर के निवेशकों की बैठक का आयोजन कर रही है। उसे उम्मीद है की इससे प्रदेश का विकास होगा। हिमाचल के गठन के बाद पहली बार निवेश को लेकर इतना बड़ा सम्मेलन हो रहा है। इन्वेस्टर्स मीट के लिए अभी तक 583 एमओयू साइन किए गए हैं। इसमें 82,344 करोड़ के निवेश की संभावनाएं देखी जा रही हैं। जयराम सरकार इन एमओयू के दम पर सूबे के लगभग पौने दो लाख लोगों को रोज़गार देने की उम्मीद कर रही है। इन्वेस्टर्स मीट से पहले जयराम सरकार ने राज्य में छह नई नीतियां इसी साल बनाई हैं।

हिमाचल प्रदेश पूरे देश में बेहतर शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है। शिक्षा में हिमाचल का नाम सबसे ऊपर है। पर्यावरण और स्वास्थ्य सेवाओं में दूसरे स्थान पर है। क़ानून व्यवस्था भी देश के सभी राज्यों की अपेक्षा में कहीं बेहतर है। दूसरी तरफ़ हिमालय क्षेत्र के प्रदेशों में हिमाचल पर्यटन की दृष्टि से सबसे मुख्य स्थल बना हुआ है। पिछले एक दशक में हिमाचल में पर्यटकों की संख्या में भारी इज़ाफ़ा हो रहा है। पहले सिर्फ़ गर्मी के मौसम में पर्यटक हिमाचल का रुख करते थे, लेकिन अब 12 महीने पर्यटकों की आवाजाही रहती है।

हिमचाल प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित इन्वेस्टर्स मीट के विरोध में एसएफ़आई ने बुधवार को धरना-प्रदर्शन किया। इसमें छात्रों और नौजवानों की बड़ी स्तर पर भागीदारी रही। इनका कहना है, "प्रदेश का क़ानून धारा 118 के तहत साफ़ तौर पर प्रदेश के बाहर के किसी भी व्यक्ति को यहां ज़मीन ख़रीदने से प्रतिबंधित करता है। एक तरफ़ सरकारी या वन विभाग की ज़मीन पर पुश्तों से हिमाचल के स्थायी निवासी के रूप में रह रहे भूमिहीन, किसान या ग़रीब मज़दूर को यही सरकार उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर ज़मीन से बेदख़ल करने के नोटिस निकाल रही है, वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेश के बहाने बड़े निजी घरानों को क़ानून को दरकिनार करते हुए मुफ़्त में प्रदेश में ज़मीन बांटी जा रही है। एसएफ़आई भाजपा सरकार के इस दोहरे चरित्र एवं पूंजीपतियों को फ़ायदा पहुंचाने वाली नीति का विरोध करती है।"

27547d16-c87e-480b-9890-ca5379f01a84_0.jpg

इसके अलावा प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भी एसएफ़आई के छात्रों ने इसका विरोध किया है।

प्रदर्शनकरियों ने कहा है कि इन्वेस्टर मीट में निवेशकों को प्रदेश के संसाधनों पर डाका डालने के लिए खुला अवसर प्रदान किया जा रहा है।

राज्य अध्यक्ष रमन थार्टा ने कहा, "केंद्र और प्रदेश की सरकार हमेशा से ही अपने चहेते पूंजीपतियों को मुनाफ़ा देने के लिए तत्पर रही है। वहीं दूसरी ओर छात्रों तथा नौजवानों को लगातार रोज़गार से दूर किया जा रहा है। प्रदेश की जयराम सरकार अब तक के अपने कार्यकाल में सभी वर्गो को संतुष्ट करने में नाकाम रही है। प्रदेश में छात्रों, मज़दूरों, महिलाओं, बेरोज़गारों के लिए कोई ठोस रणनीति तैयार करने में विफल सरकार प्रदेश की जनता को गर्त में धकेलने के लिए निवेशकों को बुलाकर प्रदेश के बचे संसाधन लुटाना चाहती है।"

रमन आगे कहते हैं, "शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान की सरकार का दृष्टिकोण बहुत संकीर्ण है। सरकार लगातार सार्वजनिक क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों के बजट में कटौती कर रही है। छात्र-अध्यापक अनुपात में भारी गिरावट आई है। शिक्षा के क्षेत्र को नए आयाम देने के लिए बने आयोगों की सिफ़ारिशों को केंद्र सरकार मात्र एक दस्तावेज की तरह सुरक्षित रखे है बजाय इसके कि इनकी सिफ़ारिशों को लागू करे। आज तक भी सकल घरेलू उत्पाद तथा राज्य सरकार के बजट का अपर्याप्त प्रतिशत ही शिक्षा क्षेत्र में ख़र्च होता है। इससे पता चलता है कि हमारी सरकारी सार्वजनिक क्षेत्र की शिक्षा के लिए कितनी संवेदनशील है।"

4d09ad5b-97a5-42cf-ac6a-a2c0cf840aca (1).jpg

विरोध कर रहे लोगों ने यह भी कहा कि "पर्यटन हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लेकिन अकेले पर्यटन क्षेत्र में ही 15 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव इस इन्वेस्टर्स मीट का हिस्सा है। लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश इस क्षेत्र में तय माना जा रहा है। छोटे-मझौले पर्यटन क्षेत्र के उद्यमी का पूरा कारोबार चौपट करने की फ़िराक़ में सरकार केवल चंद पूंजीपरस्त लोगों को फ़ायदा पहुंचाना चाहती है।"

एसएफआई ने सरकार पर आरोप लगते हुए कहा, "यदि प्रदेश की सरकार समय रहते सार्वजनिक शिक्षा क्षेत्र की मज़बूती के लिए ठोस रणनीति तैयार नहीं करती तो आने वाले दिनों में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदेश व्यापी आंदोलन की शुरुआत की जाएगी और चाहे जो भी परिस्थिति बने उसके लिए सरकार ख़ुद जवाबदेह होगी।"

Himachal Pradesh
Student Protests
Jai Ram Thakur
Amit Shah
Narendera Modi
privatization of education
HEALTH
SFI
Tourism in HP
Global Investors Meet

Related Stories

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़


बाकी खबरें

  • women in politics
    तृप्ता नारंग
    पंजाब की सियासत में महिलाएं आहिस्ता-आहिस्ता अपनी जगह बना रही हैं 
    31 Jan 2022
    जानकारों का मानना है कि अगर राजनीतिक दल महिला उम्मीदवारों को टिकट भी देते हैं, तो वे अपने परिवारों और समुदायों के समर्थन की कमी के कारण पीछे हट जाती हैं।
  • Indian Economy
    प्रभात पटनायक
    बजट की पूर्व-संध्या पर अर्थव्यवस्था की हालत
    31 Jan 2022
    इस समय ज़रूरत है, सरकार के ख़र्चे में बढ़ोतरी की। यह बढ़ोतरी मेहनतकश जनता के हाथों में सरकार की ओर से हस्तांतरण के रूप में होनी चाहिए और सार्वजनिक शिक्षा व सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हस्तांतरणों से…
  • Collective Security
    जॉन पी. रुएहल
    यह वक्त रूसी सैन्य गठबंधन को गंभीरता से लेने का क्यों है?
    31 Jan 2022
    कज़ाकिस्तान में सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO) का हस्तक्षेप क्षेत्रीय और दुनिया भर में बहुराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बदलाव का प्रतीक है।
  • strike
    रौनक छाबड़ा
    समझिए: क्या है नई श्रम संहिता, जिसे लाने का विचार कर रही है सरकार, क्यों हो रहा है विरोध
    31 Jan 2022
    श्रम संहिताओं पर हालिया विमर्श यह साफ़ करता है कि केंद्र सरकार अपनी मूल स्थिति से पलायन कर चुकी है। लेकिन इस पलायन का मज़दूर संघों के लिए क्या मतलब है, आइए जानने की कोशिश करते हैं। हालांकि उन्होंने…
  • mexico
    तान्या वाधवा
    पत्रकारों की हो रही हत्याओंं को लेकर मेक्सिको में आक्रोश
    31 Jan 2022
    तीन पत्रकारों की हत्या के बाद भड़की हिंसा और अपराधियों को सज़ा देने की मांग करते हुए मेक्सिको के 65 शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License