NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
योगी की पुलिस कैसे कर रही चुनाव में ग़रीबों से वसूली: एक पड़ताल
सवाल यह है कि क्या मात्र विज्ञापन या भाषण स्थितियों की असलियत बयान कर सकते हैं? हमने हालिया पुलिसिया दमन की पड़ताल करनी चाही, तो ‘अमृतकाल’ में ग़रीब बस्तियों का हाल कुछ और ही दिखा।
नाइश हसन
19 Feb 2022
police
तस्वीर, केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए। साभार: अमर उजाला

उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेजी पर है। दो चरणों का मतदान समाप्त होते ही चुनावी तपिश थोड़ा और बढ चुकी है। जानकार बताते है कि एक तरफ मुकाबला कांटे का है, तो नेताओं की भागदौड़ भी खासा तेज नजर आ रही है। ऐसे माहौल में तरह-तरह के नारे सुनने को मिल रहे है। मुख्यमंत्री जी कभी पूर्व की सरकारों को तो कभी नेहरू को ललकार रहे है, कभी भाषा की मर्यादा लांघते उनके अपशब्द उत्तर प्रदेश में गर्मी पैदा कर रहे हैं। मौजूदा सरकार की ईमानदारी के विज्ञापनों से पटा टीवी चैनल, अखबार और सोशल मीडिया। सवाल यह है कि क्या मात्र विज्ञापन या भाषण स्थितियों की असलियत बयान कर सकते हैं? हमने हालिया पुलिसिया दमन की पड़ताल करनी चाही, तो ‘अमृतकाल’ में गरीब बस्तियों का हाल कुछ और ही दिखा।

बस्तौली इलाके में रहने वाले राम दास पेशे से मजदूर हैं, उम्र तकरीबन 50 साल, बताते हैं कि सुबह जब वह दूध लेने जा रहे थे पुलिस ने आकर उन्हें रोका और कहा कि तुम्हारे वृद्व माता-पिता का वोट घर पर ही पड़ेगा, अपना नाम पता बता दो, घबराने की कोई बात नही है। इस तरह पुलिस ने उनके परिवार की जानकारी हासिल की। इसी प्रकार की घटना राम खेलावन, मनोज कुमार, सीताराम, अदनान, शमीम बेग, रिजवान बेग, गुफरान दानिश, राजा, सहित हजारों गरीब दिहाड़ी मजदूरों के साथ हुई। जो बस्तौली, समोदीपुर, गाजीपुर, लवकुश नगर, भाखा मऊ कुर्सी रोड,  जैसी बस्तियों और गांवों के रहने वाले है। जिनमें अधिकतर निम्न कही जाने वाली जातियों से ही ताल्लुक रखते हैं।

पुलिस के आने के चार दिन बाद घर पर चिट्ठी आ गई कि कमिश्नरेट महानगर पर हाजिरी दो और मुचलका भरो। वहां जाने पर पता चला कि वोट घर पर डलवाने जैसी कोई बात नहीं है, सभी का नाम अपराधी की लिस्ट में डाला गया है, सभी धारा 107-16 के मुल्जिम बना दिए गए हैं। उनसे शांति भंग का खतरा बताया गया है। भीड़ की भीड़ कमिश्नरेट लखनऊ, न्यायालय, कार्यपालक मजिस्ट्रेट के यहां पहुंच रही है। वहां मौजूद वकील फुर्ती से उस भीड़ के पास पहुंच एक मुचलका फार्म भरने लगते हैं, उन्हें उसी पुलिस जो अब न्यायाधीश भी है के कोर्ट में (जो अगले कमरे में है) पेश करते हैं। जब तक वह मजदूर समझ पाए कि उसकी खता क्या है उसका अंगूठा एक कागज पर चस्पा हो चुका होता है। सभी काम बड़ी फुर्ती के साथ। तीन सौ रुपये वकील लेकर थेाड़ा अंदर बाहर करके उन्हें अगली तारीख पर आने को कह कर वापस भेज देते हैं। उस कोर्ट की तारीखें बहुत जल्दी-जल्दी पड़ रही हैं। राम दास बताते हैं कि पहले उन्हें 3 फरवरी को बुलाया गया अगली तारीख 8 फिर 14 और फिर 17 फरवरी। हर तारीख पर मजदूरों से 200 रुपये लिए जा रहे हैं। सवाल जवाब करने की हिम्मत आप नहीं कर सकते। वहां सब कुछ मुस्तैदी से चल रहा है। वह किससे पूछे कि वह कभी अपराधी नहीं रहा, उसका कभी किसी से झगड़ा नहीं हुआ। कोई जवाब वहां नहीं मिलता। 

वहीं मौजूद एक वकील ने हमें नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कमिश्नरेट बनने के बाद स्थिति थोड़ा और खराब हुई है। एक चौकी इंचार्ज ही इलाके के कुछ लोगों को पकड़ लाता है और सीओ रैंक का दूसरा पुलिस वाला जो अब मजिस्ट्रेट की भूमिका में है, यानी वहां जो न्यायालय बना हुआ है उसका जज जिसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट कहते है वह सीओ ही हैं, जिसे अब एसीपी कहा जाता है, वही न्यायाधीश की भूमिका में हैं। वही फैसला सुनाने वाले हैं तो इस मामले में कौन किसकी शिकायत करेगा। एक पुलिस अपने ही विभाग के खिलाफ क्या कहेगी। बस इसी तरह चल रही है यह मनमानी व्यवस्था। गरीबों को यहां तक पहुंचाने वाला वह पहला व्यक्ति चौकी इंचार्ज के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती। आप खुद को बेगुनाह चिल्लाते रहिए।

वकील ने हमें यह भी बताया कि हर थाने को लगभग 500 लोगों को 107-16 के तहत पकड़ने का आदेश होता है। वह इसी तरह किसी को भी पकड़ लेते हैं, पकड़े जाने वालों में सभी गरीब, अशिक्षित और निम्न वर्ग के ही होते हैं। उन्हें तारीखें भी जल्दी-जल्दी इसी लिए दी जाती हैं कि उनसे हर तारीख पर वसूली की जा सके। पुलिस और वकील के गठजोड़ से सब चल रहा है। इतना जरूर दिख रहा था कि अनेक बेगुनाह नौजवान लड़के और अधेड़ उम्र के लोग इसके शिकार बने हैं। जिनका कभी कोई आपराधिक रिकार्ड ही नहीं रहा, जो थाने तक नहीं गए कभी, आज वह अपनी जमानत के लिए लाइन में लगे हैं। जिन्हें एक ही प्रक्रिया से गुजरना था, और अगर आप कहते हैं कि आप अपराधी नहीं है तो अपना दावा पेश कीजिए और वकील कीजिए मोटी फीस भरिए अन्यथा चुनाव तक ऐसे ही हाज़िरी लगाते रहिए।

इस संबंध में जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष मधु गर्ग ने कमिश्नर डी के ठाकुर को एक पत्र देकर इस बात की जांच कराने की मांग की, उनका कहना था कि जो एक बार अपराधी बना दिया गया वह हर बार इसी प्रकार पुलिस द्वारा पकड़ा जाएगा और जो कभी अपराधी रहा ही नहीं उसका नाम इस लिस्ट से हटाया जाए। जिस पर कार्यवाही करने से कमिश्नर ने साफ इनकार करते हुए कहा कि यह कोर्ट का मामला है। वही कोर्ट जो उसी पुलिस की है। एक पीड़ित की बहन सुशीला ने भी थाने से नाम हटाने की बात कही, इस संबंध में पड़ताल में थाना गाजीपुर के सिपाही मिथलेश यादव ने कहा कि पुलिस के पास इतना समय नहीं होता है कि वह आप के सवालों का जवाब दे सके। वही के एक सिपाही दुर्गेश कुमार तिवारी ने बताया कि गाजीपुर थाना ऐसा थाना है जहां पूर्व का कोई रिकार्ड ही नहीं है कि हम आप को दिखा सकें कि अमुक व्यक्ति अपराधी था या नहीं था। अर्थात थाने का रिकार्ड विभाग इतना कमजोर है कि उसके पास कुछ भी पुख्ता जानकारी नहीं है।    

सरकार को इन मजदूरों से खतरा है, जिनके पास रोटी कमाने का जरिया तक नहीं, जो मुश्किल से अपना घर चला रहे हैं जिनका कभी कोई आपराधिक रिकार्ड ही नहीं, उन्हें हाज़िरी देने को कहा जाता है, और जो वास्तविक अपराधी हैं जो किसानों पर गाड़ी चढ़ा देते हैं, जो धर्म संसद में एक समुदाय विशेष के खिलाफ जहरीले भाषण देते हैं उन्हें ज़मानत मिल जाती है, किसानों मजदूरों को जमानत तक नहीं मिलती। ये है उत्तर प्रदेश सरकार का असली चेहरा जो हिंदुत्व के नकाब में है पर कारनामे अपराधियों वाले।

ये हालात है आप की सेवा में तत्पर उत्तर प्रदेश पुलिस का, एक भगवाधारी मुख्यमंत्री जो अपनी और अपने प्रशासन की तारीफ करते नहीं थकता, उसकी पुलिस का हाल इस तरह का है। एक ऐसा समय जब लोग गरीबी से बेहाल हैं, उत्तर प्रदेश का आंकड़ा अपराध और गरीबी दोनों में आगे है, कोरोना के बाद छोटे कारोबारी मजदूर बन चुके हैं, जिनके लिए रोज कुआं खोदना रोज पानी पीने की स्थिति है उन लोगों से चुनाव के नाम पर वसूली योगी जी की नाक के नीचे राजधानी लखनऊ में हो रही है, तो प्रदेश का हाल और ईमानदार प्रशासन के हालात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

(लेखिका रिसर्च स्कॉलर व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Uttar pradesh
Yogi Adityanath
UP police
UP Assembly Elections 2022
CAA

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • ghazipur
    भाषा
    गाजीपुर अग्निकांडः राय ने ईडीएमसी पर 50 लाख का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया
    30 Mar 2022
    दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दो दिन पहले गाजीपुर लैंडफिल साइट (कूड़ा एकत्र करने वाले स्थान) पर भीषण आगजनी के लिये बुधवार को डीपीसीसी को ईडीएमसी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाने और घटना के…
  • paper leak
    भाषा
    उत्तर प्रदेश: इंटर अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा निरस्त, जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित
    30 Mar 2022
    सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया पर परीक्षा का प्रश्न पत्र और हल किया गया पत्र वायरल हो गया था और बाजार में 500 रुपए में हल किया गया पत्र बिकने की सूचना मिली थी।
  • potato
    मोहम्मद इमरान खान
    बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान
    30 Mar 2022
    पटनाः बिहार के कटिहार जिले के किसान राजेंद्र मंडल, नौशाद अली, मनोज सिंह, अब्दुल रहमान और संजय यादव इस बार आलू की बम्पर पैदावार होने के बावजूद परेशान हैं और चिंतित हैं। जि
  • east west
    शारिब अहमद खान
    रूस और यूक्रेन युद्ध: पश्चिमी और गैर पश्चिमी देशों के बीच “सभ्य-असभ्य” की बहस
    30 Mar 2022
    “किसी भी अत्याचार की शुरुआत अमानवीयकरण जैसे शब्दों के इस्तेमाल से शुरू होती है। पश्चिमी देशों द्वारा जिन मध्य-पूर्वी देशों के तानाशाहों को सुधारवादी कहा गया, उन्होंने लाखों लोगों की ज़िंदगियाँ बरबाद…
  • Parliament
    सत्यम श्रीवास्तव
    17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़
    30 Mar 2022
    हमें यह भी महसूस होता है कि संसदीय लोकतंत्र के चुनिंदा आंकड़ों के बेहतर होने के बावजूद समग्रता में लोकतंत्र कमजोर हो सकता है। यह हमें संसदीय या निर्वाचन पर आधारित लोकतंत्र और सांवैधानिक लोकतंत्र के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License