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भारत
राजनीति
होटलों को कोरोना अस्पतालों में बदलने का फैसला कितना सही है?
सरकार के निजी होटलों को कोरोना अस्पतालों से अटैच करने के आदेश पर चिंता जताते हुए फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। फेडरेशन ने होटल के बुनियादी ढांचे से लेकर कर्मचारियों की ट्रेनिंग तक को कोरोना मरीज़ों के प्रतिकूल बताया है।
सोनिया यादव
20 Jun 2020
 Hotels to corona hospitals
Image courtesy : Times of India

दिल्ली: ‘हमें आश्चर्य है कि सरकार ने पहले अशोक, सम्राट और सेंटॉर जैसे सरकारी होटलों को क्यों नहीं कोविड-19 अस्तपाल में बदला। ये काम प्राइवेट होटलों को अस्पतालों से अटैच करने से पहले किया जाना चाहिए था।’ ये स्टेटमेंट फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी FHRAI का है।

फेडरेशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर होटलों को कोविड-19 अस्पताल बनाने के फैसले पर अपनी चिंता व्यक्त की है। पत्र में कहा गया है कि जिन होटलों को कोविड-19 अस्पताल में बदला जा रहा है, उनका बुनियादी ढांचा अस्पतालों के अनुरूप नहीं है।

होटल कोविड-19 के मरीजों के लिए जरूरी सुविधाओं से लैस नहीं हैं और ना ही होटल के कर्मचारियों को स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों की तरह कोई पेशेवर प्रशिक्षण मिला है। पत्र में ये भी कहा गया है कि होटलों को कोविड-19 अस्पताल के रूप में बदलने से उनके कारोबार पर भी असर पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला?

कोरोना महामारी के चलते हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर दोहरी मार पड़ी है। एक ओर टूरिज्म बिज़नेस ठप होने से हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं तो वहीं दूसरी ओर अब सरकार द्वारा निज़ी होटलों को कोविड-19 अस्पतालों में बदलने की कवायद शुरू हो गई है, जिसने इस इंडस्ट्री के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

12 जून को दिल्ली सरकार द्वारा एक आदेश पारित किया गया। जिसमें कहा गया कि कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सरकार निज़ी होटलों पर अस्थाई अधिग्रहण कर उसे कोविड-19 अस्पतालों से अटैच करगी। आदेश के अनुसार, ऐसे अस्पतालों में कोविड-19 के इलाज के लिए चिह्नित निजी अस्पतालों के डॉक्टर इलाज करेंगे।

इस सरकारी फरमान के खिलाफ कई होटल मालिकों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन शुक्रवार, 19 जून को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने प्रशासन के इस आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि “कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और हालात पर काबू पाने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।” अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।

क्या तर्क था होटल मालिकों का?

इरोज़ ग्रैंड रिसॉर्टस एंड होट्ल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश हुए वकील ने कोर्ट में जिला मजिस्ट्रेट/जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा जारी आदेश की कॉपी सौंपते हुए कहा कि इस आदेश में विवेक का उपयोग नहीं किया गया है। कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया जैसे... कोविड-19 अस्पताल के रूप में उपयोग किए जाने वाले होटल के व्यावहारिक पहलुओं पर स्पष्टता नहीं है, डॉक्टरों और अन्य नर्सिग कर्मियों तथा होटल के कर्मचारियों की उपलब्धता आदि पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

सरकार ने क्या कहा?

दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि कोरोना वायरस से संकम्रित लोगों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण कोविड-19 मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ऐसे कदम उठाए गए हैं। वकील ने कहा कि ऐसे हालात के कारण ही प्रशासन ने शहर के विभिन्न होटलों के संबंध में ऐसे ही आदेश दिए हैं।

FHRAI का क्या कहना है?

एफएचआरएआई के उपाध्यक्ष गुरबख्श सिंह कोहली का कहना है कि सरकार की विज्ञान भवन जैसी इमारतें एक अस्पताल के तौर पर बेहतर विकल्प हो सकती हैं। राज्य सरकार को होटलों से पहले नर्सिंग होम, अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं और पॉलीक्लीनिक इत्यादि को कोविड-19 देखभाल की सुविधा के तौर पर बदलना चाहिए था।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में फेडरेशन ने सरकार द्वारा होटलों को भुगतान के संदर्भ में भी चिंता जताई है। पत्र के अनुसार, होटलों को यह भी नहीं बताया गया कि उन्हें कितने समय में इसका भुगतान मिलेगा। इससे होटलों के बिलों का भुगतान होने में बहुत देर होगी और उद्योग को आगे अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

ताजमान सिंह होटल अभी रहने योग्य नहीं

ताजमान सिंह होटल को सर गंगाराम अस्पताल से अटैच किए जाने पर इंडियन होटल्स कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह सरकार के साथ अपना सहयोग जारी रखेगी लेकिन उसके ताजमहल होटल में मरम्मत का काम चल रहा है। जिसके चलते यह अभी रहने योग्य नहीं है। खासकर डॉक्टर और मरीजों के लिए तो बिल्कुल नहीं।

भारतीय उद्योग परिसंघ ने भी जताई चिंता

बता दें कि जिन होटलों को अस्पतालों से अटैच किए जा रहा है उसमें दक्षिण दिल्ली के दो शीर्ष होटल, वसंत कॉन्टिनेंटल और हयात रीजेंसी के अलावा सिविल लाइन्स में ओबेरॉय ग्रुप का मेडेंस होटल, भीकाजी कामा प्लेस में हयात रीजेंसी,  लाजपत नगर में रैडिसन द्वारा पार्क इन और पीतमपुरा में होटल रामदा हैं।

इस लिस्ट में होटल क्राउन प्लाजा, होटल सूर्या, होटल सिद्धार्थ, होटल जीवितेश, शेरेटन साकेत भी शामिल हैं। इस संबंध में भारतीय उद्योग परिसंघ की ‘राष्ट्रीय पर्यटन एवं आतिथ्य समिति’ पहले ही चिंता जाहिर कर चुकी है।

होटल स्टाफ का क्या कहना है?

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री मेडिकल सेक्टर से काफी अलग है। ऐसे में कोविड-19 मरीज़ों की देखभाल के साथ होटल कर्मचारियों को इस बीमारी संक्रमण से बचाना निश्चित ही एक बड़ी चुनौती है।

नई दिल्ली के सूर्या होटल के वाइस प्रेसिडेंट ऑपरेशंस ग्रीश बिंद्रा कहते हैं कि हमारे पास होटल मैनेजमेंट ग्रेजुएट हैं, जो मेडिकल मामलों को संभालना नहीं जानते हैं। ऐसे में मरीज़ों के लिए होटल में तमाम बदलाव करने की आवश्यकता होगी, होटल स्टाफ को ट्रेनिंग देनी होगी। कई कर्मचारी अपने परिवार के साथ घरों में रहते हैं, उन्हें संक्रमण से बचाना भी हमारी प्राथमिकता है।

एक पांच सितारा होटल के बैंक्वेट मैनेज़र ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, “सरकार होटल के कमरों से ज्यादा बैंक्वेट हॉल में दिलचस्पी दिखा रही है। क्योंकि वो समझ रहे हैं कि हॉल में आसानी से 40-50 बेड लगाए जा सकते हैं, लेकिन ये बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। बैंक्वेट में वाशरूम आदि की सुविधा इतने लोगों के लिए नहीं हो सकती। साथ ही होटल स्टाफ को भी संक्रमण का खतरा होगा। इसके अलवा एयर कंडीशनिंग से लेकर वेंटीलेशन तक बहुत सारे बदलाव करने होंगे क्योंकि इस तरह के होटल अस्पतालों के लिए एक बैकअप के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं।”

इसे भी पढ़ें: लॉकडाउन में होटल और टूरिज़्म इंडस्ट्री को करोड़ों का नुक़सान, लाखों नौकरियां दांव पर

गौरतलब है कि कोरोना के कहर के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुज़र रही है। भारत भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। देश की अर्थव्यवस्था की हालत पहले ही खस्ता थी लेकिन इस महामारी की मार ने होटल और टूरिज्म इंडस्ट्री बहुत बड़ा झटका दिया है।

एक आकलन के मुताबिक भारत की वर्क फोर्स यानी यहां जितने भी लोग काम करने वाले हैं, उनका करीब 12.75 फीसदी हिस्सा होटल और टूरिज़्म इंडस्ट्री में काम करता है। फाइनेंशियल सर्विसेज और बिजनेस एडवाइडरी फर्म केपीएमजी की ओर से 1 अप्रैल को जारी रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना में हुए लॉकडाउन की वजह से अकेले टूरिज़्म और होटल इंडस्ट्री की करीब 70 फीसदी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।

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