NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
पंजाब कैसे कर रहा है 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड की तैयारी
पंजाब पूरा किसानी झण्डों के रंग में रंगा नज़र आ रहा है। लोगों ने अपने स्तर पर किसानी झण्डे बनाने शुरू कर दिए हैं। ‘पंजाब फर्स्ट’ नामक संस्था ने पूरे पंजाब में किसानी झण्डे लगाने की मुहिम शुरू की है।
शिव इंदर सिंह
25 Jan 2021
पंजाब

किसान यूनियनों के आह्वान पर 26 जनवरी को दिल्ली में होने वाली ट्रैक्टर परेड की तैयारियां पंजाब में ज़ोर-शोर से चलीं और अब किसान दिल्ली के लिए कूच कर रहे हैं। राज्य में 20 जनवरी से लेकर 22 जनवरी तक ट्रैक्टर परेड की रिहर्सल चली जिसके तहत हजारों की गिनती में ट्रैक्टरों द्वारा गांव-गांव में मार्च किया गया जिसके माध्यम से लोगों को दिल्ली जाने के लिए प्रेरित किया गया। पंजाब के गांवों की पंचायतों ने दिल्ली जाने वाले ट्रैक्टरों का खर्चा खुद उठाने के लिए चंदा इकठ्ठा करना शुरू कर दिया। बहुत सारी सामाजिक संस्थाएं भी इस काम में योगदान देने के लिए आगे आ रही हैं। पूरा पंजाब किसानी झण्डों के रंग में रंगा दिखाई दे रहा है।

किसानों में दिल्ली में ट्रैक्टर परेड का पूरा जोश है। अपने ट्रैक्टर को सजा रहा लुधियाना जिले का नौजवान किसान हरदीप सिंह पूरे उत्साह से कहता है, “26 तारीख को हर हालत में मैं दिल्ली ट्रैक्टर परेड में शामिल होऊंगा। अब तक गणतंत्र दिवस पर जवान परेड करते आये हैं इस बार जवान के साथ किसान भी परेड करेगा। हम इस परेड द्वारा सरकार को संदेश देना चाहते हैं कि पूरा देश सरकार द्वारा लाये गए काले कृषि कानूनों के विरुद्ध है। मैं अकेला ही नहीं मेरे गांव से पचास ट्रैक्टर दिल्ली परेड में शामिल होने के लिए जा रहे हैं।”

जिला लुधियाना के ही बुजुर्ग दम्पती जोड़े जगतार सिंह व परमजीत कौर का कहना है, “हम दोनों पति-पत्नी भी इस परेड में शामिल होंगे। गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में देश के किसानों का सैलाब मोदी सरकार के सभी भ्रम दूर कर देगा। मोदी सरकार को अपना अहंकार छोड़ना ही पड़ेगा।”

पंजाब के किसान नेताओं का मानना है कि यह आन्दोलन अब सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहा इसके साथ समाज का हर वर्ग जुड़ रहा है। सरकार किसानों के सब्र का इम्तिहान लेना चाहती है पर किसान शांतिपूर्ण आन्दोलन के रास्ते सरकार को झुका देंगे। पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठन बीकेयू एकता (उगराहां) के प्रांतीय जनरल सेक्रेटरी सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने बताया, “किसान परेड की रिहर्सल के दौरान हमारे संगठन ने दो दिनों में 1245 गांवों में 15000 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ मार्च निकाला। लोगों ने हमें भरपूर समर्थन दिया। 26 जनवरी की दिल्ली परेड के लिए हम खनौरी व डबवाली के रास्ते करीब 40,000 ट्रैक्टरों के साथ जाएंगे। हमारे 7000 ट्रैक्टर टिकरी बॉर्डर पर पहले ही खड़े हैं।”

उधर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का भी दावा है कि उनके 40 से 50 हजार ट्रैक्टर पंजाब से दिल्ली किसान परेड के लिए रवाना होंगे। जिला बरनाला में ट्रैक्टर परेड की तैयारियों में व्यस्त इंकलाबी केंद्र पंजाब के नेता नारायण दत्त और भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के नेता मलकीत सिंह हमें बताते हैं,  “बरनाला में ट्रैक्टर रैली को लेकर लोगों में काफी जोश है, हर गांव से 100 के करीब ट्रैक्टर दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। गांव के लोगों द्वारा अपने तौर पर चंदा इकठ्ठा करके इस मार्च के लिए मदद की जा रही है।”

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के जिला तरनतारन के प्रधान इंदरजीत सिंह बताते है कि हमारे संगठन का 400 से अधिक ट्रैक्टर दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है। इसी तरह कुल हिन्द किसान सभा ने भी ट्रैक्टर मार्च की तैयारी जोर शोर से करनी शुरु कर दी है। ट्रैक्टर मार्च को आम लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। बहुत सारे नौजवान अपने दम पर भी ट्रैक्टर मार्च कर रहे है। 

महिला किसान नेता हरिंदर कौर बिंदु ने हमे बताया है कि दिल्ली में ट्रैक्टर परेड में महिलाएं भी बड़ी गिनती में शामिल हो रही हैं। बहुत सारी औरतों ने हमें वालंटियर के तौर पर अपने नाम लिखवाए हैं।

लोग अपने किसान नेताओं की सादगी से प्रभावित हैं। बठिंडा जिला के गांव मंडीकलां के नौजवान जसराज सिंह ने जब किसान नेताओं की सादगी देखी तो उसने अपनी बुलेरो गाड़ी की चाबी किसान यूनियन को सौंप दी। जसराज बताता है, “किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल खेती करता है व बस में सफर करता है। जब मुझे पता लगा कि इसी यूनियन का जिला प्रधान मोटरसाईकिल पर दिल्ली मोर्चे पर गया है, तो मेरा मन भर आया मैंने अपनी बुलेरो गाड़ी इन नेताओं को सौंप दी।” एक सरकारी अधिकारी हरमीत सिंह ने किसान नेताओं को एक लाख रूपये, साउंड व टेंट का सामान दिया है। इस तरह  लोग अलग-अलग ढंग से आन्दोलन में अपना योगदान डाल रहे हैं।

मालवा क्षेत्र के मलोट इलाके में विवाह की रिसेप्शन के मौके पर लड़के के मां-बाप ने लोगों से शगुन नहीं लिया बल्कि समागम में एक डिब्बा रख कर स्टेज से ऐलान किया कि मेहमान शगुन न दें बल्कि इच्छा मुताबिक इस डिब्बे में दान डाल जाएं। यह डिब्बा किसान आन्दोलन के लिए रखा गया था। मालवा क्षेत्र में दर्जनों विवाह समारोहों में डीजे लगा तो नौजवानों ने किसान आन्दोलन के गाने बजाये व विवाह समारोहों में बराती गाड़ियों पर भी किसानी झण्डे लगाये गए।

पंजाब पूरा किसानी झण्डों के रंग में रंगा नज़र आ रहा है। लोगों ने अपने स्तर पर किसानी झण्डे बनाने शुरु कर दिए हैं। ‘पंजाब फर्स्ट’ नामक संस्था ने पूरे पंजाब में किसानी झण्डे लगाने की मुहिम शुरू की है। संस्था के वालंटियर मानिक गोयल ने जानकारी दी है, “हमारे द्वारा 20,000 किसानी झण्डे किसान संघर्ष को मजबूत बनाने के लिए मुफ़्त बांटे जा रहे हैं। इन पीले रंग के झण्डों पर ‘किसान मजदूर एकता ज़िन्दाबाद’ का नारा लिखा हुआ है। ये झण्डे शहरों, गांवों के मुख्य स्थानों पर, चौकों, घरों व दुकानों पर लगाये जा रहे हैं। 26 जनवरी को दिल्ली पहुंचने के लिए भी हम कैंपेन चला रहे हैं।”

किसानों ने जहाँ दिल्ली जाने के लिए अपने ट्रैक्टर तैयार कर लिए हैं वहीं शहरी क्षेत्रों के लोगों में भी काफी उत्साह है। शहरी लोगों भी अपनी गाड़ियों पर किसानी झण्डे व स्टीकर लगा कर आन्दोलन का समर्थन कर रहे हैं। लुधियाना में कई ऐसे दुकानदार हैं जो किसान आन्दोलन में हिस्सा डालने के लिए झण्डे व स्टीकर बिना मुनाफा कमाये लोगों को मुहैया करवा रहे हैं। लुधियाना के बस स्टैंड के नजदीक दुकानदार परमजीत सिंह ने बताया कि वह अपनी दुकान पर दस रुपये से लेकर 30 रूपये तक के किसानी झण्डे बेचता है, जरूरतमंदों को मुफ्त में भी दे दिए जाते हैं।

इस किसान संघर्ष की खास बात यह है कि अब इसकी गूंज रेलगाड़ियों में भी गूंजने लगी है। रेलवे स्टेशनों और रेल डिब्बों में किसानी झण्डों की बाढ़ आ गई है। रेलगाड़ियों में दिन-रात किसानों की भीड़ जुटती है। केसरी चुन्नियों वाली औरतें और किसान जब रेलगाड़ियों में चढ़ते हैं तो नया माहौल बन जाता है, आम यात्री भी किसान आन्दोलन के रंग में रंग जाता है।

दैनिक एक्सप्रेस गंगानगर से दिल्ली चलती है यह बठिंडा से सुबह 8:40बजे रवाना होती है। गंगानगर व अबोहर के किसानों के अलावा इस गाड़ी में मौड़ मंडी और मानसा के किसानों की भीड़ होती है। राजस्थान के किसान इस गाड़ी द्वारा दिल्ली मोर्चे में पहुँचते हैं। जब बहादुरगढ़ में किसान उतरते हैं तो गाड़ी एक तरह से सूनी हो जाती है।

मानसा के किसान दलीप सिंह का कहना है, “यह संघर्ष सिर्फ काले कानूनों तक सीमित नहीं है, हम अपनी फसल व नस्ल बचाने के लिए लड़ रहे हैं। इस किसान आन्दोलन ने पंजाब की फिजाओं में नया रंग भरा है। गणतन्त्र दिवस पर 26 जनवरी की किसानों की ट्रैक्टर परेड मोदी सरकार का अहंकार तोड़ने में सहायक होगी।”

पंजाब खेत मज़दूर यूनियन के जनरल सक्रेटरी लछमन सिंह सेवेवाला का कहना है कि 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के किए मज़दूरों के बड़े जत्थे शामिल होंगे। सेवेवाला का कहना है कि मज़दूरों की ज़िंदगी पर इन काले कृषि कानूनों का बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। इस आंदोलन में मजदूरों की भागीदारी कम नहीं है।

पंजाब के अलग अलग शहरों के डॉक्टर किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए 26 जनवरी को ऐम्बुलेंस के साथ ट्रैक्टर परेड में शामिल हो रहे हैं। इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डिवेलपमेंट के डॉक्टर अरुण मित्रा ने हमें बताया कि वह अब तक सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर 7 मेडिकल कैंप लगा चुके हैं। अब वे अपने साथियों के साथ 26 जनवरी की परेड में शामिल होंगे। इसके लिए लुधियाना से डॉक्टर ऐम्बुलेंसों के साथ ट्रैक्टर मार्च में शामिल होंगे ताकि किसानों को ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टरी सहायता दी जा सके।

लुधियाना से डॉ. मोनिका, डॉ. अरुण मित्रा, डॉ. जीएस ग्रेवाल, डॉ. एसके प्रभाकर, डॉ. गगनदीप सिंह, डॉ. नवदीप खैरा, पटियाला से डॉ. बलबीर सिंह आदि शामिल होंगे। डॉक्टरों के साथ नर्सें, लैब टैक्नीशियन और पैरा मेडिकल स्टाफ भी शामिल होगा।

(लेखक पंजाब से हैं और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

farmers protest
Punjab Farmers
Tractor March
26 January Kisan Parade
Farm bills 2020
republic day
AIKS
AIKSCC
women farmers

Related Stories

पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

महाराष्ट्र: किसानों की एक और जीत, किसान विरोधी बिल वापस लेने को एमवीए सरकार मजबूर

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’


बाकी खबरें

  • Uddhav Thackeray
    सोनिया यादव
    लचर पुलिस व्यवस्था और जजों की कमी के बीच कितना कारगर है 'महाराष्ट्र का शक्ति बिल’?
    24 Dec 2021
    न्याय बहुत देर से हो तो भी न्याय नहीं रहता लेकिन तुरत-फुरत, जल्दबाज़ी में कर दिया जाए तो भी कई सवाल खड़े होते हैं। और सबसे ज़रूरी सवाल यह कि क्या फांसी जैसी सज़ा से वाक़ई पीड़त महिलाओं को इंसाफ़ मिल…
  • jammu and kashmir
    अशोक कुमार पाण्डेय
    जम्मू-कश्मीर : परिसीमन को लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है बीजेपी
    24 Dec 2021
    बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर श्रीनगर में हिंदू मुख्यमंत्री बनवाने का जुनून सवार है। इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर घाटी व दूसरी जगह के लोगों को, ख़ुद के द्वारा पहुंचाए जा रहे दर्द को नज़रअंदाज़…
  • modi biden
    मोनिका क्रूज़
    2021 : चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की युद्ध की धमकियों का साल
    24 Dec 2021
    जो बाइडेन प्रशासन लगातार युद्ध की धमकी देने, निराधार आरोपों और चीन के विरुद्ध बहु-देशीय दृष्टिकोण बनाने के संकल्प को पूरा करने के साथ नए शीत युद्ध को गरमाए रखना जारी रखे हुए है।
  • unemployment
    रूबी सरकार
    लोगों का हक़ छीनने वालों पर कार्रवाई करने का दम भरने वाले मुख्यमंत्री ख़ुद ही छीन रहे बेरोज़गारों का हक़!
    24 Dec 2021
    इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, एमबीए करने के बाद भी मध्यप्रदेश के आईटीआई में शिक्षक सिर्फ 7200 रुपये प्रति महीने में काम करने के लिए मजबूर हैं, राज्य सरकार की ओर से राहत देने की बात भी हवाबाज़ी ही साबित हुई…
  • modi yogi
    लाल बहादुर सिंह
    चुनाव 2022: अब यूपी में केवल 'फ़ाउल प्ले' का सहारा!
    24 Dec 2021
    ध्रुवीकरण और कृपा बाँटने का कार्ड फेल होने के बाद आसन्न पराजय को टालने के लिए, अब सहारा केवल फ़ाउल प्ले का बचा है। ऐन चुनाव के समय बिना किसी बहस के जिस तरह निर्वाचन कार्ड को आधार से जोड़ने का कानून बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License