NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
वर्ष 2019 में कैसी रही महिलाओं की दुनिया?
'सतत विकास लक्ष्य-2019' हासिल करने में हम कहां पहुंचे, नीति आयोग ने सोमवार 30 दिसंबर को इस पर अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक दो मामलों में देश की स्थिति बेहद चिंतनीय है, वो है लैंगिक समानता और कुपोषण।
वर्षा सिंह
31 Dec 2019
women

सुकून की बात है कि छोटी बच्चियां अब भी गुड़िया बनाना पसंद करती हैं। वे उनके कपड़े डिजायन करती हैं। उनके बाल बनाती हैं। सितारे-मोती से अपनी गुड़िया की दुनिया सजाती हैं। लाल-पीले जैसे चटकीले रंगों से उनका घर सजाती हैं। यही छोटी बच्चियां फिर सेल्फ सिक्योरिटी के लिए त्वाइक्वांडो सीखने जाती हैं। बच्चियों को ज़रा सी दूरी पर अकेला छोड़ने में कुछ मांएं बहुत घबराती हैं। मांओं के मन में डर जम गया है कि उनकी गुड़िया की दुनिया के चटकीले रंग कोई छीन न ले। लेकिन बेटियां वहां दंगल काटती हैं। सामनेवाले को परास्त करने के लिए सारे दावपेंच आज़माती हैं।

ऐसी ही बेटियां जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करती हैं, तथ्यों-आंकड़ों और राजनीति के पुराने उदाहरणों से बताती हैं कि क्यों सीएए-एनआरसी लागू नहीं होना चाहिए, तो वे बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों को अचरज में डालती हैं। इन्हीं में से कोई लड़की हैदराबाद की एक सुनसान सड़क पर जला दी जाती है। उन्नाव की भीड़ भरी सड़क पर जलती हुई अकेली दौड़ती है, अपने दोषियों को सजा दिलाने की भरसक कोशिश करती हुई। इंसाफ...अंधेरे में दूर जलती हुई मशाल के जितनी उम्मीद जैसा दिखाई पड़ता है।
niti aayog pic.jpg

लैंगिक समानता और कुपोषण का खात्मा होना चाहिए मिशन 2020

अब इसी स्थिति को आंकड़ों से समझते हैं। सतत विकास लक्ष्य-2019 हासिल करने में हम कहां पहुंचे, नीति आयोग ने सोमवार 30 दिसंबर को इस पर अपनी रिपोर्ट जारी की। सतत विकास को लेकर संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 17 में से 16 मानकों पर ये रिपोर्ट जारी की गई। खुद नीति आयोग की रिपोर्ट की नज़र से देखें तो जिन दो मामलों में देश की स्थिति बेहद चिंतनीय है, वो है लैंगिक समानता और कुपोषण। यानी ये दो जरूरी मुद्दे होने चाहिए, जिन पर वर्ष 2020 में केंद्र और राज्य की सरकारों को सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए। सबसे अधिक बजट और संसाधन खर्च करने चाहिए।

लैंगिक समानता में पिछड़ा देश

लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण के मामले में देश में सिर्फ चार राज्य हैं जिन्हें 50 से ऊपर अंक मिले हैं। 50 अंक यानी लैंगिक समानता की दिशा में हम 50 फीसदी कार्य कर पा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में महिलाओं की स्थिति सबसे अच्छी है। इन्हें 100 में 53 अंक मिले हैं। हिमाचल प्रदेश को 52 अंक और केरल को 51 अंक मिले हैं। तेलंगाना (26 अंक) और दिल्ली (27 अंक) के साथ निचले पायदान पर हैं।

india map on gender equality.png

नीति आयोग की रिपोर्ट में लैंगिक समानता पर बनाया गया मानचित्र।

लैंगिक समानता को लेकर राज्यों की स्थिति- नीति आयोग

हिमाचल (52), केरल (51), सिक्किम (49), गोवा (46), पंजाब (46), मध्यप्रदेश (45), छत्तीसगढ़ (43),कर्नाटक (42), नागालैंड (42), महाराष्ट्र (41), उत्तरप्रदेश (41), बिहार (40), तमिलनाडु (40), राजस्थान (39), उत्तराखंड (38), पश्चिम बंगाल (38), आंध्र प्रदेश (37), मिज़ोरम (37), गुजरात (36), हरियाणा (36), ओडीशा (35), झारखंड (34), मणिपुर (34), मेघालया (34), अरुणाचल प्रदेश (33), असम (33), त्रिपुरा (32), तेलंगाना (26)।

केंद्रशासित राज्यों की स्थिति

जम्मू-कश्मीर (53), लद्दाख (53), अंडमान-निकोबार (48), चंडीगढ़ (47), दादरा और नागर हवेली (44), दमन और दिव (39), लक्षद्वीप (37), पुड्डुचेरी (35) और दिल्ली(27)।

महिलाओं की ये स्थिति लिंग अनुपात, समान वेतन, महिलाओं-बच्चियों से यौन हिंसा, घरेलू हिंसा, विधानसभा में महिलाओं की स्थिति, महिलाओं से जबरन श्रम कराना, भू-स्वामित्व जैसे मानकों के आधार पर तय की गई है।

समाज में महिलाओं की मौजूदा स्थिति

नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि लैंगिक समानता के लिए जेंडर सेंसेटिव डाटा व्यवस्था को ठीक करना हमारी पहली चुनौती है। इसमें ट्रांस जेंडर भी शामिल हैं। क्योंकि वो तो कहीं पीछे छूटे हुए हैं। कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक महिला श्रमिक हैं। असंगठित क्षेत्र में महिला श्रमिकों की बड़ी संख्या हैं। जबकि वेतन के मामले में वे घोर असमानता झेल रही हैं। ग्रामीण भारत में 75 फीसदी महिलाएं कृषि कार्यों में जुड़ी हैं, उनके पास भू-स्वामित्व मात्र 13.96 प्रतिशत है। इसकी वजह से कृषि ऋण लेने जैसे कई मामलों में उन्हें मुश्किलें आती हैं। राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं की मौजूदगी मात्र 8.32 प्रतिशत है। लिंगानुपात के मामले में देश की स्थिति प्रति 1000 लड़कों पर 896 लड़कियों की है। प्रति एक लाख महिलाओं में से 58 अपराध की शिकार हैं। बच्चों के साथ अपराध के 59.97 प्रतिशत यौन हिंसा से जुड़े हुए हैं। हर तीन में से एक महिला अपने पति द्वारा हिंसा की शिकार है।

जब हम 21वीं सदी के पहले दशक की ओर मुंह मोड़ कर देखेंगे तो 2019 की महिला हैदराबाद, उन्नाव की रेप पीड़िता के साथ हजारों-लाखों बच्चियों-महिलाओं के नाम है, जो पुलिस की एफआईआर में दर्ज हैं, बहुत से ऐसे भी हैं, जिनका नाम कहीं दर्ज नहीं हुआ, जो मारी गईं और पता नहीं चला। 2018 का कठुआ रेप केस, 2013 का निर्भया केस, 2015 में बदायूं में पेड़ पर लटके मिले दो बहनों के शव...। ये लिस्ट बहुत लंबी है। लैंगिक समानता के मामले में देश का अधिकांश नक्शा लाल नज़र आता है।

इतने निराशाजनक मोड़ पर लड़कियों को छोड़ने का मन नहीं करता। तो जब आप पीछे पलटे तो देखें कि 33 फीसदी आरक्षण और दस फीसदी उम्मीदवारी न मिलने के बावजूद लोकसभा में कोई 14 प्रतिशत महिलाएं इस वर्ष पहुंच गई हैं। खेल के मैदान तो आपके दिल को सोने-चांदी के मेडल से भर देंगे। असम के छोटे से गांव की हिमा दास पूरा दम लगाकर दौड़ती नज़र आती है। जब सब क्रिकेट-क्रिकेट चिल्लाते हैं, ऐतिहासिक जीत के साथ बैडमिंटन कोर्ट पर पीवी सिंधू सोना चूमती नज़र आती है।

रेस के मैदान में हारकर जीतती हुई दुती चंद दिखाई पड़ती है। दो बच्चों की मां और देहरादून में आईटीबीपी की डीआईजी पद पर तैनात अपर्णा कुमार विश्व की सात ऊंची चोटियों (सेवन समिट्स) और दक्षिणी ध्रुव को फतह कर, तिरंगा फहरा रही है। उत्तरकाशी की एक सादा सी लड़की दक्षिण अफ्रीका की किलमिंजारो चोटी को फतह कर लौटी है। टिकटॉक पर उनके तीखे तेवर हैं। इंस्टाग्राम पर उनकी मुस्कानें बिखरी हुई हैं। फेसबुक पर अपने लिखे से वे कितनों को आहत कर रही हैं। सर्दी की छुट्टियों में एक छोटी बच्ची रंग-बिरंगे स्केच लेकर फिर से अपनी गुड़िया के संसार को सुंदर बनाने में जुट गई है।

Sustainable Development Goal-2019
gender inequality
gender discrimination
malnutrition in children
malnutrition in India
malnutrition
NITI Aayog

Related Stories

क्यों आर्थिक विकास योजनाओं के बजट में कटौती कर रही है केंद्र सरकार, किस पर पड़ेगा असर? 

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: महिलाओं के संघर्ष और बेहतर कल की उम्मीद

लॉकडाउन में लड़कियां हुई शिक्षा से दूर, 67% नहीं ले पाईं ऑनलाइन क्लास : रिपोर्ट

यूपी चुनाव : माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य की हर तरह से अनदेखी

5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल

जलसंकट की ओर बढ़ते पंजाब में, पानी क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?

कॉर्पोरेट के फ़ायदे के लिए पर्यावरण को बर्बाद कर रही है सरकार

मोदी सरकार और नेताजी को होलोग्राम में बदलना


बाकी खबरें

  • मीडियाकर्मियों पर चौतरफ़ा हमला : डीयूजे
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मीडियाकर्मियों पर चौतरफ़ा हमला : डीयूजे
    19 Jun 2021
    आजकल असहिष्णुता का एक बढ़ता हुआ माहौल है जिसमें ट्वीट्स, फेसबुक पोस्ट और मीडिया के लोगों द्वारा रिपोर्ट पर उनके खिलाफ मनमानी आरोप दायर किए जा रहे हैं।
  • केंद्र किसानों के आंदोलन को बदनाम कर रही है, मांगें पूरी करे सरकार : एसकेएम
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केंद्र किसानों के आंदोलन को बदनाम कर रहा है, मांगें पूरी करे सरकार : एसकेएम
    19 Jun 2021
    एसकेएम ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने के लिए हर अवसर का जमकर फायदा उठाया जा रहा है। हालांकि, उनकी विफल रणनीति को फिर से विफल होना तय है। कई राज्य सरकारें आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी हैं तथा…
  • बाइडेन - पुतिन शिखर सम्मेलन से क्या कुछ हासिल?
    एम. के. भद्रकुमार
    बाइडेन - पुतिन शिखर सम्मेलन से क्या कुछ हासिल?
    19 Jun 2021
    बाइडेन-पुतिन शिखर सम्मेलन का मुख्य परिणाम रणनीतिक संवाद को फिर से शुरू करना और और साइबर मुद्दों का समाधान करना था।
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 60,753 नए मामले, 1,647 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 60,753 नए मामले, 1,647 मरीज़ों की मौत
    19 Jun 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 60,753 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में कोरोना के मामलों की संख्या बढ़कर 2 करोड़ 98 लाख 23 हज़ार 546 हो गयी है।
  • पश्चिम बंगाल: मूल्य वृद्धि, कालाबाज़ारी के ख़िलाफ़ वाम मोर्चे का महंगाई विरोधी पखवाड़ा का आह्वान
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: मूल्य वृद्धि, कालाबाज़ारी के ख़िलाफ़ वाम मोर्चे का महंगाई विरोधी पखवाड़ा का आह्वान
    19 Jun 2021
    16 जून को मीडिया को संबोधित करते हुए वाम मोर्चा के अध्यक्ष बसु ने कहा था कि पिछले डेढ़ महीने में पेट्रोलियम उत्पादों की क़ीमतों में रिकॉर्ड 21 गुना की वृद्धि हुई है, जिससे वस्तुओं की क़ीमतों में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License