NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
लॉकडाउन में होटल और टूरिज़्म इंडस्ट्री को करोड़ों का नुक़सान, लाखों नौकरियां दांव पर
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के मुताबिक कोरोना के बाद हुए लॉकडाउन की वजह से बड़े होटल समूहों को करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही केवल पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से ही 70 फीसदी नौकरियां जा सकती हैं।
सोनिया यादव
02 May 2020
होटल और टूरिज़्म इंडस्ट्री

“लगभग एक सदी पुराने इस होटल कंपनी के इतिहास में ये सबसे बुरा दौर चल रहा है। कंपनी की वित्तीय स्थिति 11 सितंबर 2011 हमले और 2008-09 की वैश्विक मंदी से भी बुरी है।”

दुनिया की सबसे बड़े होटल चेन मैरियट इंटरनेशनल के चीफ एग्जीक्युटिव आर्ने सॉरेन्सन ने कोरोना महामारी के बीच अपने कर्मचारियों को एक वीडियो मैसेज में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों की तुलना में इस वक्त मैरियट का बिजनेस 75 फीसदी तक प्रभावित हुआ है।

इस वीडियों में आर्ने सॉरेन्सन ने कहा कि वो खुद और कंपनी के बोर्ड चेयरमैन बिल मैरियट इस दौरान कोई सैलरी नहीं लेंगे। साथ ही एग्जीक्युटीव टीम भी अपनी सैलरी में 50 फीसदी की कटौती करेगी। कंपनी ने यह फैसला कोरोना वायरस की वजह से ग्लोबल ट्रैवल पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर लिया है।

कंपनी के एक अधिकारी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया कि कोरोना के चलते हॉस्पिटैलिटी सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। होटल इंडस्ट्री को इससे उबरने में अभी लंबा समय लग सकता है, इसलिए कंपनी लॉन्ग टर्म गोल लेकर चल रही है।

उन्होंने कहा, “मैरियट ने दुनिया के अलग-अलग देशों में कार्यरत अपने कॉर्पोरेट कर्मचारियों को इस महीने से 60 से 90 दिनों तक के लिए छुट्टी पर भेज दिया है। इस दौरान कंपनी ने अपने 7,300 वैश्विक होटलों में से लगभग 25% को बंद रखने का फैसला भी किया है। हालांकि कंपनी छुट्टी पर भेजे अपने कर्मचारियों को आंशिक पेमेंट जारी रखेगी और जिन कर्मचारियों को छुट्टी के लिए नहीं भेजा जाएगा, उनकी सैलरी में से भी 20 फीसदी की कटौती की जाएगी।”

बता दें कि मैरियट इंटरनेशनल दुनिया की सबसे बड़ी होटल चेन है और इस वक्त इसके व्यापार में 75 फीसदी की कमी देखी जा रही है। दुनियाभर में इस होटल के पास लगभग 14 लाख कमरे हैं, 30 ब्रांडस और 7,300 से अधिक प्रॉपर्टीज है।

इससे पहले वैश्विक यात्राओं पर रोक के बाद अप्रैल में सॉफ्टबैंक ग्रुप समर्थित OYO होटल्स एंड होम्स ने अगस्त तक चार महीनों के लिए अपने सभी कर्मचारियों के वेतन में 25 प्रतिशत की कटौती कर कुछ कर्मचारियों को सीमित लाभ के साथ छुट्टी पर भी भेज दिया है।

एक नोट में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित कपूर ने कहा, "हमारी कंपनी भारत के लिए एक मुश्किल लेकिन आवश्यक कदम उठा रही है, हम सभी OYOprenuers को उनके तय वेतन में 25 कटौती की को स्वीकार करने के लिए कह रहे हैं।"

राहत पैकेज से निराश

गौरतलब है कि सरकार द्वारा जारी राहत पैकेज में होटल और टूरिज़्म इंडस्ट्री के हाथों निराशा ही लगी है। सरकार से मदद के आभाव में इस क्षेत्र में कार्यरत करोड़ों लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआएआई) के प्रेसिडेंट अनुराग कटारियार का कहना है कि सरकार की तरफ से दिए गए इकनॉमी पैकेज में हम लोगों को कुछ मिला नहीं है, अभी तक इस सेक्टर के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। आरबीआई की तरफ से राहत जरूर मिली है लेकिन वो मौजूदा दौर में नाकाफी है। इस सेक्टर का सालाना टर्न ओवर 4 लाख करोड़ से ज्यादा का है, उस हिसाब से इसका नुकसान भी ज्यादा होगा।

इम्प्रेसरियो इंटरटेनमेंट एंड हॉस्पिटैलिटी प्रा. लिमिटेड के सीईओ और एमडी रियाज अमलानी मानते हैं कि ये वक्त फायदे और नुकसान का नहीं है। लेकिन होटल उद्योग पूरे तरह नकदी पर टिका हुआ है। अगर आगे भी यही हाल रहा तो जल्द ही छुट्टी पर भेजे गए कर्मचारियों के भुगतान और भविष्य पर असर पड़ेगा।

अमलानी कहते हैं, “देश भर के 60 रेस्टोरेंट में हमारे करीब 3,500 कर्मचारी काम करते है। हमारे सामने चुनौती इस बात की है कि हम अपने कर्मचारियों को सैलरी कैसे दें? अगर जल्द ही सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो हम बर्बाद हो जाएंगे।”

वो आगे सरकार से अनुरोध करते हैं कि टैक्स के रूप में इस सेक्टर से दिए जाने वाले पैसे की मियाद को कम-से-कम एक साल के लिए बढ़ाया जाना चाहिए ताकि हम खुद को बैलेंस कर सकें।

लेमन ट्री होटल्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पतंजलि जी केसवानी ने इस कठिन समय में मदद के लिए सरकार से गुहार लगाई है। उनके अनुसार होटल ऐसा कारोबार है जो कैपिटल इंटेंसीव है और उसमें स्थिर लागत काफी ऊंची है।

उन्होंने समाचार ऐजेंसी पीटीआई से कहा, “इसमें गहन पूंजी में मुख्य हिस्सा वित्तीय संस्थानों से लिया गया कर्ज है और इस कर्ज पर ब्याज के साथ कर्ज अदायगी भी करनी होती है। यानी इस क्षेत्र पर स्थिर लागत में कई चीजें शमिल हैं जिसमें वेतन, सरकार को दिया जाना वाला शुल्क एवं अन्य स्थायी किस्म के खर्चे शामिल हैं।

उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि आने वाले समय में होटलों में उपलब्ध जगह के मुकबले बुकिंग कम रहने वाली है, इसीलिए होटलों को या तो बंद करना होगा या सीमित स्तर पर चलाना होगा। केसवानी ने कहा कि उद्योग सरकार से कोई प्रोत्साहन पैकेज नहीं मांग रहा बल्कि हम केवल इतना चाहते हैं कि वह हमें सरकारी शुल्कों में छूट समेत न्यूनतम समर्थन दे जिससे हम अपने कर्मचारियों को वेतन दे सकें।

सिग्नेट होटल एंड रिसार्ट के संस्थापक और प्रबंध निदेश्क सरबेन्द्र सरकार का कहते हैं, “देशव्यापी बंद से होटल उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। हमें कोई नई बुकिंग नहीं मिल रही और पहले की बुकिंग रद्द करायी जा रही हैं।”

उन्होंने कहा कि रिज़र्व बैंक द्वारा कर्ज लौटाने में तीन महीने की मोहलत दिये जाने से कुछ राहत मिली है और उद्योग को उम्मीद है कि सरकार कुछ ऐसी योजनाएं लाएगी जिससे क्षेत्र को राहत मिलेगी।

क्या है सरकार से मांग?

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) ने इस संकट से उबरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ राहत की मांग की है।

  • सरकार कर्ज, ब्याज और EMI को चुकाने के लिए कम से कम छह से 12 महीने तक का समय दे।
  • 6 महीने तक के लिए सरकार कोई जीएसटी न ले।
  • लीज, किराया, प्रापर्टी टैक्स और एक्साइज टैक्स को कुछ वक्त के लिए टाल दिया जाए।
  • महामारी के खात्में के बाद सॉफ्ट लोन दिया जाए ताकि होटल और रेस्टोरेंट को दोबारा शुरू किया जा सके।

70 फीसदी नौकरियों पर खतरा

एक आकलन के मुताबिक भारत की वर्क फोर्स यानी यहां जितने भी लोग काम करने वाले हैं, उनका करीब 12.75 फीसदी हिस्सा होटल और टूरिज़्म इंडस्ट्री में काम करता है।फाइनेंशियल सर्विसेज और बिजनेस एडवाइडरी फर्म केपीएमजी की ओर से 1 अप्रैल को जारी रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना में हुए लॉकडाउन की वजह से अकेले टूरिज़्म और होटल इंडस्ट्री की करीब 70 फीसदी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।

वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिजम काउंसिल के अनुसार भारत में फिलहाल ट्रेवल और टूरिजम सेक्टर में करीब 90 लाख नौकरियों पर ज्यादा खतरा है। लेकिन अगर कोविड 19 का संकट जारी रहा, लॉकडाउन और आगे बढ़ा या फिर ट्रैवल पर किसी तरह की रोक लगी, तो इसकी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी और बढ़ जाएगी।

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के मुताबिक कोरोना के बाद हुए लॉकडाउन की वजह से बड़े होटल समूहों को करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसियों को करीब 4,312 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। टूर ऑपरेटर्स को करीब 25,000 करोड़, एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स को करीब 19,000 करोड़ और क्रूज टूरिज़्म को करीब 419 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही केवल पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से ही 2 करोड़ नौकरियां जा सकती हैं। ये दोनों सेक्टर बीमारू सेक्टर बन सकते हैं। साथ ही आधे से अधिक पर्यटन हॉस्पिटैलिटी सेक्टर बंद हो सकते हैं। अक्टूबर 2020 के बाद ही उद्योग जगत के हालात सुधरने की उम्मीद है।

मीडिया में आई रिपोर्टस के मुताबिक फरवरी 2020 के बाद से पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई है। लॉकडाउन के चलते अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू विमान सेवाओं पर रोक है। जिसके कारण टूरिजम सेक्टर बर्बादी की कगार पर है। कई ट्रैवल एजेंसियों के सैकड़ों कर्मचारी घर पर बैठे हुए हैं। इन एजेंसियों की बसें व कारें धूल खा रही हैं।

टूरिज़्म इंडस्ट्री का बुरा हाल

पर्यटन मंत्रालय की 2019-20 की रिपोर्ट कहती है कि पर्यटन उद्योग ने 8 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को रोजगार दे रखा है तो वहीं देश की कुल जीडीपी में पांच फीसदी से अधिक इसकी हिस्सेदारी है। देश में होटल और टूरिजम इंडस्ट्री से 5.56 फीसदी लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिला है, जबकि 7.19 फीसदी लोग अप्रत्यक्ष तौर पर इस व्यवसाय से जुड़े हैं।

एक ट्रैवल एंजेंसी के ऑपरेटर अंकुश सार्थी न्यूज़क्लिक को बताते हैं कि आगे आने वाले 5-6 महीनों तक पर्यटकों के आने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों को घर बैठे सैलरी देना बहुत मुश्किल है। फिलहाल ट्रैवल एंजेसियां सैलरी देने की स्थति में नहीं हैं। ऐसे में एजेंसियों से छंटनी होना लाज़मी है। लिहाजा लाखों लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रह रहा है।

अंकुश आगे कहते हैं कि इस सेक्टर में शामिल लोगों की रेगुलर सैलरी नहीं होती है। बहुत से लोग बिना किसी कॉन्ट्रैक्ट के काम करते हैं। इसमें गाइड भी शामिल हैं। जिनकी रोजी रोटी पर खतरा बना हुआ है। दुकानों, होटलों में काम करने वाले लोग इस उद्योग में शामिल हैं।

दिल्ली के एक बड़े होटल चेन से जुड़े एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारे रेस्टोरेंट के कई कर्मचारियों को मार्च की सैलरी के बाद छुट्टी पर भेज दिया गया है। अप्रैल की सैलरी का क्या होगा पता नहीं। हमें बस इतना बताया गया है कि कंपनी को आपकी जब ज़रूरत होगी तो आपसे संपर्क किया जाएगा। मेरे परिवार ने बड़ी मुश्किल से लोन लेकर  मेरी पढ़ाई का खर्च उठाया था, अब अगर सैलरी नहीं मिलेगी तो क्या होगा? मैं इस समय बहुत मुश्किल में हूं, बस यही सरकार से कहना है कि हमारे बारे में भी कुछ सोचा जाए। हमारे सेक्टर के लिए भी राहत योजना में हिस्सेदारी हो।”

मुंबई के एक रेस्तरां में काम करने वाले आशीष बिहार के समस्तीपुर के निवासी हैं। वो बताते हैं, हम लोग न तो मजदूर वर्ग में आते हैं और न ही बहुत अमीर अधिकारी लोगों में। सरकार हम जैसे मिडिल क्लास लोगों के बारे में क्यों नहीं सोचती। मैं तो इस वक्त घर भी नहीं जा सकता क्योंकि मैं फंसे मजदूर लोगों में शामिल नहीं हूं लेकिन जब मेरे पास यहां काम ही नहीं बचा अब, तो मैं क्या करू यहां रहकर। हमें तो आगे भी कोई उम्मीद नहीं दिखती। क्योंकि अगर कोरोना खत्म भी हो गया तो लोग जल्दी होटल या रेस्टोरेंट नहीं आएंगे। हमें तो पहले ही कंपनी ने बोल दिया है जब तक 30 प्रतिशत सैलरी मिल रही है अच्छा है, आगे कुछ पता नहीं। 

गौरतलब है कि कोरोना के कहर के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुज़र रही है। भारत भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। कुल 40 दिनों के लॉकडाउन के बाद गृह मंत्रालय ने 1 मई को एक बार फिर दो हफ्तों तक लॉकडाउन बढ़ाने का निर्देश दिया है। देश की अर्थव्यवस्था की हालत पहले ही खस्ता थी लेकिन इस महामारी की मार ने होटल और टूरिज्म इंडस्ट्री बहुत बड़ा झटका दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के मुताबिक पूरी टूरिजम इंडस्ट्री को कोरोना की वजह से करीब-करीब 1.58 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।

Coronavirus
Lockdown
Lockdown crisis
Hotel Industry
Tourism Industry
unemployment
OYO
economic crises
Confederation of indian industry
CII
FHRAI
Lockdown 3.0
Narendra modi
Coronavirus Epidemic

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • Ashok Gehlot and Sachin Pilot
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान: क्या एक हो गए हैं अशोक गहलोत और सचिन पायलट?
    22 Nov 2021
    नए मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही संतुष्ट नज़र आ रहे हैं और इसी से उम्मीद की जा रही है कि दोनों के बीच जारी अंदरूनी कलह फिलहाल शांत हो गई है।
  • Rajasthan: Rape accused along with friends attacked Dalit girl with knife
    एम.ओबैद
    राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला
    22 Nov 2021
    अलवर में शुक्रवार की रात रेप करने वाले शख्स और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से 20 वर्षीय दलित लड़की पर हमला किया गया। जिसमें उसकी आंख में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया है जहां…
  • Tribal Pride Week
    रूबी सरकार
    जनजातीय गौरव सप्ताह में करोड़ों खर्च, लेकिन आदिवासियों को क्या मिला!
    22 Nov 2021
    प्रदेश के आदिवासियों के लिए सवाल बरकरार है कि 52 करोड़, कुछ जानकारों के अनुसार 100 करोड़ सरकारी खर्च से इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर जो सम्मेलन किया गया, क्या वह भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भर था? क्योंकि…
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    क़ानूनों की वापसी से मृत लोग वापस नहीं आएंगे- लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवार
    22 Nov 2021
    बीजेपी को क़ानूनों की वापसी से राजनीतिक फ़ायदे का अनुमान है, जबकि मूल बात यह है कि राज्य मंत्री अजय मिश्रा अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव की वजह बन सकता…
  • South region leader
    पार्थ एस घोष
    अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता
    22 Nov 2021
    क्षेत्रीय नेताओं के लिए शुरूआती बिंदु होना चाहिए कि, वे इस मूल वास्तविकता को आंतरिक करें कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे असमान और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में से एक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License