NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फिलिस्तीन
सैकड़ों पॉलिटिकल एक्टिविस्ट, मानवाधिकार समूह और विद्वानों ने बाइडेन प्रशासन से फ़िलिस्तीनी मानवाधिकारों की रक्षा करने की मांग की
जो बाइडेन ने कहा है कि उनकी विदेश नीति मानवाधिकारों पर आधारित है और उन्होंने हाल ही में कहा है कि उनका मानना है कि "फ़िलिस्तीन और इज़रायल समान रूप से स्वतंत्रता, समृद्धि और लोकतंत्र के समान अवसरों का लाभ उठाने के पात्र हैं।"
पीपल्स डिस्पैच
21 Jun 2021
 बाइडेन

680 से अधिक नागरिक समाज समूहों और विशिष्ट हस्तियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को मानवाधिकारों पर अपनी घोषणाओं पर कार्रवाई करने और इजरायल के अधिकारियों और राजनीतिक नेतृत्व के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक खुला पत्र लिखा जो फिलिस्तीनियों के अधिकारों के रोज ब रोज के उल्लंघन में शामिल हैं। इस पत्र में यह भी मांग की गई कि बाइडेन प्रशासन फिलिस्तीनियों के "लगातार बढ़ते भेदभाव और व्यवस्थित उत्पीड़न को समाप्त करने" के लिए इजरायल पर "यथार्थपूर्ण राजनयिक दबाव" लागू करे।

इस पत्र पर अमेरिका, इजरायल और फिलिस्तीन सहित 75 से अधिक देशों के जाने-माने पूर्व राजनयिकों, एक्टिविस्टों, विद्वानों, डॉक्टरों और धार्मिक नेताओं जैसे लखदार ब्राहिमी, नोआम चॉम्स्की, राशिद खालिदी और इलान पेपे के साथ-साथ यूनाइटेड फॉर पीस एंड जस्टिस जैसे नागरिक समाज समूहों द्वारा हस्ताक्षर किए गए। हस्ताक्षरकर्ताओं की इस सूची में इज़रायल के पूर्व अटॉर्नी जनरल माइकल बेन यायिर और इज़रायली संसद के पूर्व स्पीकर अवराहम बर्ग भी शामिल हैं।

हालांकि इसमें "नस्लभेद" और कब्जा जैसे शब्दों का उपयोग नहीं किया गया है,लेकिन यह पत्र "इजरायल के संस्थागत वर्चस्व और फिलिस्तीनी लोगों के उत्पीड़न को समाप्त करने और उनके मौलिक मानवाधिकारों की रक्षा करने में मदद करने के लिए अमेरिकी नेतृत्व को कार्रवाई करने के लिए कहता है"।

बाइडेन के हालिया इस बयान, "मेरा मानना है कि फिलिस्तीनी और इजरायल समान रूप से सुरक्षित और सुरक्षित रूप से रहने के लायक हैं और स्वतंत्रता, समृद्धि और लोकतंत्र के समान अवसरों का लाभ उठाने के लायक हैं," को याद दिलाते हुए इस बयान में उजागर किया गया कि  "फिलिस्तीनियों के लिए, इन बयानों और उनके दैनिक जीवन बीच की जगह व्यापक नहीं हो सकती।"

उनके दावों के विपरीत जिसे बाउडेन ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद किया था कि उनकी विदेश नीति लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा पर केंद्रित होगी, लेकिन यहां तक गाजा में हाल ही में इजरायल के हमले की निंदा करने से भी इनकार कर दिया जो 11 दिनों तक चली और 250 से अधिक फिलिस्तीनियों को मार डाला और हजारों को विस्थापित कर दिया। 

इसके बजाय बाइडेन प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर एक संयुक्त बयान को दो बार अवरुद्ध करके इज़रायल को वैश्विक आलोचना से बचाने की कोशिश की। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंथनी ब्लिंकेन ने इजरायल की बमबारी को इजरायल का आत्मरक्षा का अधिकार बताते हुए उचित ठहराया।

Joe Biden
political activists
human rights groups
Palestinian human rights
Palestine

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

गर्भपात प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट के लीक हुए ड्राफ़्ट से अमेरिका में आया भूचाल

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

नाटो देशों ने यूक्रेन को और हथियारों की आपूर्ति के लिए कसी कमर

इज़रायली सुरक्षाबलों ने अल-अक़्सा परिसर में प्रार्थना कर रहे लोगों पर किया हमला, 150 से ज़्यादा घायल

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन


बाकी खबरें

  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    महंगाई पर देखिये: कैसे "सीएम मोदी" ने "पीएम मोदी" की पोल खोली !
    15 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा तुलना करेंगे नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में महंगाई क मुद्दे पर कैसे केंद्रीय सरकार पर सवाल उठाते थे, औऱ आज प्रधानमंत्री होने पर…
  • अनिल अंशुमन
    बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया
    15 Apr 2022
    संगठन ने रफीगंज में 6 दालित बच्चियों के ज़हर खाने के मामले में पीड़ित परिजनों को पूरा इंसाफ दिलाने के संघर्ष को और भी व्यापक बनाने तथा असली मुजरिमों को सज़ा दिलाने का संकल्प लिया।
  • अखिलेश अखिल
    लोकतंत्र के सवाल: जनता के कितने नज़दीक हैं हमारे सांसद और विधायक?
    15 Apr 2022
    देश की आबादी लगातार बढ़ती गई लेकिन आबादी के मुताबिक संसद और विधान सभाओं की सीटें नहीं बढ़ीं। इसका असर ये हुआ कि ऐसा तंत्र बन गया है जिसमें चुनाव तो होते हैं लेकिन नेताओं की जनता से दूरी बढ़ती जाती है।
  • रवि शंकर दुबे
    नफ़रत के बीच इप्टा के ‘’ढाई आखर प्रेम के’’
    15 Apr 2022
    देश में एक-दूसरे के प्रति फैलाई जा रही नफ़रत को इप्टा ने कला के माध्यम से मिटाने की मुहिम चलाई है। इप्टा की ‘’ढाई आखर प्रेम की यात्रा’’ में लोगों को खासकर युवाओं को जागरूक किया जा रहा है।  
  • अनिल जैन
    पड़ताल: मध्य प्रदेश में सांप्रदायिक दंगों के जरिए चुनावी तैयारी में जुटी है भाजपा
    15 Apr 2022
    मालवा निमाड़ के इलाके में जो घटनाएं घटी हैं, वे आकस्मिक नहीं हैं। जिस पैटर्न पर देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले एक पखवाड़े से सांप्रदायिक टकराव का माहौल बनाया जा रहा था, वैसा ही सब कुछ इस इलाके में भी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License