NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
इफको गैस कांड : प्रबंधकीय चूक की क़ीमत चुकाती ज़िंदगियां
गैस से बीमार हुए मज़दूर हरिश्चन्द्र यादव कहते हैं यदि आक्सीजन की मात्रा भरपूर होती तो किसी की भी हालत इतनी ज्यादा नहीं बिगड़ती। उनके मुताबिक इन्हीं सुरक्षा के सवालों पर जब कभी इफको प्रबन्धन से बात करो तो वह सीधे काम छोड़ने की बात कह देता है।
सरोजिनी बिष्ट
28 Dec 2020
इफको गैस कांड

22 दिसंबर की रात फूलपुर इफको फैक्ट्री में हुए अमोनिया गैस रिसाव के बाद दो अधिकारियों की मौत और बीस से ज्यादा श्रमिकों के बीमार पड़ने की घटना की जांच आखिर पूरी हुई। जांच के लिए लेबर कमिश्नर मो. मुस्तफा ने इफको के निदेशक ओपी भारतीय के नेतृत्व में पांच सदस्य कमेटी गठित की थी। घटना के बाद से ही कमेटी ने जांच शुरू कर दी थी। जांच में पूरी तरह से घटना के लिए इफको प्रबन्धन को दोषी माना गया है।

प्रयागराज (इलाहाबाद) जिले के फूलपुर स्थित इंडियन फॉर्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड यानी इफको (IFFCO) में 22 दिसंबर की रात पाइप फटने से यूरिया उत्पादन यूनिट में हुए अमोनिया गैस रिसाव की घटना ने वहां काम करने वाले श्रमिकों, कर्मचारियों के बीच एक दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। दहशत हो भी क्यूं न, जो डर उन्हें हमेशा सताता था आखिर वही हुआ। अमोनिया गैस रिसाव ने दो अधिकारियों की जान ले ली और बीस से ज्यादा मजदूर गैस की चपेट में आने से बीमार पड़ गए जिनमें से कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। फिलहाल फैक्ट्री को बन्द कर दिया गया है।

आखिर उस रात क्या हुआ था, सुरक्षा के कितने इंतजाम थे, इस घटना के बाद इफको फूलपुर ठेका मजदूर संघ, फैक्ट्री में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर प्रबन्धन से क्या मांग कर रहा है आदि, इन सवालों पर जब हमने श्रमिक हरिश्चन्द्र यादव और मजदूर संघ के महामंत्री देवानंद जी से बात की तो एक बात समान रूप से सामने आई कि ऐसी संवेदनशील जगह पर काम करने वालों को जितने जरूरी सुरक्षा उपकरण मिलने चाहिए उतने नहीं मिल पा रहे और इफको प्रबन्धन पूरी तरह से इस ओर लापरवाह बना हुआ है। हरिश्चन्द्र उन श्रमिकों में से हैं जो घटना वाली रात अमोनिया गैस की चपेट में आ गए थे।

श्रमिक हरिश्चन्द्र की जुबानी

हर रोज की तरह उस दिन भी हेमापुर गांव के (फूलपुर तहसील) 43 वर्षीय हरिश्चन्द्र अपनी रात की पाली में ड्यूटी करने दस बजे फैक्ट्री पहुंचे। उनके मुताबिक सब कुछ ठीक चल रहा था। नाईट शिफ्ट के कर्मचारी अलग अलग इकाइयों में काम में लगे हुए थे। हाजिरी दर्ज कर हम लोग अपनी नाईट शिफ्ट शुरू करने ही वाले थे कि करीब सवा दस बजे जोरदार धमाके की आवाज़ सुनाई दी। पहले तो यह समझ नहीं आया कि आखिर धमाका हुआ कहां लेकिन फिर पता चला कि यूरिया वन यूनिट में धमाका हुआ है और गैस पाइप फटने से अमोनिया का रिसाव होने लगा है। हरिश्चंद्र कहते हैं हम कुछ श्रमिक कंट्रोल की ओर भागे और हमें बताया गया कि गैस का रिसाव तेजी से हो रहा है इसलिए कंट्रोल रूम की खिड़कियां दरवाजे बन्द कर दिए जाएं। इतना समय भी नहीं मिल पाया कि फैक्ट्री से बाहर भागा जाता। उनके मुताबिक गैस का रिसाव इतना तेज था कि सांस की तकलीफ होने लगी, आंखों में जलन होने लगी और फिर धीरे धीरे दिखना भी बन्द होने लगा। ऐसा लग रहा था मानो भोपाल गैस त्रासदी की पुनरावृत्ति हो रही है। सबको आक्सीजन लगाया गया लेकिन तब हालात और खराब हो गए जब पन्द्रह बीस मिनट में ही आक्सीजन भी खत्म हो गया। हरिश्चन्द्र जी कहते हैं आक्सीजन के न रहने पर हम लोग अपना मुंह बांधकर जहां थे वहीं लेट गए।  कंट्रोल रूम में गैस बहुत ज्यादा भर गई थी और हमारा आक्सीजन भी खत्म हो चुका था जिसका नतीजा यह हुआ कि हमें बेहोशी छाने लगे इसके बाद कब और कैसे हमें अस्पताल पहुंचाया गया कुछ याद नहीं।

हरिश्चन्द्र यादव पिछले 13 सालों से इफको में संविदा कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। वे कहते हैं यदि आक्सीजन की मात्रा भरपूर होती तो किसी की भी हालत  इतनी ज्यादा नहीं बिगड़ती। उनके मुताबिक इन्हीं सुरक्षा के सवालों पर जब कभी इफको प्रबन्धन से बात करो तो वह सीधे काम छोड़ने की बात कह देता है।

क्या कहता है इफको मज़दूर संघ

इफको फूलपुर ठेका मज़दूर संघ के महामंत्री और भाकपा- माले से जुड़े देवानंद जी के मुताबिक इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी चार पांच बार घटनाएं हो चुकी हैं बावजूद इसके चाहे स्थानीय प्रशासन हो या इफको प्रशासन हो हमेशा मूक दर्शक बना रहा। उन्होंने कहा कि हमारे यूनियन ने हमेशा इस ओर इफको प्रबन्धन को आगाह किया कि बार बार हो रही घटनाओं के प्रति उनका नजरअंदाज रवैया एक दिन बड़ी घटना का कारण बन सकता है और आखिर वही हुआ।  22 दिसंबर की रात हुई अमोनिया रिसाव की घटना के चलते दो अधिकारियों की मौत और करीब बीस मजदूरों के बीमार पड़ने का जिम्मेवार उन्होंने पूरी तरीके से इफको प्रशासन को माना।

गैस रिसाव का शिकार हुए है हरीशचंद्र यादव के घर इफको ठेका मजदूर संघ की बैठक

उन्होंने कहा कि उस समय मौजूद लोगों द्वारा जल्दी ही गैस रिसाव में काबू पा लिया गया वरना एक बार फिर भोपाल गैस त्रासदी जैसे परिणाम भुगतने पड़ते। उनके मुताबिक सुरक्षा उपकरणों के अभाव में यहां का मजदूर हर रोज अपनी जान हथेली पर रखकर काम करने को मजबूर है और जो मजदूर अपनी सुरक्षा की बात करता है, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग करता है तो इफको प्रशासन उसे काम से ही हटा देती है। उन्होंने कहा कि हमारे यूनियन की हमेशा से प्रमुख मांग यही रही कि इफको प्लांट में जहां संवेदनशील काम करवाया जाता है वहां श्रमिकों, कर्मचारियों को आवश्यकतानुसार सुरक्षा उपकरण मुहैया कराया जाए और हर श्रमिक की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जाए। देवानंद जी के मुताबिक अभी तक इफको प्रबन्धन की ओर से मृतकों और बीमार मजदूरों को मुआवजा तक देने तक की बात नहीं कही गई है।

देवानंद जी कहते हैं इस घटना में जान गंवाने वाले आसिस्टेंट मैनेजर वी पी सिंह और डिप्टी मैनेजर अभयनंद को उनका संगठन शहीद मानता है, क्योंकि वे अपनी जान की परवाह किए बगैर गैस का रिसाव रोकने के लिए वहां पहुंचे जहां से रिसाव हो रहा था। अगर समय पर गैस के रिसाव को न रोका जाता तो निश्चित ही एक बहुत बड़ी घटना घट सकती थी। उन दो जांबाज अधिकारियों ने अपनी जान का बलिदान देकर सैकड़ों की जान बचाई।

ट्रेड यूनियन एक्टू का बयान

ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एक्टू) के जिला सचिव डॉ. कमल उसरी कहते हैं कि योगी सरकार संवेदनहीन हो गई है। अधिकारियों कर्मचारियों की मौत पर भी संवेदनशीलता का परिचय नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के ख़िलाफ़ किसान पूरे देश में लड़ रहा है और किसानों के लिए खाद बनाने वाली फैक्ट्री के मजदूर सरकार की लापरवाही से जान गंवा रहे हैं। उसरी जी कहते हैं एक्टू मृतक परिवारों को एक करोड़ रुपए मुआवजे के साथ परिवार के सदस्य को नौकरी और सभी घायलों को दस दस लाख रुपए का मुआवजा व गैस रिसाव के दोषियों को दंडित किए जाने की मांग करता है।

जांच के बाद सामने आई इफको प्रबन्धन की घोर लापरवाही

क्या मुनाफे के आगे किसी इंसान की जान की कोई कीमत नहीं, शायद बिल्कुल नहीं। इफको की घटना ने एक बार फिर इस सच को साबित कर दिया है। जब एक श्रमिक कहता है कि हमें सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया जाए, संवेदनशील जगह पर काम करने वाले हर मजदूर, कर्मचारी, की सुरक्षा की गारंटी की जाए तो प्रबन्धन सीधे सीधे नौकरी से हटाने की धमकी देने लगता है। इफको प्रबन्धन की घोर लापरवाही ने दो अधिकारियों की जान ले ली और अभी भी कुछ श्रमिक जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। आखिर अमोनिया गैस पाइप कैसे फटी, क्या उसका मेंटेनेंस सही नहीं था, क्या तकनीकी गड़बड़ी रही और कहां मानवीय चूक हुई, इन सवालों पर जब लेबर कमिश्नर द्वारा निदेशक इफको के नेतृत्व में पांच सदस्य कमेटी बनाई गई तो जांच में यह बात सामने आ गई कि जिस प्लंजर के टूटने पर पाइप लाइन से अमोनिया का रिसाव हुआ वह बेहद कमजोर था। फैक्ट्री के उप निदेशक अभय गुप्ता ने बताया कि जांच में प्रबन्धन की गलती सामने आई है। मिली जानकारी के मुताबिक प्रबन्धन की लापरवाही के कारण उप निदेशक की अनुमति पर सहायक निदेशक (फैक्ट्री) द्वारा कुछ दिनों के भीतर सीजीएम कोर्ट में इफको फैक्ट्री प्रबन्धन के ख़िलाफ़ अभियोग रजिस्टर कराया जाएगा।

इस पूरी घटना और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इफको ठेका मजदूर संघ और एक्टू ने अपना आंदोलन तेज करने की बात कही है। देवानंद जी कहते हैं यदि प्रबन्धन पहले ही हमारी बातों का संज्ञान ले लेता तो न तो इतनी बड़ी घटना घटती न ही दो अधिकारियों को जान से हाथ धोना पड़ता और न ही हमारे मजदूर भाई जिंदगी और मौत के बीच खड़े होते। किन्तु अब भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो और फैक्ट्री में काम करने वाला हर श्रमिक, कर्मचारी और अधिकारी खुद को सुरक्षित महसूस करे इसकी गारंटी इफको प्रबन्धन को लेनी ही होगी।

(लेखिका स्वतंत्र पत्रकार है।)

UttarPradesh
Prayagraj
IFFCO Gas Scandal
IFFCO
Indian Farmers Fertilizer Cooperative Limited
IFFCO Labor Union
trade unions
AICCTU

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

बनारस: आग लगने से साड़ी फिनिशिंग का काम करने वाले 4 लोगों की मौत

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सड़क दुर्घटना में 15 लोगों की मौत

बसों में जानवरों की तरह ठुस कर जोखिम भरा लंबा सफ़र करने को मजबूर बिहार के मज़दूर?

यूपी: आज़मगढ़ में पुलिस पर दलितों के घर तोड़ने, महिलाओं को प्रताड़ित करने का आरोप; परिवार घर छोड़ कर भागे

गैस सिलिंडर फटने से दोमंजिला मकान ढहा, आठ लोगों की मौत

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पटाखा बनाते समय विस्फोट में पांच लोगों की मौत

यूपी: “मौतें नहीं हत्याएं हैं”......श्रमिकों की क़ब्रगाह बनता इफको फूलपुर!


बाकी खबरें

  • sc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पीएम सुरक्षा चूक मामले में पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति गठित
    12 Jan 2022
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘‘सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता’’ और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा जांच की निगरानी करने की आवश्यकता है।
  • dharm sansad
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
    12 Jan 2022
    पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में 'धर्म संसद' के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी।
  • राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    विजय विनीत
    राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    12 Jan 2022
    "आरएसएस को असली तकलीफ़ यही है कि अशोक की परिकल्पना हिन्दू राष्ट्रवाद के खांचे में फिट नहीं बैठती है। अशोक का बौद्ध होना और बौद्ध धर्म धर्मावलंबियों का भारतीय महाद्वीप में और उससे बाहर भी प्रचार-…
  • Germany
    ओलिवर पाइपर
    जर्मनी की कोयला मुक्त होने की जद्दोजहद और एक आख़िरी किसान की लड़ाई
    12 Jan 2022
    पश्चिमी जर्मनी में एक गांव लुत्ज़ेराथ भूरे रंग के कोयला खनन के चलते गायब होने वाला है। इसलिए यहां रहने वाले सभी 90 लोगों को दूसरी जगह पर भेज दिया गया है। उनमें से केवल एक व्यक्ति एकार्ड्ट ह्यूकैम्प…
  • Hospital
    सरोजिनी बिष्ट
    लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़
    12 Jan 2022
    लखनऊ के साढ़ामऊ में स्थित सरकारी अस्पताल को पूरी तरह कोविड डेडिकेटेड कर दिया गया है। इसके चलते आसपास के सामान्य मरीज़ों, ख़ासकर गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। साथ ही इसी अस्पताल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License