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भारत
राजनीति
आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में चिदंबरम जमानत के लिए पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम इस समय न्यायिक हिरासत में हैं और दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 सितंबर को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Oct 2019
chitambaram
Image courtesy:News State

नई दिल्ली: आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जमानत के लिए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। न्यायमूर्ति एन वी रमणा, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले का उल्लेख करते हुये शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा कि चिदंबरम की याचिका सूचीबद्ध करने के संबंध में निर्णय के लिए याचिका प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के पास भेजी जायेगी। चिदंबरम इस समय न्यायिक हिरासत में हैं और दिल्ली उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुये कहा था कि वह इस मामले की जांच अग्रिम दौर में है और उनके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

यही नहीं, उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए अपने फैसले में यह भी कहा था कि यदि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि चिदंबरम के खिलाफ मामला साबित हो गया तो यह समाज, अर्थव्यवस्था, वित्तीय स्थिरता और देश की अखंडता के साथ अपराध होगा।

अदालत ने कहा था कि हालांकि चिदंबरम द्वारा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं है लेकिन जमानत पर रिहा होने की स्थिति में निश्चित ही वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत ने विशेष अदालत द्वारा उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के निर्णय को सही ठहराया था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 74 वर्षीय चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। अदालत ने यह भी कहा था कि चिदंबरम देश के एक ताकतवर वित्त मंत्री और गृह मंत्री रह चुके हैं और इस समय राज्य सभा के सदस्य हैं।

चिदंबरम के जहां तक देश छोड़कर भागने के जोखिम का सवाल है तो इसके लिये उन्हें पासपोर्ट जमा कराने, उनके लिये लुक आउट नोटिस जारी करने और अदालत की अनुमति के बगैर देश से बाहर नहीं जाने जैसी शर्तें लगायी जा सकती हैं।

अदालत ने यह भी कहा था कि पेश सामग्री से ऐसा लगता है कि विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड इकाई ने 4.62 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये प्रस्ताव तैयार किया था और आईएनएक्स मीडिया को मंजूरी देते समय इसे पारित कर दिया गया था।

अदालत ने इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि 4.62 करोड़ रुपये के बजाय आईएनएक्स मीडिया बगैर किसी मंजूरी के 403 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाया। संप्रग सरकार के कार्यकाल में 2004-14 के दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री और गृह मंत्री थे।
 
सीबीआई ने 2007 में बतौर वित्त मंत्री चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा 305 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दिये जाने में कथित अनियमितताओं को लेकर 15 मई, 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

इसके बाद, प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस प्रकरण में धन शोधन का मामला दर्ज किया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि सीबीआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में पेश दस्तावेजों के अनुसार जांच के दौरान पता चला है कि आईएनएक्स मीडिया के पूर्व प्रमोटर पीटर मुखर्जी ने विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड में आवेदन दायर करने से पहले चिदंबरम से कथित रूप से मुलाकात की थी और उन्होंने बोर्ड की मंजूरी का आश्वासन देते हुये इसके बदले अपने पुत्र कार्ति चिदंबरम के ‘व्यापारिक हितों’ का ध्यान रखने का निर्देश दिया था।

देश में आजादी, समानता और भाईचारा कहां हैं: चिदंबरम

आईएनक्स मीडिया मामले में गिरफ्तार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि इस समय देश में आजादी, समानता और भाईचारा कहां है।

तिहाड़ जेल में बंद चिदंबरम की तरफ से उनके परिवार ने ट्विटर पर यह टिप्पणी पोस्ट की।उन्होंने कहा, ‘जैसा कि हम महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के साल भर चलने वाले जश्न की शुरुआत कर रहे हैं, हमें यह सवाल पूछना होगा कि आजादी, समानता और भाईचारा कहाँ है?’

चिदंबरम ने दावा किया, ‘भाईचारा पूरी तरह से मर गया है। जातिवाद और कट्टरता हावी होती दिख रही है। समानता एक दूर का सपना है। सभी साक्ष्य भारतीयों में बढ़ती असमानता की ओर इशारा करते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘आजादी एक कमजोर दीपक की तरह धीमी लौ में जल रही है। क्या यह प्रज्वलित होगी या बूझ जाएगी, केवल समय ही बता सकता है।’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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