NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
घटना-दुर्घटना
समाज
भारत
सुरक्षा बलों में भी कम नहीं है महिलाओं का शोषण-उत्पीड़न : ITBP की पूर्व डिप्टी कमांडेंट की कहानी
करुणाजीत ने बड़ी उम्मीदों से करीब पांच साल पहले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ज्वाइन किया, लेकिन इस साल जून में उनके साथ जो हुआ उसने उनकी ज़िंदगी बदल दी। अब वे नौकरी से इस्तीफ़ा देकर अपने सम्मान की लड़ाई लड़ रही हैं।
सोनिया यादव
04 Dec 2019
महिला सुरक्षा

केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ी शान से 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' कार्यक्रम की शुरुआत की। जिसके तहत महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के तमाम दावे किये गए। लेकिन 'उस बेटी का क्या जो बची भी है और पढ़ी भी है लेकिन सिस्टम के आगे लाचार है'। इस बेटी ने अपने सम्मान के लिए अपनी अफ़सर पद की नौकरी छोड़ दी और आज सड़कों पर न्याय और इंसाफ की गुहार लगा रही है। ये कहानी है भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में डिप्टी कमांडेंट रहीं करुणाजीत कौर की।

करुणाजीत ने बड़ी उम्मीदों से करीब पांच साल पहले ITBP ज्वाइन किया। देश सेवा का सपना लिए ये जांबाज़ महिला अफसर अपने कर्तव्य पथ पर बढ़ ही रही थी कि उन्हें इस पि़तृसत्ता से भरे समाज में ये एहसास करा दिया गया कि तुम महिला हो और केवल मर्दों की मौज के लिए तुम्हारी भर्ती हुई है।

करुणाजीत ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, 'मुझे जानबूझ कर इंडो-चाईना बार्डर पर भेजा गया, जहां कोई महिला डिप्लॉय नहीं थी। जबकि सर्विस के कोड के अनुसार जहां महिला डिप्लॉय न हो वहां महिला अधिकारी को नहीं भेजा जाता। इसके बावजूद मुझे और एक महिला अधिकारी डॉक्टर को वहां भेज दिया गया। हमने सुरक्षा के लिए महिला कॉन्सटेबल की भी मांग की लेकिन हमें मना कर दिया गया'।

आप शायद ये सुनकर हैरान हो जाएंगे कि जहां इन दोनों महिला अधिकारियों को भेजा गया वहां कि परिस्थितियां अपने आप में संदेहास्पद थीं। करुणाजीत बताती हैं, ' हम इसी साल सात जून को उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा पर मलारी पोस्ट पर पहुंचे। जिस कमरे में वहां हमें रोका गया, वहां कोई लाइट नहीं थी, दरवाजे पर कुंड़ी नहीं थी और न ही किसी प्रकार की कोई सुरक्षा व्यवस्था थी। आस-पास कोई जन-आबादी नहीं थी और पूरा इलाका जंगलों से घिरा हुआ था'।

आप में से कई लोग ये सवाल कर सकते हैं कि इन जगहों पर जब पुरुष पैरामिलिट्री जवान और अधिकारी रह सकते हैं तो महिला अधिकारियों को क्या दिक्कत है। दिक्कत जगह से नहीं है दिक्कत पुरुष प्रधान मानसिकता से है।

करुणाजीत कहती हैं, ‘ 9-10 जून की दरमियानी रात को करीब 12-1 के बीच एक कॉन्सटेबल हमारे कमरे में घुस आया और बोलने लगा कि 'मैंने दो महीने से किसी महिला को नहीं छुआ, मुझे एक औरत की जरूरत है' इसके बाद वो आगे बढ़ने लगा, मैंने किसी तरह इंटरकॉम के जरिए साथ वाले कमरों को फोन किया। जिसके बाद मौके पर जवान और अफसर आए और कॉन्सटेबल बाहर चला गया। जब मैंने उसे फॉलो किया तो देखा कि कोई उसे कुछ नहीं कह रहा, उल्टा उसे आइडिया दे रहे हैं कि तुम्हेंं कोई काम था तो हमारे पास आ जाते। इस पर भी मैंने आपत्ति जताई कि वो बालात्कार के इरादे से कमरे में घुसा था, और आप लोग उस कॉन्सटेबल के मुंह में ही शब्द डाल रहे हैं'।

hqdefault.jpg
करुणाजीत ने आगे बताया कि इसके बाद उन्होंंने अधिकारियों से कहा कि उन्हें अपने सबसे उच्च अधिकारी डीजी यानी महानिदेशक से बात करनी है तो मुझे बताया गया कि यहां फोन नहीं काम करता, इसलिए सैटेलाइट फोन मुहैया करवाए गए हैं लेकिन मुुझे सैटेलाइट फोन भी खराब बताया गया। जिसके बाद मैंने वॉयरलैस टैलीकम्युनिक्शन से मैसेज भेजने की बात रखी तो मुझे बताया गया कि वो भी खराब है। आप यहां महिलाओं की सुरक्षा की बात तो छोड़ दीजिए आप यहां देश से गद्दारी कर रहे हैं। अगर यहां कोई रात को ऑपरेशनल दिक्कत हो जाती है तो आप कैसे संपर्क करेंगे। वहां लोग केवल दारू पीकर मौज लेने के लिए थोड़े हैं।

करुणाजीत की किस्मत शायद थोड़ी अच्छी थी, तो उन्हें वहीं कुछ लोग मदद के लिए मिल गए और उन्हें इंडियन आर्मी के कैंप तक पहुंचा दिया।
करुणाजीत बताती हैं, 'मुझे वहीं आईटीबीपी के कुछ दो-चार अच्छे लड़के मिल गए, जिन्होंने कहा कि यहां से कुछ ही दूरी पर आर्मी की सिग्नल यूनिट है, वहां चलते हैं शायद कुछ मदद मिल जाए। जिसके बाद भारतीय थलसेना ने मेरी मदद की और मुझे आईटीबीपी के फोन नंबर अरेंज करके दिए साथ ही अपने फोन से हमें फोन करवाया'।

हम अक्सर बातें करते हैं कि जब भी किसी मुसीबत का एहसास हो तो तुरंत फोन कर सूचना दें जिससे त्वरित कार्रवाई हो और अनहोनी से बचा जा सके लेकिन जब करुणाजीत ने अपने अधिकारियों को फोन किया तो उन्हें निराशा हाथ लगी। करुणाजीत ने कहा, 'मैंने तीन लोगों को फोन किया। अपने कमांडिंग अफसर, चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर जनरल को, जिसके बाद उस एरिया के इंस्पेकर जनरल से कॉन्टेक्ट किया। लेकिन ये तीनों लोग फोन सुन कर सो गए। कमांडिंग अफसर ने मुझे नशे की हालत में कहा कि मामला सुबह देखेंगे। इसके बाद जब आर्मी कैंप से मैं बाहर आई तो आईटीबीपी कैंप में सब सो चुके थे, जैसे कि कुछ हुआ ही न हो। हम यानी मैं और महिला डॉक्टर पूरी रात सड़क पर डर के मारे गाड़ी में बैठे रहे'।

करुणाजीत को यह सब देखकर एहसास हो गया कि शायद इस मामले को यहीं दबा दिया जाएगा। इसलिए उन्होंने अगली सुबह ही जोशीमठ में एफआईआर करवा दी लेकिन तब तक सिस्टम भी अपराधियों को बचाने की तैयारी कर चुका था। करुणाजीत के अनुसार जब वह जोशीमठ पहुंची तो कमांडिंग अफसर ने उन्हें फोन पर कहा कि ये बात डीजी तक आखिर कैसे पहुंची रातों-रात। साथ ही ये भी कहा कि तुम ये बात किसी को नहीं बताओगी कि कमरे में कुंडी की व्यवस्था सही नहीं थी। इसके बाद जब हम शाम को पुलिस के साथ मौका-ए-वारदात पर पहुंचे तो कुंडी सही लगा दी गई थी और वो काम भी कर रही थी। उसके बाद मैैैंने अपने अधिकारियों को चिट्ठी लिखी की साक्ष्यों के साथ छेड़खानी करने की कोशिश की गई है, सुबूतों को मिटाया गया है। लेकिन उस चिट्ठी का कोई संज्ञान नहीं लिया गया।

आप समझ सकते हैं कि किसी की पूरी दुनिया उस एक रात में बदल गई, लेकिन हमारे प्रशासन में जमीं पितृसत्ता और पुरुष प्रधान मानसिकता पर जमीं धूल करुणाजीत की लाख कोशिश के बाद भी आज तक नहीं हट पाई।

Karunajeet-KAur-ਕਰੁਨਾਜੀਤ-ਕੌਰ-660x330.jpg

करुणाजीत कहती हैं, 'मैं दिल्ली में अपने डीजी से मिली, मैंने कई पत्र लिखें, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से लेकर गृह मंत्रालय और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी को भी पत्र लिखे लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई और अंत में मैंने इस्तीफ़ा देने का फैसला कर लिया। हालांकि राष्ट्रीय महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में विभाग को पत्र लिखा है'।

करुणाजीत नारी सशक्तीकरण की एक मिसाल हैं जो आज सशक्त भी हैं और अपने खिलाफ़ हुए अपराध पर आवाज़ भी बुलंद कर रही हैं। उन्होंने कहा, मेरा इस्तीफ़ा, मेरा सम्मान है, मुझे नौकरी नहीं इज़्ज़त चाहिए। मैं सर्विज में रहकर कोड ऑफ कन्डेक्ट में बंधी थी लेकिन मैने इस्तीफ़ा इन्हें समाज में बेपरदा करने के लिया दिया है, इनके चहरों से नकाब उठाने के लिए दिया है। ये बताने के लिए दिया है कि महिला कोई मौज़ लेने की वस्तु नहीं है। यदि कोई कांस्टेबल डिप्टी कमांडेंट का हाथ पकड़ सकता है और इस तरह की हरकत कर सकता है, तो आप सुरक्षा बल में दूसरी महिलाओं के सम्मान की कैसे उम्मीद कर सकते हैं जो छोटे पदों पर तैनात हैं। करुणाजीत के मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उनका संघर्ष जारी है महिला शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ।

न्यूज़क्लिक ने इस संबंध में ITBP के महानिदेशक से ईमेल के जरिए सवाल पूछे हैं। खबर लिखने तक हमें कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि 1997 से पहले महिलाएं कार्यस्थल पर होने वाले यौन-उत्पीड़न की शिकायत आईपीसी की धारा 354 (महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ या उत्पीड़न के मामले) और 509 (किसी औरत के सम्मान को चोट पहुंचाने वाली बात या हरकत) के तहत दर्ज करवाती थीं।

_103882805_c46e7145-b2b2-405c-a906-03945472d94c.jpg

भंवरी देवी के मामले में साल 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर होने वाले यौन-उत्पीड़न के ख़िलाफ़ कुछ निर्देश जारी किए। इन निर्देशों को ही 'विशाखा गाइडलाइन्स' के रूप में जाना जाता है। इसके तहत कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साल 1997 से लेकर 2013 तक दफ़्तरों में विशाखा गाइडलाइन्स के आधार पर ही इन मामलों को देखा जाता रहा लेकिन 2013 में 'सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ वुमन एट वर्कप्लेस एक्ट' आया। जिसमें विशाखा गाइडलाइन्स के अनुरूप ही कार्यस्थल में महिलाओं के अधिकार को सुनिश्चित करने की बात कही गई। इसके साथ ही इसमें समानता, यौन उत्पीड़न से मुक्त कार्यस्थल बनाने का प्रावधान भी शामिल किया गया। इस एक्ट के तहत किसी भी महिला को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ सिविल और क्रिमिनल दोनों ही तरह की कार्रवाई का सहारा लेने का अधिकार है।

हांलाकि इस कानून के बाद भी महिलाओं के प्रति अपराध और अत्याचार कम नहीं हुए हैं और न ही शिकायत के बाद महिला के प्रति लोगों के व्यवहार में कोई सुधार हुआ है। शिकायतकर्ता महिला को क्या कुछ सहना पड़ता है ये किसी से छिपा नहीं है।

ITBP
Karunajeet Kaur
violence against women
sexual harassment at workplace
women empowerment
national commission for women
vishakha guideline
women in forces
Paramilitary Forces
Ministry of Women and Child Development
smriti irani
home ministry
Narendra modi
beti bachao beti padhao
Amit Shah

Related Stories

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं

यूपी: मुज़फ़्फ़रनगर में स्कूली छात्राओं के यौन शोषण के लिए कौन ज़िम्मेदार है?


बाकी खबरें

  • fertilizer
    तारिक अनवर
    उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार
    04 Feb 2022
    राज्य के कई जिलों के किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा संचालित केंद्रों पर डीएपी और उर्वरकों की "बनावटी" की कमी की वजह से इन्हें कालाबाजार से उच्च दरों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 5 लाख के पार
    04 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,49,394 नए मामले सामने आए और 1,072 मरीज़ों की मौत हुई है। देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 55 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • SKM
    रौनक छाबड़ा
    यूपी चुनाव से पहले एसकेएम की मतदाताओं से अपील: 'चुनाव में बीजेपी को सबक़ सिखायें'
    04 Feb 2022
    एसकेएम ने गुरुवार को अपने 'मिशन यूपी' अभियान को फिर से शुरू करने का ऐलान करते हुए कहा कि 57 किसान संगठनों ने मतदाताओं से आगामी यूपी चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देने का आग्रह किया है।
  • unemployment
    अजय कुमार
    क्या बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ने से बेरोज़गारी दूर हो जाएगी?
    03 Feb 2022
    बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ जाने से क्या बेरोज़गारी का अंत हो जाएगा या ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बात कह रही है?
  • farmers SKM
    रवि कौशल
    कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा
    03 Feb 2022
    मोर्चा ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार भी किसानों की आय को दुगुना किये जाने का उल्लेख नहीं किया है क्योंकि कई वर्षों के बाद भी वे इस परिणाम को हासिल कर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License