NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
ग्राउंड रिपोर्ट: "अगर सरकार 2024 तक कृषि क़ानूनों को निलंबित कर देती है तो हमें कोई समस्या नहीं है।"
गाजीपुर बॉर्डर पर हर किसान की जुबान पर एक बात है, 'जब तक कानूनों  वपासी नहीं, तब तक घर वाससी नहीं।'.
रौनक छाबड़ा
21 Jan 2021
ग्राउंड रिपोर्ट: "अगर सरकार 2024 तक कृषि क़ानूनों को निलंबित कर देती है तो हमें कोई समस्या नहीं है।"

गाज़ीपुर:  केंद्र सरकार ने विवादित नए कृषि कानूनों को लेकर झुकती नज़र आ रही है।  कल यानि बुधवार को उसने किसान संगठनों से दसवें दौर की वार्ता के दौरान इन कानूनों को एक से डेढ़ साल तक होल्ड यानि लागू न करने की बात कही थी। सरकार के इस प्रस्ताव पर गाजीपुर की सीमा पर 55 से अधिक दिनों से डेरा डाले किसानों ने कहा इस सरकार के किसी भी वादे पर हमें भरोसा नहीं है।  

55 वर्षीय अतर सिंह ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए इस समय भारी दबाव में है। उसे अभी तत्काल इन कानूनों को वापस लेना चहिए।

उत्तर प्रदेश के मथुरा से अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के एक सदस्य ने तर्क दिया, "हम एक साल या उससे अधिक समय तक इंतजार क्यों करे, जब हम  इसकी वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, कार्यान्वयन को निलंबित करने का प्रस्ताव कुछ भी नहीं है, लेकिन "हमारे मोर्चा को उठाने के लिए सरकार की पिछले दरवाज़े से एक और चाल है।"

लगभग दो महीने हो गए हैं, हजारों किसान दिल्ली के बॉर्डर पर भीषण ठंड में बैठे हुए हैं। इस दौरान 55 से अधिक किसानों की मौत भी हो चुकी है। हालांकि यूनियन का दावा यह है कि यह आकड़ा 70 पार है।  

सिंह के विचारों को सुनकर, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राजेंद्र सिंह ने कहा: “हम गन्ने की खेती करते हैं, इसलिए हम से पूछें, क्योंकि हम इस सरकार को अच्छी तरह जानते हैं। वे वर्षों तक किसी मुद्दे को खींचते हैं , हमारे गन्ने का भुगतान सालों साल तक नहीं होता है। ”

"हमें सरकार पर भरोसा नहीं है", उत्तर प्रदेश के बागपत के 62 वर्षीय राजेंद्र सिंह ने कहा। उन्होनें आगे बताया “वे जितनी चाहें उतनी समितियों का गठन कर सकते हैं; लेकिन उन्हें एक बात याद रखनी चाहिए कि हम इसकी मांग कर ही नहीं रहे हैं।"

यूपी के पीलीभीत शहर के 60 वर्षीय बाबू मोहन सिंह के विचार भी ऐसे ही थे, लेकिन उन्होंने अंतिम फैसला किसान संगठनों के नेताओं पर छोड़ा दिया। उन्होंने कहा  “यह तय करना उनका काम है कि प्रस्ताव स्वीकार करना है या नहीं; हम यहां प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने के लिए बैठे हैं। हमारे नेता जो भी फैसला करेंगे हम उनके साथ हैं। ”

आपको सनद रहे, बुधवार को, केंद्र के साथ दसवें दौर की वार्ता के बाद, 40 बातचीत करने वाले किसान समूहों के प्रतिनिधियों ने कहा था कि अन्य किसान संगठनों  के साथ चर्चा करेंगे।  क्योंकि इस विरोध प्रदर्शन में 400 से अधिक किसान संगठन एक मंच संयुक्त किसान मोर्चा के तहत लड़ रही है। उसकी आज बैठक है जिसके निर्णय को कल यानि 22 जनवरी को केंद्र सरकार को अवगत करा दिया जाएगा।  

हालांकि सरकार के इस प्रस्ताव को किसान सिरे से खारिज़ कर रहे हैं क्योंकि उन्हें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं पर विश्वास नहीं है।  फिर भी कुछ किसानों ने कुछ सुझाव दिए जिसे मानने के बाद हो सकता है कि वे निलंबन प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाए।  सुझाव यह है कि अगर इस कानून का निलंबन की प्रस्तावित अवधि "कम से कम 2024 तक" हो।

उत्तराखंड के सितारगंज शहर के 60 वर्षीय जसवंत सिंह उनमें से एक किसान थे  जो इस बात का समर्थन कर रहे थे।  उन्होंने कहा "अगर सरकार 2024 तक कृषि कानूनों को निलंबित कर देती है तो हमें कोई समस्या नहीं है।"

 2024 में ही अगला लोकसभा चुनाव होना है।  इसलिए किसान कह रहे हैं कि इसका निलंबन तब तक लिए किया जाए।

सिंह ने कहा, "किसान यह सुनिश्चित करेंगे कि जो लोग काले  कनून  लाए हैं वे  एक बार फिर सत्ता में न आएं।"

इस बीच, गणतंत्र दिवस पर "ट्रैक्टर परेड" की तैयारी पूरे जोश के साथ जारी है।  किसानों ने दावा किया है कि "लाखों ट्रैक्टर" 26 जनवरी से एक दिन पहले  रैली में भाग लेने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर पहुंच जाएंगे।

52 वर्षीय मनु देव चतुर्वेदी, जो 2019 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से सेवानिवृत्त हुए थे और  बनारस में अपनी तीन बीघा जमीन पर खेती करते हैं, उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा अब जो पेशकश की गई है, उसके कारण निर्धारितकिसान  परेड को नहीं रोका जाना चाहिए।

वेटरन एसोसिएशन के बैनर तले मध्य  दिसंबर से गाजीपुर सीमा पर आंदोलन में शामिल होने का दावा  करने वाले चतुर्वेदी ने कहा, “किसान सितंबर से पंजाब और हरियाणा में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे; सरकार केवल कानूनों में संशोधन करने के लिए सहमत हुई जब वे सभी दिल्ली की सीमाओं पर पहुंच गए। अब, हम इतने लंबे समय से यहां डेरा डाले हुए हैं।  जब केंद्र सरकार  ने कानूनों को निलंबित करने पर सहमति व्यक्त की, तब हमने घोषणा की कि हम राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करेंगे। ”

यह कहने के बाद, उन्होंने कहा "जब तक कानूनों की वपासी नहीं, तब तक घर वाससी नहीं।  किसानों को इसी पर डटे रहना चहिए।"

कृषि कानूनों को सीधे-सीधे रद्द करे सरकार: राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसान संगठनों एवं सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी गतिरोध बरकरार रहने को लेकर बृहस्पतिवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि उसे ‘रोज नए जुमले’ बंद कर ‘कृषि विरोधी कानूनों’ को रद्द करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले करीब दो महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। वे नये कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि इन कानूनों से मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की प्रणाली समाप्त हो जाएगी और किसानों को बड़े कारपोरेट घरानों की ‘कृपा’ का पात्र बन कर रहना पड़ेगा। हालांकि, सरकार इन आशंकाओं को खारिज कर चुकी है।

farmers
farmers protest
Ghazipur Border
All India Kisan Sabha
Bharatiya Kisan Union-Tikait
Narendra modi
Bharatiya Janata Party

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान मोदी को लोकतंत्र का सबक़ सिखाएगा और कॉरपोरेट की लूट रोकेगा: उगराहां
    27 Nov 2021
    ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने टिकरी बॉर्डर स्थित गुलाब बीबी नगर में बात की जुझारू किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (एकता) उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां से और उनसे जानने की…
  • P Chidambaram his son Karti
    भाषा
    एयरसेल-मैक्सिस मामला: अदालत ने चिदंबरम और कार्ति को 20 दिसंबर को तलब किया
    27 Nov 2021
    विशेष न्यायाधीश ने इस बात पर गौर करते हुए आदेश पारित किया कि सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार और धन शोधन के मामलों में चिदंबरम और अन्य आरोपियों को समन भेजे जाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
  • Covid new variant omicron
    एपी/भाषा
    अब कोविड-19 के नए स्वरूप ‘ओमीक्रॉन’ का डर, दुनियाभर के देशों ने लगायी यात्रा पाबंदियां
    27 Nov 2021
    डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ओमीक्रॉन के वास्तविक खतरों को अभी समझा नहीं गया है लेकिन शुरुआती सबूतों से पता चलता है कि अन्य अत्यधिक संक्रामक स्वरूपों के मुकाबले इससे फिर से संक्रमित होने का जोखिम अधिक है।…
  • gadchiroli
    अजय सिंह
    गढ़चिरौलीः यह लहू किसका है
    27 Nov 2021
    सरकार और बड़े पूंजीपति घरानों के दमन चक्र और लूट चक्र से अपने जीवन, सम्मान, जल, जंगल व ज़मीन को बचाने की लड़ाई आदिवासी लंबे समय से लड़ते आ रहे हैं। देश के अन्य हिस्सों की तरह गढ़चिरौली में भी ऐसी ही…
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संयुक्त किसान मोर्चा का 29 नवंबर का संसद कूच स्थगित, 4 को अगली बैठक
    27 Nov 2021
    एसकेएम ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि क़ानून वापस लिए जाने के मद्देनज़र फ़िलहाल 29 नवंबर को शीत सत्र की शुरुआत के दिन संसद तक होने वाला ट्रैक्टर मार्च स्थगित कर दिया गया है। भविष्य की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License