NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर
शिक्षाविदों का यह भी मानना है कि आज शिक्षक और छात्र दोनों दबाव में हैं। दोनों पर पढ़ाने और पढ़ने का दबाव है। ऐसे में ज्ञान हासिल करने का मूल लक्ष्य भटकता नज़र आ रहा है और केवल अंक जुटाने की होड़ दिख रही है।
प्रेम कुमार
29 May 2022
education
तस्वीर केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए। 

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2021 के आलोक में शिक्षा की स्थिति पर चिंता और बहस शुरू हो चुकी है। कौन राज्य आगे रहा, कौन पीछे- इस आधार पर प्रदेश का मूल्यांकन और सियासत हो रही है। शिक्षा के मामले में जो प्रदेश फ्लॉप समझा जा रहा था वह टॉप पर दिख रहा है और टॉप पर दिखने का दावा करने वाला प्रदेश फ्लॉप नज़र आ रहा है। क्या राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2021 वाकई प्रदेशों में और अंतत: देश में शिक्षा की स्थिति का आईना है?

नेशनल एचीवमेंट सर्वे यानी एनएएस-2021 की नज़र से सबसे पहले देख लेते हैं कि इसमें दिख क्या रहा है। हर तीन साल पर होने वाले इस सर्वेक्षण में कक्षा 3, 5, 8 और 10 के छात्रों की योग्यता की परख करते हुए स्कूली शिक्षा प्रणाली का समग्र मूल्यांकन किया गया है। ताजा सर्वे में देश के 1.18 लाख स्कूलों के 34.01 लाख छात्र-छात्राओं को सर्वे के दायरे में रखा गया। भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, मॉडर्न इंडिया लैंग्वेज जैसे विषयों पर अलग-अलग कक्षाओं में सवाल पूछे गये।

नीचे दी गयी सारणी में कक्षा 3, कक्षा 5, कक्षा 8, कक्षा 10 के लिए अंकों का राष्ट्रीय औसत और उसके मुकाबले पंजाब एवं दिल्ली का प्रदर्शन देख सकते हैं। दिल्ली के मुकाबले पंजाब ने न सिर्फ शानदार प्रदर्शन किया है। बल्कि, देश के किसी भी राज्य के मुकाबले पंजाब का प्रदर्शन श्रेष्ठ है। दिल्ली इस सर्वे में बुरी तरह पिछड़ती दिखी है।

अब उस सवाल पर लौटते हैं कि क्या वाकई इस सर्वे से देश में शिक्षा की स्थिति का मूल्यांकन हो पा रहा है? अध्ययन के परिणामस्वरूप (लर्निंग आउटकम) विकसित क्षमता को आंकने का प्रयास जरूर करता है एनएएस 2021, लेकिन इससे शिक्षा की स्थिति का पता चलता हो-इससे शिक्षाविद सहमत नहीं हैं।

प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान मैग्सेसे से सम्मानित संदीप पाण्डे का मानना है कि बच्चों की मेधा का टेस्ट अक्सर देश, प्रदेश और समाज की प्रतिष्ठित संस्थानें अपनी जरूरतों के लिए करती हैं। इससे वास्तव में बच्चों की बेहतरी का कोई लेना-देना नहीं होता। शिक्षा और परीक्षा दोनों अलग-अलग चीजें हैं। एक शिक्षक को अपने छात्रों की क्षमता का पता होता है और वह बगैर परीक्षा के ही उसकी ग्रेडिंग कर सकता है या फिर अंक दे सकता है। वास्तव में छात्रों को पास-फेल से दूर रखने की जरूरत है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संजय सिंह बघेल का मानना है कि शिक्षा की स्थिति को समझना हो तो हम यह देखें कि प्रायोगिक शिक्षा की स्थिति  क्या है, शिक्षा उपलब्ध करा रहे स्कूल-कॉलेज में बुनियादी सुविधाएं हैं या नहीं। विदेश मे प्रचलित शिक्षकों की ग्रेडिंग की चर्चा करते हुए प्रो. बघेल  कहते हैं कि छात्र अगर जीवन में उपलब्धि हासिल करता है तो उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की ग्रेडिंग में बढ़ोतरी होनी चाहिए। यह व्यवस्था ही शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाती है।

आईएएस की कोचिंग करा रहे शिक्षाविद सीबीपी श्रीवास्तव का मानना है कि छात्रों की परीक्षा लेने के बजाए शिक्षकों की परीक्षा ली जानी चाहिए। इसके नतीजों से ही शैक्षणिक व्यवस्था का मूल्यांकन हो जाता है। सीबीपी श्रीवास्तव पाठ्यक्रम की गुणवत्ता से भी शिक्षकों के मूल्यांकन को जोड़ते हैं। वे कहते हैं कि अगर पाठ्यक्रम में व्यावहारिक शिक्षा, नैतिक शिक्षा समेत तमाम चीजों का समावेश है और उस पर अमल कराने के लिए योग्य शिक्षक और इन्फ्रास्ट्रक्चर हैं तो शिक्षा का स्तर कमतर होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

उत्तर प्रदेश में उच्चतर शिक्षा से जुड़े प्रोफेसर डॉ एके सिंह कहते हैं कि एनएएएस 2021 का  पैमाना चाहे जो  हो लेकिन यह किसी प्रदेश में शिक्षा की स्थिति को बताने में सक्षम नहीं है। वे कहते हैं कि किसी विषय का गहराई से अध्ययन करने वाला छात्र संभव है कि परीक्षा में अच्छे अंक ना लाए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसके प्रदेश में शिक्षा का स्तर बुरा है। डॉ सिंह का मानना है कि गरीबों तक शिक्षा की पहुंच बनाना, इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास और शिक्षा को जीवन के लिए उपयोगी  बनाने का प्रयास समेत तमाम पहल होती हैं जिनसे किसी प्रदेश में शिक्षा के स्तर को मापा जा सकता है। डॉ सिंह सवाल करते हैं कि अगर एनएएस 2021 में दिल्ली फिसड्डी है तो सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा में 99 प्रतिशत परिणाम कैसे आ रहे हैं?

एजुकेशन वर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2021-22 पर नज़र डालें तो शीर्ष के 50 स्कूलों में पंजाब का सिर्फ एक स्कूल शुमार दिखता है जो 40वें नंबर पर है। दिल्ली का एक भी स्कूल टॉप 50 में जगह नहीं बना पाता है। इसका मतलब यह है कि सीबीएसई बोर्ड में 99 फीसदी परिणामों के बावजूद दिल्ली में शिक्षा का स्तर वह नहीं है जिससे स्कूल की रैंकिंग में सुधार हो। 99 फीसदी बच्चे पास तो हो जा रहे हैं लेकिन प्रतिभा के मामले में वे देश के शीर्ष स्कूलों के बच्चों से काफी पीछे हैं। एनएएस 2021 में पंजाब टॉप पर होने के बावजूद स्कूल की रैंकिंग में बहुत पीछे है तो यहां भी शिक्षा के स्तर पर सवाल उठते हैं।

स्पष्ट है कि एजुकेशन वर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2021-22 से यह तो पता चलता है कि किन राज्यों में ऐसे सुविधा संपन्न स्कूल हैं जहां बच्चे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन इससे संबंधिक प्रदेश में शिक्षा का स्तर कैसा है, इसका पता नहीं चलता। इन उदाहरणों से एक बात स्पष्ट हो रही है कि केवल छात्रों की मेरिट या प्रतिभा का परीक्षण करके शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय यह भी है कि प्रतिभा के मूल्यांकन का आधार भी दोषरहित नहीं है। एक खास पैटर्न में सवाल पूछे जाने से प्रतिभाओं का सही मूल्यांकन हो, यह आवश्यक नहीं है।

शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूलों में प्रोजेक्ट कार्य से बच्चों को जरूर जोड़ा जाता है मगर यह खानापूर्ति बनकर रह गया है। प्रोजेक्ट कार्य अब रेडीमेड मिलने लगे हैं या फिर बाजारों में मांग के अनुसार बनाए जाने लगे हैं। अभिभावक या तो स्वयं प्रोजेक्ट कार्य में बच्चों को मदद करते हैं या फिर बाजार से उसे खरीदकर उपलब्ध करा देते हैं। ऐसे प्रोजेक्ट से जुड़कर भी बच्चे कुछ सीख पा रहे हों, ऐसा नहीं लगता। पूरा मकसद ही बेमकसद हो गया लगता है। निश्चित रूप से बच्चे नंबर ले आएंगे, स्कूल भी बेहतर दिखेंगे लेकिन वास्तव में यह सब खोखले दावों का हिस्सा बन कर रह गया है।

शिक्षाविदों का यह भी मानना है कि आज शिक्षक और छात्र दोनों दबाव में हैं। दोनों पर पढ़ाने और पढ़ने का दबाव है। ऐसे में ज्ञान हासिल करने का मूल लक्ष्य भटकता नज़र आ रहा है और केवल अंक जुटाने की होड़ दिख रही है। स्कूल अपना परफॉर्मेंस खराब होते देखना नहीं चाहते और इसलिए अंक देने में कोई कंजूसी नहीं बरतते हैं। वहीं, छात्र किसी तरह से होमवर्क करने और अपने शिक्षकों को संतुष्ट करने में जुटे हैं। इसके लिए कट-पेस्ट, कॉपी और प्रोजेक्ट वर्क की खरीद सबकुछ करने को वे तैयार हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कल्पना बनकर रह गयी है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

education
Higher education
Education Sector
Teacher
student
education in india

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

शिक्षा को बचाने की लड़ाई हमारी युवापीढ़ी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का ज़रूरी मोर्चा

नई शिक्षा नीति बनाने वालों को शिक्षा की समझ नहीं - अनिता रामपाल

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 


बाकी खबरें

  • Subramanian Swamy
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी, नज़र भी: भाजपा के अपने ही बाग़ी हुए जा रहे हैं
    04 Jan 2022
    मोदी सरकार चाहती है कि कोर्ट उनके ही नेता सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका पर कोई ध्यान न दे जिसमें उन्होंने एअर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया रद्द करने और अधिकारियों द्वारा दी गई मंज़ूरी रद्द करने का…
  • Hindu Yuva Vahini
    विजय विनीत
    बनारस में हिन्दू युवा वाहिनी के जुलूस में लहराई गईं नंगी तलवारें, लगाए गए उन्मादी नारे
    04 Jan 2022
    "हिन्दू युवा वाहिनी के लोग चाहते हैं कि हम अपना धैर्य खो दें और जिससे वह फायदा उठा सकें। हरिद्वार में आयोजित विवादित धर्म संसद के बाद बनारस में नंगी तलवारें लहराते हुए जुलूस निकाले जाने की घटना के…
  • Maulana Hasrat Mohani
    परमजीत सिंह जज
    मौलाना हसरत मोहानी और अपनी जगह क़ायम अल्पसंख्यक से जुड़े उनके सवाल
    04 Jan 2022
    आज भी अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस करते हैं, ऐसे में भारत को संविधान सभा में हुई उन बहसों को फिर से याद दिलाने की ज़रूरत है, जिसमें बहुसंख्यकवाद के कड़वे नतीजों की चेतावनी दी गयी थी।
  • Goa Chief Ministers
    राज कुमार
    गोवा चुनावः  34 साल में 22 मुख्यमंत्री
    04 Jan 2022
    दल बदल के मामले में गोवा बाकी राज्यों को पीछे छोड़ता नज़र आ रहा है। चुनाव से पहले गोवा के आधे से ज्यादा विधायक पार्टी बदल चुके हैं। आलम ये है कि कहना मुश्किल है कि जो विधायक आज इस पार्टी में है कल…
  • fark saaf hai
    सत्यम श्रीवास्तव
    फ़र्क़ साफ़ है- अब पुलिस सत्तासीन दल के भ्रामक विज्ञापन में इस्तेमाल हो रही है
    04 Jan 2022
    पिछले कुछ सालों से देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा अपने ही देश के नागरिकों को ‘कपड़ों से पहचानने’ की जो युक्ति ईज़ाद की है उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पूरी मंशा से भाजपा ने इस विज्ञापन में दंगाई व्यक्ति…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License