NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मोदी दौर में बैंकों ने 660 हज़ार करोड़ कर्ज का नामोनिशान मिटा दिया
मोदी सरकार के बीते पाँच सालों के दौरान बैंकों ने 660 हज़ार करोड़ रूपये राइट ऑफ़ कर दिया। यह कुल NPA के तक़रीबन 50 फीसदी से ज्यादा है।
पुलकित कुमार शर्मा
15 Mar 2020
banking sector

एनपीए की वजह से हुई यस बैंक की बदहाली पूरे बैंकिंग सेक्टर के कर्ज के हालात पर बात करने के तरफ भी इशारा करती है। रिज़र्व बैंक के आंकड़ें बताते हैं कि मार्च 2013 में कुल NPA 205 हज़ार करोड़ था। मार्च 2019 में यह बढ़कर 1,173 हज़ार करोड़ हो गया। लेकिन बैंकों ने एक और खेल खेला। बैंकों ने एनपीए में शामिल कुछ कर्ज को राइट ऑफ कर दिया। अब आप पूछेंगे कि राइट ऑफ करना खेल कैसे है ?

तो इसका जवाब जानने से पहले हम एक लाइन में एनपीए और राइट ऑफ में थोड़ा अंतर समझ लेते हैं। एनपीए (NPA) का अर्थ होता है Non-Performing Asset यानी बैंक द्वारा दिए गया वह कर्ज जिसके मिलने की उम्मीद कम होती है मतलब डूबत ऋण। लेकिन बैंक अपने खाते में इस कर्ज को दर्शाता है। खाते में दर्ज इस कर्ज को जब खाते से ही खारिज यानी हटा दिया जाता है तब इसे राइट ऑफ करना कहते हैं। यानी बैलेंस शीट से कर्ज का नामोनिशान मिटा दिया जाता है। कहने का मतलब है कि बैंक का कर्ज डूब भी गया और यह बात किसी को बताई भी नहीं गयी।

इस लिहाज से मार्च 2019 में 237 हज़ार करोड़ राइट ऑफ़ कर दिए गए। मोदी सरकार के बीते पाँच सालों के दौरान बैंकों ने 660 हज़ार करोड़ रुपये राइट ऑफ़ कर दिया। यह पूरी राशि कुल NPA के तक़रीबन 50 फीसदी से ज्यादा है। इसे नीचे दिखाया गया है

Picture1.png
जरा ठहरकर सोचिए कि बैंक अपने खाते से इन पैसों को काट क्यों देते है। बैंक के शीर्ष अधिकारीयों पर बड़े लोगों का दबाव होता है। नेताओं से लेकर पूंजीपतियों तक साम दाम दंड की नीति अपनकार शीर्ष अधिकारियों से अपने कर्ज को खाते से हटवाने का दबाव डालते हैं। इससे बैंक की बदहाल होती स्थिति अच्छी दिखनी लगती है। समझिये टूटे- फूटे कमरे पर अच्छी खासी पेंटिंग हो जाती है। लेकिन इसका बोझ अंत में आम आदमी को सहना पड़ता है।

बैंक के साथ हुए धोखाधड़ी के मामले

इस दौरान बैंक के साथ हुए धोखाधड़ी के मामलों में भी बहुत इज़ाफा हुआ है। धोखाधड़ी यानी बैंकों के साथ फर्जीवाड़ा करना। धोखा देने वाले कई तरह के हथकंडे अपनाकर बैंक से पैसे वसूल लेना और फिर उसे वापस नहीं लौटना। जैसे फर्जी की कंपनी बनाकर उसे चलाने के लिए कर्ज ले लेना। एक लाख रुपये से अधिक के धोखाधड़ी के मामले वित्त वर्ष साल 2012-2013 में 4306 थे, वित्त वर्ष साल 2018- 19 में यह बढ़कर 6,801 हो गए।

Picture2_0.png

धोखाधड़ी के मामले में डूबा पैसा

मोदी कार्यकाल में धोखाधड़ी में डूबी धन राशि बहुत तेजी से बढ़ी है। जैसा की नीचे दिखाया गया हैं, 2018 -19 की वार्षिक रिपोर्ट के तहत 2013 में यह राशि 10.2 हजार करोड़ थी, जो मार्च 2018 में बढ़ कर 71.5 हजार करोड़ हो गयी।

Picture3_1.png

चुनावी रैली में मोदी जी द्वारा दिए गए भाषणों को याद करिये। वह तेज़ आवाज़ कहते थे कि 'न खाऊंगा न खाने दूंगा', लेकिन आँकड़े देखकर ऐसा लगता है कि मोदी जी की सरकार ने जमकर खाया है और जमकर दूसरों को खिलाया है।

इसलिए मोदी सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति छोड़कर असल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। बैंकों से बाहर जाने वाले कर्ज अगर बैंकों की कमाई के रूप में फिर से लौटकर नहीं आए तो बैंकों के जरिये चलनी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जायेगी।

banking sector
Banking Sector Crisis
NPA
Right off NPA
Banking fraud
Nirmala Sitharaman
modi sarkar
RBI
indian economy
Economic slowdown

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

जब 'ज्ञानवापी' पर हो चर्चा, तब महंगाई की किसको परवाह?

मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर

लंबे समय के बाद RBI द्वारा की गई रेपो रेट में बढ़ोतरी का क्या मतलब है?

आम आदमी जाए तो कहाँ जाए!

क्या भारत महामारी के बाद के रोज़गार संकट का सामना कर रहा है?

कन्क्लूसिव लैंड टाईटलिंग की भारत सरकार की बड़ी छलांग


बाकी खबरें

  • vikram
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपीः बीजेपी नेताओं का विरोध जारी, गांव से बैरंग लौटा रहे हैं किसान
    22 Jan 2022
    चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में कई मौकों पर विभिन्न मुद्दों के लेकर लोगों ने बीजेपी नेताओं का विरोध किया है। चाहे कृषि कानून का मामला या कोई दूसरा क्षेत्रीय या राष्ट्रीय मामला इन सबको लेकर इन नेताओं को…
  • cartoon
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: नये इंडिया का नया गणतंत्र ‘दिवस’!
    22 Jan 2022
    नेताजी का किया-धरा चाहे सब मिट्टी में मिलाएंगे, पर नेताजी की 25 फुट ऊंची मूर्ति तो मोदी जी ही लगाएंगे और वह भी परेड के रास्ते पर। इस गणतंत्र दिवस की तस्वीरें एक नयी कहानी सुनाएंगी-नये इंडिया के नये…
  • up hot seat
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: योगी और अखिलेश की सीटों के अलावा और कौन सी हैं हॉट सीट
    22 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश की गोरखपुर शहर विधानसभा सीएम योगी और करहल विधानसभा अखिलेश यादव के कारण पहले ही चर्चा में हैं, इसके अलावा कौन-कौन सी सीटों पर रहेगी राजनीतिक दलों और आम लोगों की ख़ास नज़र..
  • clubhouse
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ‘क्लब हाउस चैट’ मामले में एक और गिरफ़्तारी, ‘बिस्मिल्ला’ के नाम से आईडी चला रहा था आरोपी राहुल कपूर  
    22 Jan 2022
    क्लब हाउस चैट मामले के तार देश के हर शहर से जुड़ते जा रहे हैं, हरियाणा के बाद अब लखनऊ से एक आरोपी को गिरफ़्तार किया गया है, जो अपना नाम बदलकर महिलाओं के बारे में अश्लील टिप्पणियां करता था।
  • online campaign
    रश्मि सहगल
    चुनावों के ‘ऑनलाइन प्रचार अभियान’ में कहीं पीछे न छूट जाएं छोटे दल! 
    22 Jan 2022
    डिजिटल की तरफ शिफ्ट की बातें करना इसे लागू करने की तुलना में काफी आसान है क्योंकि चुनावी राज्यों के कई हिस्सों में अभी भी इंटरनेट की पैठ कम है और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का रवैया भी काफी हद तक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License