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किस हाल में हैं पीएम केयर फंड से बिहार में बने 500-500 बेड वाले दो कोविड अस्पताल?
आपको यह जानकर हैरत होगी कि इस साल जब राज्य एक बार फिर भीषण कोरोना की वजह से हांफ रहा है, तो महज आठ-नौ महीने पहले बने ये अस्पताल मरीजों की कोई मदद नहीं कर पा रहे, क्योंकि इन्हें बंद किया जा चुका है।
पुष्यमित्र
22 Apr 2021
मुजफ्फरपुर के पताही का मेकशिफ्ट हॉस्पिटल। पिछले साल 2020 में उद्घाटन के समय की तस्वीर
मुजफ्फरपुर के पताही का मेकशिफ्ट हॉस्पिटल। पिछले साल 2020 में उद्घाटन के समय की तस्वीर

पिछले साल अगस्त महीने में जब बिहार में कोविड के मामले पीक पर थे और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था उसके सामने हांफने लगी थी तब राज्य में पीएम केयर फंड से दो कोविड अस्पताल खोलने की घोषणा की गयी थी। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑरगेनाइजेशन (डीआरडीओ) द्वारा इसके तहत 24 अगस्त, 2020 को पटना के ईएसआईसी हॉस्पिटल को 500 बेड के कोविड हॉस्पिटल में परिवर्तित कर दिया गया। वहीं 8 सिंतबर, 2020 को मुजफ्फरपुर के पताही में दूसरा 500 बेड का मेकशिफ्ट हॉस्पिटल खुल गया। यहां सेना के डॉक्टर सेवा देने पहुंचे और नर्सों को वहां पदस्थापित किया गया। इन अस्पतालों में 125 बेड का आईसीयू था और 250 ऑक्सीजन युक्त बेड थे। मुजफ्फरपुर में तो एक ऑक्सीजन प्लांट भी था। उस वक्त इन अस्पतालों ने बिहार की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी मदद की। मगर आपको यह जानकर हैरत होगी कि इस साल जब राज्य एक बार फिर भीषण कोरोना की वजह से हांफ रहा है, तो महज आठ-नौ महीने पहले बने ये अस्पताल मरीजों की कोई मदद नहीं कर पा रहे, क्योंकि इन्हें बंद किया जा चुका है।  

जहां डीआरडीओ द्वारा ईएसआईसी अस्पताल बिहटा के परिसर में शुरू हुए अस्पताल को फिर से चालू करने के लिए बिहार सरकार पिछले एक हफ्ते से सेना से 50 डॉक्टरों की मांग कर रही है। वहीं दो महीने पहले मुजफ्फरपुर के उस कोविड अस्पताल का डेरा डंडा समेट कर कबाड़ की तरह एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर में जमा किया जा चुका है। बेड, ऑक्सीजन और दूसरी सुविधाओं की भीषण कमी से जूझ रहे बिहार राज्य के नागरिकों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर इन दोनों अस्पतालों को क्यों बंद करा दिया गया। अगर आज से अस्पताल खुले रहते तो शायद लोगों की तकलीफें इतनी अधिक नहीं होती।

मंगलवार को इसी विषय को लेकर पटना हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका दायर की गयी। याचिकाकर्ता वकील विजय कुमार सिंह ने इस लापरवाही के लिए दोषियों को दंडित करने और उस अस्पताल को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के जुड़े कई अधिकारियों को वादी बनाया है और कहा है कि कोरोना के इस भीषण दौर में उस अस्पताल को बंद करना एक बड़ी लापरवाही है।

न्यूज़क्लिक के लिए फोन पर हुई बातचीत में विजय कुमार सिंह कहते हैं कि मेरी जानकारी के मुताबिक सेना के डॉक्टर वहां से सिर्फ इसलिए लौट गये, क्योंकि मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन उनके लिए खाने और रहने की समुचित व्यवस्था नहीं कर पाया।

मुजफ्फरपुर के पताही का मेकशिफ्ट हॉस्पिटल। पिछले साल 2020 में उद्घाटन के समय की तस्वीर

याचिका के साथ लगी एक न्यूज क्लिपिंग में यह सूचना दी गयी है कि इस अस्पताल के 75 आईसीयू उपकरण, 75 वेंटिलेटर और 300 सामान्य बेड एसकेएमसीएच में डंप हैं। एक ऑक्सीजन लिक्विड टैंक भी है, जिसे अब फिर से स्थापित करने में कम से कम दो महीने का वक्त लग जायेगा। रविवार, 18 अप्रैल, 2021 को प्रकाशित इस खबर में यह सूचना भी दी गयी है कि शनिवार (17 अप्रैल) को 50 वेंटिलेटर और 25 आईसीयू बेड आईजीआईएमएस पटना, 25 वेंटिलेटर और 25 आईसीयू बेड बेतिया मेडिकल कॉलेज को भेजा गया।

मुजफ्फरपुर के जाने-माने चिकित्सक और बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. निशींद्र किंजल्क कहते हैं कि इस अस्पताल को संभालने के लिए आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज के एक बड़े अधिकारी आये थे, जो उनके जूनियर रह चुके हैं। पिछले साल इस अस्पताल ने मुजफ्फरपुर वासियों को अच्छी सेवा दी थी। वहां जो मरीज भर्ती हुए थे, उनका फीडबैक अच्छा था। पर पता नहीं क्यों इसे अचानक बंद कर दिया गया। मेरा सवाल तो यह है कि क्या सरकार को यह फीडबैक मिला था कि कोरोना खत्म हो गया है? अगर नहीं तो इस आपदा के बीच में इस अस्पताल को बंद करने का मकसद क्या था?

इसी तरह पटना के बिहटा स्थित ईएसआईसी अस्पताल में खुला यह कोविड अस्पताल भी बंद हो चुका है। फिलहाल यहां 50 बेड पर किसी तरह मरीजों का इलाज चल रहा है। पिछले दिनों इस अस्पताल में भर्ती हुए स्थानीय पत्रकार सोनू मिश्रा कहते हैं कि यहां का हाल काफी बुरा है। वे सेकेंड वेब में यहां भर्ती होने वाले पहले मरीज थे। उनके साथ कुल आठ मरीज वहां भर्ती हुए थे। सुविधाओं के अभाव में इनमें से तीन की मौत हो गयी। वे किसी तरह स्वस्थ होकर वापस लौटे। सोनू मिश्रा ने अस्पताल में इलाज कराते हुए वहां की बदहाली के वीडियोज लाइव किये थे।

बिहार का स्वास्थ्य विभाग एक हफ्ते से अधिक समय से केंद्र सरकार से 50 डॉक्टरों की मांग कर रहा है, ताकि इस अस्पताल को फिर से शुरू किया जा सके। बीते मंगलवार, 13 अप्रैल, 2021 को राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अमृत प्रत्यय ने इस बावत डीआरडीओ को पत्र लिखा था। इस मंगलवार, 20 अप्रैल को सेना की तरफ से सकारात्मक संदेश मिला है, मगर 50 डॉक्टरों के बदले सिर्फ पांच चिकित्सक भेजे जा रहे हैं। ऐसे में 500 बेड के इस अस्पताल को किस क्षमता में शुरू किया जा सकेगा, यह कहना मुश्किल है।

फिलहाल राज्य में रोज आठ से दस हजार मरीज मिल रहे हैं। मंगलवार को 10,455 मरीज मिले। बिहार में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या 56,354 पहुंच गयी है। इनमें से 90 फीसदी से अधिक मरीज के होम आइसोलेशन में ही रहने की सूचना है। जिनकी स्थिति गंभीर है, उन्हें भी अस्पताल में जगह नहीं मिल रही। पिछले साल जहां मरीजों की संख्या कम थी, राज्य सरकार की तरफ से कोविड मरीजों के लिए 2840 बेड उपलब्ध कराये गये थे, इस साल अभी तक सिर्फ 1714 बेड ही उपलब्ध हैं। इसी वजह से 15 अप्रैल से ही सारे बेड फुल हैं। ये आंकड़े भी बताते हैं कि अगर पीएम केयर फंड से बने दोनों अस्पताल खुले होते तो स्थिति इतनी अनियंत्रित नहीं होती। मगर अब तो सरकार को इन दोनों अस्पतालों को फिर से पुरानी क्षमता चालू कराने की जी तोड़ कोशिश करनी है। इसका नतीजा मरीज भुगत रहे हैं।

(पटना स्थित पुष्यमित्र स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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