NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ऐतिहासिक ख़ुदाबख़्श खां लाइब्रेरी को तोड़ने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ बढ़ता विरोध!
इस पुस्तकालय में अरबी, फ़ारसी व अंग्रेजी की 21 हज़ार से भी अधिक दुर्लभ प्राच्य पांडुलिपियाँ और 25 लाख से भी अधिक मुद्रित पुस्तकों का अद्भुत संग्रह मौजूद हैं। 
अनिल अंशुमन
11 Apr 2021
ऐतिहासिक ख़ुदाबख़्श खां लाइब्रेरी को तोड़ने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ बढ़ता विरोध!

“वर्षों पूर्व अपने समय के चर्चित अध्ययन व ज्ञान–संस्कृति के केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय में रखी ऐतिहासिक धरोहर पुस्तकों–पांडुलिपियों को सत्ता साजिश के तहत आग लगाकर नष्ट कर दिया गया था। इराक़ हमले के समय भी अमेरिका ने सबसे पहले वहां स्थित विश्वप्रसिद्ध ज्ञान–संस्कृति केंद्र और ऐतिहासिक संग्रहालय को नष्ट कर अपनी सत्ता सनक दिखायी थी। पटना स्थित प्रसिद्ध ख़ुदाबख़्श खां ओरिएंटल लाइब्रेरी के एक हिस्से को तोड़ने का फरमान जारी कर बिहार भाजपा–जदयू की सरकार ने भी उसी तर्ज़ पर अपनी सत्ता सनक में ज्ञान–संस्कृति के केंद्र पर हमला करने जैसा कुचक्र रचा है। 

विकास–विकास चिल्लानेवाली ये सरकार इसी पटना के कई सड़के चौड़ीकरण का काम सिर्फ इसलिए नहीं कर रही है क्योंकि उससे जुड़े कतिपय हिन्दू संगठनों के संरक्षण में कई स्थानों पर सड़क के बीचों-बीच मंदिर खड़े हैं, जहां से धार्मिक आस्था की आड़ में आए दिन सत्ता नियोजित ‘हिन्दू-मुसलमान’ सियासी खेल संचालित किया जाता है!”

जाने माने नाट्य निर्देशक कुणाल ने बेहद क्षोभ भरे अंदाज़ में ये बातें कहीं हैं।

सनद हो कि राजधानी पटना के हाइटेक विकास हेतु फ्लाईओवर निर्माण के नाम पर नीतीश कुमार सरकार द्वारा ख़ुदाबख़्श खां लाइब्रेरी के एक हिस्से को तोड़े जाने का फरमान जारी किया गया है। जिसका प्रदेश के कई वरिष्ठ शिक्षा–पुरातत्वविद, बुद्धिजीवी, लेखक–कलाकार-सामाजिक कार्यकर्ता व उनके संगठनों के साथ-साथ नागरिक समाज के लोग मुखर विरोध कर रहें हैं।

9 अप्रैल को जारी प्रेस बयान में नीतीश कुमार सरकार से अविलंब इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी गयी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे। जो सरकार अपने देश–समाज की ऐतिहासिक संस्कृति और धरोहर के प्रति संवेदनशील नहीं होती है, तो उसके खिलाफ नागरिक समाज को आगे आना ही पड़ता है।

सिर्फ बिहार ही नहीं अपितु पूरे देश में ऐतिहासिक-पुराततात्विक सांस्कृतिक शोध एवं अध्ययन के एक विशिष्ट सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पटना स्थित ख़ुदाबख़्श खां ओरिएंटल लाइब्रेरी को जाना जाता है। जहां महात्मा गांधी से लेकर देश के प्रथम राष्ट्रपति, देश–विदेशों के अनेकों विद्वान–शिक्षाविद–राजनेता इत्यादि आकर यहाँ रखी दुर्लभ पांडुलिपियों–पुस्तकों और पुस्तकालय की भव्यता का अवलोकन कर प्रशंसा कर चुके हैं।

पुस्तकालय-पुस्तिका में गांधी जी द्वारा यहाँ आकर लिखी हुई टिप्पणी आज भी संरक्षित है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि “मैंने इस खूबसूरत लाइब्रेरी के बारे में 9 साल पहले सुना था और तभी देखने की मैंने इच्छा जताई थी। इसने मुझे दुर्लभ पुस्तकों के समृद्ध संग्रह को देखने और परखने में सक्षम होने की खुशी दी है, यहां के रखवालों ने इतनी धैर्य और विनम्रता से मुझे दिखाया है। 

किताबें कला की वस्तु हैं। अल्ल कुरान और शाहनामा की सजावट तथा शानदार कारीगरी व रंग आंखों को सुकून देने वाली हैं। मैं उस महान संस्थापक की याद को श्रद्धांजलि देता हूँ जिन्होंने बिना किसी तकलीफ़ और पैसों की चिंता किए इतने दुर्लभ संग्रह को भारत में पेश कर दिया। --एम.के. गांधी 29.9.1925 (साभार – जेएनयू छात्र संघ पूर्व अध्यक्ष व माले विधायक संदीप सौरभ की पोस्ट से)। 

ऐतिहासिक जानकारियों के अनुसार इसके संस्थापक जनाब मौलवी ख़ुदाबक़्श ख़ान जो अपने समय के जाने माने इतिहासविद–अध्येता और विद्वान थे। 1872 में जब वे अपनी मृत्युशैय्या पर थे, तो अपने बेटे को 14 सौ दुर्लभ पांडुलिपियों और पुस्तकों की जायदाद सौंपते हुए एक पुस्तकालय खोलने की इच्छा जताई थी। इसे पूरा करने के लिए 1888 में लगभग 80 हज़ार की लागत से वर्तमान स्थल पर ही गंगा नदी के किनारे दो मंज़िले पुस्तकालय का निर्माण किया गया। 29 अक्टूबर 1891 में इसे जनता की सेवा में समर्पित कर दिया गया। यह भी बताया जाता है कि इस पुस्तकालय में अरबी, फ़ारसी व अंग्रेजी की 21 हज़ार से भी अधिक दुर्लभ प्राच्य पांडुलिपियाँ और 25 लाख से भी अधिक मुद्रित पुस्तकों का अद्भुत संग्रह मौजूद हैं। इसी के कारण इसे पूरे दक्षिण–मध्य एशिया के सर्वाधिक बौद्धिक विरासत संग्रह का सबसे बड़ा केंद्र होने का सम्मान मिला है।

निजी दान से स्थापित किए गए इस भव्य और अनूठे ऐतिहासिक अध्ययन–शोध व ज्ञान केंद्र पुस्तकालय को तत्कालीन भारत सरकार ने 1969 में संसद द्वारा विशेष रूप से पारित विधेयक में इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की प्रतिष्ठा दी।

बिहार भाकपा माले के राज्य सचिव ने विशेष प्रेस वार्ता बुलाकर नीतीश कुमार सरकार द्वारा ऐतिहासिक ख़ुदाबख़्श खां लाइब्रेरी के हिस्से को तोड़े जाने के सांप्रदायिक फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे अविलंब वापस लेने की मांग की है।

माले के ही विधायक और बिहार विधानसभा द्वारा गठित राज्य पुस्तकालय समिति अध्यक्ष सुदामा प्रसाद ने भी विधानसभा अध्यक्ष को विशेष पत्र लिखकर कहा है कि बिहार सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी व संस्कृति केंद्र के कुछ हिस्से को तोड़े जाने के फैसले से पूरा शिक्षा व बौद्धिक जगत अचंभित और दुखित–कुपित है। क्योंकि सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के शैक्षिक जगत में इस लाइब्रेरी का महत्वपूर्ण योगदान है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी ख्याति है। इतिहास को जानने–समझने का अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत केंद्र है। सरकार एक तरफ विरासत–धरोहरों को बचाने का अभियान चलाने के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर ऐसे ऐतिहासिक धरोहर व शैक्षिक स्थल को तोड़ने का भी उपक्रम कर रही है। इसलिए ऐसे हैरिटेज घोषित भवनों से छेड़छाड़, तोड़ने या नुकसान पहुँचाने की कारवाईयों पर अविलंब रोक लगायी जाय। उन्होंने इस संदर्भ में विभागीय मंत्री से भी विशेष तौर पर मिलने की बात कही है।

नीतीश कुमार सरकार द्वारा लाइब्रेरी तोड़े जाने के फैसले के खिलाफ कई वामपंथी छात्र संगठनों के सड़कों का प्रतिवाद सिलसिला शुरू हो चुका है। 

नीतीश कुमार सरकार के ही नदी जल योजना संबंधी विशेष सलाहकार तथा पटना इंजीयरिंग कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर रहे संतोष कुमार ने कहा है कि सरकार को प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण की योजना नीति को बदल कर वैकल्पिक योजना अमल में लाने की ज़रूरत है।

चर्चा है कि जब से प्रदेश सत्ता में एनडीए गठबंधन शासन आया है, राजधानी के प्राइम लोकेशन पर अवस्थित समाज में ज्ञान और धर्मनिरपेक्ष व लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रेरणा देने वाले सभी पुरातत्व, कला एवं साहित्यिक ज्ञान केन्द्रों को  नष्ट–ध्वस्त करने का सरकारी अभियान शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत प्रसिद्ध पटना म्यूजियम परिसर का सौंदर्य नष्ट कर वहां तथाकथित कला केंद्र निर्माण कार्य से की गयी। देश के कई जाने माने वरिष्ठ इतिहासकारों–पुरातत्व विदों ने अपना कड़ा ऐतराज जाताया, लेकिन सरकार को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा।

पटना आकाशवाणी केंद्र के पास बने रेणु हिन्दी साहित्यिक भवन को तो पूरी तरह से उजाड़कर वहां जिला प्रशासनिक मुख्यालय बना दिया गया है। उक्त संदर्भों में ये संदेह यूं ही नहीं है कि वर्तमान सरकार धर्मनिरपेक्षता और ज्ञान–संस्कृति की रोशनी फैलाने वाले सभी विरासत धरोहर के केन्द्रों को खत्म करने पर सुनियोजित ढंग से आमादा है! 

ताज़ा जानकारी के अनुसार 13 अप्रैल को ख़ुदाबख़्श लाइब्रेरी में बिहार विधान सभा पुस्तकालय समिति के अध्यक्ष माले विधायक सुदामा प्रसाद ने वरिष्ठ शिक्षाविद , पुरातत्व विशेषज्ञ, इतिहासकार एवं  प्रमुख बुद्धिजीवियों के अलावा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की आवश्यक बैठक बुलाई है। जिसमें व्यापक चर्चा-विमर्श के जरिये आगे की रणनीति तैयार की जाएगी । 

Bihar
PATNA
Khuda Bakhsh Library
library
patna university
Khuda Bakhsh Oriental Public Library

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • Gogoi
    वी. वेंकटेशन
    क्या रंजन गोगोई ख़ुद को क्लीन चिट देने में कामयाब रहे ?
    11 Dec 2021
    भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और अब संसद सदस्य जस्टिस रंजन गोगोई की लिखी किताब, ‘जस्टिस फ़ॉर द जज: एन ऑटोबायोग्राफ़ी’ में सुप्रीम कोर्ट में उनके विवादास्पद कार्यकाल को लेकर कई ख़ुलासे हैं।
  • KANPUR DEHAT
    रवि शंकर दुबे
    यूपी की मित्र पुलिस!: ‘बच्चे को लग जाएगी सर...’, पिता चिल्लाता रहा, लेकिन उनकी लाठी न रुकी
    11 Dec 2021
    कानपुर देहात के अकबरपुर में गोद में बच्चा लिए शख़्स को पुलिस ने बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल होने पर जांच और कार्रवाई
  • mullaperiyar
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु और केरल के बीच मुल्लापेरियार बांध के संघर्ष का इतिहास
    11 Dec 2021
    पश्चिम की ओर बहने वाली पेरियार नदी को पश्चिमी घाट के पूर्व में अर्ध-शुष्क कृषि भूमि की ओर मोड़ने के लिए एक बांध बनाने का विचार बहुत पुराना है। एक स्थानीय प्रशासक प्रदानी मुथिरुलप्पा पिल्लई ने वर्ष…
  • biden
    एम. के. भद्रकुमार
    बाइडेन के व्हाइट हाउस ने क्रेमलिन को दिया चकमा
    11 Dec 2021
    इस बैठक का आयोजन पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यालय में रहने के अंतिम दिन किया गया था। 
  • domestic violence
    राज कुमार
    घरेलू हिंसा के फ़र्ज़ी आंकड़े बन रहे संसदीय चर्चा और संसदीय रिपोर्टों का आधार!
    11 Dec 2021
    आख़िर क्या है इन आंकड़ों के पीछे की सरकारी सच्चाई? ये मामला सिर्फ़ आंकड़ों तक सीमित नही है बल्कि मामला इससे कहीं ज़्यादा गंभीर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License