NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
भारत वैश्विक भूख सूचकांक में शामिल 116 देशों के बीच 101 वें पायदान पर
केवल 15 देश भारत से बुरे हाल में हैं जिनमें अफगानिस्तान, नाइजीरिया, मोजांबिक, सोमालिया जैसे देश शामिल हैं। 
अजय कुमार
16 Oct 2021
hunger
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: सोशल मीडिया

भूख की मार झेल रहे 116 देशों के बीच विश्व गुरु का डंका पीटने वाले भारत शुरू के 100 देशों में भी शामिल नहीं है। साल 2021 के लिए प्रकाशित ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत को 101 वें पायदान पर रखा गया है। भारत का हाल पाकिस्तान से भी बुरा है। उसी पाकिस्तान से जिसका नाम लेकर भारत में सबसे कड़वी राजनीति की जाती है। भारत का हाल अपने पड़ोसी मुल्कों नेपाल बांग्लादेश, श्रीलंका से कहीं ज्यादा बुरा है। यह सब देश अपने लोगों की भूख मिटाने में भारत से बेहतर साबित हुए हैं।

अमेरिका और यूरोप के कई विकसित देश पहले ही इस रिपोर्ट से बाहर हैं। भूख की वजह से वहां की परेशानियां इतनी गहरी नहीं कि उन्हें इस रिपोर्ट में शामिल किया जाए। इस तरह से इस रिपोर्ट में सबसे पहले नंबर बेलारूस है और सबसे अंतिम नंबर पर यानी 116 वें पायदान पर सोमालिया है। तुलना करने पर भारत के राष्ट्र सम्मान पर बट्टा लगाने वाली बात यह है कि केवल 15 देश भारत से बुरे हाल में है। जिनमें अफगानिस्तान, नाइजीरिया, मोजांबिक, सोमालिया जैसे देश शामिल है। जहां अंतहीन लड़ाइयां कई सालों से जारी हैं। राज्य और सरकार जैसा कोई अस्तित्व नहीं है।

4 तरह के पैमानों के जरिए ग्लोबल हंगर इंडेक्स को मापा जाता है। पहला पैमाना यह कि आबादी में कितना बड़ा हिस्सा अल्प पोषण का शिकार है। यानी कुल आबादी में कितने लोग जरूरी कैलोरी से कम कैलोरी लेकर जीवन जी रहे है।

दूसरा पैमाना चाइल्ड वेस्टिंग से जुड़ा होता है। इसका मतलब है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों में कितने बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन उनकी लंबाई के हिसाब से कम है। तीसरा पैमाना चाइल्ड स्टांटिंग से जुड़ा होता है। इसका मतलब यह कि 5 साल के उम्र से कम उम्र के बच्चों में कितने बच्चे ऐसे हैं जिनकी लंबाई उनके वजन के मुताबिक नहीं है। सबसे अंतिम पैमाना चाइल्ड मोर्टालिटी से जुड़ा होता है। इसका मतलब यह कि 5 साल से कम उम्र के कितने बच्चे 5 साल पूरा करने से पहले ही मर जा रहे है।

इसे भी पढ़े : विश्वगुरु बनने की चाह रखने वाला भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 107 देशों में 94वें पायदान पर

इन चार पैमानों के आधार पर ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 0 से लेकर 100 तक के स्केल के बीच स्कोर दिया जाता है। इस तरह से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में जीरो का मतलब भूख की कोई परेशानी का ना होना है और 100 के स्कोर का मतलब सबसे बुरे स्तर की भुखमरी का होना है। 0 से 100 के स्कोर के बीच भूख की हालत को बताने के लिए लो, सीरियस, अलार्मिंग और एक्सट्रीमली अलार्मिंग जैसी कैटेगरी बनाई गई है।

भारत को 27.5 का स्कोर मिला है। भूख से बेहाल देशों के बीच भारत को ' सीरियस ' कैटेगरी में रखा गया है।

लंबाई के हिसाब से वजन की कमी यानी चाइल्ड वेस्टिंग के मामले में भारत का हाल दुनिया में सबसे बुरा है। भारत की बदहाली इस मामले में सोमालिया, जिबूती,यमन जैसे देशों की बदहाली से भी ज्यादा गहरी और बड़ी है। साल 2016 से लेकर 2020 के बीच 5 साल से कम उम्र के 17.3 फ़ीसदी बच्चे भारत में चाइल्ड वेस्टिंग का शिकार है। साल 2014 के बाद चाइल्ड वेस्टिंग के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है।

इसे भी पढ़े : भूखे पेट ‘विश्वगुरु’ भारत, शर्म नहीं कर रहे दौलतवाले! 

वजन के हिसाब से लंबाई की कमी यानी चाइल्ड स्टंटिंग के मामले 2016 से लेकर 2020 के बीच 5 साल से कम उम्र के 34.7 बच्चें हैं। यह बहुत खराब हाल है। इस ओर इशारा है कि आने वाली पीढ़ी पहले की पीढ़ी के मुकाबले कम लंबी होगी। भारत की कुल आबादी का तकरीबन 15.3 फ़ीसदी हिस्सा अल्प पोषण (undernourishment) का शिकार है।

हम बात-बात में चीन से तुलना करते हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन में महज 2.5 फ़ीसदी से कम लोग अल्प पोषण का शिकार। महज 1.9 फ़ीसदी बच्चें चाइल्ड वेस्टिंग जूझ रहे हैं तो महज 4.8 फ़ीसदी बच्चे बौनेपन का शिकार है।

सरकार कह रही है कि इस रिपोर्ट के गणना करने के तरीके में कई तरह की खामियां हैं। वह इसे स्वीकार नहीं करती। लेकिन सरकार के कामकाज पर गौर करने वाले सभी जानते हैं कि यही रिपोर्ट अगर भारत की बदहाली बताने के बजाय भारत की मीडिया की तरह भारत की बदहाली को छिपाकर पेश करती तो इसे पूरे धूमधाम के साथ स्वीकार कर लिया जाता है।

भारत में सबसे अमीर 1 फ़ीसदी लोगों के पास भारत की आधी से ज्यादा संपत्ति है। ऐसे देश में एक बार पूरे भारत के चक्कर लगा लिया जाए तो हर सौ कदम के बाद भारत के हर इलाके में गरीबी की मार झेलता समूह देखा जा सकता है। उसे देखने पर भूख को मापने वाले अल्प पोषण के पैमाने सोचने पर शायद उससे भी भयावह महसूस हो जिसकी बात इस रिपोर्ट में की जा रही है।

इसे भी पढ़े : भुखमरी से मुकाबला करने में हमारी नाकामयाबी की वजह क्या है?

पूरी दुनिया के संदर्भ में देखा जाए तो इस रिपोर्ट का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाले नुकसान कोरोना की महामारी और दुनिया भर में चल रहे अंतहीन हिंसक संघर्षों की वजह से भूख की परेशानी के खिलाफ लड़ी जाने वाली लड़ाई रास्ते से भटक गई है। ऐसा लग रहा है जैसे भूख की परेशानी कम होने की वजह और अधिक बढ़ ना जाए।प

पूरी दुनिया ने मिलकर तय किया था कि साल 2030 तक दुनिया से भूख की परेशानी को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। उसके बाद कोई भी इंसान दुनिया के किसी भी इलाके में भूख की परेशानी का शिकार नहीं होगा। लेकिन इस साल की रिपोर्ट क कहना है कि दुनिया जितने लचर तरीके से भूख की परेशानी का सामना कर रही है उससे अब लग रहा है कि साल 2030 तक भूख की परेशानी का सफाया नामुमकिन लगने लगा है। पूरी दुनिया और दुनिया के तकरीबन 47 देश साल 2030 तक भुखमरी से छुटकारा नहीं हासिल कर पाएंगे। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम चेतावनी दे रहा है कि पूरी दुनिया में तकरीबन 4.1 करोड़ लोग अकाल के मुहाने पर खड़े हैं।

इस रिपोर्ट के आंकड़ें बता रहे हैं कि पूरी दुनिया में भूख की परेशानी कम हुई है लेकिन भूख की परेशानी कम होने की दर पहले से भी कम हो गई है। इसमें सबसे बड़ी वजह अल्प पोषण है। जितना पोषण होना चाहिए उतना पोषण नहीं हो पा रहा है। बच्चों में अल्प पोषण की दर सबसे अधिक है। पूरी दुनिया में भूख की सबसे अधिक मार अफ्रीका और सहारा मरुस्थल का दक्षिणी इलाका झेल रहा है। उसके बाद दक्षिण एशिया का नंबर आता है जिसमें भारत पाकिस्तान अफगानिस्तान जैसे देश शामिल है। यूरोप और मध्य एशिया के इलाकों की हालत इस मामले में सबसे बेहतर है।

Global Hunger Index
Child Stunting
Child wasting
इंडिया रैंक इन ग्लोबल हंगर इंडेक्स
India rank in global hunger index
Hunger
What is hunger
Method of calculation of hunger
Hunger and war
Hunger in world

Related Stories

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

विकास की वर्तमान स्थिति, स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव और आम आदमी की पीड़ा

चिंता: ग्लोबल हंगर इंडेक्स को लेकर भी असहिष्णु सरकार

वैश्विक भुखमरी इंडेक्स में भारत की ‘तरक़्क़ी’: थैंक्यू मोदी जी!

केरल में जनता रेस्तरां भूखों का पेट भरने के लिए आगे आये 

सिंघू बार्डर हत्याकांड, भारत की भूख और राहुल शरणम् कांग्रेस

भारत में भूख की अंतहीन छाया

केरल की वाम सरकार ने महामारी के दौरान ग़रीबों के हित में सही फ़ैसला लिया

बंपर उत्पादन के बावजूद भुखमरी- आज़ादी के 75 साल बाद भी त्रासदी जारी

केरल में पूर्ण ग़रीबी उन्मूलन की प्रस्तावित योजना लागू होना तय


बाकी खबरें

  • fertilizer
    तारिक अनवर
    उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार
    04 Feb 2022
    राज्य के कई जिलों के किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा संचालित केंद्रों पर डीएपी और उर्वरकों की "बनावटी" की कमी की वजह से इन्हें कालाबाजार से उच्च दरों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 5 लाख के पार
    04 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,49,394 नए मामले सामने आए और 1,072 मरीज़ों की मौत हुई है। देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 55 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • SKM
    रौनक छाबड़ा
    यूपी चुनाव से पहले एसकेएम की मतदाताओं से अपील: 'चुनाव में बीजेपी को सबक़ सिखायें'
    04 Feb 2022
    एसकेएम ने गुरुवार को अपने 'मिशन यूपी' अभियान को फिर से शुरू करने का ऐलान करते हुए कहा कि 57 किसान संगठनों ने मतदाताओं से आगामी यूपी चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देने का आग्रह किया है।
  • unemployment
    अजय कुमार
    क्या बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ने से बेरोज़गारी दूर हो जाएगी?
    03 Feb 2022
    बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ जाने से क्या बेरोज़गारी का अंत हो जाएगा या ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बात कह रही है?
  • farmers SKM
    रवि कौशल
    कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा
    03 Feb 2022
    मोर्चा ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार भी किसानों की आय को दुगुना किये जाने का उल्लेख नहीं किया है क्योंकि कई वर्षों के बाद भी वे इस परिणाम को हासिल कर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License