NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मुनव्वर फ़ारूक़ी का भारतीय-अमेरिकी हास्य कलाकारों ने किया समर्थन
अपनी टिप्पणियों में भारतीय-अमेरिकी हास्य कलाकारों ने कहा है कि फ़ारूक़ी की गिरफ़्तारी सरासर अनुचित और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ थी।
भाषा
09 Feb 2021
मुनव्वर फ़ारूक़ी

वाशिंगटन: भारतीय-अमेरिकी हास्य कलाकारों के एक समूह ने धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर ठेस पहुंचाने के मामले में हाल ही में जेल से रिहा हुए कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी का समर्थन किया है।

मध्य प्रदेश के इंदौर में नव वर्ष पर एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर एक भाजपा विधायक के बेटे की शिकायत पर फारूकी तथा चार अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया था।

उन्हें उच्चतम न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद शनिवार देर रात इंदौर केंद्रीय कारागार से रिहा किया गया था।

न्यायिक हिरासत में 35 दिन गुजारने वाले फारुकी ने जेल से रिहाई के बाद एक संक्षिप्त वीडियो संदेश में कहा, ‘‘मैं (अपने खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर) इस वक्त कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहूंग। लेकिन मुझे हमारी न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा।’’

अपनी टिप्पणियों में भारतीय-अमेरिकी हास्य कलाकारों ने कहा है कि फारूकी की गिरफ्तारी सरासर अनुचित और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रत्रा के खिलाफ थी।

हास्य कलाकार पल्लवी गुणालन ने कहा, ‘‘एक कॉमेडियन के तौर पर मेरी पूरी जिंदगी न सिर्फ लोगों को हंसाने के लिए , बल्कि विरोधाभासों और अन्याय के खिलाफ बोलने के लिए भी समर्पित है। इस कारण मैं अपने विचारों को विकसित करने के लिए अपनी स्वतंत्रता को काफी महत्व देती हैं और उन्हें लोगों के साथ साझा करती हूं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘महज एक कॉमेडियन होने के नाते मुनव्वर से इस तरह का निर्मम व्यवहार किया जाना सरासर अनुचित है और हमें इस बारे में बोलने की जरूरत है। जेल जाने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया जाना यह प्रदर्शित करता है कि हर किसी के लिए और जिनसे हम असहमत हो सकते हैं, उन लोगों के लिए स्वतंत्रता के क्या मायने हैं, उन्हें समझने के लिए हमें अभी काफी लंबा सफर तय करना होगा।’’

उन्होंने हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स द्वारा जारी एक बयान में कहा, ‘‘हममे से किसी की भी जान काफी शीघ्रता से ले ली जा सकती है और यह सही चीज नहीं है। इसलिए, हमें उनके लिए लड़ना होगा। मैं मुनव्वर और उनके सहकर्मियों का समर्थन करती हूं तथा उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद करती हूं। ’’

हाल ही में, पल्लवी और कई अन्य भारतीय-अमेरिकी हास्य कलाकारों ने फारूकी के समर्थन में एक डिजिटल एकजुटता कार्यक्रम में भाग लिया था। पिछले सप्ताह हुए इस कार्यक्रम में नौ युवा दक्षिण एशियाई अमेरिकी कॉमेडियन ने प्रस्तुति दी थी।

साई डी ने कहा, ‘‘एक हास्य कलाकार होने के नाते मुनव्वर के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करना मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है...। ’’

रिषी महेश ने कहा, ‘‘मुनव्वर का समर्थन करना संघर्ष की स्थिति में आपसी सम्मान का समर्थन करना है। ’’

फिल्म निर्माता एवं कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली फातिमा असगर ने कहा कि फारूकी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक युवा मुखर मुस्लिम कॉमेडियन भी हैं।

Munawar Farooqui
Indian-American comedians
Washington
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    लीजिए विकास फिर से शुरू हो गया है, अब ख़ुश!
    27 Mar 2022
    ये एक सौ तीस-चालीस दिन बहुत ही बेचैनी में गुजरे। पहले तो अच्छा लगा कि पेट्रोल डीज़ल की कीमत बढ़ नहीं रही हैं। पर फिर हुई बेचैनी शुरू। लगा जैसे कि हम अनाथ ही हो गये हैं। जैसे कि देश में सरकार ही नहीं…
  • सुबोध वर्मा
    28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?
    27 Mar 2022
    मज़दूर और किसान आर्थिक संकट से राहत के साथ-साथ मोदी सरकार की आर्थिक नीति में संपूर्ण बदलाव की भी मांग कर रहे हैं।
  • अजय कुमार
    महंगाई मार गई...: चावल, आटा, दाल, सरसों के तेल से लेकर सर्फ़ साबुन सब महंगा
    27 Mar 2022
    सरकारी महंगाई के आंकड़ों के साथ किराना दुकान के महंगाई आकड़ें देखिये तो पता चलेगा कि महंगाई की मार से आम जनता कितनी बेहाल होगी ?
  • जॉन पी. रुएहल
    क्या यूक्रेन मामले में CSTO की एंट्री कराएगा रूस? क्या हैं संभावनाएँ?
    27 Mar 2022
    अपने सैन्य गठबंधन, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के जरिये संभावित हस्तक्षेप से रूस को एक राजनयिक जीत प्राप्त हो सकती है और अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उसके पास एक स्वीकार्य मार्ग प्रशस्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License