NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संगीत
भारत
बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
आलोक शुक्ला
16 Feb 2022
Bappi Lahiri

बॉलीवुड में डिस्को किंग और उससे कहीं ज्यादा गोल्डन किंग के नाम से मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर बप्पी लाहिड़ी का मंगलवार, 15 फरवरी की रात 11.45 बजे  मुंबई के क्रिटी केयर अस्पताल में निधन हो गया। उन्हे सांस लेने में प्रॉब्लम होने के कारण एडमिट किया गया था। वे 69 साल के थे।

बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई। वे अपने तरीके के एक अलग तरह के म्यूज़िक डॉयरेक्टर थे, उन्होंने कई फिल्मों में अपनी अलग टोन की आवाज में गीत में गाये।

बालीवुड के पर्सनल सर्कल में दादू और बप्पी दा कहे जाने वाले बप्पी लाहिड़ी ने भारतीय सिनेमा में सिंथेसाईज्ड डिस्को संगीत के उपयोग को लोकप्रिय बनाने में बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1980 और 1990 के दशक में उनकी अनेक फिल्मों के साथ डिस्को डांसर, नमक हलाल, सैलाब, हिम्मतवाला, तोहफा, जस्टिस चौधरी, आज का एमएलए, शराबी और आज का अर्जुन जैसी फिल्मों ने खूब धमाल मचाया।

बप्पी दा का रियल नेम अलोकेश लाहिड़ी है और उनका जन्म 27 नवम्बर 1952 को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुडी में हुआ था, उनका एक संगीतकार बेटा बप्पा लाहिड़ी और बिटिया रीमा लाहिड़ी हैं।

बप्पी दा को संगीत का हुनर अपने घर से ही मिला और महज तीन साल की उम्र में उन्होंने तबला बजाना शुरू कर दिया था, फिर उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की और कई हिट बांग्ला फिल्मों में संगीत देने से उनका सफर शुरू हुआ जिसमें पंख लगे जब उन्होंने लता मंगेशकर को 1973 में बंगाली फिल्म दादू में गवाया था और लता दी के प्रोत्साहन से वे बॉलीवुड आए। यहां उनकी पहली हिंदी फिल्म 1973 की नन्हा शिकारी बनी हालाँकि उनकी पहचान 1976 की फिल्म ‘चलते-चलते’ के मशहूर गीत ‘चलते-चलते मेरे ये गीत याद रखना कभी अलविदा न कहना’, से बनी थी और फिर उनके संगीत से सजी 1979 महेश भट्ट की हिट फिल्म आई ‘लहू के दो रंग’, फिल्म की शूटिंग हांगकांग और भारत में हुई थी। फिल्म की कहानी, पटकथा और संवाद सूरज सनीम ने लिखे थे और फारुक केसर ने गीत लिखे थे जिन्हें बप्पी लाहिड़ी ने बड़ी ही खूबसूरती से अपने संगीत से सजाया था, इस फिल्म में किशोर कुमार का एक गीत ‘मुस्कुराता हुआ मेरा यार’, काफी सराहा गया ये गाना विनोद खन्ना और शबाना आज़मी पर फिल्माया गया था  

बप्पी दा कभी किसी फिल्म को छोटी या बड़ी नहीं समझते थे, वे बस अच्छे से उसका संगीत तैयार करते थे। उनकी इसी सोच पर उनके संगीत से सजी एक फिल्म 8 अगस्त 1980 को अनिल गांगुली द्वारा निर्देशित एग्रीमेंट नाम से आई, इस फिल्म में रेखा और शैलेंद्र सिंह ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। शैलेन्द्र सिंह मुख्यतः एक सिंगर के रूप में जाने जाते हैं लेकिन शुरूआती दौर में उन्होंने कुछेक फिल्मों में बतौर एक्टर भी काम किया था।

इस फिल्म में गुलशन बावरा के लिखे गीत को बप्पी लाहिड़ी ने बेहद नये तरीके से कम्पोज किया था। ऐसा ही एक गीत काफी उल्लेखनीय है ‘जीना ये कोई  जीना नहीं प्यार बिना’,  इस गाने के दो वर्जन थे एक लता मंगेशकर ने गाया था जो रेखा के ऊपर फिल्मांकित हुआ और दूसरा शैलेन्द्र सिंह पर फिल्माया गया था जिसे उन्होंने खुद गाया था।

वास्तव में बप्पी दा एक वर्सेटाईल म्यूजिक डायरेक्टर थे, वर्सेटाईल इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि वे जाने ज़रूर डिस्को किंग के रूप में जाते हैं लेकिन सच कहें तो उन्हें हर तरह का संगीत देने में महारत हासिल थी। मेलोडी हो, वेस्टर्न हो या फिर क्लासिकल। और बप्पी दा के लिए ये बात यूँ ही नहीं कही जातीं, वे वाकई अपने संगीत में ऐसे प्रयोग करते हैं जो शायद ही दूसरा कभी करता होगा। अब जैसे  अमिताभ बच्चन स्टारर 30 अप्रैल 1982 को प्रकाश मेहरा की रिलीज फिल्म ‘नमक हलाल’ में अंजान के लिखे एक गीत ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ को कुछ इस तरह से कम्पोज किया कि वो एक माइल स्टोन बन गया। किशोर कुमार को बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला, इस गाने के क्लासिकल पार्ट को बप्पी दा ने पंडित सत्यनारायण मिश्रा से गवाया था। 

इसके बाद बप्पी लाहड़ी के संगीत के सुरीले सफ़र में एक ऐसी फिल्म आई जिसने उनको डिस्को किंग के ख़िताब से नवाज़ दिया और कुछ इस तरह ये ख़िताब उनके सफ़र में साथ हो लिया कि पूरी  ज़िंदगी ये उनके साथ रहा। उनके जीवन की ये माइल स्टोन फिल्म थी राही मासूम रज़ा द्वारा लिखित और बब्बर सुभाष द्वारा निर्देशित 10 दिसम्बर 1982 को रिलीज हुई ‘डिस्को डांसर’।

इस फिल्म ने मिथुन चक्रवर्ती की जिंदगी भी बदल दी थी और उन्होंने बप्पी दा के संगीत से सजे कई गानों के साथ फिल्म के सर्वाधिक हिट सॉन्ग ‘आय ऍम अ डिस्को डांसर’ से दर्शकों के दिल पर अपनी एक जगह बना ली।

ये फिल्म दुनिया भर में सफल रही, यह दुनिया भर में 100 करोड़ कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म भी बनी। डिस्को डांसर ने बप्पी दा के संगीत के साथ मिथुन को भारत के साथ दक्षिणी एशिया और सोवियत संघ में एक घरेलू नाम के रूप में स्थापित कर दिया। इस फिल्म में बप्पी दा के म्यूजिक एल्बम ने भारत में प्लैटिनम और चीन में गोल्ड अवार्ड हासिल किया।

बप्पी दा को बदलते समय के अनुसार अपने संगीत के प्रयोगों को बदलने का हुनर भी बखूबी आता था, जैसे मई 1984 को अमिताभ बच्चन स्टारर, प्रकाश मेहरा की फिल्म शराबी में बप्पी दा ने घुंघरू का उपयोग किया जो खूब हिट हुआ। इस फिल्म में बेस्ट म्यूजिक के लिए बप्पी लाहड़ी को और बेस्ट प्ले बैक के लिए किशोर कुमार को फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला जबकि इसे हर वर्ग में  नामांकन मिले जैसे बेस्ट एक्ट्रेस के लिए जया प्रदा, बेस्ट एक्टर अमिताभ, बेस्ट लिरिक्स के लिए अंजान को, बेस्ट डायरेक्टर प्रकाश मेहरा को, फिल्म में बप्पी दा ने एक गाने दे दे प्यार दे के दो-दो वर्जन तैयार किये और दोनों ही अपने आपमें मुकम्मल थे एक को किशोर कुमार ने अपनी आवाज़ दी थी जबकि दूसरे को आशा भोंसले ने।  

बप्पी दा की विशेषता थी कि ज्यादातर वे तुरंत गाने की ट्यून बना देते थे और गा भी देते थे। अपनी ऐसी ही खासियत के कारण वे कई ऐसी फिल्मे फटाफट कर देते थे जिनका नाम आप सुनने के बाद कहते हैं हैं अच्छा ये फिल्म भी बप्पी दा ने की है। जी हाँ एक ऐसी ही फिल्म ‘साहब’ नाम से 31 जनवरी 1985 को अनिल गांगुली के निर्देशन में रिलीज हुई। इस फिल्म में अनिल कपूर और  अमृता सिंह की जोड़ी ने बप्पी दा के गीत संगीत में थिरक कर दर्शकों को भी थिरकने को मजबूर कर दिया फिल्म का ऐसा ही एक ज़बरदस्त गाना - "यार बिना चैन कहां रे" आज भी लोकप्रिय हैं।

इसके बाद 10 अगस्त 1990 में बप्पी दा के संगीत से सजी एक ऐसी फिल्म आई जिसने सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के गिरते करिअर को फिर से स्थापित करने में बहुत मदद की और ये फिल्म थी, के सी बोकाड़िया की ‘आज का अर्जुन’।

फिल्म में अंजान के लिखे और बप्पी लहरी द्वारा संगीतबद्ध, लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार की आवाज़ में गाये गीत ‘गोरी हैं कलाईयाँ, मंगा दे मुझे हरी हरी चूड़ियाँ’ को लीड कास्ट अमिताभ और जया प्रदा पर फिल्माया गया था और ये बेहद हिट हुआ। इस फिल्म में अपने खूबसूरत संगीत के लिए बप्पी दा ने फिल्मफेयर अवार्ड भी जीता। इस गाने में बप्पी दा ने कई नए प्रयोग किये जिसके के लिए वे मशहूर थे।

गानों में कोरस का अपना एक अलग महत्त्व होता है। इस बात को कहते हुए बप्पी दा दीपक बलराज विज द्वारा निर्देशित 31 अगस्ट 1990 को रिलीज माधुरी दीक्षित स्टारर फिल्म सैलाब के "हमको आज कल इंतजार" का ज़िक्र करते रहे हैं। जावेद अख्तर के लिखे इस गीत में बप्पी दा के संगीत की सनसनाहट आज भी महसूस कर सकते हैं,  इस गाने ने सरोज खान को बेस्ट कोरिग्राफर का अवार्ड भी दिलाया, आप जब भी इसको सुनेंगे तो कोरस को खूब अच्छे से महसूस करेंगे।

इतना काम करने के बाद भी बप्पी लाहिड़ी बेहद विनम्रता से पेश आते थे, वे कहते रहे हैं कि मैं जो भी हूँ दर्शको के प्यार के कारण हूँ।

आज ये हरफनमौला म्यूजिक डायरेक्टर बप्पी दा हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका संगीत और उनकी अलहदा आवाज सदा हमारे बीच रहेगी।

(लेखक वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक, निर्देशक एवं पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

इसे भी पढ़ें : स्मृति शेष: सुरेखा सीकरी उर्फ़ दादी मां यानी समानांतर सिनेमा के मज़बूत स्तंभ का ढहना

Bappi Lahiri
Musician Bappi Lahiri passes away
Indian singer
Bappi Da

Related Stories


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License