NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नहीं, भारत "मुस्लिम-राष्ट्र" नहीं बनेगा! 
भारत के मुस्लिम-बहुल राष्ट्र में बदलने की आशंका एक झूठा प्रचार है, जो प्रचार देश में हिंदू और मुस्लिम आबादी के विकास की ऐतिहासिक दर को ध्यान में नहीं रखता है।
आत्मन शाह
01 Nov 2021
Translated by महेश कुमार
India
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

भारत में धर्म के आधार पर जनसंख्या और उसकी वृद्धि हमेशा एक राजनीतिक मुद्दा रही है, खासकर तब जब चुनाव नज़दीक हों। हम पोस्ट-ट्रुथ समाज में रह रहे हैं जिसमें लोग तार्किक सोच के बजाय भावनाओं पर अधिक जोर देते हैं। और इसलिए उन्हें धर्म के नाम पर आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यह झूठा प्रचार फैलाया गया या फैलाया जा रहा है कि मुस्लिम आबादी हिंदू आबादी से अधिक हो जाएगी। और भारत जल्द ही मुस्लिम बहुल देश बन जाएगा। इसके अलावा, इस प्रचार को आगे बढ़ाने वाले लोगों का मानना है कि इस मुद्दे को हल करने के लिए हिंदुओं को अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए, और सरकार को सख्त नीतिगत कार्रवाइयों के ज़रिए मुस्लिम आबादी को बढ़ने से रोकना चाहिए।

आइए चर्चा करते हैं कि क्या यह दावा आंकड़ों पर आधारित है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की हिंदू और मुस्लिम आबादी का हिस्सा क्रमशः 79.80 प्रतिशत और 14.23 प्रतिशत था। केवल जम्मू और कश्मीर और लक्षद्वीप में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक में थी। तालिका-1, 1951 से हिंदू-मुस्लिम आबादी और उनकी विकास दर को दर्शाती है।

2011 में भारत की कुल आबादी में मुस्लिम आबादी का योगदान 15 प्रतिशत से भी कम देखा गया है। हालांकि, यह आबादी की बढ़ती हुई प्रवृत्ति को दर्शाता है। यह 1951 में 9.80 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 14.20 प्रतिशत हो गया है। हालाँकि, दोनों समुदायों के भीतर एक दशकीय वृद्धि दर में उल्लेखनीय कमी आई है। 1951 और 2011 के बीच, मुस्लिम आबादी की दशकीय वृद्धि दर में 8.28 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि के दौरान हिंदू आबादी में 6.12 प्रतिशत की कमी आई है। यह महसूस किया जा सकता है कि दोनों समुदायों की दशकीय वृद्धि आपस में मिल रही है, और इस पर विचार करने का कोई आधार नहीं है कि भविष्य में उनकी वृद्धि अलग होगी। 

प्यू रिसर्च सेंटर (पीआरसी) के अनुसार, मुस्लिम आबादी का हिस्सा 2050 में बढ़कर 18.4 प्रतिशत हो जाएगा, जबकि हिंदू आबादी का हिस्सा 76.7 प्रतिशत होगा। यह इंगित करता है कि भारत में नज़दीक समय में या बाद में मुस्लिम आबादी अधिक होने की कोई संभावना नहीं है। इसके अलावा, हिंदू आबादी 2050 में पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और नाइजीरिया जैसे चार सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देशों की मुस्लिम आबादी से अधिक हो जाएगी।

मुख्य रूप से, दो संभावनाएं हैं जिनमें मुस्लिम आबादी हिंदू आबादी से अधिक हो सकती है। सबसे पहले, यह तब होगा जब हिंदू आबादी में बिल्कुल भी वृद्धि नहीं होगी। यदि मुस्लिम जनसंख्या 24.43 प्रतिशत (2001-11 की वृद्धि दर) की दर से बढ़ती रही और हिंदू जनसंख्या समान बनी रहे (यानि शून्य जनसंख्या वृद्धि दर कायम रखती है), तो 2091 में मुसलमानों की संख्या हिंदुओं से अधिक हो सकती है। दूसरे शब्दों में, मुस्लिम आबादी, कुल आबादी की तुलना में 2091 तक कुल जनसंख्या का 50 प्रतिशत हो सकती है। हालाँकि, यह तर्कहीन है क्योंकि हिंदू जनसंख्या 70 वर्षों तक समान नहीं रहेगी। यह तभी हो सकता है जब हिंदू जन्म दर और मृत्यु दर समान हो, लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस तथ्य का समर्थन नहीं करते हैं। 

दूसरे, आंकड़ें इस तर्क का समर्थन भी नहीं करते हैं है कि हिंदुओं की तुलना में मुसलमानों में अधिक जनसंख्या वृद्धि दर के कारण भारत "मुस्लिम राष्ट्र" में बदल जाएगा। 1980 के दशक को छोड़कर, 1951 से मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आ रही है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कुल प्रजनन दर (टीएफआर) में भी मुस्लिम समुदाय में गिरावट का रुझान दिखा है। एनएफएचएस-4 के अनुसार मुसलमानों में टीएफआर 2.62 प्रतिशत था, जो कि अब 2.1 प्रतिशत के बदलाव के करीब है। साथ ही, एनएफएचएस-3 और एनएफएचएस-4 डेटा से पता चलता है कि मुसलमानों में टीएफआर हिंदुओं की तुलना में अधिक अनुपात में कम हुआ है।

भट्ट और जेवियर (2005) के अनुसार, दोनों समुदायों में टीएफआर 2031-41 के दौरान 2.1 प्रतिशत के समान होगा। उन्होंने यह भी अनुमान लगाया है कि 2101 में मुस्लिम आबादी का हिस्सा 18.8 फीसदी हो जाएगा।

पीआरसी के अनुसार, मुसलमानों में टीएफआर यानि कुल प्रजनन दर 2015 में 4.4 से घटकर 2.6 हो गई थी। इसी अवधि के दौरान, हिंदू में टीएफआर 3.3 से गिरकर 2.1 हो गया था। इससे पता चलता है कि इस अवधि के दौरान टीएफआर में अंतर भी कम हुआ है।

नतीजतन, धार्मिक संरचना महत्वपूर्ण रूप से नहीं बदलेगी, और भारत इस दौरान "मुस्लिम-राष्ट्र" कतई नहीं बनेगा। घोष (2018) के अध्ययन से यह भी पता चला है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में हिंदू में टीएफआर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के मुस्लिम टीएफआर से अधिक है। इससे पता चलता है कि उच्च जनसंख्या वृद्धि विभिन्न सामाजिक-आर्थिक हालातों की वजह से जिम्मेदार है, न कि धर्म की वजह से ऐसा है।

(आत्मन शाह, अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग में व्याख्याता हैं।) 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

No, India Will not Become a "Muslim-Rashtra"

communal propaganda
Population Growth
Hindus
Muslims
census
PRC
Communalism

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • bihar
    अनिल अंशुमन
    बिहार शेल्टर होम कांड-2’: मामले को रफ़ा-दफ़ा करता प्रशासन, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
    05 Feb 2022
    गत 1 फ़रवरी को सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो ने बिहार की राजनीति में खलबली मचाई हुई है, इस वीडियो पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। इस वीडियो में एक पीड़िता शेल्टर होम में होने वाली…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    सत्ता में आते ही पाक साफ हो गए सीएम और डिप्टी सीएम, राजनीतिक दलों में ‘धन कुबेरों’ का बोलबाला
    05 Feb 2022
    राजनीतिक दल और नेता अपने वादे के मुताबिक भले ही जनता की गरीबी खत्म न कर सके हों लेकिन अपनी जेबें खूब भरी हैं, इसके अलावा किसानों के मुकदमे हटे हो न हटे हों लेकिन अपना रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ कर लिया…
  • beijing
    चार्ल्स जू
    2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के ‘राजनयिक बहिष्कार’ के पीछे का पाखंड
    05 Feb 2022
    राजनीति को खेलों से ऊपर रखने के लिए वो कौन सा मानवाधिकार का मुद्दा है जो काफ़ी अहम है? दशकों से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने अपनी सुविधा के मुताबिक इसका उत्तर तय किया है।
  • karnataka
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: हिजाब पहना तो नहीं मिलेगी शिक्षा, कितना सही कितना गलत?
    05 Feb 2022
    हमारे देश में शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, फिर भी लड़कियां बड़ी मेहनत और मुश्किलों से शिक्षा की दहलीज़ तक पहुंचती हैं। ऐसे में पहनावे के चलते लड़कियों को शिक्षा से दूर रखना बिल्कुल भी जायज नहीं है।
  • Hindutva
    सुभाष गाताडे
    एक काल्पनिक अतीत के लिए हिंदुत्व की अंतहीन खोज
    05 Feb 2022
    केंद्र सरकार आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार को समर्पित करने के लिए  सत्याग्रह पर एक संग्रहालय की योजना बना रही है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के उसके ऐसे प्रयासों का देश के लोगों को विरोध…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License