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अपने भविष्य के लिए लड़ते ब्राज़ील के मूल निवासी
हाल ही में इतिहास की सबसे बड़ी मूल निवासियों की लामबंदी ने सत्ता प्रतिष्ठानों के आस-पास की उस शुचिता की धारणा को को तोड़कर रख दिया है जिसने सदियों से इन मूल निवासियों को सत्ता से बाहर रखा है या उनके ख़त्म होने की वजह रही है।
निक एस्टेस
20 Sep 2021
Indigenous People of Brazil Fight for Their Future
प्रतिकात्मक फ़ोटो। | साभार: पीएक्सहेयर

ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने ब्राजील में मूल निवासियों की हत्या का नया लाइसेंस दे दिया है। 2019 में सत्ता में आने से पहले यह साफ़ नहीं था कि वह ब्राजिल में किसी तरह का निर्माण चाहते हैं, लेकिन वह इतना ज़रूर जानते थे कि यहां के मूल निवासी और अमेज़ॉन और इसी तरह की और भी चीज़ों में से किसे और क्या-क्या तबाह करना चाहते हैं।

मूल निवासियों की नेता सेलिया ज़ाक्रिबा ने मुझे बताया, "बोल्सोनारो ने सबसे पहले एक महिला, यानी हमारी ज़मीन, हमारी मां पर हमला किया। हमारे पास पलटवार करने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा है।"

राष्ट्रपति बनने के बाद से देश के अंतिम सैन्य तानाशाह के अधीन काम करने वाले इस पूर्व सेना कप्तान ने पर्यावरण और इसकी रक्षा करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ एक अभूतपूर्व युद्ध का नेतृत्व किया है। मूल निवासी-विरोधी क़ानूनों के एक समूह से आदिवासी भूमि रक्षकों के ख़िलाफ़ हिंसा और हत्याओं में बढ़ोत्तरी हुई है, और कोविड-19 महामारी ने ब्राजील के आदिवासियों, अमेज़ॅन वर्षावन और इस ग्रह के भविष्य के वजूद को ही ख़तरे में डाल दिया है।

बोल्सोनारो की अनदेखी की वजह से अमेज़ॉन के तक़रीबन 7,700 वर्ग मील (20,000 वर्ग किलोमीटर) जंगल तबाह हो गये है, और ऐसा ज़्यादातर मवेशी उद्योग और लकड़ी उद्योगों के चलते लगने वाली आग के कारण हुआ है। अमेज़ॉन वर्षावन की यह तबाही बायोम (किसी ख़ास तरह की जलवायु के अनुकूल वनस्पति और वन्य जीवन का एक बड़ा समुदाय) को एक नहीं पलटाये जा सकने वाले बदलाव के एक ऐसे मोड़ पर ले जा रहा है, जहां यह खुद को फिर से पहले वाली स्थिति में ले आ पाने में सक्षम नहीं होगा और अमेज़ॉन को आदिवासियों के रहने लायक़ नहीं छोड़ेगा।

इस बीच 2021 में वैज्ञानिकों ने पाया है कि अमेज़ॉन पहली बार कार्बन ऑक्साइड को अवशोषित करने के मुक़ाबले उत्सर्जित ज़्यादा कर रहा है। अमेज़ॉन, जिसे अक्सर ऑक्सीजन के लिहाज़ से "इस धरती के फेफड़े" के तौर पर जाना जाता है,अब ऐसा लगता है कि यह बढ़ने के मुक़ाबले कहीं तेज़ी से ख़त्म हो रहा है।

लेकिन, इस जंगल को अपना घर बताने वाले आदिवासी मिटने से इनकार करते हैं।

अगस्त, 2021 के आख़िर में ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस और देश की राजधानी ब्रासीलिया स्थित राष्ट्रपति महल से घिरे मुख्य सैरग़ाह पर मार्च कर रहे तक़रीबन 6,000 आदिवासियों के तेज़ क़दमों से उठते लाल धूल धुएं की तरह आकाश में उठी। देश के हर इलाक़े से एक सौ छिहत्तर अलग-अलग आदिवासी समूह अपने ख़ुद के मिटने के विरोध में लुटा पेला विदा (जीवन बचाने का संघर्ष) शिविर पहुंचे।

हाल ही में इतिहास की सबसे बड़ी मूल निवासियों की लामबंदी ने सत्ता प्रतिष्ठानों के आस-पास की उस शुचिता की धारणा को को तोड़कर रख दिया है, जिसने सदियों से इन मूल निवासियों को सत्ता से बाहर रखा है या उनके ख़त्म होने की वजह रही है।

एपीआईबी के रूप में जाने जाते ब्राजील के आदिवासियों के एक संगठन की एलेसेंड्रा मुंडरुकु ने मुझसे कहा, "हमें एक आदिवासी संगठन की ज़रूरत है।। हमारी ज़िंदगी मायने रखती है।” उनके पास जोआनिया वैपिचाना जैसी एक समर्थक हैं, जो पहली आदिवासी महिला वकील और कांग्रेस की सदस्य हैं। वह ब्राजील और आदिवासी अधिकारों के "राजनीतिक शुरुआत" की मांग कर रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने एपीआईबी के साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वदेशी आंदोलन को आगे बढ़ाने में भी मदद की है।

एपीआईबी देश के आदिवासियों के एकीकरण का एक ताक़तवर ज़रिया है। ब्राज़ीलियाई आदिवासियों की संख्या ब्राज़ील की आबादी का एक छोटा सा हिस्सा है। यह संख्या 21 करोड़ 10 लाख आबादी में तक़रीबन 9 लाख है।  लेकिन, उनके पास ऐसी भाषा और संस्कृति है, जिसमें एक ऐसी गहरी मानवीय विविधता है, जो ज़्यादातर आधुनिक देशों में भी नहीं दिखायी देती है। वे अब बोल्सोनारो की युद्धप्रियता और उन्हें सत्ता में लाने वाली शक्तिशाली ताक़तों के ख़िलाफ़ एक आम मक़सद से लामबंद हैं।

9 अगस्त को एपीआईबी ने बोल्सोनारो पर नरसंहार का आरोप लगाते हुए अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में मुकदमा दायर कर दिया है। ऐसा आईसीसी के इतिहास में पहली बार हुआ है कि पश्चिमी गोलार्ध के आदिवासियों ने हेग में मानवता के विरुद्ध अपराधों के ख़िलाफ़ आदिवासी वकीलों की मदद से अपना बचाव किया है।

एपीआईबी की कार्यकारी निदेशक सोनिया गुआजारा ने एक बयान में कहा, "हम अपने अस्तित्व को बनाये रखने को लेकर सैकड़ों सालों से हर दिन लड़ते रहे हैं और आज इन अधिकारों के लिए हमारी लड़ाई तो वैश्विक है।"

आधुनिक कृषि कारोबारी, हथियार लॉबी, और ईसाई धर्म प्रचारक से लेकर दक्षिणपंथी ताक़तों का एक ऐसा गठबंधन सामूहिक रूप से संसद में लामबंद है, जिसे "बुल, बुलेट और बाइबिल" ब्लॉक के रूप में जाना जाता है और यह समूह अमेज़ॉन और वहां रह रहे लोगों के तबाह करने वाली बोल्सनारो की परियोजना का समर्थन कर रहा है।

सोया की खेती (ज़्यादातर जानवरों के चारे के लिए) और मवेशियों के झुंड ने हरे-भरे इन जंगलों और पारंपरिक ग्रामीण समुदायों की जगह ले ली है। ब्राजील का ज़्यादातर खाद्य पदार्थ निर्यात कर दिया जाता है। ये खाद्य पदार्थ बड़े पैमाने पर अमेरिका और यूरोपीय बाज़ारों का पोषण करते हैं। कई सारे आदिवासी इस सोया उत्पादन के सिलसिले में पर्यावरण की इस तबाही में भूमिका को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे बड़ी निजी तौर पर संचालित कंपनी कारगिल जैसे बहुराष्ट्रीय निगमों को दोषी ठहराते हैं।

ग्रामीण ज़मींदार, लकड़ी उद्योग को चलाने वाले और खदान पर कब्ज़ा करने वाले बंदूक की नोक पर इन आदिवासियों और पारंपरिक समुदायों को आतंकित करते हैं और उनकी ज़मीन से उन्हें बेदखल करते हैं। बन्दूक और गोला-बारूद रखने के क़ानूनों में ढील दिये जाने के चलते ख़ास तौर पर ग्रामीण ज़मींदारों के बीच बंदूक के स्वामित्व में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है, जिसके चलते बाद के दिनों में गोली-बारी की हिंसा में इज़ाफ़ा हुआ है। बोल्सोनारो की सिग्नेचर वाले उंगली के इशारे उनके जनाधार को तैयार करने को लेकर समर्थन का संकेत देते हैं।

इस प्रभाव का ज़्यादतर हिस्सा इंजील चर्चों के साथ गठबंधन सहित उस संयुक्त राज्य अमेरिका से आता है, जिससे बोल्सोनारो और उनके समर्थक प्रेरणा लेते हैं।

बोल्सोनारो ने कभी अफ़सोस जताते हुए कहा था, "यह शर्म की बात है कि ब्राजील की घुड़सवार सेना उन अमेरिकी घुड़सवार सेनाओं की तरह कुशल नहीं थी, जिन्होंने वहां के मूल निवासियों को ख़त्म कर दिया था।"

मुंडरुकु ने मुझे बताया, "आपके देश (संयुक्त राज्य अमेरिका) में पहले ही मूल निवासियों को तबाह किया जा चुका है।" वह ब्राजील में भी इसी तरह की प्रक्रिया को देख रही हैं। लेकिन, इससे जुड़ाव तो ख़त्म नहीं होता है।

मुंडरुकु ने आगे कहा, "जिस तेज़ी से आपका देश (संयुक्त राज्य अमेरिका) सोया की खपत कर रहा है, वह खपत मेरी मातृभूमि की तबाही में योगदान देती है।"

इस हमले का निर्णायक मोर्चा इन आदिवासी इलाक़ों की रक्षा करने वाला बहुत हद तक क़ानूनी और राजनीतिक ढांचा यानी कि 1988 का ब्राज़ीलियाई संविधान है। ब्राज़ीलियाई कांग्रेस उन विधेयकों की एक श्रृंखला पर मतदान करती रही है, जो इन आदिवासी इलाक़ों की हिफ़ाज़त करने, अवैध भूमि-हथियाने से बचाने और बुनियादी ढांचे, खनन और ऊर्जा परियोजनाओं के लिहाज़ से आदिवासियों की ज़मीन को छोड़ देने जैसे मुश्किल से हासिल हुए  अधिकारों को फिर से पहले वाली स्थिति में ला देंगे।

इन विधेयकों में से एक विधेयक तो राष्ट्रपति को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन सम्मेलन के 1989 के उस स्वदेशी और जनजाती सम्मेलन 169 से हट जाने को लेकर अधिकृत करेगा, जो स्वदेशी और आदिवासियों की रक्षा करने वाली एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संधि है।

एपीआईबी और लुटा पेला विदा सरकार से कम से कम अपने क़ानूनों और संविधान का सम्मान करने के लिए कह रहे हैं। इसलिए, 150 मूल निवासियों के एक समूह ने 27 अगस्त को ब्राजील की कांग्रेस की सीढ़ियों पर एक बड़े काले ताबूत का पुतला जलाया। इसके किनारों पर उन विधेयकों के नाम लिखे हुए थे, जिनका मक़सद उन्हें तबाह करना है। संदेश एकदम साफ़ था कि मून निवासी इससे इनकार करते हैं।

1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे मामले में दलीलों की सुनवाई करना शुरू कर दिया है, जो 1988 के संविधान की पुष्टि के बाद अपने इलाक़ों से हटाये गये इन आदिवासियों की पैतृक ज़मीन को हड़पने में सक्षम बना सकता  है या उस पर रोक लगा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को इस मामले पर फिर से विचार करने की तारीख़ को तय किये बिना उसे निलंबित कर दिया था। एपीआईबी का दावा है कि आदिवासियों के लिए कोई भी सकारात्मक फ़ैसला देश के सैकड़ों भूमि संघर्षों का तुरंत हल देगा, और साथ ही साथ यह चेतावनी भी देता है कि कोई भी नकारात्मक फ़ैसला हिंसा को तेज़ भी कर सकता है।

इस बात पर ग़ौर करना ज़रूरी है कि ब्राजील का लोकतंत्र कमज़ोर है। 2022 में होने वाले चुनाव में बोल्सोनारो के फिर से चुने जाने की संभावना क्षीण होने के चलते उनके समर्थकों ने 7 सितंबर को "ब्राजील में एक सामान्य सफ़ाये की प्रक्रिया को शुरू करने" को लेकर सड़कों पर लामबंद होने का आह्वान किया था। इसके लिए निकाली गयी रैली के निशाने पर कांग्रेस, सुप्रीम कोर्ट और चीनी दूतावास थे और बोल्सोनारो समर्थक अमेरिकी राष्ट्रपति के समर्थकों से अपनी प्रेरणा लेते हुए दिख रहे थे, जिन्होंने 6 जनवरी को अमेरिकी संसद भवन पर धावा बोल दिया था।

10 अगस्त को बोल्सोनारो के बेटे एडुआर्डो बोल्सोनारो ने मेरे ग्रामीण गृह राज्य साउथ डकोटा में ट्रम्प समर्थकों के साथ एक मंच साझा किया था, जिसमें 2022 के चुनावों पर संदेह करने और अंतर्राष्ट्रीय दक्षिणपंथी समर्थन हासिल करने की उम्मीद जतायी गयी थी। उनके साथ वह स्टीव बैनन भी शामिल हुए, जिन्होंने ब्राजील के पूर्व वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा को "दुनिया का सबसे ख़तरनाक वामपंथी" कहा था, क्योंकि उनकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से पिछले चार सालों में अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान बोल्सनारो ने जो कुछ भी किया है, उसे पलट दिये जाने की संभावना बढ़ गयी लगती है।

पिछले हफ़्ते एक आदिवासी समारोह में सोनिया गुआजारा ने लूला को "इन इलाक़ों का संरक्षक" क़रार दिया, जो आदिवासियों के प्रति उनकी ज़िम्मेदारियों की याद दिलाता है और इस बात को भी सामने रखता है कि अगला राष्ट्रपति इस अमेज़ॉन क्षेत्र से आने वाले व्यक्ति को ही होना चाहिए।

यह स्वदेशी आंदोलन ब्राजील और उसके संविधान से परे है। लुटा पेला विदा शिविर का एक लोकप्रिय नारा था- "हमारा (आदिवासियों का) इतिहास 1988 से शुरू नहीं होता।" इसके अलावे, यह स्वदेशी संघर्ष उन ख़्वाब-ओ-ख़्यालों वाले हसीन दिनों को फिर से लौटा लाने से कहीं ज़्यादा है, जो सदियों से इन आदिवासियों के लिए पूरी तरह वजूद में कभी रहा नहीं।

गुआजारा ने मुझे बताया, "भविष्य पुरखों से जुड़ा हुआ है।" और वह इस भयानक ख़तरे के समय में पूरी दुनिया से इस स्वदेशी आंदोलनों से अगुवाई का आह्वान कर रही हैं।

निक एस्टेस लोअर ब्रुले सिओक्स जनजाति के नागरिक हैं। वह एक पत्रकार, इतिहासकार और रेड नेशन पॉडकास्ट के सह-प्रस्तोता हैं।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

Indigenous People of Brazil Fight for Their Future

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