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भारत
राजनीति
जस्टिस मुरलीधर के तबादले पर अंतरराष्ट्रीय बार निकाय ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा
‘‘यह अचानक असामान्य तबादला...ऐसे समय में जब सामाजिक अशांति के कारण भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के कमतर होने का ख़तरा है।"
भाषा
13 Mar 2020
जस्टिस मुरलीधर
Image courtesy: India.com

दिल्ली: वकीलों की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर के ‘‘जल्दबाजी में’’ तबादले के सरकार के ‘‘फैसले’’ पर चिंता जताई है। 

न्यायमूर्ति मुरलीधर का तबादला 26 फरवरी की रात को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया। एक दिन पहले उन्होंने उत्तरपूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों से पहले भाजपा के तीन नेताओं द्वारा कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से विफल रहने को लेकर दिल्ली पुलिस की खिंचाई की थी।

बार निकाय के पदाधिकारियों के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया है, ‘‘अंतरराष्ट्रीय बार एसोसिएशन की मानवाधिकार संस्था (आईबीएएचआरआई) ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को खुला पत्र जारी किया है और उनसे अपील की है कि न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर के दिल्ली उच्च न्यायालय से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जल्दबाजी में किए गए तबादले पर कार्रवाई करें।’’

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘यह अचानक असामान्य तबादला...ऐसे समय में जब सामाजिक अशांति के कारण भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के कमतर होने का खतरा है। कानून के शासन का बुनियादी उसूल है कि न्यायपालिका सरकार को जिम्मेदार ठहराए और किसी न्यायाधीश द्वारा स्वतंत्र रूप से आवाज उठाने को नहीं दबाया जाना चाहिए।’’

आईबीएएचआरआई वकीलों की संस्था है जो दुनिया भर में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनके संरक्षण के लिए काम करती है।

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International Bar body
Justice Muralidhar Transfer
president ramnath kovind
IBAHRI
Indian judiciary

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License