NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
नोबेल शांति पुरस्कार के लिये अंतर्राष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क नामांकित
IFCN की स्थापना 2015 में की गई। इसका उद्देश्य दुनियाभर के फैक्ट-चेकर और फैक्ट-चेकिंग संगठनों को एक मंच पर लेकर आना था। भारत के भी कई फैक्ट-चेकिंग संस्थान और वेबसाइट इस नेटवर्क का हिस्सा है।
राज कुमार
23 Jan 2021
नोबेल शांति पुरस्कार के लिये अंतर्राष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क नामांकित

झूठी ख़बरों की आंधी, वाट्सऐप यूनिवर्सिटी और साज़िश के सिद्धांतों के इस दौर में वर्ष 2021 फैक्ट-चेकिंग कम्युनिटी यानी सत्यशोधक समुदाय के लिये एक खुशख़बरी लेकर आया है। वर्ष 2021 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिये अंतर्राष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क (IFCN) को नामांकित किया गया। पॉयंटर संस्थान के निदेशक बायबर्स ऑर्सेक ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है। ये पूरे फैक्ट-चेकिंग समुदाय के लिये गर्व और खुशी की बात है।

The fact-checking community and the International Fact-Checking Network (@factchecknet) are grateful for this nomination for the Nobel Peace Prize.

This nomination tells so much about the importance of truth and it's weight in our discourse.

Thank you, @Trinesg! https://t.co/hMO2mMvVJk

— Baybars Örsek (@baybarsorsek) January 21, 2021

क्या हैं अंतर्राष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क (IFCN)?

अंतर्राष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क पॉयंटर संस्थान की एक फैक्ट-चेकिंग इकाई है। जिसका दफ़्तर फ्लोरिडा में है। IFCN की स्थापना 2015 में की गई। इसका उद्देश्य दुनियाभर के फैक्ट-चेकर और फैक्ट-चेकिंग संगठनों को एक मंच पर लेकर आना था। भारत के भी कई फैक्ट-चेकिंग संस्थान और वेबसाइट इस नेटवर्क का हिस्सा है। जैसे- आल्ट न्यूज़, बूम लाइव, फैक्ट क्रेसेंडो, न्यूज़मीटर, विश्वास न्यूज़ आदि। पूरी सूची आप इस लिंक पर देख सकते हैं। IFCN हर साल अपने सदस्यों के काम का ऑडिट भी करता है। ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मापदंडों की अवहेलना नहीं की गई है।

IFCN ने फैक्ट-चेकर्स के लिये एक “कोड ऑफ प्रिंसीपल” भी तैयार किया है। इसके अलावा फैक्ट-चेकिंग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सम्मेलनों का आयोजन करता है। तकनीकी अन्वेषण के लिये लगातार सक्रिय रहता है। विभिन्न नीतिगत प्रश्नों पर बहस की शुरुआत करता है।

आज 71 देशों के 59 संस्थानों ने IFCN के कोड ऑफ प्रिंसीपल पर हस्ताक्षर किये हैं और इसका हिस्सा हैं। इसी नेटवर्क की पहल पर 2 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग दिवस मनाने की शुरुआत हुई।

IFCN ने फैक्ट-चेकिंग के बड़े ऊंचे मापदंड रखे हैं और ये सुनिश्चित करने के लिये लगातार सक्रिय रहता है कि लोगों को सही और भरोसेमंद सूचना मिले।

IFCN के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित होने के मायने

ये नामांकन फिर से यह साबित करता है कि झूठी और भ्रामक ख़बरें, साज़िश के सिद्धांत विश्व स्तर पर एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। IFCN का नोबेल शांति पुरस्कार के लिये नामांकन फेक न्यूज़ को एक विश्व स्तरीय समस्या के तौर पर रेखांकन भी है। याद करें कि कोरोना महामारी के दौरान विश्व सवास्थ्य संगठन ने कहा था कि हम सिर्फ पेंडेमिक से ही नहीं बल्कि इंफोडेमिक से भी जूझ रहे हैं। हमने देखा है कि किस तरह झूठी ख़बरों का कारोबार पूरी दुनिया में ध्रुवीकरण का ख़तरनाक काम कर रहा है। कहीं धर्म के नाम पर, कहीं शरणार्थियों के मुद्दे पर, कहीं नस्ल, भाषा और जाति के मुद्दे पर नफ़रत फैलाई जा रही है। इन झूठी ख़बरों ने न सिर्फ समाज में तनाव को बढाया है बल्कि सैकड़ों लोगों की ज़िंदगियां भी निगल ली हैं। झूठी ख़बरों और झूठा प्रोपेगंडा सीधे तौर पर देशों की चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है और जनतंत्र के लिये ख़तरा बन गया है। ऐसे में IFCN का नोबल शांति पुरस्कार के लिये नामांकन एक राहत की ख़बर की है।

उम्मीद है कि फैक्ट-चेकिंग के काम को विश्व-स्तर पर गंभीरता से लिया जाएगा। झूठी ख़बरों और झूठे प्रोपेगंडा पर अंकुश लगाने की तरफ नीतिगत तौर पर हम बढ़ेंगे। फैक्ट-चेकर्स सत्यशोधक तो हैं ही अब उन्हें शांतीदूत की तरह भी देखा जा रहा है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते रहते हैं।)

Nobel Peace Prize
IFCN
International fact-checking network

Related Stories

ज़ोर पकड़ती  रिहाई की मांग के बीच जूलियन असांज नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित

डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की 50वीं वर्षगांठ पर इसके अच्छे-बुरे पन्नों को जानना ज़रूरी है

'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' के पुरज़ोर समर्थक दो पत्रकारों को 'नोबेल शांति पुरस्कार'

गोलियां बीज नहीं हैं जीवन का !

वर्ल्ड फूड प्रोग्राम को मिले नोबेल शांति पुरस्कार का क्या अर्थ है?


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    यूपी: दाग़ी उम्मीदवारों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी, लेकिन सच्चाई क्या है?
    19 Jan 2022
    सत्ताधारी बीजेपी खुद को जहां सबसे ज्यादा स्वच्छ और ईमानदार छवि वाली पार्टी तो वहीं विरोधियों को गुंडाराज वाली पार्टी बता रही है। हालांकि अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो इनके दावों से उलट 'हम्माम में सब…
  • Cows
    गौरव गुलमोहर
    यूपी गौशाला पड़ताल: तेज़ ठंड और भूख से तड़प-तड़प कर मर रही हैं गाय
    19 Jan 2022
    झाँसी की घुघुआ गौशाला में पिछले 10 दिन में लगभग 20 से अधिक गायें भूख और ठंड से मर चुकी हैं। रोज 2 से 3 गायें मर रही हैं। ज़िंदा गायों की हालत भी कुछ अच्छी नहीं है।
  • BIHAR IN UP
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: सियासत की पटरी पर आमने-सामने खड़ा हो गया बिहार का डबल इंजन!
    19 Jan 2022
    बिहार के राजनीतिक दिग्गज अब यूपी में दम दिखाने के लिए तैयार हैं, एक ओर जहां जेडीयू ने बीजेपी से अलग बगावती तेवर अपना लिए हैं, वहीं मुकेश साहनी और चिराग पासवान ने भी ताल ठोक दी है।
  • women
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: महिलाओं के लिए बनाई जा रही नीति पर चर्चा नाकाफ़ी
    19 Jan 2022
    मसौदा नीति में बढ़ते लिंगानुपात को संबोधित किये जाने की आवश्यकता सहित घरेलू कार्यों में लैंगिक विषमता को अनुमानित करने के लिए एक सर्वेक्षण करने, एकल महिला मुखिया एवं वंचित परिवारों के लिए सामाजिक…
  • mayawati
    कृष्ण सिंह
    बसपा के बहुजन आंदोलन के हाशिये पर पहुंचने के मायने?
    19 Jan 2022
    जिस बहुजन आंदोलन और उसकी राजनीति का कांशीराम ने सपना देखा और उसे हक़ीक़त में बदला था, वह आज गहरी निराशा और बिखराव के रास्ते पर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License