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इंट्रा-अफ़ग़ान वार्ताकार भविष्य की वार्ता के लिए औपचारिक प्रक्रियाओं को तैयार करने को सहमत
12 सितंबर से चल रही शांति वार्ता के पहले मील के पत्थर ने व्यापक युद्धविराम समझौते की उम्मीद पैदा कर दी है। इससे देश में नागरिक और सैन्य संस्थानों के ख़िलाफ़ तालिबान के आक्रमण के समाप्त होने की संभावना है।
पीपल्स डिस्पैच
03 Dec 2020
इंट्रा-अफ़ग़ान

देश में दशकों लंबे युद्ध के अंत की उम्मीद को बढ़ाते हुए अफगानिस्तान सरकार और तालिबान ने बुधवार दो दिसंबर को दोहा में चल रही वार्ता के दौरान भविष्य की वार्ता के लिए प्रक्रियात्मक नियमों को तैयार करने पर सहमति व्यक्त की। यह दोनों गुटों के बीच व्यापक संघर्षविराम पर वार्ता का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

देश में युद्ध को समाप्त करने के लिए इंट्रा-अफगान वार्ता के एक क्रम के रुप में तालिबान और अफगान सरकार के प्रतिनिधिमंडल सितंबर से कतर की राजधानी दोहा में बैठक कर रहे हैं। ये युद्ध 2001 में इस देश में अमेरिका के नेतृत्व में हमले के बाद शुरू हुआ था। दोनों पक्षों के "संपर्क समूह" अब तक पांच बार मुलाकात कर चुके हैं और भविष्य की वार्ता की प्रक्रियाओं की सहमति के लिए बुधवार का फैसला जारी वार्ता की पहली बड़ी उपलब्धि है।

वार्ताकारों की सरकार की टीम के एक सदस्य नादर नादेरी ने मीडिया से कहा कि दोनों पक्षों ने एक कार्यसमिति बनाई है जो भविष्य में बातचीत के लिए तय किए जाने वाले विषयों पर निर्णय करेगी।

नादेरी ने कहा कि, "दोनों पक्षों के बीच मौजूदा बातचीत से पता चलता है कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति हासिल करने की इच्छा है और दोनों पक्ष अफगानिस्तान में एक स्थायी शांति प्राप्त करने के लिए अपने गंभीर प्रयासों को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं"। टोलो न्यूज ने ये रिपोर्ट प्रकाशित किया।

इस फैसले का स्वागत करते हुए रिकॉन्सिलिएशन काउंसिल के अध्यक्ष अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने कहा कि यह "प्रारंभिक बड़ा कदम" है और उन्होंने सभी प्रतिभागियों और मेजबान कतर को इसके लिए धन्यवाद दिया। तालिबान की टीम ने भी बाद में एक ट्वीट में इस फैसले की पुष्टि की।

इंट्रा-अफगान वार्ता तालिबान और अमेरिका के बीच शांति समझौते से पहले हुई है जिसे फरवरी में अंतिम रूप दिया गया था। इस शांति समझौते के अनुसार, अमेरिकी सेनाएं इंट्रा-अफगान वार्ता की प्रगति के आधार पर देश से वापस होंगी।

जारी वार्ता के बावजूद, तालिबान ने सरकारी सैनिकों और नागरिकों के खिलाफ आक्रामक रवैया अपना रखा जिसमें सैकड़ों लोगों की हत्या हुई है। व्यापक युद्ध विराम की संभावना ने इन हमलों का समाप्ति और अधिक जटिल राजनीतिक पहलुओं पर बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद पैदा की है।

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